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भांग की खेती पर उत्तराखंड में होगा 1100 करोड़ का निवेश

नई दिल्लीः इंडियन इंडस्ट्रीयल हेम्प एसोसिएशन ने उत्तराखंड में औद्योगिक भांग की खेती पर 1,100 करोड़ रुपए निवेश करने की घोषणा की है। कम उपजाऊ, बेकार और बंजर जमीन पर औद्योगिक भांग की खेती पर यह निवेश 5 साल के दौरान किए जाएंगे जिससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि करीब 90 हजार लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

उत्तराखंड सरकार ने एसोसिएशन को औद्योगिक भांग की खेती को बढावा देने के लिए लाइसेंस दिया है। इस किस्म के भांग की खेती बहुत कम उपजाऊ और बंजर जमीन पर की जा सकती है जिसमें सिंचाई की कम जरूरत होती है। वर्षा पर आधारित क्षेत्रों में भी इसकी भरपूर पैदावार ली जा सकती है। इस भांग के रेशे की कपड़ा उद्योग में भारी मांग है। इसके अलावा इससे बायो एथेनॉल, दवाएं, निर्माण सामग्री तथा कुछ अन्य सामान बनाये जाते हैं। इससे राज्य में उद्योगों को भी बढावा मिलेगा।

एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित शर्मा के अनुसार औद्योगिक भांग की खेती से राज्य में विकास की गति तेज होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। बंजर जमीन में किसान किसी फसल की भरपूर पैदावार नहीं ले पाते हैं और कई बार यह घाटे का सौदा साबित होता है जबकि दुनिया के अनेक हिस्सों में ऐसी जमीनों पर भांग की खेती सफलतापूर्वक की जाती है। ऐसी जमीन पर किसान साल में दो बार भांग की फसल ले सकते हैं।

संगठित क्षेत्र में इसकी खेती से शोध, प्रबंधन उद्योगों की स्थापना और संसाधन प्रबंधन को बढावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि भारतीय वस्त्र उद्योग में सालाना डेढ लाख टन भांग के रेशों से बने धागे की मांग है और कुछ उद्योग चीन आदि से इसका आयात करते हैं। चीन की सेना भांग के रेशे से बने वस्त्र का उपयोग करती है। एसोसिएशन झारखंड, तेलंगाना तथा कुछ अन्य राज्यों में औद्योगिक भांग की खेती की अनुमति दिए जाने के लिए प्रयास कर रहा है। यह संगठन किसानों को भांग की खेती के तौर तरीकों और बीज की आपूर्ति में भी मदद करेगा।

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