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गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को, इस दिन प्रीति, हर्षण व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का अद्भुत संयोग

 गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश के समान माना जाता है - 'गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा'।

HIGHLIGHTS

  1. पूजा का सबसे शुभ समय 29 जुलाई को सुबह 5:41 बजे से 9:05 बजे तक
  2. गुरु पूर्णिमा को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था
  3. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का पहला ज्ञान दिया था

 गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। यह दिन भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। 'गुरु' का अर्थ होता है वह जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाए। गुरु न केवल शिक्षा देते हैं बल्कि जीवन को सही दिशा भी प्रदान करते हैं।

यह दिन विशेष रूप से उन गुरुओं को समर्पित है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और जीवन जीने की कला सिखाई है। गुरु पूर्णिमा को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। भारतीय परंपरा में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है।

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एक प्रसिद्ध श्लोक है, गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः इसका अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं, और वही परम ब्रह्म के समान हैं।

गुरु पूर्णिमा 28 जुलाई को शाम छह बजकर 18 मिनट से होगा। पूर्णिमा तिथि समाप्त 29 रात आठ बजकर पांच मिनट बजे होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त 29 जुलाई को सुबह पांच बजकर 41 मिनट से सुबह नौ बजकर पांच मिनट तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

गुरु पूर्णिमा पर बनेंगे ये शुभ योग

 

गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन प्रीति योग, हर्षण योग और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का अद्भुत संयोग बनता है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को बहुत फलदायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। इस दिन किए गए दान, पूजा-पाठ और गुरु पूजा का कई गुना अधिक शुभ फल मिलता है।

वेद व्यास जयंती मनाई जाएगी इसे व्यास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन महाभारत के रचयिता और चारों वेदों के संकलक महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव ने आदि गुरु के रूप में सप्तऋषियों को योग विज्ञान का पहला ज्ञान दिया था।

पूजा करने की विधि

 

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें, पूजा स्थान को साफ करें, गुरु या भगवान की तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं, फूल और फल अर्पित करें, गुरु मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करें। इस दिन अपने गुरु को वस्त्र, फल या दक्षिणा देना शुभ माना जाता है। वहीं जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत पुण्यदायक होता है। ध्यान और योग करें इसके साथ ही धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें।

 
 

 

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