छत्तीसगढ़

चुनावी परीदृश्य पर बेबाक चर्चा डॉ. रमन सिंह के साथ : ब्रजेश शुक्ला/आशीष सिंह

ब्रजेश शुक्ला/आशीष सिंह 

रायपुर।  चुनावी माहौल के शांत होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से चर्चा करने का अवसर मिला। चुनाव के दौरान तो आरोप और दावों की बात होती है लेकिन मतदान के बाद नेताओं से बातचीत समीक्षात्मक होती है। चुनावी मोड और मूड से बाहर निकल चुके डॉ. रमन सिंह से दैनंदिनी के प्रधान संपादक ब्रजेश शुक्ला और आशीष सिंह की विस्तार से हुई चर्चा के संपादित अंश प्रस्तुत हैं।
चुनावी तनाव और दौरों की थकान से मुक्त डॉ. रमन सिंह बिलकुल तरोताजा और पूरी ऊर्जा से लबरेज नजर आए। उन्होंने स्वीकार भी किया कि वे इन दिनों बहुत रिलेक्स महसूस कर रहे हैं, घर-परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका भी मिल रहा है। वे किताबें पढ़ रहे हैं, पौत्री के साथ खेल रहे हैं और फिल्म भी देख रहे हैं। कुल मिलाकर एक राजनेता पूरी तरह से गृहस्थ जीवन में रमा हुआ है। स्वाभाविक तौर पर हमने प्रदेश में भाजपा की संभावाओं के बारे में पहला सवाल किया। उन्होंने पूरे यकीन और आत्मविश्वास से कहा कि पूरे बहुमत से सरकार बन रही है, पिछली बार से ज्यादा सीटें भी आ रही हैं। ‘किसानों का कर्ज माफ और बिजली का बिल हॉफÓ से वे न प्रभावित दिखे और न ही चिंतित। सोसायटियों तक धान नहीं पहुंचने के सवाल पर डॉ. सिंह ने कहा कि चुनाव शुरू हो जाने के कारण ऐसा हुआ है। धान की कटाई, मिंजाई जैसे कार्यों के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत होती है। बड़ी संख्या में मजदूर चुनाव प्रचार आदि कार्यों में लगे थे। मजदूरों की कमी के कारण धान समितियों तक नहीं पहुंचा पर अब धान खरीदी में तेजी आ गई है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया है कि इस बार भी लक्ष्य से अधिक धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर होगी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के घोषणा पत्र से प्रदेश के किसान प्रभावित होते तो बंफर वोटिंग होती। वे कहते हैं कि मतदान प्रतिशत में 4-5 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए थी।

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