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करिहा सोच के मतदनवा, ना त देशवा बेच दीहें बेर्हमनवा ये पंक्तियां आजमगढ़ के भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल ‘निरहुआ’ आज कल जनता के बीच खूब गुनगुना रहे हैं

आजमगढ़ : ‘करिहा सोच के मतदनवा मोरे आजमगढ़ के लोग, ना त देशवा बेच दीहें बेईमनवा, मोरे आजमगढ़ के लोग। निरहुआ कइले बा ऐलनवा आजमगढ़ के लोग’।
ये पंक्तियां आजमगढ़ के भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल ‘निरहुआ’ आज कल जनता के बीच खूब गुनगुना रहे हैं। बीच-बीच में भारत माता की जय का उद्घोष भी कर रहे हैं। मतलब साफ है जनता के बीच जनता का नब्ज पकड़ रहे हैं वह भी पूरे देसी अंदाज में। भाजपा के राष्ट्रवाद के लिए शब्दों की माला पिरोकर स्वरों के जरिए उतार रहे हैं। गंभीर होकर नेता तो बीच-बीच में गीत गाकर अभिनेता का अहसास करा रहे हैं। निरहुआ के प्रचार करने का अंदाज ही अलग है। गांव में पैदल चल रहे हैं, ग्रामीणों को देखते ही ठमक जाते हैं। मुस्कुराते हुए पूछते हैं कि का मालिक वोट केकरा के देत हऊआ। ग्रामीण के सामने असमंजस यह कि सामने भाजपा का प्रत्याशी है या भोजपुरी स्टार। यह समझने में थोड़ा वक्त ही बीतता है कि तीसरा रूप सामने आ जाता है कि अरे ये तो विशुद्ध रूप से हम लोगों के बीच का आम आदमी है। निरहुआ के भी प्रचार करने के तरीके से तो एकबारगी भाजपाई भी भौचक हो जा रहे हैं। मतदाताओं के बीच वह जाकर रिश्ते की गांठ मजबूती के साथ जोड़ रहे हैं। मतदाताओं की उम्र आंखों से पढ़कर तपाक से किसी को चाचा, किसी को बाबूजी, किसी को भाई तो कहीं बहन-माई व बच्चों को बेटा बनाकर जुडऩे की कोशिश में जुटे हैं। लब्बोलुआब यह कि जो जिस उम्र का मिल रहा है उसी के अनुरूप संबोधन। संबोधन में सहजता व सरलता है तो आंखों में आत्मविश्वास भी झलकता है। साथ में भाजपाइयों की समृद्ध टीम बाकी काम कर रही है।

भोजपुरी सिने स्टार पिछले एक पखवारे से यहां डेरा डाले हुए हैं। रुपहले पर्दे पर लंबे समय से मौजूदगी के कारण इस अभिनेता को अपने बारे में बताने की किसी को जरूरत नहीं पड़ रही है। देखते ही युवा सेल्फी की जुगत में लग जाते हैं। सियासत की विवशता कहें या जो नाम दे लें, बनावटी ही सही लेकिन वह थोड़ी सी मुस्कुराहट लोगों के दिलों को झंकृत कर देती है। सिने स्टार के पास लोक गायकी की अपनी एक अलग विधा है। इसको सुनने वालों की एक अलग ही फौज है। इसी का नतीजा है कि यह मौका देख गुनगुनाने से भी गुरेज नहीं करते हैं लेकिन एक प्रत्याशी की मर्यादा को नहीं भूलते हैं। विपक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में भी नहीं हिचकते पर भाषा नियत्रंण रेखा से बाहर नहीं जाती। सपा-बसपा के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में निरहुआ के समक्ष पूर्व सीएम अखिलेश यादव हैं। विरोधी पर तंज भी कसना है तो नाम पूरे आदर के साथ। अपने विरोधी के कद को निरहुआ पहचानते हैं। गठबंधन प्रत्याशी अखिलेश की मर्यादा को भी जानते हैं। इसीलिए जब भी उनकी जुबान पर नाम आता है तो अखिलेश भइया ही कहते हैं।

बहरहाल चुनावी सियासत के इस रंग में वह छाने को आतुर दिख रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि भाजपा के नामी-गिरामी सभी नेता साथ खड़े हैं। एमएलसी यशवंत सिंह, मंत्री दारा सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह तो वहीं प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य अखिलेश मिश्र गुड्डू के साथ युवाओं की एक लंबी फौज हमराही की भूमिका में है। जनता भी उन्हें गले लगा रही है। यह अलग बात कि गले लगाना व वोटों की बरसात दोनों अलग-अलग धुरी है। इसके लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। बावजूद इसके आधा दर्जन ग्रामीणों की टोली दिखी तो उसके पास पहुंचकर निरहुआ गुनगुना उठे …

दुधवा क कर्जा माई हम चुका के आइब,

दुश्मन के मुहवां में करखा लगा के आइब।

धन-दौलत, रुपया-पैसा सब कुछ बेकार बांटे,

सबसे ऊपर भइया देसवा हमार बांटे।
आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र में मतदाता
-17,70,635-कुल मतदाता।
-9,62,890-पुरुष मतदाता।
-8,07,668-महिला मतदाता।
-77-अन्य मतदाता।

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