छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के ‘प्रयागराज’ में 13 सालों बाद फिर लौटेगी पुन्नी मेले की रौनक

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रयागराज नाम से विख्यात राजिम में 13 सालों के बाद पुन: पुन्नी मेले की रौनक लौटेगी। सन् 2005 से तत्कालीन सरकार ने इसे अर्धकुंभ और कुंभ के रूप में मनाने का निर्णय लिया था, जो 2018 तक अनवरत जारी रहा।

वहीं इस वर्ष सरकार ने इसके पुराने स्वरूप को लौटाने का फैसला लिया और वापस इसे पुन्नी मेले के रूप में मनाने तैयारियां शुरू कर दी गई है। इस वर्ष ये मेला 19 फरवरी से शुरू होकर 4 मार्च तक चलेगा। इसके साथ ही राजिम में सन 2017 से गंगा आरती की शुरूआत भी की गई थी, जिसे बदलकर अब महानदी आरती की जाएगी।

छत्तीसगढ़ का राजिम प्रयागराज के नाम से पहले से ही विख्यात रहा है। क्योंकि राजिम में तीन नदियों महानदी, पैरी नदी और सोंढूर नदी का संगम स्थल है। इसके साथ ही राजिम का पुरातात्विक महत्व भी रहा है।

लोगो में मान्यता है की भनवान जगन्नाथपुरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक भगवान राजीव लोचन तथा कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। राजिम अपने पुरातत्वों और प्राचीन सभ्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। राजिम मुख्य रूप से भगवान श्री राजीव लोचन जी के मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। राजिम का यह मंदिर आठवीं शताब्दी का है।

बहरहाल, मेले की तैयारियां शुरू कर दी गई है। इस वर्ष पुन्नी मेले में छत्तीसगढ़ी खेलों जैसे कबड्डी, फुगड़ी आदि को शामिल किए जाने राज्य सरकार ने फैसला लिया है। वहीं छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के लिए स्टाल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही इस बार मुख्य मंच के अलावा और भी दो-तीन मंच बनायें। एक मंच में पंडवानी, एक में राउत नाचा जैसे छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम होंगे और मुख्य मंच में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।

धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने सोमवार को ही विश्राम गृह राजिम में अधिकारियों की बैठक लेकर राजिम मेला की प्रारंभिक तैयारियों की समीक्षा भी की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति, बोली, तीज-त्यौहार और आस्था तथा भावना के अनुरूप इस बार नवीन स्वरूप में राजिम माघी-पुन्नी मेला का आयोजन किया जाएगा।

साथ ही प्रवचन के लिए बाहर के विद्वानों के साथ ही छत्तीसगढ़ के विद्वानों को आमन्त्रित किया जाएगा। संत समागम भी होगा। संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू ने विधायकद्वय धनेन्द्र साहू, अमितेश शुक्ल और प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ मेला स्थल का निरीक्षण किया।

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