छत्तीसगढ़ / जशपुर
जशपुर में 6-9 नवंबर तक ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ का भव्य आयोजन
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने देश देखा पहुंचकर तैयारी की जानकारी ली
जशपुर, 05 नवम्बर 2025
जशपुर जिले में 6 से 9 नवम्बर तक ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ का आयोजन किया जा रहा है। इस चार दिवसीय आयोजन में जिले के युवाओं के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक भी शामिल होंगे। जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। आज कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार ने देशदेखा पहुंचकर आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पानी, बिजली, सुरक्षा, चिकित्सा, पार्किंग आवागमन, कैंपिंग साइट और ग्राम केरा स्थित होमस्टे का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर जाकर तैयारियों की समीक्षा करें और संभावित कमियों को शीघ्र दूर करें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी साहसिक गतिविधियां सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए संचालित हो, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
चार दिवसीय ‘जशपुर जम्बूरी’ में प्रतिभागियों को रोमांच, कला और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। पहले दिन पंजीयन एवं स्वागत सत्र के बाद आइस-ब्रेकर गेम्स और रचनात्मक आर्ट वर्कशॉप आयोजित होंगे। दोपहर में रॉक क्लाइम्बिंग, ज़िपलाइन, जुमरिंग और रैपलिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियाँ होंगी, जबकि शाम को कल्चरल एंड फन इवनिंग तथा रात में स्टारगेज़िंग सेशन आयोजित किया जाएगा।
दूसरे और तीसरे दिन प्रतिभागियों का मयाली समूह कायाकिंग, पैरामोटर, एटीवी, पेंटबॉल, हॉट एयर बलून जैसी वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आनंद लेगा, वहीं देशदेखा समूह रानीदाह जलप्रपात, सारुडीह चाय बागान और संग्रहालय भ्रमण करेगा। शाम को सरना एथनिक रिज़ॉर्ट में सांस्कृतिक एवं संगीत संध्या का आयोजन होगा। तीसरे दिन दोनों समूह अपने गंतव्य अदल-बदल कर कार्यक्रम में भाग लेंगे। अंतिम दिन 9 नवम्बर को एडवेंचर और आर्ट रोटेशन का फाइनल राउंड तथा क्लोजिंग सेरेमनी का आयोजन होगा। दोपहर में समूह फोटो, फीडबैक सेशन के साथ ‘जशपुर जम्बूरी’ का समापन होगा।
संभाग स्तरीय सरस मेला 2025 में महिला सशक्तिकरण की दिखेगी झलक
जशपुरनगर । जिला प्रशासन जशपुर एवं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त तत्वावधान में संभाग स्तरीय सरस मेला दृ 2025 का आयोजन जशपुर में किया जाएगा। इसका आयोजन 06 से 09 नवम्बर 2025 तक विकासखण्ड कुनकुरी के ग्राम मयाली में किया जाएगा। यह मेला आत्मनिर्भर ग्रामीण महिलाओं के हुनर, कौशल एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
मेला में जशपुर सहित सरगुजा संभाग के समस्त जिलों सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़ -चिरमिरी -भरतपुर से 03 से 05 स्व- सहायता समूह सदस्य शामिल होंगे। लगभग 20 से 30 स्टॉलों के माध्यम से समूहों द्वारा स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, वनोपज आधारित वस्तुएँ तथा पारंपरिक कलाकृतियों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जाएगा। साथ ही, लोकसंस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम मेला की शोभा बढ़ाएँगे। यह मेला ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाने के साथ ही जशपुर जिले की समृद्ध परंपरा, लोककला एवं उद्यमशीलता को एक मंच प्रदान करेगा।
राज्योत्सव समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के 3 दिवसीय जिला स्तरीय समारोह विगत दिवस जिला मुख्यालय जशपुर के रणजीता स्टेडियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर देर शाम तक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। समारोह में आदिवासी लोककला, नृत्य, गीत और प्रेरक नाटक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न विभागों एवं महाविद्यालयों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों ने जशपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले सांस्कृतिक दल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय शामिल हुए। विशिष्ट आतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष जशपुर श्री अरविंद भगत , जनपद अध्यक्ष जशपुर श्री गंगाराम भगत, पूर्व विधायक श्री जागेश्वर भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष जशपुर श्री यशप्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, डीएफओ श्री शशि कुमार, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू, एसडीएम श्री विश्वासराव मस्के, डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के पूर्व अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार राय, पूर्व उपाध्यक्ष नगर पालिका जशपुर श्री राजेश गुप्ता, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी कर्मचारी सहित भारी संख्या में नागरिकगण मौजूद रहे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव के राज्य निर्माण में योगदान को नमन करते हुए कहा कि कुमार साहब ने भी राज्य निर्माण के लिए महत्वपूर्व पहल की थी। उन्होंने कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में जशपुर जिले का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूरदृष्टि और नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ, जिससे इस अंचल के विकास को नई दिशा मिली। उन्होंने स्मरण किया कि उस समय जशपुर जिला शिक्षा और संस्कार का केंद्र था, जहाँ साक्षरता दर सर्वाधिक थी। उन्होंने कहा कि आज जशपुर जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जिले में मेडिकल कॉलेज, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, उद्यानिकी कॉलेज की स्थापना से युवाओं को स्थानीय स्तर पर शिक्षा के अवसर मिलेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि फरसाबहार में सत्य साईं सत्संग ट्रस्ट अस्पताल खुलने जा रहा है, जो लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देगा। कृषि क्षेत्र में नाशपाती, महुआ जैसे उत्पादों को नई पहचान मिली है। महुआ अब केवल शराब का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यंजनों और आर्थिक सशक्तिकरण का साधन बन गया है। उन्होंने कहा कि मधेश्वर पहाड़ जैसे धार्मिक स्थल जिले को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। जशपुर आज हर क्षेत्र में विकास की गाथा लिख रहा है।
आदिवासी विकास विभाग की प्रस्तुतियों से गूंजा मंच :
राज्योत्सव समापन समारोह की शुरुआत आदिवासी विकास विभाग के दलों की पारंपरिक प्रस्तुतियों से हुई। नटकेला, कुनकुरी, मनोरा, बगीचा, जशपुर और ईचकेला के जनजाति कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सुआ, करमा, सरहुल आदि लोकनृत्य और लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। ईचकेला दल द्वारा प्रस्तुत लोकगीत ने वातावरण में लोकसंस्कृति की सुगंध घोल दी, वहीं मनोरा और बगीचा के कलाकारों की तालबद्ध नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों से खूब सराहना पाई।
स्वास्थ्य विभाग का नाटक रहा आकर्षण का केंद्र- स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत सामाजिक संदेश से भरपूर नाटक ने लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। नाटक की प्रभावशाली प्रस्तुति और संवादों ने दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया। नाटक के माध्यम से 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ में सुदृढ़ हुई स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया गया।
महाविद्यालयीन छात्राओं की प्रस्तुतियों में झलकी युवा ऊर्जा :
जिला स्तरीय राज्योत्सव के अंतिम दिन विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। शासकीय रा.भ.रा.एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुर नगर के विद्यार्थियों ने सुवा, कर्मा, सरहुल और छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। शासकीय विजय भूषण सिंह देव कन्या महाविद्यालय, जशपुर नगर तथा शासकीय बाला साहब देशपांडे महाविद्यालय, कुनकुरी के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत किए। ठाकूर शोभा सिंह शासकीय महाविद्यालय एवं अशासकीय गुरुकुल महाविद्यालय, पत्थलगांव के विद्यार्थियों ने अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से समापन समारोह को उत्साहपूर्ण बना दिया।
संस्कृति और परंपरा का हुआ संगम :
कार्यक्रम में कोमल जैन द्वारा स्वरचित छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में भीम सुमन लोक कला मंच जशपुर के सदस्यों द्वारा जशपुर की मिट्टी की महिमा का गुणगान किया गया। सुंदर लोकगीतों के माध्यम से जशपुर की परंपरा और संस्कृति तथा यहां मौजूद मधेश्वर पहाड़, खुड़िया रानी, देशदेखा, कैलाश गुफा एवं अन्य पर्यटन स्थलों का वर्णन किया गया। कार्यक्रम के दौरान दर्शक पारंपरिक गीत-संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए। मंच पर विविधता से भरे प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि जशपुर जिला न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में समृद्ध है बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर में भी अनुपम है।
धान खरीदी से पहले खरीदी केन्द्रों में सभी तैयारियां सुनिश्चित करें : कलेक्टर
जशपुरनगर । कलेक्टर रोहित व्यास ने मंगलवार को साप्ताहिक समय सीमा की बैठक लेकर धान खरीदी की तैयारी की समीक्षा की उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी धान खरीदी केन्द्रों में पानी, बिजली, नए और पुराने बारदाने की व्यवस्था, नमी मापने की मशीन, कांटा बांट, कम्प्यूटर, धान को बारिश से बचाने के लिए कैंप कवर, तराजू बैनर पोस्टर, आदि जरूरी सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सभी चेक पोस्ट पर अधिकारीयों और कर्मचारीयों की ड्यूटी लगाने के लिए भी कहा गया है। इसके साथ ही उड़ीसा और झारखंड सीमा पर भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। ताकि कोचिया और बिचोलिए अवैध धान को न खपा सके सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध धान खपाने की सूचना मिलने पर धान जब्त कर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि धान खरीदी केन्द्रों के सत्यापन के लिए जिन जिन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जानी है। वे मौके पर जाकर सही सत्यापन करेंगे और खरीदी केन्द्रों में जो भी समस्या आ रही होगी उसकी जानकारी जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से देंगे।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को राईस मिलों का भी भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। वन अधिकार पत्र और विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा किसानों का भी प्राथमिकता से धान खरीदने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सभी पात्र किसानों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी राज्य निर्वाचन के अधीन रहते है। और उन्हें निर्वाचन से संबंधित कार्य करना होगा।
कलेक्टर ने साप्ताहिक समय सीमा की बैठक में सभी अधिकारियों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ अधिक से अधिक हितग्राहियों को देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर में जिन अधिकारी, कर्मचारी का खुद का मकान वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
इसके साथ ही निर्माण एजेंसी, प्राइवेट स्कूल ,कालेज, अस्पतालों में भी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने विगत दिवस मुख्यमंत्री जी द्वारा कलेक्टर कान्फ्रेंस लिए गए थे उस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को कलेक्टर कान्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का भली भांति पालन करना है।
स्वास्थ्य केन्द्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है। घर में प्रसव होने वाले माताओं की जानकारी अनिवार्य रूप से देने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान रखें और गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू और सभी एसडीएम, जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
राज्योत्सव : शास्त्रीय नृत्य और बैंड की धुनों ने ऐसा समां बांधा कि लोग झूमने लगे
मलखंभ में छात्रों ने अपने सधे हुए शरीर सौष्ठव और लचीलेपन से दर्शकों को किया आश्चर्यचकित
जशपुरनगर । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव 2025 के तहत 3 नवंबर को रणजीता स्टेडियम में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल थे।
इस अवसर पर कलाकारों और विद्यार्थियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में जहां मनीषा भगत द्वारा प्रस्तुत भरतनाट्यम और सरस्वती कला केंद्र की छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुति कत्थक जैसे शास्त्रीय नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं स्वप्निल बैंड और संदीप शर्मा बैंड की मधुर धुनों ने ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा स्टेडियम तालियों की गूंज और झूमते दर्शकों से भर गया।
कार्यक्रम में भारत की पारंपरिक खेल विधा मलखंभ का शानदार प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वनवासी कल्याण आश्रम के विद्यार्थियों ने अपने सधे हुए शरीर सौष्ठव और लचीलेपन से दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। विद्यालय के 26 छात्रों ने दशरंग, फ्रंटकैच, बगली, तेड़ी, चतुराआसान, एकपाद शिरासन, बैटीकेच, पश्चिमात्सन, हाथ का फारा, पैर का फारा और पिरामिड जैसी कठिन विधाओं का प्रदर्शन कर सभी की वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर विधायक रायमुनी भगत, पद्मश्री जागेश्वर यादव, कृष्ण कुमार राय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, रायगढ़ जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, जिला पंचायत सदस्य शांति भगत, कलेक्टर रोहित व्यास, डीएफओ शशि कुमार, अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू, एसडीएम विश्वास राव मस्के, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी, सुनील गुप्ता, उपेंद्र यादव, शारदा प्रधान सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
कुनकुरी का मयाली नेचर कैम्प बना पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र
जशपुरनगर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में जशपुर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 6 से 9 नवम्बर तक जशपुर जम्बुरी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
मयाली नेचर कैम्प जशपुर में जल क्रीड़ाओं का नया रोमांचक गंतव्य
स्पीड बोटिंग, कयाकिंग, एक्वा साइक्लिंग और बाउंस बोट का भी पर्यटन आनंद उठा पाएंगे
जशपुर की हरी-भरी वादियां जलाशय
हरे-भरे जंगलों, झरनों और पहाड़ियों से घिरे जशपुर जिले का मयाली नेचर पार्क अब रोमांच और जल क्रीड़ा प्रेमियों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन गया है। शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य से भरे इस स्थल में अब एडवेंचर का नया रंग जुड़ चुका है, स्पीड बोटिंग, कयाकिंग, एक्वा साइक्लिंग और बाउंस बोट जैसी गतिविधियाँ यहाँ के पर्यटन अनुभव को और भी यादगार बना रही हैं।
मयाली जलाशय की स्वच्छ और विस्तृत झील अब पर्यटकों को केवल प्रकृति की गोद में सुकून ही नहीं, बल्कि रोमांच का अहसास भी कराती है। सुबह की सुनहरी रोशनी में झील पर फिसलती स्पीड बोट्स जब हवा को चीरती हैं, तो दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। वहीं, कयाकिंग में प्रतिभागी अपनी शक्ति और संतुलन के बल पर पानी की लहरों के बीच आगे बढ़ते हैं, यह अनुभव आत्मविश्वास और एकाग्रता का प्रतीक बन जाता है।
परिवारों और युवाओं के बीच एक्वा साइकिलिंग सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में से एक बन रही है। पानी पर चलती यह विशेष साइकिल रोमांच के साथ-साथ मनोरंजन का बेहतरीन मिश्रण पेश करती है। यह उन लोगों के लिए है जो रोमांच तो चाहते हैं, पर शांति के साथ। वहीं बच्चों और समूह पर्यटकों के लिए बाउंस बोट पूरी तरह मस्ती से भरा अनुभव है, नाव पर हंसी, शोर और उमंग का माहौल पूरे झील क्षेत्र को जीवंत बना देता है।
इन सभी गतिविधियों को सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में संचालित किया जा रहा है। हर प्रतिभागी के लिए लाइफ जैकेट, और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षित गाइड और स्थानीय युवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही है।
जशपुर जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की यह पहल न केवल जिले के प्राकृतिक आकर्षणों को एक नया स्वरूप दे रही है, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज़्म एवं एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
मयाली नेचर पार्क अब केवल एक पिकनिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव स्थल बन चुका है जहाँ प्रकृति, रोमांच और संस्कृति तीनों का सुंदर संगम दिखाई देता है। झील के किनारे से उठती ठंडी हवा, पानी पर चमकती धूप की लहरें और दूर से आती बोट की आवाज़, यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल रचते हैं जो हर पर्यटक के मन में जशपुर की याद हमेशा के लिए बसा देता है।
कुनकुरी क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य को दी मंजूरी
क्षेत्र के किसानों ने जताया आभार......
जशपुर, 31 अक्टूबर 25

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक और बड़ा कदम उठाते हुए जशपुर जिले के विकासखंड कुनकुरी की ईंब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के लिए 37 करोड़ 09 लाख 63 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। इस स्वीकृति से कुनकुरी क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
योजना के पूर्ण होने के बाद 3323 हेक्टेयर के विरुद्ध 1453 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इजाफा होगा। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ईब व्यपवर्तन योजना के जीर्णाेद्धार से कृषि योग्य भूमि की सिंचाई क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा। लंबे समय से मरम्मत की आवश्यकता को लेकर किसान मांग कर रहे थे, जिसे अब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पूरा किया है। कुनकुरी क्षेत्र के किसानों ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया है। उनका कहना है कि इस योजना के पुनर्जीवन से उनकी खेती फिर से सशक्त होगी और अब उन्हें सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हिमालय में गूँजी जशपुर की गूंज: आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया मार्ग
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम
रायपुर, 30 अक्टूबर 2025



छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है।
यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की।
अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की।
अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
“विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है।
यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं।
अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया।
प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे।
यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।”
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
बाढ़ आपदा के लिए कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारियों का सम्पर्क नंबर जारी
जगदलपुर, 30 अक्टूबर 2025
मोंथा तूफान के तहत ऐतिहातन के लिए जिला कार्यालय जगदलपुर में बाढ़ आपदा कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका सम्पर्क नम्बर 07782-222661है। इसके अलावा तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों के नंबर भी जारी किया गया है जिसमें तहसीलदार जगदलपुर श्री राहुल गुप्ता (+91-7389214400), तहसीलदार बस्तर सुश्री जॉली जेम्स (+91-9424291946), तहसीलदार तोकापाल श्रीमती यशोदा केतारप (+91-9424297984), तहसीलदार लोहण्डीगुड़ा श्री कैलाश पोयाम (+91-8770723024), तहसीलदार भानपुरी श्री जीवेश कुमार सोरी (+91-9406422812), तहसीलदार दरभा श्री सुनील कुमार ध्रुव (+91-898218562), प्रभारी तहसीलदार बकावण्ड श्रीमती जागेश्वरी पोयाम (7999626732), प्रभारी तहसीलदार करपावण्ड श्री गौतम गोरे (+91-8962330903) और प्रभारी तहसीलदार बास्तानार श्री पुष्पराज मिश्रा (+91-9179081224) का सम्पर्क नंबर जारी किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने बगिया में जनदर्शन में सुनी आमजनों की समस्याएं
जशपुरनगर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने गृह ग्राम बगिया में जनदर्शन आयोजित कर आम नागरिकों से सीधे संवाद किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, किसान, छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों और समस्याओं के साथ उपस्थित हुए। मुख्यमंत्री ने सभी की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवेदनों का गंभीरता से परीक्षण कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाएं जनता की सुविधा और विकास के लिए हैं, इसलिए प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक इनका लाभ समय पर पहुँचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दें ताकि आमजन को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास भी मौजूद रहे।
जनदर्शन के दौरान प्राप्त कई आवेदनों में तत्काल कार्रवाई करते हुए समाधान किया गया। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कुछ अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और संबंधित विभागों को जनहित के प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने को कहा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दौरान ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि शासन जनता के साथ है और हर समस्या का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।
राज्यस्तरीय पैरा दिव्यांग तैराकी प्रतियोगिता : जिले के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर जीते तीन गोल्ड और दो सिल्वर मैडल
जशपुरनगर । बिलासपुर में मंगलवार को आयोजित 12 वीं छत्तीसगढ़ राज्यस्तरीय पैरा दिव्यांग तैराकी प्रतियोगिता में जिले के तैराकों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन गोल्ड एवं दो सिल्वर मैडल प्राप्त कर जिले को गौरवान्वित किया है। प्रतियोगिता में तैराक सतेंद्र राम ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया और तीन गोल्ड मैडल हासिल किए।
वहीं गोस्वामी पैंकरा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दो सिल्वर मैडल प्राप्त किए। सतेंद्र राम हैदराबाद में 15 नवंबर से 18 नवंबर 2025 तक आयोजित होने वाली राष्ट्रीय दिव्यांग तैराकी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।
प्राकृतिक आपदा में जनहानि के एक मामले में प्रभावित परिजन हेतु 04 लाख की राशि स्वीकृत
जशपुरनगर। कलेक्टर रोहित व्यास ने प्राकृतिक आपदा में जनहानि के एक मामले में प्रभावित परिजन को आर.बी.सी. 6-4 के तहत् 04 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि की स्वीकृत दी है। सन्ना तहसील अंतर्गत ग्राम तोरा निवासी स्व. भुटकुल का कुआं के पानी में डूबने से 17 फरवरी 2024 को मृत्यु हो गई। मृतक के निकटतम वारिस उनके पत्नी रुकमणी बाई हेतु 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
हो जाएं रोमांचक अनुभव के लिए तैयार, देश-विदेश से आएंगे पर्यटक
काउंटडाउन शुरू............... राष्ट्रीय क्षितिज में चमकने को तैयार जशपुर
जशपुर जम्बूरी 6 से 9 नवंबर 2025 तक
स्वरोजगार और पर्यटन को मिलेंगे नए आयाम
जशपुर, 28 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में 6 से 9 नवंबर 2025 तक भव्य जशपुर जम्बूरी का आयोजन होगा। यह महोत्सव जिले की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और एडवेंचर स्पोर्ट्स का शानदार संगम होगा, जो जशपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कहते हैं कि- ‘‘हमारा लक्ष्य है कि जशपुर की प्रकृति और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिले। जशपुर जम्बूरी 2025 न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करेगा, बल्कि पर्यटन, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता को भी नई ऊर्जा देगा। यह आयोजन राज्य के लिए गौरव और विकास दोनों का प्रतीक बनेगा तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर खोलेगा। जशपुर जम्बूरी जैसे आयोजन छत्तीसगढ़ को एडवेंचर टूरिज्म हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। यह सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गर्व का भी उत्सव है‘‘।

जशपुर जम्बूरी केवल एक मनोरंजक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय स्व-सहायता समूहों, युवा कारीगरों, गाइड्स और होमस्टे संचालकों के लिए रोजगार और स्वरोजगार का प्रमुख माध्यम भी है। 2024 में पहली बार आयोजित यह कार्यक्रम पिछले वर्ष लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ और इस बार इसे और विस्तार देने की तैयारी की गई है।

रॉक क्लाइम्बिंग, ज़िपलाइन, ट्रेकिंग जैसे रोमांच सहित जनजातीय इलाकों का अनुभव
जशपुर जम्बूरी 2025 रोमांच, कला और सामुदायिक अनुभवों को और भी समृद्ध करेगा। रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, ज़िपलाइन, ट्रेकिंग, मयाली डैम पर वॉटर स्पोर्ट्स, पैरामोटर और हॉट एयर बलून से मधेश्वर पहाड़ों के दृश्य देखे जा सकेंगे। जनजातीय नृत्य (कर्मा, सरहुल), लोक संगीत, हस्तशिल्प कार्यशालाएँ (मिट्टी, बाँस, गोंदना कला, लकड़ी व लोहे की कारीगरी), लोकनाट्य और स्थानीय व्यंजन का भी अनुभव मिलेगा। पारंपरिक खेल, टीम-बिल्डिंग गतिविधियाँ और तारों भरे आसमान के नीचे अलाव की गर्माहट से लोगों के मन में आनंद की अनुभूति होगी। जशपुर जम्बूरी 2025 का उद्देश्य है प्रतिभागियों को प्रकृति, परंपरा और समुदाय की उस धारा से जोड़ना, जहाँ हर पल एक नई कहानी कहता है।

युवाओं के लिए विशेष : कौशल विकास से लेकर रोजगार तक की संभावनाएं
युवाओं के लिए यह जशपुर जम्बूरी शिक्षा और कौशल विकास का अवसर लेकर आ रहा है। पर्यटन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में युवाओं को वैश्विक मानकों पर प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वे बेहतर रोजगार के अवसर पा सकें। डिजिटल मार्केटिंग और जीआईएस मैपिंग के माध्यम से इलाके की पहुंच बढ़ाई जाएगी, जो आर्थिक विकास में सहायक होगी।
जशपुर में स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा
स्थानीय किसानों और स्व-सहायता समूहों को भी इस महोत्सव से लाभ मिलेगा, जिससे वे अपनी कृषि और पर्यटन संबंधी गतिविधियों को और सशक्त बना सकेंगे। यह उत्सव जिले की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि का भी माध्यम बनेगा। जशपुर जम्बूरी स्थानीय समुदाय, पर्यटकों और निवेशकों को जोड़ने का काम करेगा और युवाओं को स्वरोजगार व रोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान करेगा। जशपुर जंबूरी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत मयाली नेचर कैंप में बोटिंग, कैक्टस गार्डन और टेंट सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। यहाँ के पर्यटक स्थल अब बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित हैं। जशपुर जंबूरी का आयोजन जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के सहयोग से होता है। इसके लिए जशपुर जिला प्रशासन की इन्स्टाग्राम पेज जशपुर जम्बूरी ( jashpurjamboree ) पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
रानीदाह जलप्रपात : छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में छिपा प्रकृति का चमत्कार
जशपुर, 26 अक्टूबर 2025

रानीदाह जलप्रपात का सबसे आकर्षक रूप मानसून के दौरान देखने को मिलता है, जब पानी का बहाव चरम पर होता है और चारों ओर हरियाली व वादियां निखर उठती हैं। एडवेंचर, फोटोग्राफी, और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान अद्भुत अनुभव देता है। यहाँ की स्वच्छ बूंदें, हरियाली भरी घाटियाँ और झरने की गूंज हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देती है।
रानीदाह जलप्रपात छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह झरना घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के मध्य स्थित है और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। बरसात के मौसम में यहाँ का नजारा अत्यंत मनोहारी होता है, झरने की धाराएं विशाल चट्टानों से गिरती हैं और एक विशाल जलकुंड में मिल जाती हैं। आसपास जंगल, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, और ऊँची-नीची पहाड़ियाँ इस जगह को रोमांचक बनाते हैं। यहाँ के माहौल में शांति, ताजगी और हरियाली छायी रहती है, जिससे यह पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों का आदर्श स्थल है।
रानीदाह जलप्रपात से जुड़ी एक रोचक किंवदंती भी है। कहा जाता है कि उड़ीसा की रानी शिरोमणि अपने प्रेमी के साथ भागकर जशपुर आई थीं, जहाँ उन्होंने अपने भाईयों से छिपते हुए इसी झरने के समीप आत्मसमर्पण किया। इसी वजह से इस स्थल का नाम रानीदाह पड़ा। आज भी यहाँ रानी की समाधि और पंचमैया नामक स्थल देखने को मिलता है, जो रानी के पाँच भाईयों को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाता है। जलप्रपात के निकट एक शिव मंदिर भी है, जिससे इसका धार्मिक महत्त्व बढ़ जाता है।
यह जलप्रपात वर्ष पर्यन्त विशेष रूप से जून से फरवरी तक चालू रहता है। जशपुर से आरा मार्ग पर लगभग 18 किमी दूरी और मुख्य सड़क से 5 किमी अंदर की ओर स्थित इस स्थल तक सड़क मार्ग, ट्रेन (रांची व अंबिकापुर रेलवे स्टेशन), और हवाई यात्रा (रांची व रायपुर एयरपोर्ट) से पहुँचा जा सकता है। यहाँ जिला प्रशासन ने व्यू प्वाइंट, सीढ़ियाँ, एवं पिकनिक के लिए सुरक्षित व्यवस्था की है ताकि पर्यटक पूर्ण रूप से प्रकृति का आनंद उठा सकें।
रानीदाह जलप्रपात न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण बिंदु है, बल्कि प्रकृति, इतिहास और रोमांच से भरपूर एक अविस्मरणीय स्थल भी है। यहाँ आकर मनुष्य को प्रकृति के शांत, पवित्र एवं रमणीय स्वरूप का गहरा अहसास होता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के घर का सपना हुआ साकार-श्रीमती महंती बेक
महतारी वंदन और आवास योजना बनीं ग्रामीण महिला की ताकत
जशपुर, 25 अक्टूबर 2025
प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब एवं वंचित आवास विहीन परिवारों को आवास के साथ साथ आधारभूत संरचना की सुविधा उपलब्ध कराना, जिससे उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार हो सके। सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के साथ भागीदारी में किफायती आवास की सुविधा उपलब्ध कराना। ऋण से जुड़ी व्याज सब्सिडी के माध्यम से कमजोर वर्गों के लिए किफायती आवास की सुविधा उपलब्ध कराना। श्रीमती महंती बेक का वर्षों पुराना सपना अब साकार होने की राह पर है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनके पति श्री सुनील के नाम से पक्के मकान की स्वीकृति मिली है, जिसका निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से प्रगतिरत है।
मिट्टी और टिन की झोपड़ी से मिलेगी मुक्ति
जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सन्ना गांव की रहने वाली श्रीमती महंती बेक को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनके पति श्री सुनील के नाम से पक्के मकान की स्वीकृति मिली है, जिसका निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से प्रगतिरत है। मिट्टी और टिन की झोपड़ी में जीवन बिताने वाली महंती बेक अब अपने नए पक्के घर की दीवारें खड़ी होते देख खुश हैं। श्रीमती महंती बेक के वर्षों पुरानी सपना अब साकार होने की राह पर है।
श्रीमती बेक के जीवन में स्थायित्व और सम्मान मिला
महंती बेक बताती हैं कि “हमारा जीवन कठिनाईयों से भरा रहा। मैं और मेरे पति रोज़ मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं। दो छोटे बच्चों की परवरिश के साथ पक्का घर बनाना हमारे लिए एक सपना ही था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने यह सपना पूरा कर दिया।” वे बताती हैं कि इस योजना के तहत उन्हें आर्थिक सहायता मिली, जिससे घर का निर्माण कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ा। सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन में स्थायित्व और सम्मान की भावना दी है।
महतारी वंदन योजना की सहायता राशि से जीवन बना आसान
महंती बेक आगे कहती हैं कि “महतारी वंदन योजना के माध्यम से मुझे एक हजार रूपए प्रतिमाह की सहायता राशि मिलती है, जिससे बच्चों की जरूरतें पूरी करने में बड़ी मदद मिलती है। उज्ज्वला योजना से गैस सिलेंडर मिलने के बाद अब खाना पकाने में आसानी होती है।” महंती बेक कहती हैं - “पहले बरसात में छत टपकती थी, सर्दी में हवा अंदर आती थी, गर्मी में मिट्टी की दीवारें झुलसाती थीं। अब जल्द ही हम अपने नए पक्के घर में रहेंगे। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी की हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने हम गरीबों के लिए घर का सपना साकार किया।”
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय पटल पर उभर रहा है जशपुर
जर्मन मेहमानों को जशपुर की जनजातीय संस्कृति ने किया मंत्रमुग्ध
रायपुर, 25 अक्टूबर 2025

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रेरणा और राज्य सरकार की पर्यटन संवर्धन नीतियों के अंतर्गत जशपुर अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना रहा है। इसकी झलक हाल ही में तब देखने को मिली जब जर्मनी से आए पर्यटक श्री बर्नहार्ड और श्रीमती फ्रांजिस्का जशपुर की जनजातीय संस्कृति, कला और आत्मीयता से गहराई से प्रभावित हुए।


दोनों पर्यटकों ने क्षेत्रीय स्टार्टअप “ट्रिप्पी हिल्स” के अनुभवात्मक पर्यटन कार्यक्रम के तहत जनजातीय जीवन की बारीकियों को समझा। यात्रा की शुरुआत मलार समुदाय से हुई, जो अपने उत्कृष्ट हस्तनिर्मित आभूषणों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इन कारीगरों की रचनात्मकता ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के गांव में उन्होंने पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ गहरे संबंध को महसूस किया। वहीं अगरिया समुदाय के दौरे में लौह गलाने की पारंपरिक तकनीक का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसने दोनों अतिथियों को आश्चर्यचकित कर दिया। यात्रा का समापन स्थानीय हाट-बाजार में हुआ, जहाँ रंगीन वस्त्र, मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक जनजातीय संगीत ने जशपुर की जीवंत सांस्कृतिक धड़कन को अभिव्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि जशपुर की जनजातीय संस्कृति केवल धरोहर नहीं, बल्कि पर्यटन विकास का सशक्त माध्यम भी है। उनके नेतृत्व में जशपुर में सड़क, संचार और सुविधाओं के प्रसार से नए पर्यटन मार्ग तैयार हो रहे हैं। “कल्चर देवी” और “अनएक्सप्लॉरड बस्तर” जैसे संगठनों के सहयोग से स्थानीय समुदायों को भी अपने हुनर को दुनिया के सामने लाने का अवसर मिला है। यह अनूठा सांस्कृतिक अनुभव इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति अब वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन रही है, जहाँ परंपरा, प्रकृति और आधुनिकता का सुंदर संगम नजर आता है।
6 से 9 नवम्बर तक जशपुर में होगा ‘जशपुर जम्बूरी 2025' का आयोजन
छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनेगा ‘जशपुर जम्बूरी 2025’
छत्तीसगढ़ के जशपुर में सजेगा ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ — रोमांच, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत उत्सव
जशपुर, 23 अक्टूबर 2025



छत्तीसगढ़ का पर्वतीय और हरियाली से आच्छादित जिला जशपुर एक बार फिर उत्सव, संस्कृति और रोमांच का केंद्र बनने जा रहा है। यहाँ आगामी 6 से 9 नवम्बर 2025 तक आयोजित होने वाले ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ में प्रदेश और देशभर से पर्यटक प्रकृति की गोद में रोमांचक अनुभवों, जनजातीय परंपराओं और सामुदायिक उत्सव के रंगों का आनंद लेंगे। यह आयोजन प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय परंपराओं और आधुनिक रोमांच का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।
प्रकृति की गोद में चार दिन का उत्सव
जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झरनों, पहाड़ियों और हरे-भरे जंगलों के कारण पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इन चार दिनों में यह जिला उत्साह, उमंग और अनूठे अनुभवों का जीवंत मंच बन जाएगा। देशभर से आने वाले सैलानी यहां रोमांचक खेलों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जनजातीय लोकपर्वों की रंगीन झलक का आनंद लेंगे।
हॉट एयर बलून और पैरामोटरिंग का रोमांच
इस वर्ष का सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा हॉट एयर बलून और पैरामोटरिंग शो, जिसमें प्रतिभागी मधेश्वर पहाड़ियों के ऊपर से उड़ान भरकर जशपुर की भव्यता को नई ऊँचाई से देख सकेंगे। नीले आसमान और हरी वादियों का यह संगम एक अविस्मरणीय अनुभव बनेगा।
कयाकिंग, एटीवी और मोटर बोटिंग से मिलेगा एडवेंचर का आनंद
फेस्टिवल में कयाकिंग, मोटर बोटिंग और एटीवी राइड्स जैसी गतिविधियाँ रोमांच प्रेमियों को अपनी सीमाओं को परखने का अवसर देंगी। झरनों की धारा में कयाकिंग और जंगलों के बीच मिट्टी के रास्तों पर एटीवी चलाने का रोमांच हर आगंतुक के लिए यादगार रहेगा।
फॉरेस्ट ट्रेकिंग और प्राकृतिक अनुभव
प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष फॉरेस्ट ट्रेकिंग ट्रेल्स तैयार की गई हैं। घने पेड़ों के बीच, फूलों की महक और पक्षियों की चहचहाहट में चलना जशपुर की जैव विविधता से गहरा जुड़ाव कराएगा। यह पर्यावरण और पर्यटन के बीच सामंजस्य का प्रतीक है।
खुले आसमान तले स्टार गेज़िंग सेशन्स
रात्रिकालीन आयोजनों में स्टार गेज़िंग सेशन्स विशेष आकर्षण होंगे। तारों से सजे जशपुर के निर्मल आसमान में सैकड़ों नक्षत्रों को निहारने का अनुभव आगंतुकों को अद्भुत शांति और विस्मय का एहसास कराएगा।
लोककला, संगीत और बोनफायर नाइट्स से सजेगा हर शाम का माहौल
हर शाम बोनफायर नाइट्स में जनजातीय लोकनृत्य, संगीत और हँसी से भरी संध्याएँ होंगी। पारंपरिक गीतों की धुन और आग की लपटों के बीच साझा होती मुस्कानें इस आयोजन को आत्मीयता का नया अर्थ देंगी।
फेस्टिवल में स्थानीय व्यंजनों का विशेष स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहेगा। स्थानीय पारंपरिक पकवानों के स्वाद से पर्यटक छत्तीसगढ़ की मिट्टी की असली महक महसूस करेंगे।
‘जशपुर जम्बूरी’ केवल एक पर्यटन आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक आत्मसम्मान का उत्सव भी है। पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला प्रदर्शनी और आदिवासी परिधानों की झलक इस आयोजन को विशिष्ट बनाएगी।
जशपुर प्रशासन और पर्यटन विभाग ने पर्यटकों की सुविधा के लिए ठहरने, खानपान, सुरक्षा और स्वच्छता की संपूर्ण व्यवस्था की है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी बढ़ेगी पहचान
इस आयोजन में देशभर से एडवेंचर प्रेमी, फोटोग्राफर, ट्रैवल ब्लॉगर और इनफ्लुएंसर भाग लेंगे, जिससे जशपुर की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल माध्यमों से और सशक्त होगी।
"हमारा प्रयास है कि जशपुर की प्रकृति और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिले। जशपुर जम्बूरी 2025’ न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रखर करेगा, बल्कि पर्यटन, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता को नई ऊर्जा देगा। यह आयोजन राज्य के लिए गौरव और विकास दोनों का प्रतीक बनेगा। ऐसे आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी पैदा करते हैं। जशपुर के लोग जितने सादगीपूर्ण हैं, उतने ही उत्साही और साहसी भी हैं।
‘जशपुर जम्बूरी’ जैसे आयोजन इस क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर रहे हैं। यह फेस्टिवल छत्तीसगढ़ को ‘एडवेंचर टूरिज्म हब’ के रूप में आगे बढ़ाएगा।" - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय




