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बसना सीट भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

जावेद अख्तर
महासमुंद जिले की बसना विधानसभा सीट काफी खास है। ये राज्य की उन सीटों में से एक है, जहां लगातार दो बार कोई पार्टी चुनाव नहीं जीतती है, यहां की जनता हर बार अपने नेता को बदलती है। निकट आते चुनाव के कारण बसना विधानसभा में इन दिनों चुनावी पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा एक ओर अपने विकास की गाथा का गुणगान करने में लगी है तो कांग्रेस विकास के दावों की पोल खोल रही है। जिले का सबसे बड़ा और चर्चाओं में रहने वाले इस विस में वर्तमान में भाजपा का कब्जा है और महिला बाल विकास की संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी यहां की विधायक हैं। लेकिन पिछले पांच चुनाव के इतिहास को देखें तो ये साफतौर समझ आता है कि इस सीट परिवर्तन तय है, भाजपा के सामने यही मुश्किल है। साल 1993 से वर्ष 2013 के बीच हुए 5 चुनावों में भाजपा ने 4 बार प्रत्याशी बदला और कांग्रेस ने एक बार ही प्रत्याशी बदला है। कांग्रेस के महेन्द्र बहादुर सिंह ने 1993 में यह सीट निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीता, 1998 में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और भाजपा के डॉ. त्रिविक्रम भोई को हराकर लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचे। साल 2003 के चुनाव में भाजपा के त्रिविक्रम भोई ने कांग्रेस के महेंद्र बहादुर सिंह को 2400 वोट से हराकर पिछली हार का हिसाब चुकता कर दिया। वर्ष 2008 में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रत्याशी बदले, भाजपा के प्रेमशंकर पटेल को कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह ने करीब 16 हजार मतों के अंतर से हराया। वर्ष 2013 में भाजपा ने पुन: प्रत्याशी बदलकर रूपकुमारी चौधरी को टिकट दिया, चौधरी ने कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह पर 7000 हजार वोटों से जीत दर्ज कर पिछली हार का हिसाब बराबर किया। लेकिन इस बार जोगी पार्टी आने से यहां पर नये एंगल बनते दिखाई दे रहें। बसना विधानसभा में भाजपा से टिकट को लेकर पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा के सामने बगावत का खतरा मंडरा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा को महासमुंद की तरह नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विधानसभा चुनाव 2013
रूपकुमारी चौधरी (भाजपा) वोट 77,137
देवेंद्र बहादुर सिंह (कांग्रेस) वोट 70,898
जीत का अंतर -6239
विधानसभा चुनाव 2008
देवेंद्र बहादुर सिंह (कांग्रेस) वोट 52,145
प्रेमशंकर पटेल (भाजपा) वोट 36,238
जीत का अंतर -15,907
2003 विधानसभा चुनाव
त्रिविक्रम भोई (भाजपा) वोट 29,385
महेंद्र बहादुर सिंह (कांग्रेस) वोट 26982
जीत का अंतर -2403
दावेदार
भाजपा : वर्तमान विधायक व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी, बसना नगर पालिका अध्यक्ष संपत अग्रवाल, क्रेडा अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा के पुत्र पियूष मिश्राा, महासमुंद जिला पंचायत की अध्यक्ष अनीता पटेल के पति डी.सी. पटेल
कांग्रेस : पूर्व विधायक देवेंद्र बहादुर सिंह, ऊषा पटेल
छजकां (जे) : डॉ. अनामिका पॉल
आप : संकल्प दास प्रत्याशी घोषित।
प्रमुख मुद्दे
बसना क्षेत्र के लोग अरसे से पिरदा और सांकरा को ब्लॉक बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की जा रही है। ब्लॉक का गठन नहीं होना 2018 के विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। इतना ही नहीं, पिथौरा के लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए अब भी 55 किलोमीटर दूर महासमुंद जाना पड़ता है।
प्रशासनिक क्षेत्र की कमियां चुनाव में सिर उठा सकती हैं। सिंचाई को लेकर क्षेत्र की कुछ पुरानी मांगें फिर से उठ सकती है। सांकरा में मिनी स्टेडियम बनाने के लिए आया फंड जमीन नहीं मिलने से लैप्स हो गया। गांवों में व्यायामशाला की मांग, लेकिन कहीं भी व्यायामशाला नहीं खुुला। वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत बसना को नगर पालिका बनाने की घोषणा की लेकिन यह घोषणा अब तक अधूूरी है। 13 सितंबर 2016 को बसना नगर पंचायत में हाइटेक गौरवपथ निर्माण की घोषणा मुख्यमंत्री ने की थी। 26.67 करोड़ के इस कार्य का भूमिपूजन भी हुआ। लेकिन यह घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई।

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