छत्तीसगढ़ / जशपुर
जशपुर में चमका कोरिया का ‘अमृत ब्रांड’ : बिहान की दीदियों के हुनर ने जीता लोगों का दिल, बिक्री ने बढ़ाया आत्मविश्वास
जशपुर, 10 नवम्बर 2025

जशपुर जिले के मायाली पर्यटन स्थल में 06 से 09 नवम्बर 2025 तक आयोजित जम्बूरी महोत्सव एवं बिहान क्षेत्रीय सरस मेले में कोरिया जिले के ‘कोरिया अमृत’ ब्रांड ने अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई। मेले में कोरिया जिले की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक और पौष्टिक उत्पादों ने खरीदारों का ध्यान आकर्षित करते हुए बिक्री में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
मेले में कोरिया अमृत मोदक लड्डू, कोरिया अमृत अचार एवं सुगंधित चावल सहित विभिन्न उत्पादों की मांग विशेष रूप से बढ़ी। स्वाद, गुणवत्ता और घर की पारंपरिक विधि से निर्मित होने के कारण खरीदारों ने इन उत्पादों की जमकर प्रशंसा की।
ग्राम पंचायत आनी के ज्योति एवं माँ शारदा महिला स्व-सहायता समूह ने कोरिया अमृत मोदक लड्डू बेचकर 45,000 रुपए का व्यवसाय किया। ग्राम पंचायत छिंदिया के जागृति महिला स्व-सहायता समूह ने कोरिया अमृत अचार की बिक्री द्वारा 24,000 रुपए से अधिक की आय अर्जित की। महिला युग एफ.पी.सी. द्वारा सुगंधित चावल की बिक्री से 12,000 रुपए का कारोबार हुआ। इस प्रकार 80 हजार रूपए से अधिक की बिक्री दर्ज की गई, जो कोरिया जिले इन महिलाओं को आत्मविश्वास को और मजबूत किया है।
मेले में कमिश्नर सरगुजा, कलेक्टर जशपुर सहित अन्य अधिकारियों ने ‘कोरिया अमृत’ स्टॉल का निरीक्षण करते हुए उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की तथा स्वयं खरीदारी भी की। इससे समूहों का उत्साह और भी बढ़ा।
कोरिया कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में कोरिया जिले के महिला स्व-सहायता समूहों को विपणन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़कर नए बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कोरिया की महिलाएँ अब ‘लखपति दीदी‘ बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
जशपुर जम्बूरी 2025: प्रकृति, संस्कृति और साहसिक रोमांच का अनोखा संगम
जशपुर में हो रहा है चार दिन का उत्सव, जहां पर्यटक प्राकृतिक वादियों, जनजातीय संस्कृति और एडवेंचर खेलों का उठा रहे हैं आनंद
जशपुर, 08 नवंबर 2025



जशपुर के हरे-भरे जंगलों और सुरम्य वादियों में आयोजित जशपुर जम्बूरी 2025 पर्यटन का ऐसा महाकुंभ है, जो प्रकृति प्रेमियों और रोमांच तलाशने वालों के लिए यादगार अनुभव लेकर आया है। 6 से 9 नवंबर तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में देशभर से आए 120 से अधिक प्रतिभागियों ने नीमगांव में पक्षी दर्शन से अपनी यात्रा की शुरुआत की, जहां शांत वातावरण ने सभी को प्रकृति के करीब ला दिया।


दो समूहों में बंटे पर्यटकों ने मयाली में कयाकिंग, एटीवी राइड, एक्वा साइकिलिंग और पेंटबॉल जैसे साहसिक खेलों का आनंद लिया, जबकि दूसरे समूह ने देशदेखा में बोल्डरिंग, रॉक क्लाइंबिंग, जुमारिंग और ज़िपलाइनिंग जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में भाग लिया। मधेश्वर पहाड़ के प्राकृतिक शिवलिंग की दिव्यता के बीच आयोजित इस उत्सव में स्थानीय व्यंजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी प्रतिभागियों के बीच अपनी छाप छोड़ी। शाम को सरना एथनिक रिजॉर्ट में पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों ने जशपुर की जीवंत जनजातीय संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया।


आखिरी सत्र में पर्यटक चमकीले तारों के नीचे कैम्पफायर के इर्द-गिर्द एकजुट हुए, जहां हंसी-मज़ाक और अनुभवों के आदान-प्रदान से यह दिन प्रतिभागियों के लिए एक यादगार बन गया। यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी प्रस्तुत कर रहा है, जिससे जशपुर राज्य के पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास पहचान बना रहा है। जशपुर जम्बूरी 2025 ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण पर्यटन को नई उड़ान दी है, जहां प्रकृति, संस्कृति और एडवेंचर का प्रभावशाली समागम देखने को मिल रहा है।
जशपुर में सड़कों की सूरत निखर रही— 4 करोड़ 50 लाख की लागत से बी.टी. पेच रिपेयर कार्य तेज़ी से जारी
जशपुर, 07 नवम्बर 2025

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में सड़क अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत जशपुर जिले में सड़कों के बी.टी. पेच रिपेयर कार्य तेजी से जारी हैं। लोक निर्माण विभाग, जशपुर द्वारा जिले में कुल 220.70 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के मरम्मत एवं रखरखाव हेतु 4 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जा रहा है। सरईपानी–बगीचा मार्ग के 17 किलोमीटर और दोदरअम्बा–ढुलूकोना मार्ग के 4 किलोमीटर, इस प्रकार कुल 21 किलोमीटर सड़क का बी.टी. पेच रिपेयर कार्य 5 नवम्बर 2025 तक पूरा कर लिया गया है।
शेष सड़कों के मरम्मत कार्यों को दिसंबर 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन कार्यों के पूरा होने से जिले में सड़क सुविधा और बेहतर होगी तथा ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में आवागमन सुगम बनेगा।
जशपुर में सड़क मरम्मत कार्यों की यह पहल न केवल स्थानीय नागरिकों की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समारोह का किया शुभारंभ
जशपुर जिले के समस्त शासकीय कार्यालय एवं शैक्षणिक संस्थानों में हुआ इसका प्रसारण
जशपुर , 07 नवंबर 2025


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम‘‘ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर देशभर में एक साथ “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन किया गया, जिससे राष्ट्रभक्ति और एकता का अद्भुत वातावरण बना। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान “वंदे मातरम्” पर आधारित विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। इस ऐतिहासिक अवसर का सीधा प्रसारण देशभर के सभी जिलों, शासकीय कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में किया गया, जहाँ अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ और जनप्रतिनिधि एक स्वर में राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन में शामिल हुए।
जशपुर जिले में कलेक्टरेट कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसडीएम श्री विश्वास राव मस्के, डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, नगर पालिका जशपुर के सीएमओ श्री योगेश्वर उपाध्याय, पार्षदगण और जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने प्रधानमंत्री के साथ “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन करते हुए राष्ट्रप्रेम, एकता और गौरव का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने उदबोधन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का महत्व और आजादी में आंदोलन में इसकी भूमिका का विस्तार से बताया। उन्होंने माँ भारती के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सभी वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सभी नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम” केवल एक शब्द नहीं, यह एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, और एक दृढ़ संकल्प है। जहाँ-जहाँ आज़ादी की लड़ाई लड़ी गई, वहाँ “वंदे मातरम” गूँजा। क्रांतिकारी वीर सावरकर से लेकर शहीदों तक, सबके होंठों पर यही शब्द थे। महात्मा गांधी ने 1927 में कहा था कि “वंदे मातरम् अखंड भारत की तस्वीर प्रस्तुत करता है। श्री अरविंदो ने इसे “मंत्र” बताया जो आंतरिक शक्ति को जगाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही भारत का राष्ट्रीय ध्वज समय के साथ बदलता गया हो, लेकिन जब भी वह फहरता है, हमारे हृदय से एक ही स्वर निकलता है “भारत माता की जय! वंदे मातरम”। उन्होंने कहा कि आज जब हम इस राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो यह उन वीरों के प्रति श्रद्धांजलि है जिन्होंने “वंदे मातरम” कहते हुए प्राण न्यौछावर कर दिए।
विधायक श्री रायमुनी भगत ने कहा कि भारत की आज़ादी के दीवानों के लिए “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक मंत्र था। उन्होंने कहा कि गुलाम भारत के दौर में जब यह गीत गूंजता था, तो लोगों के भीतर आज़ादी के लिए मर-मिटने का उत्साह और जोश उमड़ पड़ता था। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इस राष्ट्रीय गीत के महत्व और उसके ऐतिहासिक योगदान से अवगत कराना हम सभी का दायित्व है, ताकि उनमें भी राष्ट्रप्रेम और समर्पण की वही भावना जागृत हो सके।
चार चरणों में होगा वर्षभर आयोजन
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में इस ऐतिहासिक पर्व को वर्षभर चलने वाले महाअभियान के रूप में मनाया जा रहा है। देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी यह आयोजन जनभागीदारी के साथ चार चरणों में ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक भव्य रूप में संपन्न किया जाएगा। प्रथम चरण 7 से 14 नवम्बर 2025, द्वितीय चरण 19 से 26 जनवरी 2026, तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 (हर घर तिरंगा अभियान के साथ), और चतुर्थ चरण 1 से 7 नवम्बर 2026 तक चलेगा। इस दौरान राज्य के सभी जिलों, जनपदों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों एवं सामाजिक संगठनों में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे।
राज्य के सभी जिलों में मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।प्रत्येक जिले में स्थानीय कलाकारों, छात्रों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सके। प्रदेश के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में “वंदे मातरम” विषय पर विशेष सभाएँ, निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ होंगी। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और स्कूल बैंड के माध्यम से वंदे मातरम से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। राज्य पुलिस बैंड भी सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों पर आधारित कार्यक्रमों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंगेगा।
राज्यभर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत “वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ” स्थापित किए जाएंगे। इनमें नागरिक अपनी आवाज़ में वंदे मातरम् गाकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर गीत की मूल धुन और बोल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह पहल लोगों को अपने तरीके से राष्ट्रप्रेम व्यक्त करने का अवसर देगी और आंदोलन को अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बनाएगी।
जशपुर जम्बुरी में पर्यटकों के लिए गांव केरे में 8 होम स्टे की सुविधा, स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनोखा अनुभव
जशपुर, 07 नवम्बर 2025


जशपुर जिले में चल रहे जशपुर जम्बुरी आयोजन के दौरान पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य का सजीव अनुभव देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से ग्राम केरे में 8 आधुनिक होम स्टे की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन होम स्टे में पर्यटक न केवल ठहरने का आनंद ले रहे हैं, बल्कि जशपुर की पारंपरिक जीवनशैली, खानपान और लोकसंस्कृति को भी करीब से महसूस कर रहे हैं।
भिलाई से आए वरिष्ठ नागरिकों का एक परिवार भी इन होम स्टे में ठहरा हुआ है। उन्होंने बताया कि यहां का वातावरण अत्यंत शांत और आत्मीय है, भोजन स्वादिष्ट है और स्थानीय लोगों का व्यवहार अतिथि देवो भव: की भावना को साकार करता है। उन्होंने कहा कि जशपुर जम्बुरी में यह पहल वास्तव में प्रशंसनीय है, जिसने हमारे प्रवास को यादगार बना दिया।


प्रशासन द्वारा तैयार किए गए इन होम स्टे में सभी आवश्यक सुविधाएं जैसे स्वच्छ कमरे, भोजन, नाश्ता और स्थानीय गाइड की व्यवस्था उपलब्ध है। इससे जशपुर आने वाले पर्यटकों को होटल जैसी सुविधा के साथ ग्रामीण परिवेश का सजीव अनुभव मिल रहा है।
“होम स्टे” पर्यटन की वह अवधारणा है, जिसमें पर्यटक स्थानीय परिवार के साथ रहकर उनकी संस्कृति, परंपराओं और भोजन का अनुभव कर सकते हैं। यह पहल न केवल स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को भी नई पहचान दे रही है।
जशपुर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा इस तरह के अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे जिले की प्राकृतिक सुंदरता, पारंपरिक कला-संस्कृति और आतिथ्य को देशभर के पर्यटकों तक पहुँचाया जा सके।
जशपुर जम्बुरी 2025 : देशदेखा में 120 पर्यटक ले रहे रॉक क्लाइंबिंग का रोमांच, विशेषज्ञों की निगरानी में सुरक्षित साहसिक अनुभव
जशपुर, 07 नवम्बर 2025


छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभरते जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी 2025 के दौरान रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए अद्भुत अनुभव देखने को मिला। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल देशदेखा में लगभग 120 पर्यटकों ने रॉक क्लाइंबिंग जैसे साहसिक खेल का रोमांचक आनंद लिया।

यह गतिविधि पूरी तरह सुरक्षा मानकों के अनुरूप और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में कराई गई। प्रतिभागियों ने ऊँची प्राकृतिक चट्टानों पर चढ़ाई करते हुए न केवल अपने साहस की परीक्षा दी, बल्कि प्रकृति की गोद में सुकून और उत्साह से भरे पल भी बिताए।
रॉक क्लाइंबिंग एक साहसिक पर्वतारोहण खेल है, जिसमें प्रतिभागी प्राकृतिक चट्टानों या कृत्रिम दीवारों पर चढ़ाई करते हैं। इस खेल का उद्देश्य शारीरिक क्षमता, संतुलन और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा लेना होता है।
जशपुर की हरी-भरी वादियों, ठंडी हवाओं और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच आयोजित यह गतिविधि न केवल पर्यटकों के लिए यादगार बनी, बल्कि जिले के साहसिक पर्यटन को भी नई पहचान दी।
जशपुर जिला प्रशासन द्वारा जशपुर जम्बुरी 2025 के तहत विभिन्न एडवेंचर गतिविधियाँ जैसे रॉक क्लाइंबिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और नेचर ट्रेल का आयोजन किया जा रहा है, जिससे राज्य में इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।
जशपुर जम्बुरी में लोक संस्कृति और प्रकृति का संगम : देशदेखा में पर्यटक झूमे लोक कलाकारों के साथ, चांदनी रात में किया स्टार ग्रेजिंग का आनंद
जशपुर, 07 नवम्बर 2025





छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी 2025 का पहला दिन लोक संस्कृति, आतिथ्य और प्राकृतिक सौंदर्य के रंगों से सराबोर रहा। देशदेखा पहुंचे देशभर के पर्यटक न केवल जशपुर की मनमोहक वादियों में खो गए, बल्कि लोक कलाकारों के साथ पारंपरिक नृत्य और संगीत की थाप पर झूम उठे।
पहले दिन जम्बुरी में 120 पर्यटकों का पंजीयन किया गया। उनका स्वागत जशपुर की परंपरागत शैली में किया गया और स्थानीय शुद्ध दोना-पत्तल में पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। अतिथियों ने स्थानीय भोजन के स्वाद और जशपुरवासियों के आत्मीय सत्कार की प्रशंसा की।
सांझ ढलते ही चांदनी रात में देशदेखा का आसमान सितारों से जगमगा उठा। पर्यटकों ने खुले आसमान के नीचे स्टार ग्रेजिंग सेशन का आनंद लिया, जो जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से आयोजित किया गया था। तारों के बीच बैठकर लोक कलाकारों की प्रस्तुति ने वातावरण को और भी मनमोहक बना दिया।
लोक संस्कृति की जीवंत झलकियों के बीच पर्यटकों ने नृत्य, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से जशपुर की समृद्ध विरासत को करीब से महसूस किया। इस अनुभव ने न केवल उन्हें रोमांचित किया बल्कि राज्य के इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई ऊँचाई दी।
जशपुर में 6-9 नवंबर तक ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ का भव्य आयोजन
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने देश देखा पहुंचकर तैयारी की जानकारी ली
जशपुर, 05 नवम्बर 2025
जशपुर जिले में 6 से 9 नवम्बर तक ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ का आयोजन किया जा रहा है। इस चार दिवसीय आयोजन में जिले के युवाओं के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक भी शामिल होंगे। जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। आज कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार ने देशदेखा पहुंचकर आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पानी, बिजली, सुरक्षा, चिकित्सा, पार्किंग आवागमन, कैंपिंग साइट और ग्राम केरा स्थित होमस्टे का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर जाकर तैयारियों की समीक्षा करें और संभावित कमियों को शीघ्र दूर करें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी साहसिक गतिविधियां सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए संचालित हो, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
चार दिवसीय ‘जशपुर जम्बूरी’ में प्रतिभागियों को रोमांच, कला और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। पहले दिन पंजीयन एवं स्वागत सत्र के बाद आइस-ब्रेकर गेम्स और रचनात्मक आर्ट वर्कशॉप आयोजित होंगे। दोपहर में रॉक क्लाइम्बिंग, ज़िपलाइन, जुमरिंग और रैपलिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियाँ होंगी, जबकि शाम को कल्चरल एंड फन इवनिंग तथा रात में स्टारगेज़िंग सेशन आयोजित किया जाएगा।
दूसरे और तीसरे दिन प्रतिभागियों का मयाली समूह कायाकिंग, पैरामोटर, एटीवी, पेंटबॉल, हॉट एयर बलून जैसी वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आनंद लेगा, वहीं देशदेखा समूह रानीदाह जलप्रपात, सारुडीह चाय बागान और संग्रहालय भ्रमण करेगा। शाम को सरना एथनिक रिज़ॉर्ट में सांस्कृतिक एवं संगीत संध्या का आयोजन होगा। तीसरे दिन दोनों समूह अपने गंतव्य अदल-बदल कर कार्यक्रम में भाग लेंगे। अंतिम दिन 9 नवम्बर को एडवेंचर और आर्ट रोटेशन का फाइनल राउंड तथा क्लोजिंग सेरेमनी का आयोजन होगा। दोपहर में समूह फोटो, फीडबैक सेशन के साथ ‘जशपुर जम्बूरी’ का समापन होगा।
संभाग स्तरीय सरस मेला 2025 में महिला सशक्तिकरण की दिखेगी झलक
जशपुरनगर । जिला प्रशासन जशपुर एवं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त तत्वावधान में संभाग स्तरीय सरस मेला दृ 2025 का आयोजन जशपुर में किया जाएगा। इसका आयोजन 06 से 09 नवम्बर 2025 तक विकासखण्ड कुनकुरी के ग्राम मयाली में किया जाएगा। यह मेला आत्मनिर्भर ग्रामीण महिलाओं के हुनर, कौशल एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
मेला में जशपुर सहित सरगुजा संभाग के समस्त जिलों सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़ -चिरमिरी -भरतपुर से 03 से 05 स्व- सहायता समूह सदस्य शामिल होंगे। लगभग 20 से 30 स्टॉलों के माध्यम से समूहों द्वारा स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, वनोपज आधारित वस्तुएँ तथा पारंपरिक कलाकृतियों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जाएगा। साथ ही, लोकसंस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम मेला की शोभा बढ़ाएँगे। यह मेला ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाने के साथ ही जशपुर जिले की समृद्ध परंपरा, लोककला एवं उद्यमशीलता को एक मंच प्रदान करेगा।
राज्योत्सव समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के 3 दिवसीय जिला स्तरीय समारोह विगत दिवस जिला मुख्यालय जशपुर के रणजीता स्टेडियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर देर शाम तक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। समारोह में आदिवासी लोककला, नृत्य, गीत और प्रेरक नाटक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न विभागों एवं महाविद्यालयों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों ने जशपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले सांस्कृतिक दल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय शामिल हुए। विशिष्ट आतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष जशपुर श्री अरविंद भगत , जनपद अध्यक्ष जशपुर श्री गंगाराम भगत, पूर्व विधायक श्री जागेश्वर भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष जशपुर श्री यशप्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, डीएफओ श्री शशि कुमार, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू, एसडीएम श्री विश्वासराव मस्के, डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के पूर्व अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार राय, पूर्व उपाध्यक्ष नगर पालिका जशपुर श्री राजेश गुप्ता, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी कर्मचारी सहित भारी संख्या में नागरिकगण मौजूद रहे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव के राज्य निर्माण में योगदान को नमन करते हुए कहा कि कुमार साहब ने भी राज्य निर्माण के लिए महत्वपूर्व पहल की थी। उन्होंने कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में जशपुर जिले का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूरदृष्टि और नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ, जिससे इस अंचल के विकास को नई दिशा मिली। उन्होंने स्मरण किया कि उस समय जशपुर जिला शिक्षा और संस्कार का केंद्र था, जहाँ साक्षरता दर सर्वाधिक थी। उन्होंने कहा कि आज जशपुर जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जिले में मेडिकल कॉलेज, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, उद्यानिकी कॉलेज की स्थापना से युवाओं को स्थानीय स्तर पर शिक्षा के अवसर मिलेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि फरसाबहार में सत्य साईं सत्संग ट्रस्ट अस्पताल खुलने जा रहा है, जो लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देगा। कृषि क्षेत्र में नाशपाती, महुआ जैसे उत्पादों को नई पहचान मिली है। महुआ अब केवल शराब का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यंजनों और आर्थिक सशक्तिकरण का साधन बन गया है। उन्होंने कहा कि मधेश्वर पहाड़ जैसे धार्मिक स्थल जिले को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। जशपुर आज हर क्षेत्र में विकास की गाथा लिख रहा है।
आदिवासी विकास विभाग की प्रस्तुतियों से गूंजा मंच :
राज्योत्सव समापन समारोह की शुरुआत आदिवासी विकास विभाग के दलों की पारंपरिक प्रस्तुतियों से हुई। नटकेला, कुनकुरी, मनोरा, बगीचा, जशपुर और ईचकेला के जनजाति कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सुआ, करमा, सरहुल आदि लोकनृत्य और लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। ईचकेला दल द्वारा प्रस्तुत लोकगीत ने वातावरण में लोकसंस्कृति की सुगंध घोल दी, वहीं मनोरा और बगीचा के कलाकारों की तालबद्ध नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों से खूब सराहना पाई।
स्वास्थ्य विभाग का नाटक रहा आकर्षण का केंद्र- स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत सामाजिक संदेश से भरपूर नाटक ने लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। नाटक की प्रभावशाली प्रस्तुति और संवादों ने दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया। नाटक के माध्यम से 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ में सुदृढ़ हुई स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया गया।
महाविद्यालयीन छात्राओं की प्रस्तुतियों में झलकी युवा ऊर्जा :
जिला स्तरीय राज्योत्सव के अंतिम दिन विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। शासकीय रा.भ.रा.एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुर नगर के विद्यार्थियों ने सुवा, कर्मा, सरहुल और छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। शासकीय विजय भूषण सिंह देव कन्या महाविद्यालय, जशपुर नगर तथा शासकीय बाला साहब देशपांडे महाविद्यालय, कुनकुरी के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत किए। ठाकूर शोभा सिंह शासकीय महाविद्यालय एवं अशासकीय गुरुकुल महाविद्यालय, पत्थलगांव के विद्यार्थियों ने अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से समापन समारोह को उत्साहपूर्ण बना दिया।
संस्कृति और परंपरा का हुआ संगम :
कार्यक्रम में कोमल जैन द्वारा स्वरचित छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में भीम सुमन लोक कला मंच जशपुर के सदस्यों द्वारा जशपुर की मिट्टी की महिमा का गुणगान किया गया। सुंदर लोकगीतों के माध्यम से जशपुर की परंपरा और संस्कृति तथा यहां मौजूद मधेश्वर पहाड़, खुड़िया रानी, देशदेखा, कैलाश गुफा एवं अन्य पर्यटन स्थलों का वर्णन किया गया। कार्यक्रम के दौरान दर्शक पारंपरिक गीत-संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए। मंच पर विविधता से भरे प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि जशपुर जिला न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में समृद्ध है बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर में भी अनुपम है।
धान खरीदी से पहले खरीदी केन्द्रों में सभी तैयारियां सुनिश्चित करें : कलेक्टर
जशपुरनगर । कलेक्टर रोहित व्यास ने मंगलवार को साप्ताहिक समय सीमा की बैठक लेकर धान खरीदी की तैयारी की समीक्षा की उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी धान खरीदी केन्द्रों में पानी, बिजली, नए और पुराने बारदाने की व्यवस्था, नमी मापने की मशीन, कांटा बांट, कम्प्यूटर, धान को बारिश से बचाने के लिए कैंप कवर, तराजू बैनर पोस्टर, आदि जरूरी सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सभी चेक पोस्ट पर अधिकारीयों और कर्मचारीयों की ड्यूटी लगाने के लिए भी कहा गया है। इसके साथ ही उड़ीसा और झारखंड सीमा पर भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। ताकि कोचिया और बिचोलिए अवैध धान को न खपा सके सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध धान खपाने की सूचना मिलने पर धान जब्त कर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि धान खरीदी केन्द्रों के सत्यापन के लिए जिन जिन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जानी है। वे मौके पर जाकर सही सत्यापन करेंगे और खरीदी केन्द्रों में जो भी समस्या आ रही होगी उसकी जानकारी जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से देंगे।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को राईस मिलों का भी भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। वन अधिकार पत्र और विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा किसानों का भी प्राथमिकता से धान खरीदने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सभी पात्र किसानों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी राज्य निर्वाचन के अधीन रहते है। और उन्हें निर्वाचन से संबंधित कार्य करना होगा।
कलेक्टर ने साप्ताहिक समय सीमा की बैठक में सभी अधिकारियों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ अधिक से अधिक हितग्राहियों को देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर में जिन अधिकारी, कर्मचारी का खुद का मकान वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
इसके साथ ही निर्माण एजेंसी, प्राइवेट स्कूल ,कालेज, अस्पतालों में भी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने विगत दिवस मुख्यमंत्री जी द्वारा कलेक्टर कान्फ्रेंस लिए गए थे उस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को कलेक्टर कान्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का भली भांति पालन करना है।
स्वास्थ्य केन्द्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है। घर में प्रसव होने वाले माताओं की जानकारी अनिवार्य रूप से देने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान रखें और गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू और सभी एसडीएम, जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
राज्योत्सव : शास्त्रीय नृत्य और बैंड की धुनों ने ऐसा समां बांधा कि लोग झूमने लगे
मलखंभ में छात्रों ने अपने सधे हुए शरीर सौष्ठव और लचीलेपन से दर्शकों को किया आश्चर्यचकित
जशपुरनगर । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव 2025 के तहत 3 नवंबर को रणजीता स्टेडियम में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल थे।
इस अवसर पर कलाकारों और विद्यार्थियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में जहां मनीषा भगत द्वारा प्रस्तुत भरतनाट्यम और सरस्वती कला केंद्र की छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुति कत्थक जैसे शास्त्रीय नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं स्वप्निल बैंड और संदीप शर्मा बैंड की मधुर धुनों ने ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा स्टेडियम तालियों की गूंज और झूमते दर्शकों से भर गया।
कार्यक्रम में भारत की पारंपरिक खेल विधा मलखंभ का शानदार प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वनवासी कल्याण आश्रम के विद्यार्थियों ने अपने सधे हुए शरीर सौष्ठव और लचीलेपन से दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। विद्यालय के 26 छात्रों ने दशरंग, फ्रंटकैच, बगली, तेड़ी, चतुराआसान, एकपाद शिरासन, बैटीकेच, पश्चिमात्सन, हाथ का फारा, पैर का फारा और पिरामिड जैसी कठिन विधाओं का प्रदर्शन कर सभी की वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर विधायक रायमुनी भगत, पद्मश्री जागेश्वर यादव, कृष्ण कुमार राय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, रायगढ़ जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, जिला पंचायत सदस्य शांति भगत, कलेक्टर रोहित व्यास, डीएफओ शशि कुमार, अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू, एसडीएम विश्वास राव मस्के, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी, सुनील गुप्ता, उपेंद्र यादव, शारदा प्रधान सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
कुनकुरी का मयाली नेचर कैम्प बना पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र
जशपुरनगर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में जशपुर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 6 से 9 नवम्बर तक जशपुर जम्बुरी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
मयाली नेचर कैम्प जशपुर में जल क्रीड़ाओं का नया रोमांचक गंतव्य
स्पीड बोटिंग, कयाकिंग, एक्वा साइक्लिंग और बाउंस बोट का भी पर्यटन आनंद उठा पाएंगे
जशपुर की हरी-भरी वादियां जलाशय
हरे-भरे जंगलों, झरनों और पहाड़ियों से घिरे जशपुर जिले का मयाली नेचर पार्क अब रोमांच और जल क्रीड़ा प्रेमियों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन गया है। शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य से भरे इस स्थल में अब एडवेंचर का नया रंग जुड़ चुका है, स्पीड बोटिंग, कयाकिंग, एक्वा साइक्लिंग और बाउंस बोट जैसी गतिविधियाँ यहाँ के पर्यटन अनुभव को और भी यादगार बना रही हैं।
मयाली जलाशय की स्वच्छ और विस्तृत झील अब पर्यटकों को केवल प्रकृति की गोद में सुकून ही नहीं, बल्कि रोमांच का अहसास भी कराती है। सुबह की सुनहरी रोशनी में झील पर फिसलती स्पीड बोट्स जब हवा को चीरती हैं, तो दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। वहीं, कयाकिंग में प्रतिभागी अपनी शक्ति और संतुलन के बल पर पानी की लहरों के बीच आगे बढ़ते हैं, यह अनुभव आत्मविश्वास और एकाग्रता का प्रतीक बन जाता है।
परिवारों और युवाओं के बीच एक्वा साइकिलिंग सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में से एक बन रही है। पानी पर चलती यह विशेष साइकिल रोमांच के साथ-साथ मनोरंजन का बेहतरीन मिश्रण पेश करती है। यह उन लोगों के लिए है जो रोमांच तो चाहते हैं, पर शांति के साथ। वहीं बच्चों और समूह पर्यटकों के लिए बाउंस बोट पूरी तरह मस्ती से भरा अनुभव है, नाव पर हंसी, शोर और उमंग का माहौल पूरे झील क्षेत्र को जीवंत बना देता है।
इन सभी गतिविधियों को सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में संचालित किया जा रहा है। हर प्रतिभागी के लिए लाइफ जैकेट, और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षित गाइड और स्थानीय युवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही है।
जशपुर जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की यह पहल न केवल जिले के प्राकृतिक आकर्षणों को एक नया स्वरूप दे रही है, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज़्म एवं एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
मयाली नेचर पार्क अब केवल एक पिकनिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव स्थल बन चुका है जहाँ प्रकृति, रोमांच और संस्कृति तीनों का सुंदर संगम दिखाई देता है। झील के किनारे से उठती ठंडी हवा, पानी पर चमकती धूप की लहरें और दूर से आती बोट की आवाज़, यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल रचते हैं जो हर पर्यटक के मन में जशपुर की याद हमेशा के लिए बसा देता है।
कुनकुरी क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य को दी मंजूरी
क्षेत्र के किसानों ने जताया आभार......
जशपुर, 31 अक्टूबर 25

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक और बड़ा कदम उठाते हुए जशपुर जिले के विकासखंड कुनकुरी की ईंब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के लिए 37 करोड़ 09 लाख 63 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। इस स्वीकृति से कुनकुरी क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
योजना के पूर्ण होने के बाद 3323 हेक्टेयर के विरुद्ध 1453 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इजाफा होगा। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ईब व्यपवर्तन योजना के जीर्णाेद्धार से कृषि योग्य भूमि की सिंचाई क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा। लंबे समय से मरम्मत की आवश्यकता को लेकर किसान मांग कर रहे थे, जिसे अब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पूरा किया है। कुनकुरी क्षेत्र के किसानों ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया है। उनका कहना है कि इस योजना के पुनर्जीवन से उनकी खेती फिर से सशक्त होगी और अब उन्हें सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हिमालय में गूँजी जशपुर की गूंज: आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया मार्ग
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम
रायपुर, 30 अक्टूबर 2025



छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है।
यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की।
अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की।
अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
“विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है।
यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं।
अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया।
प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे।
यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।”
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
बाढ़ आपदा के लिए कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारियों का सम्पर्क नंबर जारी
जगदलपुर, 30 अक्टूबर 2025
मोंथा तूफान के तहत ऐतिहातन के लिए जिला कार्यालय जगदलपुर में बाढ़ आपदा कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका सम्पर्क नम्बर 07782-222661है। इसके अलावा तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों के नंबर भी जारी किया गया है जिसमें तहसीलदार जगदलपुर श्री राहुल गुप्ता (+91-7389214400), तहसीलदार बस्तर सुश्री जॉली जेम्स (+91-9424291946), तहसीलदार तोकापाल श्रीमती यशोदा केतारप (+91-9424297984), तहसीलदार लोहण्डीगुड़ा श्री कैलाश पोयाम (+91-8770723024), तहसीलदार भानपुरी श्री जीवेश कुमार सोरी (+91-9406422812), तहसीलदार दरभा श्री सुनील कुमार ध्रुव (+91-898218562), प्रभारी तहसीलदार बकावण्ड श्रीमती जागेश्वरी पोयाम (7999626732), प्रभारी तहसीलदार करपावण्ड श्री गौतम गोरे (+91-8962330903) और प्रभारी तहसीलदार बास्तानार श्री पुष्पराज मिश्रा (+91-9179081224) का सम्पर्क नंबर जारी किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने बगिया में जनदर्शन में सुनी आमजनों की समस्याएं
जशपुरनगर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने गृह ग्राम बगिया में जनदर्शन आयोजित कर आम नागरिकों से सीधे संवाद किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, किसान, छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों और समस्याओं के साथ उपस्थित हुए। मुख्यमंत्री ने सभी की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवेदनों का गंभीरता से परीक्षण कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाएं जनता की सुविधा और विकास के लिए हैं, इसलिए प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक इनका लाभ समय पर पहुँचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दें ताकि आमजन को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास भी मौजूद रहे।
जनदर्शन के दौरान प्राप्त कई आवेदनों में तत्काल कार्रवाई करते हुए समाधान किया गया। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कुछ अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और संबंधित विभागों को जनहित के प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने को कहा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दौरान ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि शासन जनता के साथ है और हर समस्या का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।


