छत्तीसगढ़ / रायपुर

सेवा की कहानी : एनआरसी का कमाल कोरबा के नन्हें आकाश ने जीती कुपोषण से जंग, चेहरे पर लौटी मुस्कान

 कुपोषण के शिकार बच्चों को समय पर उपचार, पौष्टिक आहार और विशेष देखभाल देकर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर वापस लौटने में मदद कर रहे हैं। पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी और नियमित फॉलोअप किया जाता है। बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर कर उन्हें स्वस्थ जीवन देने में पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) वरदान साबित हो रहे हैं। छत्तीसगढ के कोरबा जिले के कोरबा जिला चिकित्सालय स्थित एनआरसी जीएमसी की बेहतरीन देखरेख और चिकित्सीय सहायता से नवधापारा (मुड़ापार) निवासी श्रीमती राधिका महंत के 18 माह के बेटे आकाश ने कुपोषण को मात देकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाए हैं।

’कमजोरी और बीमारी से थी परेशानी’
श्रीमती राधिका ने बताया कि कुछ समय पहले उनका बेटा आकाश लगातार कमजोर होता जा रहा था। उसका वजन कम होने के साथ उसे बार-बार तेज बुखार आता था, जिससे वह काफी चिड़चिड़ा रहने लगा था। सीमित आर्थिक स्थिति के कारण निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना परिवार के लिए असंभव था। ऐसे में मितानिन और स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता की मदद से उसे जिला चिकित्सालय लाया गया।

’विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ सुधार’
शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह पर राधिका अपने बेटे को एनआरसी जीएमसी कोरबा लेकर पहुंचीं। यहां आकाश को नियमित जांच, दवाइयां और उसकी पोषण जरूरतों के अनुसार पौष्टिक आहार दिया गया। खास बात यह रही कि केंद्र में मां राधिका के रहने और भोजन की भी पूरी तरह निःशुल्क व्यवस्था की गई। निरंतर देखभाल से आकाश का बुखार ठीक हुआ, वजन बढ़ा और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर पहले की तरह हंसने-खेलने लगा।

’मिला आर्थिक संबल’
उपचार और पौष्टिक आहार के साथ-साथ योजना के तहत राधिका को 2,200 रुपये की आर्थिक सहायता राशि भी प्रदान की गई, जिससे इलाज से जुड़े खर्चों की चिंता दूर हुई। इस सफलता से गदगद राधिका महंत ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी अपील की है कि बच्चों के स्वास्थ्य में कमजोरी दिखने पर समय पर एनआरसी की मदद लें।

Leave Your Comment

Click to reload image