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टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा
नई दिल्ली । टाटा ग्रुप के साथ चार दशक पूरे कर चुके एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को समूह के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल को एक बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी बताया। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा और उन्होंने कंपनी के बोर्ड को सूचित कर दिया है कि वह इसके बाद चेयरमैन पद के लिए अपना नाम नहीं देंगे। यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से पहले सामने आया है।
चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में अपने 40 वर्षों के सफर को याद करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनना और इसके विकास में योगदान देना उनके लिए सम्मान की बात रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक तक टाटा संस का नेतृत्व करना उनके जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों और उपलब्धियों में शामिल रहा है। अपने बयान में उन्होंने कहा, मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान के विकास में योगदान देने का अवसर मेरे लिए अत्यंत संतोषजनक रहा है। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी रही है।
सपा सांसदों ने FCRA बिल को JPC के पास भेजने का किया समर्थन
नई दिल्ली । विपक्षी सांसदों ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का समर्थन किया है। उन्होंने सरकार से सदन में राम मंदिर चढ़ावा मामले पर भी जवाब देने की मांग की। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी एफसीआरए विधेयक को जेपीसी के पास भेजे जाने का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि यदि इसे जेपीसी में भेजा जा रहा है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि विपक्ष पहले ही आशंका जता चुका है कि संस्थाओं और उनके जमीनी स्तर पर काम करने के तरीके को लेकर किस तरह हेरफेर हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए काम करने वाले एनजीओ और अन्य संस्थाओं पर भी सरकार के अनुरूप काम नहीं करने की स्थिति में दबाव बनाया जाता है। डिंपल यादव ने राम मंदिर में दान और चढ़ावा चोरी का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि कथित तौर पर चोरी की गई रकम को बोरियों में भरकर ट्रेनों के जरिए ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को सार्वजनिक नहीं करना चाहती थी ताकि आम लोगों को दान-पात्रों से कथित चोरी की जानकारी न हो सके। समाजवादी पार्टी ने इस मामले को उठाया और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी इस पर आवाज उठाई। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह पूरे मामले पर स्पष्ट रूप से बताए कि वास्तव में क्या हुआ था और दान की रकम को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई क्या है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इन बयानों से नहीं होती है।
समाजवादी पार्टी की सांसद ने सरकार पर उन संगठनों और संस्थानों को डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया, जो सरकार की इच्छा के अनुसार काम नहीं करते। उन्होंने कहा कि सरकार को लोकतांत्रिक संस्थाओं और सिविल सोसाइटी के साथ पारदर्शी और निष्पक्ष रवैया अपनाना चाहिए।
लोकसभा की सीटें 543 पर स्थिर कर देनी चाहिए, अन्यथा यह चीन की संसद जैसी हो जाएगी: चिदंबरम
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि लोकसभा की सीटों को 543 पर स्थिर कर देना चाहिए, अन्यथा यह चीन की संसद की तरह हो जाएगी। कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, लोकसभा को 543 पर फ्रीज किया जाना चाहिए। वरना यह चीन की संसद जैसी हो जाएगी। यह सदन नहीं, एक सार्वजनिक सभा बन जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु का मौजूदा हिस्सा 7.18 फीसदी है। इसलिए तमिलनाडु समेत सभी दक्षिण भारतीय राज्यों का कोटा भी फ्रीज किया जाना चाहिए। उन्हें परिवार नियोजन लागू करने की सजा नहीं दी जा सकती।
चिदंबरम ने आगे कहा कि परिसीमन विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने आगे कहा, उस परिसीमन विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं है। राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व को कम नहीं किया जाना चाहिए। हमें क्यों दंडित किया जा रहा है? उन राज्यों को क्यों दंडित किया जा रहा है जिन्होंने ईमानदारी और सर्वसम्मति से परिवार नियोजन कार्यक्रम को लागू किया है?
उन्होंने झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, झारखंड मुद्दे पर राहुल गांधी और मेरे समेत कई अन्य लोगों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। मैंने कहा था कि पुलिस और उनके राजनीतिक आकाओं पर शर्म आती है। ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ है, इसलिए हम इसकी निंदा करते हैं।
इस बीच, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को रांची में लगातार 19वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दोनों परीक्षाओं के उम्मीदवारों को लंबे समय से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल हुए हैं और उन्होंने विरोध स्थल पर ठहरे छात्रों के बिगड़ते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारी ने कहा, बहुत सारे लोग आए हैं, बहुत सारे लोग यहां आए हैं। सुबह-सुबह बाबूलाल मरांडी यहां आए थे। बहुत सारी चर्चाएं हुईं और उन्होंने मीडिया के सामने छात्रों के बारे में बात की। इतने सारे लोग यहां बैठे हैं और उनकी सेहत बिगड़ रही है।
हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं : राहुल गांधी
नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान या “लेक्चर” सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनकी प्राथमिकता देश की युवा पीढ़ी से जुड़े उन सवालों का जवाब पाना है, जिनका संबंध छात्रों पर हुई कथित हिंसा से है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है और विपक्ष की अन्य पार्टियों ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष जानना चाहता है कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया, किसके आदेश से छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ और एक छात्र की आंख की रोशनी जाने की घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।
उन्होंने गृह मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश गृह मंत्रालय के स्तर से लागू किया गया था। राहुल गांधी ने सीधे अमित शाह से सवाल किया कि क्या उन्होंने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।उन्होंने कहा कि यदि ऐसा आदेश गृह मंत्री ने दिया था तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि तब वे इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे। वहीं, अगर उन्होंने ऐसा आदेश नहीं दिया था तो राहुल गांधी ने उनकी क्षमता पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की।
राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह पिछले 20 दिनों से सदन में नजर नहीं आए हैं। गृह मंत्री में सदन का सामना करने की हिम्मत नहीं है और वे संसद में आकर इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते। राहुल गांधी ने छात्रों पर कथित तौर पर कील लगी लाठियों से हमला किए जाने का भी उल्लेख किया और पूछा कि इस तरह की कार्रवाई का आदेश किसने दिया था।
वहीं, झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे चुप रहने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह झारखंड के मामले पर चुप नहीं हैं और अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को सही नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं और विपक्ष का मकसद छात्रों के खिलाफ हिंसा के मामलों में जवाबदेही तय कराना है। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों से जुड़े इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है और सरकार को इस पर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।
एक-एक सवाल का दूंगा जवाब, विपक्ष तय करे चर्चा करनी है या हंगामा : अमित शाह
नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कहा है कि वे गुरुवार को सदन में विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है। साथ ही, गृह मंत्री ने विपक्ष के हंगामे को लेकर भी निशाना साधा। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के पास चर्चा का पत्र दे। बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं। वहीं, विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने लिखा, विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, हंगामा करना है। मैं गुरुवार को विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दूंगा। फिर जनता तय करेगी कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है।
वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'लापता', 'भाग गए' और 'भगोड़े' हैं, जैसी भाषा भारत के सार्वजनिक और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ रही है। जब से सत्र शुरू हुआ, तब से मैं लगातार संसद आता हूं। मैं अपने चैंबर में बैठता हूं, चूंकि विपक्ष संसद के दोनों सदनों को चलने नहीं दे रहा है, तो वहां जाकर क्या किया जा सकता है?
उन्होंने आगे कहा, जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि नीट को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। विपक्ष इसकी मांग कर रहा था और हमने इसे स्वीकार किया।
शाह ने हमला बोलते हुए कहा, मैंने भी कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं, लेकिन वो (विपक्ष) चर्चा ही नहीं होने देना चाहते हैं। अब जनता तय करे कि कौन भाग रहा है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि आज 3 बजे तक विपक्ष स्पीकर साहब को पत्र दे। आज दोपहर तीन बजे से गुरुवार दोपहर तीन बजे तक हम सभी प्रकार की चर्चा के लिए तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
अमित शाह ने कहा, मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार हर चीज पर चर्चा के लिए तैयार है, बस विपक्ष संसद को चलने दे। हम प्रश्नकाल भी सस्पेंड करने के लिए तैयार हैं, अगर स्पीकर की अनुमति मिले। मैं सभी सवालों पर जवाब देने के लिए तैयार हूं। गुरुवार को दोपहर 3 बजे जवाब दूंगा। अब विपक्ष को तय करना है उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है।
गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित रूप से गबन और दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। विपक्ष ने सदन में अमित शाह की मौजूदगी की मांग की है और छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री से जवाब मांगा है। इस गतिरोध के कारण संसद के मॉनसून सत्र में बार-बार कामकाज में बाधा आई है।
सांसद बृजमोहन ने उठाई मरीजों की आवाज, डिजिटल टोकन व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर
नई दिल्ली । रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में सरकारी अस्पतालों की डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों के लिए अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने नियम 377 के तहत डिजिटल पंजीकरण और टोकन व्यवस्था को जरूरी भौतिक सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव सरकार के सामने रखा।
अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। डिजिटल पंजीकरण, अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली और टोकन व्यवस्था से मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब अस्पतालों में इससे जुड़ी व्यवस्थाएं भी पूरी तरह कार्यरत हों।
‘डिजिटल टोकन सिर्फ नंबर नहीं, मरीज के सम्मान की गारंटी’
सांसद ने कहा कि डिजिटल टोकन के साथ अस्पतालों में डिस्प्ले स्क्रीन, उद्घोषणा प्रणाली और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे मरीजों को अपनी बारी और आवश्यक जानकारी समय पर मिल सकेगी और अनावश्यक इंतजार कम होगा।
उन्होंने कहा, “डिजिटल टोकन केवल एक संख्या नहीं, बल्कि मरीज को समय पर सुविधा और सम्मान देने की गारंटी बनना चाहिए।” उनके मुताबिक तकनीक के साथ उससे जुड़ी जमीनी व्यवस्थाओं को मजबूत किए बिना डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।
अगली वित्तीय किस्त से पहले सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग
अग्रवाल ने सरकार को सुझाव दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए अगली वित्तीय किस्त जारी करने से पहले संबंधित अस्पतालों में जरूरी उपकरणों की स्थापना और उनका संचालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी जांची जाए।
उन्होंने कहा कि इससे सरकारी धन का बेहतर इस्तेमाल होगा और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी डिजिटल व्यवस्था की सफलता का आकलन केवल जारी किए गए टोकन की संख्या से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रतीक्षा समय में कमी और अस्पताल के बेहतर अनुभव से किया जाना चाहिए।
सांसद ने कहा कि मरीजों की सुविधा, सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना जरूरी है। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है।
NTA सुधार पर समिति में मंथन, बृजमोहन बोले- परीक्षा व्यवस्था को बनाना होगा और पारदर्शी
नई दिल्ली । रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को नई दिल्ली में शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी समिति की बैठक में शामिल हुए। बैठक में ‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में सुधार और इसका सुदृढ़ीकरण’ विषय से जुड़े 382वें संशोधित प्रारूप प्रतिवेदन पर विचार-विमर्श किया गया और इसे स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और अभ्यर्थियों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सांसद अग्रवाल ने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थी अपने भविष्य की उम्मीद लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था का निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद होना बेहद जरूरी है।
साइबर सुरक्षा और शिकायत निवारण मजबूत करने पर जोर
अग्रवाल ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, मजबूत साइबर सुरक्षा और बेहतर परीक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया केवल तकनीकी रूप से मजबूत होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे अधिक संवेदनशील और सुगम भी बनाया जाना चाहिए।
मेहनत का मूल्यांकन पूरी निष्पक्षता से हो’
सांसद ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षाएं आयोजित करना नहीं, बल्कि ऐसी विश्वसनीय व्यवस्था तैयार करना है जिस पर विद्यार्थी और अभिभावक भरोसा कर सकें। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को यह विश्वास होना चाहिए कि उनकी क्षमता और मेहनत का मूल्यांकन पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ होगा।
अग्रवाल ने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली देश की शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करती है। NTA में आवश्यक सुधारों के जरिए विद्यार्थियों के विश्वास को और मजबूत करना समय की जरूरत है।
बैठक में समिति अध्यक्ष मुकुल वासनिक सहित समिति के अन्य सदस्य और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
टाइफून नंबर 15 को लेकर जापान में हाई अलर्ट
जापान । जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने खराब होते मौसम को लेकर आमजन को आगाह करते हुए सावधानी बरतने की अपील की। पीएम तकाइची ने टाइफून नंबर 15 के चलते भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और तेज हवाओं की आशंका के बीच लोगों से समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने और मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर रखने को कहा है। प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि टाइफून नंबर 15 इस समय जापान के पूर्वी हिस्से के समुद्र में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है।
आशंका है कि यह कल, यानी 11 तारीख को, दक्षिणी तोहोकू और उत्तरी कांटो क्षेत्रों के काफी करीब पहुंच सकता है और संभव है कि तट से भी टकराए। पीएम तकाइची ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र में स्थापित 'सूचना समन्वय कक्ष' के माध्यम से लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरी जानकारियां जुटा रही है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी कदम पूरी तैयारी के साथ उठाए जाएंगे।
तकाइची ने कहा कि तोहोकू क्षेत्र के प्रशांत महासागर वाले हिस्से में 11 तारीख की देर सुबह से लेकर देर रात तक भारी बारिश होने की संभावना है। इसलिए भूस्खलन जैसी घटनाओं को लेकर बेहद सावधान रहें। साथ ही निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर बढ़ने और उनके उफान पर आने के खतरे पर भी नजर रखें।
इसके अलावा, 11 तारीख को सुबह से शाम तक तेज हवाओं के कारण इमारतों को नुकसान पहुंचने और यातायात बाधित होने की आशंका है। समुद्री इलाकों में देर सुबह से देर रात तक ऊंची लहरों और समुद्री उफान के कारण जहाजों तथा तटीय सुविधाओं को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए विशेष सतर्कता बरतें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांटो-कोशिन क्षेत्र में भी 11 तारीख को लगभग दोपहर से देर रात तक ऊंची लहरों, निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर बढ़ने या उनके उफान पर आने का खतरा बना रह सकता है। लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
आपने सिर्फ मेडल ही नहीं बढ़ाए, बल्कि एक पीढ़ी तैयार की: पीएम मोदी
नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुए गेम्स में देश की झोली में कुल 39 मेडल आए। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लिए मेडल जीतकर लौटे खिलाड़ियों संग खास मुलाकात की। उन्होंने प्लेयर्स की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी। पीएम मोदी ने अपने आवास पर हुई मुलाकात के दौरान पैरा-एथलीटों की विशेष रूप से सराहना की गई।
ग्लासगो गेम्स के मेडल विजेताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सफलता सिर्फ एक मेडल जीतने से कहीं ज्यादा अहम है। उन्होंने जोर दिया कि उनके प्रदर्शन से देश में खेलों का माहौल बन रहा है और युवा खिलाड़ी प्रेरित हो रहे हैं। मोदी ने खिलाड़ियों से कहा, "मैं इस उपलब्धि को सिर्फ आपकी उपलब्धि नहीं मानता। आपकी जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनती है।आपने सिर्फ मेडल की संख्या ही नहीं बढ़ाई है। आपने एक पूरी पीढ़ी तैयार की है। मोदी ने बच्चों को प्रेरित करने में खेलों की सफलता की ताकत पर भी जोर दिया और कहा, शायद हम स्कूलों में जाकर बच्चों से बात करके जो काम कर सकते थे, उससे कहीं अधिक आपके मेडल उन्हें प्रेरित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा, दोस्तों, आपने बहुत अच्छा काम किया है। आपने देश का मान बढ़ाया है। मैं आपको दिल से बधाई देता हूं। उन्होंने मेडल विजेताओं को उत्कृष्टता की अपनी कोशिश जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा, मेरा यकीन मानिए, आप भविष्य में भी जीत हासिल करते रहेंगे और हम एक बार फिर यहां मिलेंगे।
प्रधानमंत्री ने भारत के खेल जगत में आगे बढ़ने में खिलाड़ियों के योगदान की भी तारीफ की और कहा कि पिछले दशक में उनकी कोशिशों ने देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की परंपरा स्थापित करने में मदद की है। पीएम मोदी ने कहा, मैं कई खिलाड़ियों से मिला हूं, लेकिन आपसे इसलिए मिल रहा हूं क्योंकि आपने पिछले 10-12 वर्षों में लगातार भारत को जीत दिलाई है और खेल के क्षेत्र में देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की परंपरा बनाई है।
भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के पीएम बालेन शाह से की मुलाकात
नई दिल्ली । भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोमवार को काठमांडू में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने नेपाल-भारत संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने नेपाल-भारत संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बातचीत में द्विपक्षीय मित्रता, साझा हितों, विकास सहयोग और दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। राजदूत श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री शाह को अपनी शुभकामनाएं दीं और भारत की ओर से नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राजदूत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर लिखा, ''सोमवार सुबह नेपाल के माननीय प्रधानमंत्री बालेन शाह से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं। भारत और नेपाल के बीच मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने पर सार्थक और उपयोगी बातचीत हुई।
नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने साझा हितों वाले क्षेत्रों में मिलकर काम करने के महत्व को भी रेखांकित किया।
करीब चार महीने पहले पद संभालने के बाद यह पहला अवसर है जब प्रधानमंत्री शाह ने किसी विदेशी राजनयिक के साथ आमने-सामने द्विपक्षीय बैठक की है। इससे पहले शाह राजदूतों के साथ अकेले मुलाकात करने के बजाय समूह में बातचीत को प्राथमिकता देते रहे थे और व्यक्तिगत बैठकों से दूरी बनाए रखी थी।
नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव के साथ बैठक के बाद प्रधानमंत्री शाह सोमवार को ही चीन के राजदूत झांग माओमिंग के साथ अलग से एक-से-एक चर्चा करने वाले हैं।
इससे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को पद संभालने के बाद भारत की ओर से यात्रा का निमंत्रण दिया गया था। हालांकि अभी तक उनका भारत दौरा नहीं हो पाया है। आमतौर पर नेपाल के नए प्रधानमंत्री पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद भारत या चीन का दौरा करते रहे हैं।
सरकार सदन में छात्र आंदोलनों पर चर्चा के लिए तैयार, विपक्षी दल करें सहयोग : रिजिजू
नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों पर सदन में विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने विपक्ष से अपील की कि चर्चा और सरकार के जवाब के दौरान सदन में किसी तरह की बाधा न डाली जाए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुना जाए।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से कहा कि सरकार का प्रस्ताव स्पष्ट है। उनके मुताबिक, छात्र आंदोलनों से जुड़े हर पहलू पर चर्चा की जा सकती है और सरकार सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि एक बार चर्चा शुरू होने के बाद मुद्दे के सभी पहलुओं पर विस्तार से बात होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि चर्चा के दौरान सदन का ध्यान भटकाने या गृह मंत्री के बयान को रोकने की कोशिश न की जाए।
किरेन रिजिजू ने कहा, विपक्ष हर मुद्दे पर बोल रहा है। राम मंदिर के मुद्दे पर मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं कि एसआईटी के गठन के साथ ही यूपी सरकार की कार्रवाई और कई अन्य कदम उठाए गए हैं। इसलिए, मैं अभी उस मामले पर और कुछ नहीं कहना चाहता। मैं यहां सरकार का स्पष्ट रुख रखने आया हूं कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों और छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा के लिए तैयार है।
रिरिजू ने कहा, मैं कांग्रेस पार्टी और विपक्ष से अपील करता हूं कि सरकार छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि चर्चा के दौरान कोई व्यवधान न हो और आप गृह मंत्री तथा सरकार की बात पूरी तरह शांति से सुनें। आपको हमें इस बात का भरोसा भी दिलाना होगा।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा संसद सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने परिसीमन की जरूरत बताते हुए कहा कि इस पर आम सहमति बननी चाहिए और इसे राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। अठावले ने संसद में जारी हंगामे को समाप्त कर मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर सदन में बहस होनी चाहिए।
विपक्ष सांसदों ने एफसीआरए बिल का जताया विरोध
नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र में एफसीआरए विधेयक, अयोध्या में भूमि खरीद-फरोख्त, विपक्षी दलों के विरोध और झारखंड के छात्र आंदोलन पर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने एफसीआरए विधेयक पर सरकार से स्पष्टता की मांग की है। उन्होंनेसरकार से पारदर्शिता बरतने और नियम को सभी संगठनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की है। सपा सांसद डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक पंजीकृत संगठन है या नहीं।
उन्होंने कहा कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआरए बिल के जरिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों के तहत पंजीकृत संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है और इससे लोगों में डर का माहौल पैदा हो सकता है। सपा सांसद ने अयोध्या से जुड़े जमीन और ट्रस्ट के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से एसआईटी कमेटी गठित है, लेकिन जमीन के लेन-देन को लेकर उठे सवालों का अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उनके मुताबिक, कुछ संपत्तियों को कथित तौर पर वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक दाम पर खरीदे जाने के आरोप हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 2 करोड़ रुपये की जमीन 16 करोड़ रुपये में और 5 करोड़ रुपये की जमीन कथित तौर पर 25, 30 या 40 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दान राशि में कथित अनियमितताओं और सोने-चांदी की वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मामलों का उचित हिसाब और रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की मांगों में बदलाव के बावजूद सरकार की ओर से जरूरी जवाब नहीं मिला है। पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी, जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की घटनाओं को लेकर सदन में स्पष्टीकरण देने की मांग की जा रही है।
नीट विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान बोले, मेरे लिए मंत्री पद युवाओं से बड़ा नहीं
नई दिल्ली । नीट पेपर लीक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा युवाओं का भविष्य महत्वपूर्ण है। प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर विरोध प्रदर्शनों में युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के लगभग दो हफ्ते बाद बीजेपी के बड़े नेता धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे मुद्दे पर पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद के समय हुए आंदोलन के दौरान युवाओं को भड़काने और गुमराह करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके लिए मंत्री की कुर्सी कभी भी देश के युवाओं से ज्यादा बड़ी नहीं रही।
जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत
जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों से बात करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेन जी देश का फ्यूचर है और उनकी अपनी सोच और सपने हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने नीट विवाद का फायदा उठाकर युवाओं को गलत रास्ते पर भेजने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस्तीफे की बात कही थी और आखिरकार 25 जुलाई को उन्होंने अपना पद छोड़ दिया।
पद मेरे लिए कभी खास नहीं रहा
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह जेन जी को अपने बच्चों की तरह मानते हैं। उनके लिए शिक्षा मंत्री का पद कोई पर्सनल मुद्दा नहीं था, बल्कि देश के युवाओं की उम्मीदें ज्यादा जरूरी हैं। आपको बता दें कि नीट पेपर लीक के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने लंबा प्रोटेस्ट किया था। छात्रों की मांग थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बने और एग्जाम सिस्टम को सुधारा जाए। इसी दबाव के चलते उन्होंने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया था। इसे भी पढ़ें: आखिर क्यों पूरा नहीं कर पाते शिक्षा मंत्री अपना कार्यकाल
नवीन पटनायक पर बोला हमला
ओडिशा के एक इवेंट में धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में युवाओं का इस्तेमाल किया गया। रायराखोल में बीजेडी कार्यकर्ताओं के 'धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ' के नारों पर उन्होंने कहा कि वह ऐसे प्रोटेस्ट से डरने वाले नहीं हैं। वह एक किसान के बेटे हैं और अपने काम से कभी ओडिशा का नाम खराब नहीं होने देंगे।
लाठी-बंदूक से नहीं, बातचीत से निकलेगा हल, रांची में चल रहे छात्र आंदोलन पर बोले CM हेमंत सोरेन
पटना । रांची में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए बातचीत से समाधान निकालने और दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही।
रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली का विरोध कर रहे युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय दिलाने का वादा किया है। 'झारखंड आदिवासी दिवस' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि घर की समस्याओं का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है, लाठी या बंदूक से नहीं। हथियार तो सीमा पर दुश्मनों का सामना करने के लिए होते हैं। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त किया कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्ष पर राजनीति करने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री ने बीजेपी और अन्य विरोधी दलों पर झूठ फैलाकर राज्य के युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने फायदे के लिए राज्य के माहौल को खराब करने और आंदोलन का राजनीतिकरण करने में लगे हैं। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए नीट पेपर लीक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां युवाओं पर लाठियां चलाई गईं और उन्हें देशद्रोही तक कहा गया, लेकिन झारखंड सरकार छात्रों पर बल प्रयोग करने के पक्ष में नहीं है।
सोरेन ने कहा, छात्रों को दिलाएंगे न्याय
हेमंत सोरेन ने कहा कि युवाओं की चिंता उनकी अपनी चिंता है। उन्होंने कहा, "हमने चोरी पकड़ी है और हम ही न्याय दिलाएंगे।" इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से अपील की कि वे अपने आंदोलन के लिए किसी राजनीतिक दल का सहारा न लें, क्योंकि न्याय पाना उनका अधिकार है और सरकार इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसे भी पढ़ें: JPSC और JSSC परीक्षा गड़बड़ी के विरोध में विधानसभा के बाहर एक दिवसीय अनशन पर बैठे Jairam Mahto
16वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन और छठे दौर की वार्ता
भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया, जिसमें 6 छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच, रांची के राजकीय अतिथि गृह में सरकार और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच छठे दौर की बातचीत हुई। छात्र JPSC और JSSC में सुधार के साथ-साथ पूरे मामले की जांच CBI या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के रिटायर जज की कमेटी से कराने की मांग कर रहे हैं।
बारामती एयरपोर्ट पर क्रैश-लैंड हुआ ट्रेनी एयरक्राफ्ट, सुरक्षित बचे दोनों पायलट
मुंबई । पुणे के बारामती एयरपोर्ट पर टेक-ऑफ के दौरान एक ट्रेनी एयरक्राफ्ट रनवे से बाहर निकल गया। इस हादसे में दोनों पायलट सुरक्षित हैं और विमान को मामूली नुकसान पहुंचा है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में बारामती के पास हुए एक विमान हादसे में अजीत पवार सहित पांच लोगों की जान चली गई थी।
पुणे के बारामती एयरपोर्ट पर आज दोपहर एक प्राइवेट कंपनी का ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश-लैंड हो गया। यह हादसा दोपहर करीब 12:35 बजे एयरपोर्ट परिसर के अंदर, रनवे से थोड़ी ही दूरी पर हुआ। राहत की बात यह रही कि प्लेन में सवार दोनों पायलटों को कोई चोट नहीं आई और एयरक्राफ्ट को भी मामूली नुकसान ही पहुंचा है। बता दें कि इसी शहर में करीब सात महीने पहले हुए एक प्लेन हादसे में महाराष्ट्र के तत्कालीन डिप्टी सीएम अजीत पवार की मौत हो गई थी।
रनवे से बाहर निकला एयरक्राफ्ट
सीनियर पुलिस ऑफिसर संदीप सिंह गिल ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग के दौरान रनवे से बाहर निकल गया था। इस प्लेन में कैप्टन चिराग शशिकांत डोइफोडे और कैडेट अभिजीत जुंड्रे सवार थे। हादसे के वक्त दोनों पायलट पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी को भी चोट नहीं आई।
कैसे हुई यह घटना?
पुलिस अधिकारी के अनुसार, एयरक्राफ्ट पहले लिंक ब्रावो से रनवे पर आया और टेक-ऑफ की कोशिश की, लेकिन टेक-ऑफ को बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद एयरक्राफ्ट को दूसरे छोर से दोबारा टेक-ऑफ के लिए ले जाया गया, जहां एक बार फिर टेक-ऑफ रोकना पड़ा। इस प्रक्रिया के दौरान स्पीड ज्यादा होने की वजह से प्लेन रनवे पर रुक नहीं पाया और पक्की सतह से बाहर निकलकर दाईं ओर चला गया। इसे भी पढ़ें: टर्बुलेंस का शिकार हुई Air India Flight का पायलट डोप टेस्ट में फेल, जांच में जुटा DGCA
जनवरी में हुआ था बड़ा हादसा
इससे पहले जनवरी में बारामती एयरपोर्ट के पास लियरजेट 45 प्लेन क्रैश हो गया था, जिसमें अजीत पवार समेत 5 लोगों की जान चली गई थी। VSR वेंचर्स के उस प्लेन में 66 साल के एनसीपी नेता, उनके सिक्योरिटी ऑफिसर, अटेंडेंट और दो पायलट कैप्टन सुमित कपूर और फर्स्ट ऑफिसर शाम्भवी पाठक मौजूद थे। यह हादसा 28 जनवरी को दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश करते समय हुआ था।
ममता बनर्जी के काफिले पर हमले से गरमाया बंगाल का माहौल, BJP ने TMC के आरोपों पर किया पलटवार
कोलकाता । पश्चिम बंगाल के बिजपुर में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव और चप्पल फेंकने की घटना हुई, जिसे ममता ने बीजेपी की साजिश बताया। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और अपनी पार्टी की संलिप्तता से इनकार करते हुए इसे जनता का आक्रोश करार दिया।
पश्चिम बंगाल के बिजपुर में टीएमसी के एक दिवंगत कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले का भारी विरोध हुआ। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ 'चोर-चोर' के नारे लगाए और उनकी गाड़ी पर कीचड़, पत्थर व जूते फेंके। ममता बनर्जी ने इस पूरी घटना को बीजेपी की एक सोची-समझी साजिश बताया, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वह इलाके में अशांति फैलाने आई थीं। इस घटना के बाद से राज्य का राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है।
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अग्निमित्रा पॉल ने कहा, कीचड़ या चप्पल फेंकना हमारी संस्कृति नहीं
ममता बनर्जी की गाड़ी पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य मंत्री और बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "हमारी पार्टी या सरकार मारपीट, बदसलूकी, या किसी पर कीचड़ और जूते फेंकने जैसी हरकतों का कभी समर्थन नहीं करती। यह बीजेपी की संस्कृति का हिस्सा नहीं है। ममता बनर्जी ने भले ही अपने शासनकाल में गलतियां की हों, लेकिन एक बुजुर्ग महिला नेता के साथ ऐसा व्यवहार बिल्कुल गलत है। अगर कोई बीजेपी का नाम लेकर ऐसा कर रहा है, तो वह सरासर गलत है।" इसे भी पढ़ें: बंगाल में Mamata Banerjee के काफिले पर हमला, गाड़ी पर कीचड़ और पत्थर फेंकने का आरोप
घटना में बीजेपी का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं
बीजेपी के राज्य अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इस मामले पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि ममता बनर्जी की गाड़ी पर पत्थर या चप्पल फेंकने की घटना से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है। इसमें पार्टी का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, "हम पूर्व महिला मुख्यमंत्री के साथ ऐसे व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, क्योंकि इससे राज्य की छवि खराब होती है।" इसे भी पढ़ें: Astrological Predictions: क्या मोदी सरकार पूरा नहीं कर पाएगी अपना कार्यकाल? Modi-?
तृणमूल से ही परेशान है जनता
सामिक भट्टाचार्य ने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस को इस मामले में बीजेपी पर आरोप लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजपुर में जो कुछ भी हुआ, वह जनता का तृणमूल कांग्रेस के प्रति गुस्सा और टकराव है। उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी भी नेता की गाड़ी पर हमला करने का समर्थन नहीं करती और पुलिस को इस मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन तृणमूल को भी अपने पिछले अत्याचारों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
झारखंंड छात्र आंदोलन: 5 घंटे चली बैठक, CBI जांच पर नहीं बनी बात, 10 अगस्त को होगा विधानसभा घेराव
पटना । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर छात्रों और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा रही। सरकार ने सीबीआई जांच की मांग खारिज कर सीआईडी और ईडी से जांच कराने का फैसला किया है। वहीं, छात्र सीबीआई जांच पर अड़े हैं और उन्होंने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव जारी रखने की घोषणा की है।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को छठे दौर की बातचीत खत्म हो गई। करीब 5 घंटे तक चली इस लंबी बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों की सबसे बड़ी मांग परीक्षाओं की जांच CBI को सौंपने की थी, लेकिन सरकार के साथ इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।.
बैठक के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सरकार ने दोतरफा जांच का फैसला लिया है। 14वीं JPSC और बैकलॉग भर्तियों में हुई गड़बड़ी के आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी, जबकि पैसों के अवैध लेन-देन के मामलों की जांच के लिए ED से अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा, मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा और 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। भविष्य के सुधारों के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के एक्सपर्ट्स की एक कमेटी भी बनाई जाएगी। इसे भी पढ़ें: लाठी-बंदूक से नहीं, बातचीत से निकलेगा हल, रांची में चल रहे छात्र आंदोलन पर बोले CM Hemant Soren
CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार का रुख
मंत्री ने स्पष्ट किया कि CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग पूरी नहीं की जा सकती, क्योंकि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई थी और सफल उम्मीदवार पहले ही नौकरी में आ चुके हैं। इसे एकतरफा रद्द करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है। सरकार ने जांच की देखरेख के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे छात्रों ने खारिज कर दिया। सरकार का मानना है कि उसने छात्रों की 98% मांगें मान ली हैं। इसे भी पढ़ें: Ranchi में प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले संजय सेठ और आदित्य साहू, उठाई CBI जांच की मांग
CBI जांच से कम कुछ मंजूर नहीं
दूसरी तरफ, सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद छात्र नेता कुणाल ने साफ कहा कि आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा, "हमारी मुख्य मांग CBI जांच की है और हम इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे।" उन्होंने ऐलान किया कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।