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दिल्ली कांग्रेस में नेतृत्व के संकट का नतीजा है दीक्षित की वापसी : AAP

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की कमान एक बार फिर सौंपे जाने को कांग्रेस में नेतृत्व के संकट का सबूत बताया है.

शीला दीक्षित को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाये जाने की गुरुवार को घोषणा किए जाने के बाद आप की ओर से जारी बयान में हालांकि इसे कांग्रेस का आंतरिक मामला बताया गया. किंतु यह भी कहा गया है ‘दीक्षित की वापसी का मतलब साफ है कि दिल्ली कांग्रेस में नेतृत्व का गंभीर संकट है.’

और क्या कहा आप ने?
पार्टी ने दलील दी कि 2013 में दीक्षित बतौर मुख्यमंत्री आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से चुनाव हारी थी. तब से लेकर अब तक कांग्रेस के दो प्रदेश अध्यक्षों को आजमाया गया और इस दौरान विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का दिल्ली में खाता भी नहीं खुल सका.

पार्टी ने कहा कि इसके बाद दीक्षित को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना कर भेजा गया. बाद में कांग्रेस ने सपा से हाथ मिलाकर चुनाव लड़ा और इसमें कांग्रेस की करारी हार हुई.

आप ने इसके बावजूद दीक्षित को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाने को कांग्रेस में नेतृत्व के गंभीर संकट का सबूत बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की.

बता दें पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही देवेन्द यादव, हारून यूसुफ और राजेश लिलोठिया को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। कांग्रेस के दिल्ली मामलों के प्रभारी पी सी चाको ने गुरुवार को यह घोषणा की। हाल ही में अजय माकन ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।

शीला दीक्षित 1984 से 1989 तक कन्नौज से सांसद रह चुकी हैं। वह 1998 से 2013 तक (लगातार 15 साल) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

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