छत्तीसगढ़

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की प्रेस कान्फ्रेंस दिनांक 12.10.2018

विधानसभा निर्वाचन – 2018 हेतु राज्य में कुल 2468 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 2468 सेक्टर, 318 कुल उड़नदस्ता दल, कुल 374 स्थैतिक निगरानी दल कार्य कर रहे हैं।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा – 28 (क) के अधीन अधिकारी/कर्मचारी निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने से लेकर निर्वाचन कार्यक्रम समाप्ति तक निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर समझे जाऍंगे और उस समय तक सभी निर्वाचन आयोग के अधीन होते हैं और उनके नियंत्रण, पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं।

विधानसभा निर्वाचन – 2018 को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्देशित किया गया है कि विभिन्न विभागों के जिला प्रमुखों एवं समकक्षीय अधिकारियों का किसी भी प्रकार का अवकाश कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी की लिखित अनुशंसा उपरांत ही स्वीकृत किया जा सकेगा अन्यथा नहीं।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 77 (1) के अनुसार लोकसभा या विधानसभा के अभ्यर्थी के लिये नामांकन की तारीख से परिणाम की घोषणा की तारीख (जिसमें
दोनों तारीख शामिल) के मध्य किये गये व्ययों का पृथक व सही व्यय लेखा रखना अनिवार्य है।

उपरोक्त व्यय का कुल योग धारा 77 (3) में अधीन निर्धारित राशि से अधिक नहीं होना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में व्यय सीमा विधानसभा निर्वाचन हेतु 28 लाख एवं लोकसभा निर्वाचन हेतु 70 लाख है।

यह आवश्यक होगा कि प्रचार अवधि में ROद्वारा निर्धारित किये अनुसार प्रत्याशी कम-से-कम तीन बार अपने व्यय लेखा की जॉंच करायेंगे।

सभी प्रत्याशी परिणाम घोषणा के तीस दिन के भीतर अपना निर्वाचन संबंधी, सम्पूर्ण व्यय लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

व्यय लेखा में क्या-क्या देना होता है:-

शपथ पत्र ।
बैंक खाता नामांकन से कम-से-कम एक दिन पूर्व खोला जाना आवश्यक होगा।
स्टॉर कैम्पेनर- प्रत्येक पंजीकृत मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय व राज्य दल को 40 एवं गैर-मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के लिए 20, स्टॉर कैम्पेनर हो सकते हैं।
यह सूची अधिसूचना के 7 दिन के भीतर भारत निर्वाचन आयोग या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ कार्यालय को देनी होगी।

(01) यदि स्टॉर कैम्पेनर सभा में अपने भाषण में किसी प्रत्याशी का नाम लेते हैं
तो खर्च प्रत्याशी के खाते में जुडे़गा।

(02) यदि प्रत्याशी मंच साझा करते हैं तो खर्च प्रत्याशी के खाते में जुड़ेगा।

(03) यदि कार्यक्रम स्थल में बैनर/पोस्टर प्रत्याशी का लगा हो तो खर्च प्रत्याशी

के खाते में जुड़ेंगे।

कोई भी राजनैतिक पार्टी प्रचार सामग्री के राज्यभर में परिवहन हेतु एक वाहन की अनुमति CEOकार्यालय से प्राप्त कर सकेंगे।
कार्यालय पदाधिकारी (OfficeBearer) हेतु सीईओ कार्यालय से पार्टी अधिकतम 03 वाहन की अनुमति प्राप्त कर सकेगी।

आदर्श आचार संहिता लागू होने से व्यापारी वर्ग को आने वाले परेशानियों को दृष्टिगत रखते हुये व्यापारी संघ के प्रतिनिधि मण्डल से हुई चर्चा उपरांत जानकारी दी गई कि व्यापारी अपना पहचान पत्र साथ लेकर चलें। कोई भी व्यापारी बैंक में डिपोजिट/आहरण हेतु राशि लेकर जा रहे हैं या आ रहें हैं तो उसका डिपोजिट स्लिप या आहरण स्लिप साथ में लेकर चलें एवं राशि का विवरण या रखे गये सामग्री की विस्तृत विवरण साथ में रखें ताकि उड़न दस्ता टीम से परेशानी न हो।

डाले गये मतों का लेखा प्रारूप 17 (C) – मतदान केन्द्र में मतदान दिवस के दिन मतदान समाप्ति के उपरांत एक प्रारूप 17 (C) प्रत्येक मतदान अभिकर्ता को दिया जाता है जिसमें EVM/VVPAT मशीन के नंबर, कुल डाले गये मतों का लेखा रहता है। समस्त राजनैतिक दलों से अनुरोध किया गया है कि अपने मतदान अभिकर्ता को इस बात की जानकारी जरूर दें कि प्रारूप 17 (C) पीठासीन अधिकारी से अवश्य प्राप्त करें।
(i) आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चुनाव लड़ने वाले लोगों के संबंध में याचिका पर
सर्चोच्च न्यायालय का निर्णय।

(i) फार्म 26 में संशोधन (उम्मीदवारों द्वारा हलफनामें का प्रारूप)

सभी निर्वाचन में उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ फार्म-26 में शपथ पत्र दाखिल करना होगा, आपराधिक मामलों, सम्पतियों, देनदारियों और शैक्षणिक योग्यता के बारे में जानकारी घोषित करना होगा। अब संशोधित फार्म-26 में हलफनामा दाखिल करने की आवश्यकता है।

2. वर्ष 2011 के याचिका (सिविल) क्रमांक 536 के फैसले में माननीय सर्वाेच्च न्यायालय ने अन्य बातों के अतिरिक्त निम्न निर्देश दिये हैं-

i प्रत्येक निर्वाचन में उम्मीदवार निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदान किए गए फार्म को भरेगा, फार्म में आवश्यक सभी विवरण होने चाहिए।

ii यह उम्मीदवार के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के संबंध में बोल्ड अक्षरों में बताएगा।

iii यदि कोई उम्मीदवार किसी पार्टी विशेष के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है तो उसे पार्टी को लंबित आपराधिक मामलों के बारे में सूचित करना आवश्यक है।

iv संबंधित राजनैतिक दल को अपनी वेबसाइट पर उम्मीदवार के आपराधिक पृष्ठभूमि संबंधित जानकारी रखने के लिए बाध्य किया जाएगा।

v उम्मीदवार के साथ-साथ संबंधित राजनैतिक दल को भी उम्मीदवार के आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी की घोषणा, क्षेत्र के व्यापक रूप से प्रसारित समाचार पत्रों में करना होगा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी व्यापक प्रसार करना होगा। जब हम व्यापक प्रचार कहते है तो हमारा अर्थ है कि ‘‘नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कम से कम तीन बार किया जाएगा।’’

3. उपरोक्त निर्णयों का अनुसरण करते हुए, आयोग ने चिन्तन उपरांत लोकसभा एवं विधानसभा निर्वाचन के उन उम्मीदवारों को जिनके विरूद्ध अपराधिक मामले हंै (चाहे पूर्व में अथवा लंबित हो) तथा राजनैतिक दलों जिनके वे उम्मीदवार है, को निम्नांकित निर्देश अनुपालन हेतु जारी किए है –

(a) लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा एवं विधान परिषद के निर्वाचन के उम्मीदवार जिनके वे दोषी पाए गए है। प्रकरण दर्ज है तो इसे समाचार पत्रों में व्यापक प्रचार हेतु ऐसे मामलो की घोषणा करनी होगी। यह घोषणा नाम वापसी की अंतिम तिथि से मतदान की तिथि के दो दिन पूर्व के बीच, अलग-अलग तिथियों में कम से कम तीन बार संलग्न प्रारूप सी-1 में प्रकाशित की जानी है। मामला कम से कम 12 फॉन्ट आकार में प्रकाशित होना चाहिए और समाचार पत्रों में उचित रूप से डालना चाहिए ताकि व्यापक प्रचार के लिए निर्देशों का शाब्दिक व अर्थ की दृष्टि से सही अनुपालन किया जा सकें।

उदाहरणतः यदि नाम वापसी की अंतिम तिथि महीने का 10वाँ दिन है और मतदान महीने के 24वें दिन है तो घोषणा का प्रकाशन उस महीने के 11वें से 22वें दिन के बीच किया जाएगा।

(b) आपराधिक मामलों वाले सभी उम्मीदवारों को उपर्युक्त अवधि के दौरान तीन अलग-अलग तिथियों पर टी.वी. चैनलों पर उपर्युक्त घोषणा प्रकाशित करने की भी आवश्यकता है। लेकिन टी.वी. चैनलों में घोषणा के मामले में इसे

मतदान के समापन के लिए निर्धारित घंटे के 48 घंटे की अवधि से पहले पूरा किया जाना चाहिए।

(c) प्रारूप -26 के मद 5 और 6 की घोषणा के अनुसार ऐसे सभी अभ्यर्थियों के मामलो में जिनके आपराधिक मामले हैं समाचार पत्र और टीवी चैनल पर वृहद प्रचार के लिए आपराधिक मामलो की घोषणा के प्रकाशन के लिए निर्देशों के संबंध में रिटर्निंग अधिकारी लिखित स्मरण पत्र देगें। अभ्यर्थियों के

ऐसे स्मरण पत्र के लिए मानक प्रारूप C-3 में संलग्न है। अभ्यर्थी उन समाचार पत्रों की प्रतियाँ जिनमंे इस संबंध में उनकी घोषणा प्रकाशित है, निर्वाचन व्यय लेखों के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करेंगे।

(d) राजनीतिक दलो द्वारा स्थापित आपराधिक मामलो वाले उम्मीदवारों के मामले में, चाहे वह मान्यता प्राप्त पर्टियांे के हांे, ऐसे उम्मीदवारों को संबंधित रिटर्निंग आॅफिसर के समक्ष घोषित करना होगा कि उन्होने अपने विरूद्व आपराधिक मामलो की सूचना अपने राजनीतिक दल को दे दिया है। इस तरह की घोषणा के लिए नये डाले गये मद 6A में प्रावधान किये गये हंै।

4. राजनीतिक दलों- मान्यता प्राप्त दल और पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल जो आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार स्थापित करते हैं, या तो लंबित मामलों या पूर्व के सजा के मामलों को इस लंबित मामलांे की विस्तृत जानकारी देते हुए अपने वेबसाइट पर घोषणा प्रकाशित करना होगा साथ ही साथ TV चैनल और राज्य मे वृहद वितरण वाले समाचार पत्रों मेें भी प्रकाशित करने की आवश्यकता है। राजनीतिक दलांे द्वारा घोषणा प्रारूप C-2संलग्न है। समाचार पत्रों और TV चैनलों में घोषणा का प्रकाशन, उपरोक्त पैरा 2( a) में उल्लेखित अवधि के दौरान कम से कम तीन अलग-अलग तिथियों में किया जाना आवश्यक है। TV चेनलो के मामलो में यह सुनिश्चित् किया जाएगा कि प्रकाशन निर्वाचन के समापन के निर्धारित समय के 48 घण्टे की अवधि से पहले पूरा किया जाना चाहिए। ऐसे सभी राजनीतिक दल, संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक रिपोर्ट जमा करेंगे जिसमें उल्लेखित होगा कि उन्होंने इस दिशा की सभी आवश्यकताओं को पूरा कर दिया है और संबंधित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के दल डाटा प्रकाशित घोषणाओं सहित पेपर कटिंग को संलग्न किया है। यह निर्वाचन पूर्ण होने के 30 दिनों के अंदर किया जाना होगा। इसके पश्चात् अगले 15 दिनांे के अंदर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संबंधित दलों द्वारा अनुपालन की पुष्टि का रिपोर्ट आयोग को जमा करेंगे और दोषियो के मामले (यदि कोई हो) इंगित करेंगे।

5. सरकार के खिलाफ बकाया सुविधा, आवास यदि कोई हो तो जिसे उम्मीदवारों को आबंटित किया गया हो, तो इसे अब सार्वजनिक वित्तीय संस्थान में देनदारियों से

संबंधित फार्म 26 (आईटम 8 के अंतर्गत) शामिल किया गया है। इसलिए उम्मीदवार फार्म 26 (आईटम 8 के अंतर्गत) में आवश्यक घोषणा/विवरण देंगे।

6. इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के लिंक https : //eci.nic.in/eci_main1/Current/ImpInsCEOs_10102018.PDFऔर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, छत्तीसगढ़ रायपुर के लिंक https://ceochhattisgarh.nic.in/node/1844 में उम्मीद्वारों द्वारा दिये जाने वाले हलफनामों (Affidavit) का फार्म-26 (संशोधित प्रारूप) में उपलब्ध है, जिसे देखा एवं प्रिन्ट भी लिया जा सकता है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की प्रेस वार्ता दिनांक 12/10/2018 से संबंधित अन्य प्रमुख बिन्दु

चुनाव प्रचार से संबंधित कानूनी प्रावधान सोशल मीडिया पर उसी तरीके से लागू होते हैं, जिस तरीके से किसी भी अन्य मीडिया का उपयोग करते हुए चुनाव प्रचार के किसी भी रूप में लागू होते है। चूंकि सोशल मीडिया मीडिया का अपेक्षाकृत नवीन रूप है, इसलिए सभी संबंधित व्यक्तितयों को निम्नलिखित निर्देशों को स्पष्ट करना आवश्यक हो जाता है:-

उम्मीदवारों द्वारा उनके सोशल मीडिया एकाउंट के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय फार्म-26 में हलफनामा दाखिल करना होगा।
राजनैतिक विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणन – मीडिया भी इंटरनेट आधारित मीडिया/ सोशल मीडिया सहित वेबसाईट को कोई भी राजनैतिक दल/ उम्मीदवार बिना सक्षम प्राधिकारी के पूर्व प्रमाणन के राजनैतिक विज्ञापन नहीं दे सकता।

सोशल मीडिया सहित इंटरनेट के माध्यम से प्रचार करने पर व्यय उम्मीदवारों व राजनैतिक दलों को सोशल मीडिया में विज्ञापन सहित प्रचार पर किये गये सभी व्यय को एक उचित निर्वाचन व्यय लेखा तैयार करने तथा व्यय का ब्यौरा देने हेतु शामिल करना होगा। अन्य खातों के साथ इसमें इंटरनेट कंपनी और वेबसाईट को विज्ञापन देने के लिए दिया या भुगतान और सामग्रीयों के रचनात्मक विकास पर किए गए परिचालन व्यय, वेतन पर परिचालन व्यय तथा उम्मीरवारों और राजनैतिक दलों द्वारा अपने सोशल मीडिया अकाउंट को बनाये रखने के लिए नियुक्त किये गए कर्मचारियों के टीम को दिए गए भत्ते आदि शामिल होंगे।

सोशल मीडिया समेत इंटरनेट की सामग्री पर आदर्श आचार संहिता – आयोग के पास राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों के संबंध में निर्वाचन के दौरान आदर्श आचार संहिता प्रभावशील है, जो आयोग द्वारा निर्वाचन की तारिख की घोषणा से समाप्ति तक प्रभावशील है। यह स्पष्ट किया जाता है कि आदर्श आचार संहिता के प्रावधान और समय-समय पर आयोग द्वारा जारी किये गये संबंधित निर्देश, वेबसाईट उम्मीदवार और राजनैतिक दल सहित इंटरनेट पर डाली जाने वाली सामग्री पर भी लागू होंगे।

जहां तक उम्मीदवार और राजनैतिक दल के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा डाले जाने वाले सामग्री का संबंध है – जहां तक यह राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रचार से संबंधित है या उनसे जुडेे़ हुए है, आयोग इस मुददे से निपटने के लिए व्यावहारिक तरिकों पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया का पूर्व प्रमाणीकरण – आयोग ने दिनांक 27/08/2012 का आदेश जारी किया है जिसमें जिला और राज्य स्तर पर एमसीएमसी को राजनैतिक प्रकृति के विज्ञापन के पूर्व प्रमाणन की जिम्मेदारी दी गई थी। चूंकि सोशल मीडिया वेबसाईटें परिभाषा अनुसार इलेक्ट्राँनिक मीडिया भी है। इसलिए आयोग के आदेश क्रमांक 509/75/2004/जेएस-1/4572, दिनांक 15/04/2004 में उल्लेखित निर्देश सोशल मीडिया सहित वेबसाईटों पर भी लागू होंगे तथा पूर्व प्रमाणन के दायरे में आएगें।

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