छत्तीसगढ़ / बेमेतरा
विश्व मृदा दिवस पर कृषक प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
बेमेतरा, 06 दिसंबर 2025
कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग बेमेतरा के संयुक्त तत्वाधान में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर ग्राम मड़ई विकासखंड बेमेतरा में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। खाद्य सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन में मृदा के महत्व पर व्यापक चर्चा एवं जनजागरूकता हेतु प्रत्येक वर्ष 5 दिसंबर को पुरे विश्व में विश्व मृदा दिवस के रूप में विविध कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। इस वर्ष स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा की थीम पर विश्व मृदा दिवस का आयोजन किया गया। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तोषण कुमार ठाकुर ने बताया कि अंधाधुंध व असंतुलित रसायन युक्त खेती तथा इंडस्ट्रियल वेस्ट, शहरी कचरा, अपशिष्ट पदार्थ, प्लास्टिक के उपयोग एवं खनन कार्य में लगातार वृद्धि होने के कारण कृषि एवं अन्य क्षेत्र के मृदा स्वास्थ्य व उसकी गुणवत्ता में तेजी से गिरावट हुई है। इससे कृषि उत्पाद में हानीकारक रसायन के अवशेष मानक स्तर से और अधिक बढ़ता जा रहा है इसके कारण हमारे आहार में विषाक्तता बढ़ती जा रही है, जो कई गंभीर बीमारियों का कारक बन रही है। इससे बचने के लिए जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को अपनाना अतिआवश्यक है। इसकी शुरुआत किसानों को अपने घरेलू उपयोग के लिए जैविक फसल उत्पादन के साथ करना चाहिए तभी क्रमबद्ध तरीके से मृदा के स्वास्थ्य में सुधार होगा। तत्पश्चात ही ग्राम व शहरी जीवन के स्वास्थ्य में सुधार संभव होगा।
अनुभागीय कृषि अधिकारी श्रीमती निलिमा कोरी ने बताया कि जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से जैविक खेती मिशन एवं प्राकृतिक खेती मिशन चलाया जा रहा है इसके अंतर्गत कृषकों के प्रक्षेत्र में प्रदर्शन कार्यक्रम भी लिया जा रहा है तथा प्राकृतिक खेती में उपयोग किये जाने वाले बायों इंपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर बायाँ इंपुट रिसोर्स सेंटर (बी.आर.सी.) के लिए कुछ कृषकों को चयन भी किया गया है। इस अवसर पर बी.आर.सी. के रूप में चयनित कृषक श्री तरुण वर्मा ने उनके द्वारा तैयार की जाने वाली बायो इंपुट के बारे में भी जानकारी दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक श्रीमती रजनी धर्मेन्द्र अगाशे एवं श्री डोमन सिंह टेकाम ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य की देखभाल के लिए मिट्टी परीक्षण के महत्व, समन्वित कीट, रोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दिया। श्री देशराज यादव, सहायक संचालक कृषि तथा श्री वी. के. टंडन वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती की विधि के बारे में बताते हुए मृदा में लाभदायक सुक्ष्म जीव के लिए जैविक कार्बन के महत्व के बारे में जानकारी दिया। परिचर्चा के दौरान उपस्थित किसानों को रबी दलहनी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई, साथ ही विभागीय अधिकारियों के द्वारा किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में बताया गया। इस कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, ग्राम मड़ई के सरपंच के साथ 50 से अधिक कृषकगण उपस्थित रहे।
संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने जिले में सख्त व्यवस्था लागू : निजी कृषि केंद्रों में कृषि अधिकारियों की उपस्थिति में डीएपी वितरण शुरू, किसानों को जागरूक किया गया
बेमेतरा, 06 दिसम्बर 2025
जिले में अत्यधिक डीएपी उर्वरक के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। संचालनालाय नवा रायपुर पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए तथा एनपीके, एसएसपी एवं अन्य पोषक तत्वों के विकल्पों का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। रबी वर्ष 2025–26 में जिले के जिन निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में 15 मीट्रिक टन से अधिक डीएपी उपलब्ध है, वहां उर्वरकों की उपलब्धता को नियंत्रित रखते हुए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मैदानी कृषि विस्तार अधिकारी (कृ.वि.अधि.) एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (ग्रा.कृ.वि.अधि.) की ड्यूटी लगाई गई है।
निर्देशानुसार अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के निजी उर्वरक प्रतिष्ठानों में उपस्थित रहकर पीओएस मशीन के माध्यम से ही डीएपी का वितरण सुनिश्चित करेंगे, जिससे किसानों को आवश्यकता के अनुरूप संतुलित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित उर्वरक निरीक्षक द्वारा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में जिले में आज निजी कृषि केंद्र से डीएपी वितरण की शुरुआत की गई |
एम.एस. वर्मा कृषि केन्द्र, थानखमरिया में कृषि अधिकारी की उपस्थिति में किसानों को कुल 38 बैग डीएपी उर्वरक का वितरण किया गया।
अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि डीएपी का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए एनपीके, एसएसपी जैसे संतुलित विकल्पों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। कृषि विभाग के इस सक्रिय कदम से जिले में उर्वरक उपयोग को वैज्ञानिक एवं संतुलित बनाने में मदद मिलेगी तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति किसानों में महत्वपूर्ण जागरूकता पैदा होगी।
किसानों को फसल सुरक्षा का संबल : ग्राम मड़ई में फसल बीमा पाठशाला का आयोजन
कृषि विभाग ने किसानों को दी फसल बीमा योजना, पंजीयन प्रक्रिया व दावे की जानकारी
बेमेतरा, 06 दिसम्बर 2025
कृषि विभाग द्वारा ग्राम मड़ई में किसानों के हित में फसल बीमा पाठशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के महत्व, लाभ, पंजीयन की प्रक्रिया, फसल कटाई प्रयोग (क्रॉप कटिंग), प्रीमियम भुगतान, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में दावे (क्लेम) दाखिल करने की विधि सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि फसल बीमा योजना किसानों की सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं—जैसे अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखा, कीट–रोग प्रकोप या अन्य अनियंत्रित परिस्थितियों में फसल क्षति होने पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। किसानों को समय पर बीमा करवाने, बैंक पासबुक, भू-अधिकार पत्र, पंजीयन रसीद तथा आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील की गई।
कृषि विशेषज्ञों ने फसल सलाह, मौसम आधारित खेती, वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग, जैविक खेती को प्रोत्साहन, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड, बीज उपचार, कीट प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
किसानों को यह भी बताया गया कि यदि फसल क्षति होती है, तो 72 घंटे के भीतर संबंधित पोर्टल या निकटतम कृषि कार्यालय में सूचना देना अनिवार्य है, जिससे उनका दावा निर्बाध रूप से स्वीकृत हो सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और उन्होंने फसल बीमा योजना से संबंधित प्रश्न पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान किया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि विभाग हमेशा किसानों के साथ है और किसी भी समस्या पर तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी।
फसल बीमा पाठशाला के सफल आयोजन में ग्रामीण कृषक मित्रों, कृषि सहायक, ग्रामीण स्तर के पदाधिकारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों का विशेष सहयोग रहा। यह कार्यक्रम किसानों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जोखिम रहित खेती के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
लिंग आधारित हिंसा समाप्ति हेतु 16 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं को गुड टच–बैड टच, कानूनी अधिकार व विभागीय योजनाओं की दी गई जानकारी
बेमेतरा, 06 दिसम्बर 2025
कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सी.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग के महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब) द्वारा लिंग आधारित हिंसा समाप्ति हेतु 16 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान के तहत कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बेमेतरा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभागीय टीम ने छात्राओं को गुड टच–बैड टच, माहवारी प्रबंधन, लिंग आधारित हिंसा, महिलाओं के कानूनी अधिकार, घरेलू हिंसा, बाल विवाह रोकथाम, पास्को अधिनियम, एवं साइबर अपराध (हेल्पलाइन 1930) के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। साथ ही सखी वन स्टॉप सेंटर, बाल सहायता नंबर 1098, महिला हेल्पलाइन 181, तथा विभागीय योजनाओं के बारे में भी विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।
विद्यालय परिसर में 181 महिला हेल्पलाइन एवं विभागीय योजनाओं के स्टीकर चस्पा किए गए तथा छात्राओं को सेनेटरी पैड का वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्राओं को बाल विवाह मुक्त बेमेतरा के संकल्प हेतु शपथ दिलाई गई। इस कार्यक्रम में राखी यादव (केंद्र प्रशासक), सेवन्तिका एवं तमन्ना (लिंग विशेषज्ञ), आनंद धृतलहरे (सामाजिक कार्यकर्ता), इंद्राणी (बाल सहायता पर्यवेक्षक), तथा विद्यालय की वार्डन एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। यह जागरूकता अभियान बालिकाओं में आत्म-सुरक्षा, अधिकारों एवं संवेदनशील मुद्दों के प्रति समझ बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
बाल विवाह मुक्त भारत के लिए बढ़ा एक और कदम : बेमेतरा में विद्यार्थियों को बाल विवाह निषेध कानून की दी गई जानकारी
बेमेतरा, 06 दिसम्बर 2025
कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बेमेतरा द्वारा संचालित जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल सहायतालीन 1098, एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने बेमेतरा शहर में जागरूकता अभियान आयोजित किया। यह कार्यक्रम जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया, माननीय सचिव श्रीमती अनिता कोशिमा रावटे, तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सी.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
टीम ने सरस्वती शिशु मंदिर, बेमेतरा पहुँचकर छात्रों को बाल विवाह मुक्त भारत के उद्देश्य, बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। अधिकारियों ने उपस्थित छात्र–छात्राओं को बाल विवाह के उन्मूलन हेतु शपथ भी दिलाई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को निःशुल्क विधिक सहायता, उनके अधिकारों, तथा कानूनी संरक्षण के बारे में अवगत कराया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को 1098 बाल सहायतालीन, प्रायोजन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, तथा अन्य बाल संरक्षण सेवाओं की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में प्राचार्य एवं समस्त विद्यालय स्टाफ का सहयोग मिला। कार्यक्रम में श्री आभास शर्मा (परामर्शदाता), सुश्री इंद्राणी सिंह (पर्यवेक्षक), श्री आशीष जायसवाल (पर्यवेक्षक) तथा श्री धरमु बारले एवं श्री संजीव शर्मा (अधिकार मित्र, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) उपस्थित थे।
छड़ की आड़ में गांजा तस्करी, ट्रक पलटने के बाद हुआ खुलासा..
बेमेतरा । छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में देर रात हुआ सड़क हादसा एक बड़ी तस्करी के खुलासे में बदल गया। रायपुर से प्रयागराज जा रहा लोहे की छड़ लेकर निकला एक ट्रक ग्राम बैजी के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना के बाद ट्रक चालक मौके से भाग गया।
सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और ट्रक की प्राथमिक जांच की। शुरुआत में वाहन में केवल लोहे की छड़ें दिखाई दीं, लेकिन जब पुलिस ने केबिन और अंदरूनी हिस्सों को खोला तो वहां से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। नशे को छड़ों के नीचे और केबिन में छिपाकर रखा गया था।
पुलिस जेसीबी और मजदूरों की मदद से ट्रक से माल उतारकर गांजे को सुरक्षित निकालने में जुटी है। जब्त किए गए नशे की कुल मात्रा का आकलन किया जा रहा है। घटना के बाद फरार हुए ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी गई है।
पुलिस का कहना है कि छड़ की आड़ में गांजा ले जाया जा रहा था और यह संगठित तस्करी का मामला लगता है। जांच जारी है।
रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय में चार दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य समापन
विभिन्न प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, एसकेएस राजनांदगांव ओवरऑल चैंपियन
बेमेतरा । रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बेमेतरा में आयोजित चार दिवसीय पश्चिम क्षेत्रीय अंतर महाविद्यालयीन खेलकूद प्रतियोगिता 2025 का समापन समारोह बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। चार दिनों तक चले इस आयोजन ने विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को एक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. विनम्रता जैन, अधिष्ठाता—कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, राजनांदगांव थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. यू.के. ध्रुव ने की, जबकि आयोजन सचिव डॉ. असित कुमार उपस्थित रहे।
चार दिनों तक विभिन्न खेलों का आयोजन कृषि महाविद्यालय परिसर में किया गया। प्रमुख खेलों में शामिल थे रिले रेस, खो-खो, कबड्डी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, तवा फेंक, भाला फेंक, लंबी एवं ऊंची कूद, 100, 200, 400, 800 और 1500 मीटर दौड़ इन प्रतियोगिताओं में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर से संबद्ध पश्चिम क्षेत्रीय आठ महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने रोमांचक मुकाबले प्रस्तुत किए। विशिष्ट अतिथि डॉ. विनम्रता जैन ने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति विकसित करते हैं। प्रभारी अधिष्ठाता डॉ. योगेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन स्वयं एक खेल है, जिसमें जीत और हार दोनों का महत्व होता है।
मुख्य अतिथि एसएसपी रामकृष्ण साहू ने कहा कि शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब उसमें खेल, कला और संस्कृति का समावेश हो। उन्होंने खिलाड़ियों को मेहनत, लगन और टीम भावना बनाए रखने की प्रेरणा दी। इस प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियनशिप: एसकेएस कृषि महाविद्यालय, राजनांदगांव रनर-अप चैंपियनशिप: संत कबीर कृषि महाविद्यालय, कवर्धा | विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए। रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय, बेमेतरा के खिलाड़ियों ने भी कई प्रतियोगिताओं मंल चमक बिखेरी जिसमे 100 मीटर दौड़ – अनिकेत (स्वर्ण), तवा फेंक – दिव्यांशु (स्वर्ण), टेबल टेनिस – विमला, सीमा (स्वर्ण), खो-खो महिला वर्ग – टीम बेमेतरा (स्वर्ण), गोला फेंक – आरती (स्वर्ण), तवा फेंक – आरती (रजत), टेबल टेनिस पुरुष वर्ग – राहुल, सुमित सिकदार (रजत), 1500 मीटर दौड़ – दिव्यांशु (रजत), ऊंची कूद – आकाश (रजत), 4×100 मीटर रिले रेस पुरुष वर्ग – बेमेतरा टीम (स्वर्ण) पुरुष वर्ग – बेस्ट एथलीट: प्रहलाद (संत कबीर कृषि महाविद्यालय, कवर्धा) रनर-अप बेस्ट एथलीट: दिव्यांशु (रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय, बेमेतरा) महिला वर्ग – बेस्ट एथलीट: पुनिका चंद्रवंशी (कृषि महाविद्यालय, राजनांदगांव)
मुख्य अतिथि एसएसपी रामकृष्ण साहू ने विजेताओं को पदक और ट्रॉफियाँ प्रदान कीं। पुरस्कार लेते हुए खिलाड़ियों में उत्साह चरम पर था और समूचा खेल मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस अवसर पर डॉ. टी.डी. साहू, डॉ. हेमलता निराला, डॉ. कुंती बंजारे, डॉ. भारती बघेल, डॉ. राजेश्वरी कुर्रे, डॉ. प्रीति पैकरा, डॉ. साक्षी बजाज, डॉ. सरिता शर्मा, डॉ. महानंद साहू, संजीव, डॉ. रामेश्वर पाटिल सहित समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे और सभी ने प्रतियोगिता का भरपूर आनंद लिया।
राष्ट्रीय राजमार्ग वाहन चालक नेत्र परीक्षण सप्ताह सफलतापूर्वक सम्पन्न
110 भारी वाहन चालकों का निःशुल्क नेत्र परीक्षण, सुरक्षित ड्राइविंग के लिए किया गया जागरूक
बेमेतरा । स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में 24 से 29 नवम्बर तक “राष्ट्रीय राजमार्ग वाहन चालक नेत्र परीक्षण सप्ताह” सफलतापूर्वक मनाया गया। राज्य कार्यालय से प्राप्त निर्देशानुसार आयोजित इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य भारी वाहन चालकों का निःशुल्क नेत्र परीक्षण कर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करना था।
यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर तथा जिला सहायक नोडल अधिकारी (अंधत्व) डॉ. बी.एल. राज के मार्गदर्शन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जेवरा एवं चोरभट्टी बाईपास, बेमेतरा में आयोजित किया गया।
ट्रक चालकों के लिए विशेष नेत्र परीक्षण सुविधाएँ
नोडल अधिकारी डॉ. बी.एल. राज ने बताया कि शिविर में चालक वर्ग का कलर ब्लाइंडनेस, निकट दृष्टिदोष, दूर दृष्टिदोष, प्रेस बायोपिक आदि का विस्तृत परीक्षण किया गया। जिनमें दृष्टिदोष पाया गया, उन्हें उपयुक्त नंबर का चश्मा एवं आवश्यक आई ड्रॉप्स वितरित किए गए। साथ ही सुरक्षित ड्राइविंग के सुझाव भी प्रदान किए गए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले अधिकांश ड्राइवर समयाभाव के कारण नेत्र जांच नहीं करा पाते, जिसके चलते कई बार दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यह विशेष सप्ताह आयोजित किया, ताकि वाहन चालकों के नेत्र स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सके।
पूरा कार्यक्रम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू के सुपरविजन में तथा यातायात प्रभारी रक्षित निरीक्षक प्रवीण खलखो एवं उनकी टीम के सहयोग से संचालित हुआ। पुलिस विभाग की सक्रिय भूमिका से शिविर में भारी वाहन चालकों की बड़ी संख्या में सहभागिता सुनिश्चित हुई। इस विशेष शिविर में कुल 110 वाहन चालकों का नेत्र परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशु अग्रवाल, सहायक नोडल अधिकारी विद्यासागर द्वारा शिविर का निरीक्षण किया गया। यह अभियान न केवल सड़क सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि वाहनों को सुरक्षित रूप से चलाने व दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के संयुक्त प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
गौधाम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न
बेमेतरा । छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग नियम 2005 के अंतर्गत संचालित गौधाम योजना की जिला स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक बीते दिवस जिला मुख्यालय में सम्पन्न हुई। कलेक्टर रणबीर शर्मा के निर्देशन पर बैठक की अध्यक्षता अपर कलेक्टर प्रकाश भारद्वाज ने की। इस बैठक में उप संचालक पंचायत श्रीमती भूमिका देसाई, जिला स्तरीय समिति के अशासकीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएँ, पशु चिकित्सा विभाग, पुलिस विभाग तथा वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जिले में गौधामों की वर्तमान स्थिति, पशु क्रूरता की रोकथाम, आवारा एवं घुमंतू पशुओं के संरक्षण तथा गौधाम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
घुमंतू पशुओं के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश
अपर कलेक्टर श्री भारद्वाज ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में गौधाम खोलने की आवश्यक प्रक्रियाएँ शीघ्र पूर्ण की जाएँ। उन्होंने कहा कि सड़क एवं सार्वजनिक स्थलों पर विचरण करने वाले घुमंतू पशुओं का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से स्वीकृत गौधामों को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की पशु क्रूरता की स्थिति उत्पन्न न हो।
पराली जलाने पर पंचायत विभाग को कड़े निर्देश
कृषि कार्यों में फसल कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली जलाने की समस्या पर भी बैठक में गंभीरता से चर्चा हुई। प्रभारी कलेक्टर ने पंचायत विभाग को सख्त निर्देश दिए कि सरपंच एवं सचिव अपने-अपने क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पराली दहन पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचाता है तथा मृदा की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। इसके रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान, निगरानी और वैकल्पिक प्रबंधन उपायों को अनिवार्य रूप से अपनाया जाए।
अधिकारियों को सौंपे गए दायित्व
गौधाम स्थलों की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करना। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा घुमंतू पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण व टीकाकरण नियमित रूप से कराना। पुलिस एवं वन विभाग द्वारा अवैध पशु परिवहन एवं पशु क्रूरता पर प्रभावी निगरानी रखना। पंचायत विभाग द्वारा पराली दहन पर रोक के लिए जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करना।
बैठक के अंत में अपर कलेक्टर ने कहा कि गौधाम योजना न सिर्फ पशु संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह अनिवार्य पहल है। जिले के सभी विभागों का समन्वित प्रयास इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अपर कलेक्टर ने किया एसआईआर कार्यों का किया निरीक्षण
मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में तेज़ी लाने दिए निर्देश
बेमेतरा । नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्य की प्रगति का निरीक्षण आज अपर कलेक्टर प्रकाश भारद्वाज द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बूथ स्तर पर चल रहे निर्वाचन संबंधी कार्यों, मतदाता सूची के अद्यतन, मतदाताओं से प्राप्त प्रपत्रों के सत्यापन तथा प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के समय ईवीए (Electoral Verification Activity) टीम, बीएलओ तथा निर्वाचन कार्य में लगे अन्य कार्मिक उपस्थित थे। अपर कलेक्टर ने कर्मचारियों से घर-घर सर्वे, फॉर्म 6, 7 और 8 की प्राप्ति स्थिति, पुराने एवं नए मतदाताओं के विवरण, नाम जोड़ने-कटाने-संशोधन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।
एसआईआर कार्य में तेजी लाने के निर्देश
अपर कलेक्टर श्री भारद्वाज ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप मतदाता सूची का शत-प्रतिशत अद्यतन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने टीम को स्पष्ट रूप से बताया कि पात्र नागरिकों के नाम किसी भी स्थिति में सूची से छूटने न पाएँ। नए मतदाताओं, विशेषकर 18+ युवा वर्ग को प्राथमिकता देकर पंजीकृत किया जाए। बीएलओ अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर सत्यापन कार्य को समय सीमा के भीतर पूर्ण करें। दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और दूरस्थ क्षेत्रों के मतदाताओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।
स्थल निरीक्षण में मिले महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर ने मौजूद मतदान कार्मिकों को कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या विलंब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दस्तावेजों की जांच, मतदाता फोटो मिलान, परिवारवार सत्यापन, मृत मतदाताओं के नाम हटाने तथा गलत प्रविष्टियों को सुधारने के निर्देश दिए। भारतीय सिंधु सभा, छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा लगाए गए सहयोग शिविर में भी अपर कलेक्टर पहुंचे, जहाँ बड़ी संख्या में लोग फॉर्म भरते और दस्तावेज जमा करते दिखाई दिए। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से बातचीत कर उन्हें जागरूक किया कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति अपना नाम निर्वाचन नामावली में अवश्य दर्ज कराएँ। अंत में श्री भारद्वाज ने कहा कि आगामी निर्वाचन को ध्यान में रखते हुए जिले में मतदाता सूची को पूर्ण, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने हेतु सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अधिक सुदृढ़ हो सके।
पीएम-आशा योजना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
उप संचालक कृषि ने किया उपार्जन केंद्रों व मॉडल खेतों का व्यापक निरीक्षण
बेमेतरा । कलेक्टर रणबीर शर्मा के मार्गदर्शन मे शासन की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आशा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से आज उप संचालक कृषि द्वारा जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों का व्यापक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रत्येक केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, किसानों की आवक, मक्का एवं अन्य उपज की स्थिति तथा प्रचार-प्रसार गतिविधियों की समीक्षा की।
9 उपार्जन केंद्रों का दौरा—किसानों को योजना से जोड़ने निर्देश
थानखमरिया, थेलकाडीह, देवरबीजा, साजा सहित जिले में चिन्हित 9 उपार्जन केंद्रों में पहुँचकर उप संचालक कृषि ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीएम-आशा योजना के लाभों का अधिकतम प्रचार-प्रसार किया जाए, किसानों को समर्थन मूल्य, भावांतर भुगतान प्रक्रिया एवं पंजीयन की विधि के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए, अधिक से अधिक किसानों को उपार्जन केंद्रों तक लाकर उपज विक्रय हेतु प्रेरित किया जाए।इसी क्रम में संबंधित केंद्रों के प्रांगण में पीएम आशा योजना का सूचना फ्लेक्स समिति सदस्यों एवं किसानों की उपस्थिति में चस्पा किया गया, ताकि किसान सरलता से योजना की जानकारी प्राप्त कर सकें।
नेचुरल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत जैविक खाद उत्पादन का निरीक्षण
उप संचालक कृषि ने ग्राम चिखली एवं कुटरु में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु स्थापित जैविक खाद इकाइयों का बारीकी से निरीक्षण किया। यहाँ उन्होंने कृषि सखियों एवं किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (वेर्मिकम्पोस्ट /जीवमृत इत्यादि) तैयार करने, इसके उपयोग की सही विधि, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में इसके प्रभाव, तथा लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल लागत को कम करती है, बल्कि भूमि की सेहत, पर्यावरण और उत्पाद की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार लाती है।
पराली न जलाने का अनुरोध—वैकल्पिक प्रबंधन पर विशेष जोर
भ्रमण के दौरान खेतों में कार्य कर रहे किसानों से बातचीत करते हुए उप संचालक कृषि ने पराली जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान, मिट्टी के जीवांश नष्ट होने के खतरे के बारे में समझाया। उन्होंने किसानों को पराली को भूमि में दबाने, कम्पोस्ट बनाने, मल्चिंग, तथा गौ-चारण उपयोग जैसे विकल्प अपनाने हेतु प्रेरित किया। पूरे निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी, सहायक संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, तथा संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित रहे एवं प्रत्येक गतिविधि का स्थल पर समन्वय किया।
जिले में कृषि विभाग का सतत प्रयास
कृषि विभाग द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के उपयोग, प्राकृतिक खेती के विस्तार और पराली प्रबंधन को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उप संचालक कृषि ने कहा कि विभाग का उद्देश्य है हर किसान को योजनाओं का पूरा लाभ मिले, फसल का उचित मूल्य प्राप्त हो और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जाए। यह निरीक्षण अभियान आगामी दिनों में भी जिले के अन्य ग्रामों और केंद्रों में जारी रहेगा।
छत्तीसगढ़ का प्रमुख बर्ड वॉक एवं जैव विविधता संरक्षण केंद्र: गिधवा-परसदा
बेमेतरा , 20 नवंबर 2025
साल 2023 में किए गए जैव विविधता सर्वेक्षण के अनुसार यहां 104 मछलियों, 19 उभयचरों और 243 पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की गईं। अक्टूबर से मार्च के बीच भारत, रूस, मंगोलिया, बर्मा, बांग्लादेश सहित कई देशों से हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। इसी कारण गिधवा- परसदा परिसर छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय बर्ड-वॉक और प्रकृति अध्ययन केंद्र बन गया है।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित गिधवा-परसदा आर्द्रभूमि परिसर राज्य का सबसे समृद्ध और सक्रिय पक्षी आवास क्षेत्र माना जाता है। गिधवा, गिधवा-2, परसदा, कूर्मू तथा एसएसएमटी जैसी जलाशयों से मिलकर बना यह परिसर स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बेहतर प्रबंधन और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण के कारण यह स्थल राज्य का प्रमुख पारिस्थितिक केंद्र बन चुका है।

इको-पर्यटन शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का केंद्र
वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर गिधवा-परसदा न केवल जैव विविधता का आश्रय स्थल बना है, बल्कि जनजागरूकता, प्रशिक्षण और प्रकृति-आधारित पर्यटन का उत्कृष्ट केंद्र भी बन रहा है। यहां आयोजित राज्य स्तरीय बर्ड फेस्टिवल, जनसहभागिता कार्यक्रमों और संरक्षण-उन्मुख गतिविधियों ने इसे एक प्रमुख प्रकृतिक शिक्षा केंद्र का रूप दिया है। इन आयोजनों में स्थानीय समुदाय, विद्यार्थी, प्रकृति प्रेमी और विशेषज्ञ सक्रिय रूप से शामिल होते हैं, जिससे न केवल जागरूकता बढ़ी है बल्कि स्थानीय आर्थिक अवसर भी विकसित हुए हैं।

फॉरेस्ट ट्रेल्स प्रकृति-आधारित शिक्षा का अनूठा स्थल
गिधवा-परसदा परिसर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है यहां नियमित रूप से आयोजित बर्ड वॉक, फॉरेस्ट ट्रेल और नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियाँ। इन ट्रेल्स में विद्यार्थियों और आगंतुकों को पक्षियों, पौधों और अन्य प्रजातियों की पहचान सिखाई जाती है। वन विभाग के प्रशिक्षित मार्गदर्शकों द्वारा पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन के बारे में सरल और वैज्ञानिक जानकारी दी जाती है।
एक सफल संरक्षण मॉडल

सुदृढ़ प्रबंधन, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी तथा निरंतर प्रशिक्षण-आधारित गतिविधियों ने गिधवा-परसदा को जैव विविधता संरक्षण और इको-पर्यटन का सफल मॉडल बना दिया है। यह परिसर आज न केवल छत्तीसगढ़ का सर्वाेत्तम बर्ड वॉक स्थल है बल्कि वैज्ञानिक महत्व, सामुदायिक सहभागिता और प्रकृति संरक्षण के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण भी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में वित्तीय गड़बड़ी उजागर
बेमेतरा । ग्राम मोतेसरा, ग्राम पंचायत रौद्रा (जनपद पंचायत साजा) में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। शिकायतकर्ता नीलम निषाद सहित ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर जिला स्तरीय जांच समिति ने मामले की जांच की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आवास हितग्राही कल्याणी बाई/राधेश्याम एवं दुगधी बाई/सुकालू, ग्राम मोतेसरा के मकान निर्माण न होने के बावजूद प्रति हितग्राही ₹95,000-₹95,000 की राशि जारी कर दी गई। आरोप था कि यह राशि भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों व रोजगार सहायक की मिलीभगत से बिना निर्माण कार्य के ही अंतरित कर शासन की राशि का गबन किया गया।
जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि दोनों हितग्राही पहले से ही पक्के मकान वाले अपात्र थे। इसके बावजूद उन्हें कुल ₹1,90,000 की राशि जारी की गई। जांच में दोषी पाए गए अधिकारी एवं कर्मचारियों से यह संपूर्ण राशि की वसूली कर ली गई है।
कड़ी कार्रवाई करते हुये सचिव निलंबित, रोजगार सहायक व आवास मित्र की सेवा समाप्त कि गई हैं।
वित्तीय अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है
रोशन साहू, सचिव (मूल प्रभार-ग्राम पंचायत किरकी, अतिरिक्त प्रभार-ग्राम पंचायत रौद्रा), को निलंबित किया गया।
विश्राम साहू, तत्कालीन सचिव, ग्राम पंचायत रौद्रा, जनपद पंचायत साजा, को भी निलंबित किया गया।
भुनेश्वरी साहू, तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत रौद्रा, की सेवा समाप्त की गई।
मीना साहू, आवास मित्र, ग्राम पंचायत रौद्रा, की भी सेवा समाप्ति की कार्यवाही की गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
कलेक्टर शर्मा ने किया कोबिया पोलिंग स्टेशन का आकस्मिक निरीक्षण
बेमेतरा । मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर 2026) के तहत कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी रणबीर शर्मा ने आज कोबिया पोलिंग स्टेशन का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने मतदान केंद्र में संधारित अभिलेखों, दावे-आपत्तियों से संबंधित प्रपत्रों, बीएलओ रिकॉर्ड, नियंत्रण रजिस्टर तथा अन्य व्यवस्थाओं की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर शर्मा ने वार्ड क्रमांक 09 के बूथ नंबर 34 का भी दौरा किया और नाम जोड़ने, हटाने एवं संशोधन संबंधी प्रगति का विस्तार से मूल्यांकन किया। उन्होंने बीएलओ एवं संबंधित पर्यवेक्षकों से सभी लंबित प्रपत्रों के त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण के निर्देश दिए।
कलेक्टर रणबीर शर्मा के स्पष्ट निर्देश :
कलेक्टर ने एसआईआर 2026 की प्रक्रिया को “जनप्रतिनिधित्व की नींव और लोकतांत्रिक शुचिता का अहम चरण” बताते हुए कहा कि हर योग्यता प्राप्त नागरिक का नाम मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक एवं प्रथम बार मतदाता बनने वाले युवाओं को विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाए।
दावे-आपत्तियों का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता से किया जाए, किसी भी प्रकार की त्रुटि तुरंत सुधारी जाए। बीएलओ अपने क्षेत्र का फिजिकल वेरिफिकेशन सतर्कता से करें और बिना सत्यापन के कोई प्रविष्टि स्वीकार न करें। डुप्लीकेट, मृत तथा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने में लापरवाही न हो। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्राप्त प्रपत्रों की अद्यतन स्थिति नियमित रूप से पोर्टल में अपलोड की जाए। मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूर्णतः पारदर्शी, सटीक और समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष निर्वाचन की आधारशिला है। किसी योग्य मतदाता का नाम छूटना अथवा किसी अपात्र व्यक्ति का नाम बने रहना अस्वीकार्य है।
निरीक्षण में मिली जानकारी और सुधारात्मक सुझाव :
निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने कलेक्टर को वर्तमान प्रगति, प्राप्त दावेदृआपत्तियों की संख्या, निस्तारण की स्थिति, बीएलओ द्वारा की गई फील्ड विज़िट तथा पोर्टल अपडेट की जानकारी विस्तार से प्रदान की। कलेक्टर शर्मा ने अधिकांश व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए यह भी निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है, उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि एसआईआर 2026 के सभी मानक समय सीमा में पूर्ण हो सकें। कलेक्टर के इस निरीक्षण से निर्वाचन संबंधी तैयारियों में और तीव्रता आने की संभावना है, जिससे बेमेतरा जिले की मतदाता सूची अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित रूप में तैयार हो सकेगी।
टोकन तुहर हाथ मोबाइल एप बना किसानों का सशक्त सहायक
बेमेतरा । राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने का अभिनव प्रयास “टोकन तुहर हाथ” मोबाइल एप इस वर्ष किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर प्रारंभ हुई धान खरीदी के दौरान किसान अब बिना किसी भीड़-भाड़ और लंबी लाइन में लगे बिना घर बैठे ही अपना टोकन प्राप्त कर रहे हैं। इस डिजिटल सुविधा ने न केवल किसानों का समय बचाया है, बल्कि खरीदी केंद्रों पर होने वाली अव्यवस्था और अनावश्यक दबाव को भी समाप्त कर दिया है।
मोबाइल एप ने बदली तस्वीर : भीड़ और लाइन से पूरी आज़ादी
ग्राम पदुमसरा किसान केशव, दुर्गेश पटेल, तथा ग्राम पदमी के किसान रामनारायण सिन्हा आज धान बेचने हेतु उपार्जन केंद्र पदमी पहुंचे। उन्होंने बताया कि पहले टोकन के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता था, कई बार एक दिन पहले से सेंटर पहुंचना पड़ता था। अब ‘टोकन तुहर हाथ’ एप से 2 मिनट में टोकन कट जाता है और तय समय पर पहुंचने से कोई भी भीड़ नहीं रहती। किसानों ने कहा कि एप के कारण उपार्जन केंद्रों में धक्का-मुक्की, प्रतीक्षा और भीड़ पूरी तरह खत्म हो गई है। अब किसान सीधा निर्धारित समय पर पहुंचकर तौल करवा रहे हैं, जिससे समय, श्रम और धन तीनों की बचत हो रही है।
सरकार की व्यवस्थाएँ बनी अधिक बेहतर, तौल प्रक्रिया तेज :
दुर्गेश पटेल ने बताया कि इस वर्ष खरीदी केंद्रों में की गई व्यवस्थाएँ पिछले वर्षों से अधिक मजबूत और किसान हितैषी हैं। तौल प्रक्रिया अधिक तेज, कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगात्मक, केंद्रों में साफ-सफाई, पेयजल, शेड जैसी सुविधाएँ बेहतर उन्होंने कहा अब खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। टोकन समय का पालन होने से कोई अव्यवस्था नहीं होती। प्रशासन ने किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा है।
किसान सहायता केंद्र बना मददगार :
किसान रामनारायण सिन्हा ने बताया कि यदि एप में कोई दिक्कत आती है या खरीदी से जुड़ा कोई सवाल होता है, तो किसान सहायता केंद्र से तुरंत समाधान मिल जाता है। सहायता केंद्र के कर्मचारी धैर्यपूर्वक मार्गदर्शन करते हैं। इससे हमें तकनीक का उपयोग करने में कोई परेशानी नहीं होती।
किसानों का संदेश-राज्य सरकार और जिला प्रशासन को धन्यवाद :
सभी किसानों ने राज्य शासन और जिला प्रशासन को इस व्यवस्थित, सरल और पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि टोकन तुहर हाथ ऐप ने धान खरीदी को तनावमुक्त, समय बचाने वाला और आसान बना दिया है। यह तकनीक गांव के साधारण किसान को भी डिजिटल सुविधा से जोड़ रही है। ऐसी पहल किसान हित में मील का पत्थर है। इस प्रकार “टोकन तुहर हाथ” मोबाइल एप ने इस वर्ष धान खरीदी प्रणाली में क्रांतिकारी सुधार लाकर किसानों को बड़ी राहत दी है। यह नवाचार न केवल खरीदी व्यवस्था को सुगम बनाता है बल्कि किसानों की तकनीक पहुंच को भी सशक्त बनाता है।
रेत खदानों की ई-नीलामी संपन्न, लॉटरी के माध्यम से अधिमानी बोलीदारों का चयन
बेमेतरा । छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 के अंतर्गत बेमेतरा जिले की बहेरघट एवं डंगनिया (ख) रेत खदानों की ई-नीलामी (रिवर्स ऑक्शन) प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई। जिला बेमेतरा द्वारा ई-निविदा ईवेंट (डंगनिया-ख) के लिए 07 से 13 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त निविदाओं को 14 नवंबर 2025 को दोपहर 12 बजे कलेक्ट्रेट दिशा सभाकक्ष, बेमेतरा में खोला गया।
ई-नीलामी प्रक्रिया में रेत खदान बहेरघट के लिए कुल 18 तथा डंगनिया (ख) के लिए 10 बोलीदारों ने भाग लिया। तकनीकी दस्तावेजों के परीक्षण में बहेरघट हेतु 17 तथा डंगनिया (ख) हेतु 09 बोलीदार पात्र पाए गए, जबकि दोनों खदानों से 01-01 बोलीदार के दस्तावेज अपूर्ण पाए जाने पर उन्हें अपात्र घोषित किया गया। इसके बाद पात्र बोलीदारों की वित्तीय बोलियां खोली गईं, जिसमें सभी ने समान न्यूनतम बोली ₹52.50 (अक्षरी-बावन रुपये पचास पैसे मात्र) लगाई। न्यूनतम बोली राशि एक जैसी होने के कारण नियम 7(4) के अनुसार दोनों खदानों के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाई गई।
लॉटरी परिणाम इस प्रकार रहे
रेत खदान बहेरघट :
प्रतीक सिंह राजपूत, पिता कमलनारायण सिंह राजपूत, निवासी परपोड़ा, तहसील बेरला, जिला बेमेतरा। रेत खदान डंगनिया (ख): विधी नवलानी, पति जयेश कुमार नवलानी, निवासी वार्ड 07, गांधी चौक उत्तर कुरुद, जिला धमतरी। दोनों विजेता बोलीदारों को प्रारूप-03 के तहत अधिमानी बोलीदार घोषित किया गया है तथा उन्हें कार्यपालन प्रतिभूति जमा करने हेतु निर्देशित किया गया है। प्रतिभूति जमा होने के उपरांत संबंधित रेत खदानों के संचालन हेतु माइनिंग प्लान, पर्यावरण स्वीकृति (म्ब्) तथा कार्य अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। बेमेतरा जिले की दोनों रेत खदानों की ई-नीलामी पारदर्शी, नियमों के अनुरूप तथा सफलतापूर्वक पूर्ण हुई।
लोलेसरा के किसान खम्मम वर्मा ने 112.40 क्विंटल धान बेचा
“60 साल में पहली बार इतनी सुगम और बेहतरीन व्यवस्था देखी”
बेमेतरा । छत्तीसगढ़ शासन की किसान हितैषी नीतियाँ, प्रशासन का सुशासन और पारदर्शी व्यवस्थाएँ इस वर्ष धान खरीदी प्रक्रिया में उल्लेखनीय परिणाम दे रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा की गई उत्कृष्ट तैयारियाँ, ऑनलाइन टोकन प्रणाली, गुणवत्तापूर्ण बारदाना, परिवहन एवं भुगतान व्यवस्था ने किसानों को सहज, सुचारू और सुविधाजनक खरीदी का अनुभव प्रदान किया है। कलेक्टर रणवीर शर्मा द्वारा लगातार समितिवार समीक्षा एवं खरीदी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग ने पूरे तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया है। प्रशासन की सक्रियता और समिति प्रबंधकों के सहयोग से जिले में धान खरीदी प्रक्रिया किसानों के लिए बेहद सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बन रही है।
आज खरीदी के चौथे दिन धान उपार्जन केंद्र लोलेसरा में अपनी फसल बेचने पहुंचे किसान खम्मम वर्मा ने कुल 112.40 क्विंटल धान बेचकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 60 साल की उम्र में पहली बार इतनी व्यवस्थित और सुविधाजनक धान विक्रय व्यवस्था देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि पहले टोकन लेने के लिए लंबी कतारों और कई दिनों के इंतजार का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस वर्ष शासन द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन टोकन व्यवस्था किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब किसान घर बैठे मोबाइल से टोकन प्राप्त कर समय और श्रम दोनों की बचत कर पा रहे हैं।
वर्मा ने छत्तीसगढ़ शासन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति परिवार सहित आभार जताते हुए कहा कि इस वर्ष की खरीदी प्रक्रिया वास्तव में किसानों के हितों को प्राथमिकता देने वाली है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले भर के खरीदी केंद्रों में सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया गया है। बारदाना, परिवहन, तौल और भुगतान प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है ताकि सभी किसानों को समय पर और सुगमता से धान विक्रय का लाभ मिल सके।
किसान खम्मम वर्मा ने आगे बताया कि उपार्जन केंद्रों में अच्छी गुणवत्ता के बारदाने उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा अधिकारियों की नियमित उपस्थिति से वातावरण शांतिपूर्ण, अनुशासित और भरोसेमंद बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘टोकन तुहर हाथ’ मोबाइल एप की सुविधा ने खरीदी प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी और किसानों के लिए अत्यधिक उपयोगी बना दिया है। जिला प्रशासन की कड़ी मॉनिटरिंग, सुशासन और किसान-हितैषी पहल के परिणामस्वरूप इस वर्ष बेमेतरा जिले में धान खरीदी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान केंद्रित बनकर उभरी है।