छत्तीसगढ़

2040 में पानी के लिए मचेगा हाहाकार, CG में 37 फीसदी भू-जल खत्म

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की हालत बेहद खराब है। प्रदेश में कुल 37 प्रतिशत भूजल का इस्तेमाल जा चुका है। वर्तमान में 63 प्रतिशत भूजल बचा है, लेकिन जिस तरह से प्रदेश में भूजल का दोहन किया जा रहा है, इससे प्रदेश में वर्ष 2040 तक भू-जल की स्थिति खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगी।

इसका खुलासा केन्द्रीय भू-जल संरक्षण की रिपोर्ट में हुआ है, जो काफी चौंकाने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में तीन प्रतिशत अधिक पानी का दोहन किया जा चुका है। भूजल दोहन के मामले में प्रदेश की 21 ब्लाकों की हालत बेहद खराब है।

इन ब्लाकों में 90 से 100 प्रतिशत तक भू-जल का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारी का कहना है कि बरसात कम हुई और भूजल का दोहन ज्यादा हो रहा है, पानी का रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। इससे इन ब्लाकों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। इसके साथ ही कुओं का जल स्तर भी नीचे जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रदेश में कुल 146 ब्लाक हैं, जिनमें बालोद जिले के गुरूर ब्लाक की हालत प्रदेश में सबसे खराब है। गुरूर ब्लाक में 100 प्रतिशत से अधिक पानी का इस्तेमाल किया जा चुका है।

धमतरी और बरमकेला ब्लॉक में 90 से 100 प्रतिशत भूजल का यूज कर रहे हैं। प्रदेश के अन्य 18 ब्लाकों में 70 से 90 प्रतिशत के बीच पानी यूज किया जा रहा है। बाकी ब्लाकों का हाल ठीक है। यदि प्रदेश में यही स्थिति रही तो आगामी वर्ष 2040 तक प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार कि स्थिति बन जाएगी।

37 प्रतिशत पानी इस्तेमाल हो चुका है

भू-जल के अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान स्थिति यह है कि किसान थोड़े बहुत फायदे के लिए गर्मी में भी बरसात की फसल लगा रहा है। जिससे पानी का दोहन अधिक हो रहा है। प्रदेश में 63 प्रतिशत भू-जल ही शेष है। उन्होंने बताया कि बारिश भरपूर नहीं हो रही है और पानी का दोहन लगातार बढ़ रहा है। किसान बचे हुए भू-जल को खेती के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इस हालात में प्रदेश में पानी रिचार्ज करना बेहद जरूरी है।

नहीं हो रहा नियमों का पालन

शासन ने कागजों में नियम तो बना दिये, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है। हर निर्माण व नलकूप खनन के साथ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाना चाहिए। सस्ते व सरल तकनीक से भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया जा सकता है। भू-जल के अधिकारी ने बताया कि गर्मी में भू-जल स्तर गिरने की शिकायत रहती है, लेकिन कुछ ब्लाकों को छोंड दें तो अन्य जगहों की स्थिति अभी काफी बेहतर है।

ऐसे करें जल संरक्षण

– शहरों में घरों की नालियों के पानी को गढ्ढे बना कर एकत्र किया जाए और पेड़-पौधों की सिंचाई के काम में लिया जाए, तो साफ पेयजल की बचत अवश्य की जा सकती है।

– अगर प्रत्येक घर की छत पर बरसात के पानी का भंडार करने के लिए एक या दो टंकी बनाई जाए और इन्हें मजबूत जाली या फिल्टर कपड़े से ढंक दिया जाए तो शहर में जल संरक्षण किया जा सकेगा।

– घरों, मुहल्लों और सार्वजनिक पार्कों, स्कूलों अस्पतालों, दुकानों, मन्दिरों आदि में लगी नल की टोंटियां खुली या टूटी रहती हैं, तो अनजाने ही प्रतिदिन हजारों लीटर जल बेकार हो जाता है। इस बरबादी को रोकने के लिए नगर पालिका एक्ट में टोटियों की चोरी को दण्डात्मक अपराध बनाकर, जागरूकता भी बढ़ानी होगी।

प्रदेश में केवल 63 प्रतिशत पानी शेष है। 21 ब्लाकों में भू-जल की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। यहां पर 90 से 100 प्रतिशत पानी की इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 37 प्रतिशत भू-जल का उपयोग किया जा चुका है। यही स्थिति रही तो वर्ष 2040 तक पानी खत्म हो जाएगा – एमएम सोनकूजरे, सीनियर हाइड्रोजियोलॉजिस्ट, केन्द्रीय भू-जल संरक्षण रायपुर

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