छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के जाने-माने साहित्यकार और कवि पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी का निधन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जाने-माने साहित्यकार और कवि पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी उम्र 94 का निधान हो गया है। उनके निधन से पूरा देश-प्रदेश स्तब्ध है। शुक्रवार की सुबह एक प्राइवेट अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले कुछ दिनों से पद्मश्री श्यामलाल वेंटीलेटर पर थे।सुबह 8ः10 पर उन्होंने अंतिम सांस ली है। आज दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पंडित श्यामलाल के आकस्मिक निधन से साहित्य और पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति पहुंची है। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार और राजभाषा आयोग के पहले अध्यक्ष पद्मश्री पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी ने अपनी पूरी जिंदगी छत्तीसगढ़ी भाषा और स्वाभिमान की लड़ाई के लिए लगा दी।

छत्तीसगढ़ उनकी सांसों में बसता था जो उनकी वाणी से मुखरित होता था। उनके सपनों में आता था। उनके शब्दों में व्यक्त होता था। वे सच में छत्तीसगढ़ के लोकजीवन के चितेरे और सजग व्याख्याकार थे। उनकी पुस्तकें, उनकी कविताएं, उनका जीवन, उनके शब्द सब छत्तीसगढ़ में रचे-बसे हैं। आप यूं कह लें उनकी दुनिया ही छत्तीसगढ़ है।

जशपुर से राजनांदगांव, जगदलपुर से अंबिकापुर की हर छवि उनके लोक को रचती है और उन्हें महामानव बनाती है। अपनी माटी और अपने लोगों से इतना प्रेम उन्हें इस राज्य की अस्मिता और उसकी भावभूमि से जोड़ता है।

साहित्य साधना और पत्रकारिता में योगदान के लिए पद्मश्री
चतुर्वेदी के निधन के समय उनका पूरा परिवार मौजूद था। अभी करीब एक साल के अन्दर भारत सरकार ने उन्हें दरबार हाल नई दिल्ली में दीर्घ साहित्य साधना और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया था।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका पिछले एक महीने से पहले बिलासपुर फिर रायपुर में इलाज चल रहा था। हाल ही में उनका हिप ऑपरेशन हुआ था और वो बीमार चल रहे थे। फिलहाल वे एक निजी अस्पताल में वेंटीलेटर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। उनके लगातार स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की जा रही थी।

पत्रकार श्यामलाल वे व्यक्ति हैं जो रायपुर-बिलासपुर करीब 114 किलोमीटर साइकिल से आना-जना करते थे। ये उनकी सादगी थी। वे जनसत्ता और नवभारत टाइम्स के प्रतिनिधि रहे। उन्होंने 1940-41 से लेखन आरंभ किया। चतुर्वेदी का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटमी गांव में हुआ था।

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