जीवित कर्मचारी को सरकारी रिकॉर्ड में बताया मृत, हाई कोर्ट ने निरस्त किया आदेश
बिलासपुर ।
सरकारी तंत्र की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उसकी नौकरी समाप्त कर दी गई। मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरगुजा कमिश्नर के आदेश को निरस्त कर कर्मचारी को राहत दी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
मामला जशपुर जिले के मनोरा तहसील के ग्राम गजमा का है। यहां मरियानुस एक्का ग्राम पंचायत में कोटवार के पद पर कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति को लेकर सुबोध कुमार तिर्की ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला अपील के रूप में सरगुजा कमिश्नर के पास पहुंचा।
18 जून 2018 को कमिश्नर ने यह कहते हुए मरियानुस एक्का की नियुक्ति निरस्त कर दी कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। जबकि मरियानुस एक्का स्वयं अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे और जीवित होने के पर्याप्त प्रमाण भी मौजूद थे।
मामला हाई कोर्ट पहुंचने पर जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने राज्य शासन से जवाब मांगा। जांच के बाद सरकारी अधिवक्ता केशव गुप्ता ने अदालत को बताया कि मरियानुस एक्का जीवित हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने कमिश्नर का आदेश निरस्त कर दिया।
अदालत के इस फैसले ने सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सरकारी दस्तावेजों के सत्यापन और निर्णय प्रक्रिया में बरती जाने वाली सावधानी की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।