छत्तीसगढ़

अमित जोगी कर रहे कांग्रेस से संपर्क

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव अपनी सरल और सहज छवि के लिए जाने जाते हैं। वे धैर्य से पत्रकारों के सवालों को सुनते हैं और अपनी असहमति भी शालीनता से व्यक्त करते हैं। श्री सिंहदेव प्रदेश के उन राजनेताओं में से हैं। जो स्पष्टवादी हैं। इस समय वे दिल्ली में है। उनसे फोन पर चर्चा हुई। श्री सिंहदेव ने पूरे भरोसे के साथ कहा है कि इस बार भाजपा की सत्ता से रवानगी तय है और कांग्रेस कम से कम 52 सीटें लेकर आराम से सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने प्रदेश में त्रिशकु स्थिति से भी इंकार करते हुए दोहराया कि कांग्रेस को किसी से समर्थन लेने की जरूरत ही नहीं होगी। उन्होने एक बार फिर साफ कर दिया कि ‘राजनीति में सब कुछ चलता हैÓ के सख्त खिलाफ हैं।
उनसे पूछा गया कि बार-बार जोगी से समर्थन लेने की चर्चा क्यों उठ रही है, उन्होंने कहा कि ऐसी कोई संभावना नहीं है। श्री सिंहदेव ने कहा कि अमित जोगी कुछ लोगों से संपर्क कर रहे हैं। इसकी पुख्ता जानकारी उन्हें मिली है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का कोई भी विघायक इधर-उधर नहीं होगा।
सोसायटियों में धान की कम खरीदी का कारण उन्होंने कांग्रेस के घोषणा पत्र को माना है। उन्होंने बताया कि घोषणा पत्र बनाते समय उन्होंने प्रदेश के बजट की कल्पना एक लाख करोड़ रुपए की रखी किसानों का कर्ज माफ, बिजली का बिल हॉफ और बेरोजगारी भत्ते के वायदे निभाए जाएंगे, इसके लिए राज्य के संसाधनों पर होम वर्क किया गया है। उन्होंने कहा कि विकल्प के तौर पर सरकार अपने खर्चों में कटौती भी कर सकती है। ग्रामीण इलाकों में हुए अच्छे मतदान से उत्साहित श्री सिंहदेव ने कहा कि किसान जरूरतमंद होता है। वह जल्द से जल्द धान बेचना चाहता है। अगर इस बार समितियों में धान की आवक कम हुई तो इसकी बड़ी वजह है कांग्रेस के घोषणा पत्र पर किसानों का। किसानों ने अधिक समर्थन मूल्य की उम्मीद में धान नहीं बेचा है। अब किसान अपना धान समितियों में ला रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि किसानों को कार्ड के आधार पर जो ऋण दिया जाता है वही कर्ज माफ होगा। उन्होंने चुनाव के दौरान ‘लेबर प्राब्लमÓ को भी नकार दिया।
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि सत्ता में आने के लिए कंाग्रेस किसानों की ओर टकटकी लगाए बैठी है। कम मतदान के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान प्रतिशत ने कांग्रेस की उम्मीदों को पंख लगा दिया है। किंतु याद रखना होगा कि 2013 में कांग्रेस को 5365272 यानी 42.34 प्रतिशत और भाजपा को 5267694 अर्थात, 41.57 प्रतिशत मत मिले थे। इसका मतलब तो यही है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस भाजपा से .77 फीसदी अधिक मत प्राप्त करने के बाद भी 9 सीटों से पिछड़ गई थी। इस बार तो 1.06 फीसद मतदान ही कम हुआ है जबकि 20-24 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के आसार है, बकौल श्री सिंहदेव इसका लाभ भी कांग्रेस को मिल रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2013 में 53 सीटों पर तीसरे और चौथे प्रत्याशी प्रभावशाली थे। इन सीटों में से 30 भाजपा के पक्ष में गई थी। 18 सीटों पर नोटा का गहरा असर देखा गया था। उन सीटों में 11 भाजपा और कांग्रेस को मिली थी।
इस बार 1.06 प्रतिशत मतदान का कम होनना, सोसायटियों में पसरा सन्नाटा, बदलाव की चर्चा और .86 प्रतिशत महिलाओं के मददान में गिरावट दर्ज होना पूरे परिदृश्य को भ्रमपूर्ण बना रहा हैं। अटकलें नतीजे आने तक जारी रहेंगी देखना होगा इस बार छत्तीसगढ़ का सरताज कौन होगा, जोगी-माया का करिश्मा कितना प्रभावी रहा, उसने किसका नुकसान किया और किसे लाभ मिला।

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