छत्तीसगढ़ / रायपुर

श्रम से संवरा नाला, खेतों में आई हरियाली; रोजगार से सिंचाई तक बदली गांव की तस्वीर

 रायपुर । कभी जिस नाले का पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में रुक जाता था, आज उसी नाले का पानी भैयाथान क्षेत्र के खेतों में लहलहाती फसल की कहानी लिख रहा है। बारिश से पहले किए गए नाला सफाई के काम ने न सिर्फ किसानों की सिंचाई की चिंता कम की, बल्कि ग्रामीणों के श्रम को गांव के विकास से जोड़ते हुए आने वाले समय में खेती के नए अवसर भी खोल दिए हैं। खेतों में फैली हरियाली और किसानों के चेहरों पर संतोष, जिला प्रशासन की इस पहल की सफलता को बयां कर रहा है।
सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भैयाथान में कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र सिंह पाटले के निर्देशन में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत बारिश से पूर्व बड़े पैमाने पर नाला सफाई का कार्य कराया गया। नाला साफ होने से बारिश का पानी सुगमता से खेतों तक पहुंचा और किसानों ने इसका उपयोग धान की रोपाई में किया।

पहले झाड़ियों और टूट-फूट के कारण नाले का जल प्रवाह कई जगह बाधित हो जाता था। इस वर्ष जल का रास्ता साफ हुआ तो खेतों तक पानी पहुंचा और खेती आसान हुई। भैयाथान क्षेत्र के किसान श्री संलित कुशवाहा, श्री उमाशंकर, श्री कृष्णा नाविक, श्री संदीप, श्री धनीराम, श्री राकेश, श्री रूप नारायण, श्री मोतीलाल, श्री जय राम, श्री राम नारायण एवं श्री विजेन्द्र सहित कई अन्य किसानों ने नाले के पानी से धान की रोपाई कर इसका लाभ उठाया है। विकसित भारत जी राम जी योजना ने रोजगार के साथ जल-संरक्षण और सिंचाई का आधार तैयार किया है। आज बड़े क्षेत्रफल में लहलहाती फसल जिला प्रशासन की उस सोच को साकार करती नजर आ रही है, जिसमें ग्रामीणों का श्रम सीधे गांव की समृद्धि से जुड़ता है।
रबी फसलों के लिए भी बनेगा सिंचाई का आधार
इस पहल का लाभ केवल मानसून तक सीमित नहीं रहेगा। नाले में संचित पानी का उपयोग किसान रबी फसलों के लिए भी कर सकेंगे। इससे एक ही खेत से दो फसल लेने की संभावना बढ़ेगी और किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। जो नाला रबी फसल के शुरुआती दिनों में ही सूख जाया करता था, वहां अब जल संरक्षण और बेहतर जल प्रवाह के कारण किसानों को रबी सीजन में भी सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। किसान इस पानी का उपयोग गेहूं, सरसों, साग-सब्जी सहित विभिन्न फसलों के उत्पादन में कर सकेंगे। इससे एक ही खेत से दो फसल लेने की संभावना बढ़ेगी और किसानों को खेती से दोहरा लाभ प्राप्त होगा।

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