छत्तीसगढ़ / मुंगेली

बरसात में बेघर हो रहे परिवार, अतिक्रमण कार्रवाई पर उठे मानवीय सवाल कांग्रेस ने सरकार को घेरा, जिला अध्यक्ष घनश्याम वर्मा बोले— संवेदनाओं पर प्रहार बर्दाश्त नहीं

मुंगेली। बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही प्रदेश में अतिक्रमण हटाने, सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के नाम पर चल रही प्रशासनिक कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। कई स्थानों पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के आशियाने उजड़ने से मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इस तरह की कार्रवाई को लेकर आमजन के साथ-साथ राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।


प्रदेश मे धरसीवा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने लोगों को झकझोर कर रख दिया। जिन परिवारों के मकान प्रशासनिक कार्रवाई में ढहाए गए, उनका कसूर केवल इतना था कि उनके घर कथित रूप से शासकीय भूमि पर बने हुए थे। हालांकि इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि भूमि शासकीय थी, तो वर्षों तक वहां आवास निर्माण कैसे होता रहा और संबंधित विभाग तब तक मौन क्यों रहे।

लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून सम्मत हो सकती है, लेकिन उसका समय और तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बरसात के बीच परिवारों को बेघर कर देना सामाजिक और मानवीय दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

इसी तरह का मामला  मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक में भी सामने आया था जहां प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने सिर छिपाने तक की समस्या खड़ी हो गई है।

इस मुद्दे पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में इस प्रकार की कार्रवाई पूरी तरह अमानवीय और निंदनीय है।

घनश्याम वर्मा ने कहा कि सामान्यतः देश में 10 जून से वर्षा ऋतु प्रारंभ मानी जाती है और इसी अवधि में कई निर्माण तथा खनन गतिविधियों पर सीमित या नियंत्रित व्यवस्था लागू रहती है। ऐसे समय में शासन-प्रशासन द्वारा तोड़फोड़ की कार्रवाई करना यह दर्शाता है कि सरकार को आमजन की परेशानियों और जीवन स्थितियों की कितनी चिंता है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, ताकि प्रभावित परिवारों को खुले आसमान के नीचे रात न गुजारनी पड़े। उनके अनुसार, किसी भी विकास कार्य की कीमत गरीबों के आशियाने उजाड़कर नहीं चुकाई जानी चाहिए।

कांग्रेस ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।

फिलहाल यह मुद्दा प्रशासनिक कार्रवाई बनाम मानवीय संवेदनाओं की बहस का केंद्र बन चुका है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि विकास और कानून पालन के बीच मानवीय गरिमा और पुनर्वास को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।

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