छत्तीसगढ़

जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री जी.आर. राणा ने आवश्यक बैठक ली

बलरामपुर| छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री जी.आर. राणा जिले के नगेसिया, नागेसिया एवं किसान जाति के लोगों का जाति प्रमाण पत्र बनाने में आने वाली कठिनाईयों को ध्यान पूर्वक सुना एवं शासन द्वारा दिये गये निर्देशानुसार जाति प्रमाण पत्र बनाने के दिशा-निर्देश राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिये।
जिला कार्यालय के सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री जी.आर. राणा ने आज एक आवश्यक बैठक ली और कहा कि जिन लोगों का जाति में नगेसिया, नागेसिया एवं किसान लिखा है और जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है। ऐसे संबंधित मामलों में धारा 113 में राजस्व संबंधित त्रुटि सुधार के लिए हमारे राजस्व विभाग के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को अधिकार है। इसके लिए संबंधित व्यक्तियों को शपथ पूर्वक आवेदन देना होगा और उसका रिपोर्ट शासन स्तर पर अनुसूचित जनजाति आयोग के माध्यम से पहुंचाया जावेगा। इस कार्य को जिले में एक सप्ताह के अन्दर शीघ्रतापूर्वक कराने के दिशा-निर्देश राजस्व विगाग के अधिकारियों को दिये। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र जिन लोगों का नहीं बन रहा है, ऐसे लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनाने में अधिकार अभिलेख का जरूरत होता है। निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए 1950 के रिकार्ड की आवश्यकता पड़ता है। उन्होंने कहा कि नगेसिया, नागेसिया एवं किसान जाति के लोग जशपुर, रायगढ़, सरगुजा एवं बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र में रहते हैं। जाति प्रमाण पत्र राष्ट्रपति के अधिसूचना के आधार पर बनता है। नगेसिया, नागेसिया अनुसूचित जनजाति वर्ग में आते हैं। लेखन संबंधित किसी भी समय किन्हीं गलतियों को एस.डी.ओ. राजस्व को शुद्ध करने का अधिकार है। बैठक में इसके लिए जिले के ग्राम पंचायतवार खाता वाइस उपरोक्त जातियों के कितने लोग रहते हैं। इसका एक सप्ताह में सर्वे करने तथा किसी व्यक्ति के जाति में किसान लिखा है, ऐसे लोगों की जाति नगेसिया है एवं गलती से किसान लिखा गया है, इस गलती को ठीक करने के लिए संबंधित परिवार के मुखिया को शपथ पूर्वक आवेदन एस.डी.एम. न्यायालय में देना होगा। आयोग के अध्यक्ष ने इस कार्य को तेजी से पूरा कराने एवं धारा 113 आवेदन का प्रारूप तैयार करवाने और ग्रामसभा में उसका अनुमोदन कराने के लिए निर्देश दिये।
अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने बैठक में कहा कि 22 जाति के 58 लाख लोगों के जाति में त्रुटि सुधार हो गया है। इसके आलावा कुछ जाति बच गये हैं, जिनके जातियों के मात्रात्मक त्रृटि को सुधार करने का कार्य चल रहा है। उन्होंने अधिसूचना में आने वाले जातियों का जाति प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी और राज्य शासन के नये नियम के तहत् 11 बिन्दु तय किये हैं। उसके सरलीकरण के संबध मंे बताया। कलेक्टर श्री हीरालाल नायक ने बैठक में राष्ट्रपति द्वारा 1950 में अधिसूचना जारी कर अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों का जाति प्रमाण किस प्रकार बनाया जाता है, उसके संबंध में जानकारी दी और कहा कि सन् 1996 में अविभाजित मध्यप्रदेश के जी.ए.डी. के समय में अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी करना और 2013 में छत्तीसगढ़ शासन के अधिनियम एवं नियम से जाति प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति भूमिहीन है और जाति प्रमाण पेश नहीं करता है तो जाति प्रमाण पत्र बनाने 13 बिन्दु हैं और इस जिले के मूल आदिवासियों को उनके मूल अधिकार मिले इसके लिए आयोग द्वारा बैठक आयोजित की गई है। बैठक में नगेसिया एवं नागेसिया जाति के लोगों से चर्चा कर उनके जाति प्रमाण पत्र बनाने में आने वाली कठिनाईयों के संबंध में जानकारी ली गई।
बैठक में अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य श्री रामकिशुन सिंह, अपर कलेक्टर श्री विजय कुमार कुजूर, एवं डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, आर.आई. एवं मैदानी स्तर के पटवारी तथ नगेसिया समाज के लोग भी उपस्थित थे।

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