December 5, 2021

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PM मोदी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की सौगात दी

रायपुर,

pm मोदी ने रक्षा मंत्रालय के नए भवन का उदघाटन किये

राजनाथसिह भी रहे उपस्थित

ये प्रोजेक्ट हैं नया संसद भवन और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू,  नए संसद भवन की लागत 862 करोड़ और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू की लागत 477 करोड़ है. कुल मिलाकर ये लागत लगभग 1300 करोड़ रुपये है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ नए संसद में मनाएंगे.

सेंट्रल विस्टा क्या है?

नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 3.2 किमी लंबे एरिया को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। इसकी कहानी 1911 से शुरू होती है। ये वो दौर था जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। कलकत्ता उनकी राजधानी थी, लेकिन बंगाल में बढ़ते विरोध के बीच दिसंबर 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया। दिल्ली में अहम इमारतें बनाने का जिम्मा मिला एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को। इन दोनों ने ही सेंट्रल विस्टा को डिजाइन किया। ये प्रोजेक्ट वॉशिंगटन के कैपिटल कॉम्प्लेक्स और पेरिस के शान्स एलिजे से प्रेरित था। ये तीनों प्रोजेक्ट नेशन-बिल्डिंग प्रोग्राम का हिस्सा थे।
लुटियंस और बेकर ने उस वक्त गवर्नमेंट हाउस (जो अब राष्ट्रपति भवन है), इंडिया गेट, काउंसिल हाउस (जो अब संसद है), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और किंग जॉर्ज स्टैचू (जिसे बाद में वॉर मेमोरियल बनाया गया) का निर्माण किया।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही राजपथ के दोनों ओर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसेस बनाने का प्लान था, लेकिन ये आजादी के वक्त तक नहीं बन सके थे। यानी, जब देश आजाद हुआ तो सेंट्रल विस्टा का अधूरा मॉडल मिला। आजादी के बाद सेंट्रल विस्टा के दोनों ओर कई नई इमारतें बनीं। रेल भवन, वायु भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन जैसी इमारतें 1962 तक यहां बन चुकी थीं। इसी तरह अलग-अलग मंत्रालयों ने अलग-अलग इमारतें बनाईं।
इस वक्त सेंट्रल विस्टा के अंदर राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, रेल भवन, वायु भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन, निर्माण भवन, नेशनल आर्काइव्ज, जवाहर भवन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उपराष्ट्रपति का घर, नेशनल म्यूजियम, विज्ञान भवन, रक्षा भवन, वाणिज्य भवन, हैदराबाद हाउस, जामनगर हाउस, इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल, बीकानेर हाउस आते हैं।

को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। इसकी कहानी 1911 से शुरू होती है। ये वो दौर था जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। कलकत्ता उनकी राजधानी थी, लेकिन बंगाल में बढ़ते विरोध के बीच दिसंबर 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया। दिल्ली में अहम इमारतें बनाने का जिम्मा मिला एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को। इन दोनों ने ही सेंट्रल विस्टा को डिजाइन किया। ये प्रोजेक्ट वॉशिंगटन के कैपिटल कॉम्प्लेक्स और पेरिस के शान्स एलिजे से प्रेरित था। ये तीनों प्रोजेक्ट नेशन-बिल्डिंग प्रोग्राम का हिस्सा थे।
लुटियंस और बेकर ने उस वक्त गवर्नमेंट हाउस (जो अब राष्ट्रपति भवन है), इंडिया गेट, काउंसिल हाउस (जो अब संसद है), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और किंग जॉर्ज स्टैचू (जिसे बाद में वॉर मेमोरियल बनाया गया) का निर्माण किया।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही राजपथ के दोनों ओर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसेस बनाने का प्लान था, लेकिन ये आजादी के वक्त तक नहीं बन सके थे। यानी, जब देश आजाद हुआ तो सेंट्रल विस्टा का अधूरा मॉडल मिला। आजादी के बाद सेंट्रल विस्टा के दोनों ओर कई नई इमारतें बनीं। रेल भवन, वायु भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन जैसी इमारतें 1962 तक यहां बन चुकी थीं। इसी तरह अलग-अलग मंत्रालयों ने अलग-अलग इमारतें बनाईं।

इस वक्त सेंट्रल विस्टा के अंदर राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, रेल भवन, वायु भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन, निर्माण भवन, नेशनल आर्काइव्ज, जवाहर भवन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उपराष्ट्रपति का घर, नेशनल म्यूजियम, विज्ञान भवन, रक्षा भवन, वाणिज्य भवन, हैदराबाद हाउस, जामनगर हाउस, इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल, बीकानेर हाउस आते हैं।