छत्तीसगढ़ / रायपुर

सेवा की कहानी : आजीविका डबरी से आत्मनिर्भर हुआ रामभजन का परिवार

 सब्जी उत्पादन से रही 800-900 की साप्ताहिक आय

सब्जी उत्पादन और मछली पालन बना आर्थिक उन्नति का जरिया

रायपुर, 04 अक्टूबर 2026

सब्जी उत्पादन से रही 800-900 की साप्ताहिक आय

सब्जी उत्पादन से रही 800-900 की साप्ताहिक आय

सेवा का संकल्प अब धरात पर दिखने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित आय और संसाधनों की कमी के कारण परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती रही है। ग्रामीण क्षेत्र की इन्हीं परेशानियों को दूर करने विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण योजना की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा की गई। जमीनी स्तर अब इसका फायदा अब  दिखने लगा है। कबीरधाम जिले की जनपद पंचायत बोड़ला के तहत ग्राम पंचायत पोड़ी निवासी रामभजन मिसाल कायम कर रहे हैं।

रामभजन की मांग पर स्वीकृत हुई आजीविका डबरी

रामभजन की मांग पर 1.80 लाख की लागत से विकसित भारत जी राम जी योजना से आजीविका डबरी बनाने में सहायता मिली। रामभजन के पास लगभग 50 डिसमिल भूमि उपलब्ध है जो सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण उपयोग नहीं हो रहा था। डबरी निर्माण से रोजगार के साथ सिंचाई का स्रोत मिल गया। इस कार्य में 1 लाख 66 हजार रुपए का मजदूरी भुगतान हुआ। 697 मानव दिवस रोजगार का सृजन करते हुए हितग्राही रामभजन एवं उसके परिवार सहित अन्य ग्रामीणों को रोजगार मिला। डबरी निर्माण से आसपास के लगभग 1 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ और भू-जल स्तर बढ़ने के साथ हैंडपंप रिचार्ज में सहायता मिली।

आजीविका डबरी के  सकारात्मक परिणाम

वर्षा आधारित खेती और सीमित पानी के कारण कृषि उत्पादन में असर पड़ता था। प्रतिवर्ष लगभग 8,000 से 10,000 तक ही आय प्राप्त होता था। सिंचाई का पर्याप्त साधन उपलब्ध न होने के कारण अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से वंचित रह जाते थे और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। विकसित भारत जी राम जी योजना से निर्मित आजीविका डबरी ने जीवन मे नया मोड़ लाया। डबरी निर्माण से 50 डिसमिल भूमि का उपयोग मत्स्य पालन के लिए हो रहा है। डबरी के मेड़ों पर और सिंचाई का साधन मिलने के कारण सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। वर्षभर जल उपलब्ध रहने से कृषि एवं मत्स्य पालन दोनों से अतिरिक्त आय मिल रहा है।

डबरी बन जाने से बढ़ी कमाई– रामभजन

हितग्राही रामभजन कहते हैं कि बरबट्टी, टमाटर, लौकी, भिंडी, कद्दू, फूल गोभी, गवारफ़ली, केला, करमत्ता भाजी और धनिया की फसल खेत में लगी है। हर सप्ताह घर से कुछ कदम दूर पोड़ी बाजार में सब्जियां विक्रय की जाती हैं। जैविक सब्जियां होने के कारण हाथों हाथ बिक जाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक सप्ताह 800 से  900 की आमदनी हो रही है, वहीं महीने में कम से कम 3500 से 4000 की कमाई हो जाती है। पहले सिंचाई के अभाव में सब्जियों की ऐसी पैदावार नहीं हो पाती थी। अब अपने परिवार की देखभाल पहले से कहीं बेहतर कर पा रहा हूं। रामभजन ने यह भी बताया कि डबरी में मछली पालन भी किया जा रहा है जिससे प्रतिवर्ष लगभग 60,000 से 70,000 तक अतिरिक्त आय प्राप्त होने की उम्मीद है। अब आमदनी पहले की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ गई है।
     
सेवा के संकल्प से बदलती ग्रामीण भारत की तस्वीर

यह कार्य विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण द्वारा जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। डबरी निर्माण से न केवल रोजगार और वर्षभर सिंचाई की सुविधा ग्रामीणों को उपलब्ध है ,बल्कि आसपास के किसानों को भी जल संरक्षण आधारित टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण कर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है। किसानों की आमदनी बढ़ेगी तो गांव की अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ेगी और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना साकार होगा।

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