*पश्चिमी नौसेना कमान पहुंची छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम, आईएनएस चेन्नई की क्षमताओं से हुई रूबरू*
2026-09-25 11:08:22
मुंबई: पुणे और मुंबई के प्रेस टूर पर आई छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की टीम ने मुंबई स्थित भारतीय नौसेना की पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों ने भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता, स्वदेशी युद्धपोत निर्माण, युद्धपोतों के रखरखाव और भारत की समुद्री शक्ति के विकास को करीब से समझा।
दौरे के दौरान पत्रकारों को कोलकाता श्रेणी के गाइडेड मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत आईएनएस चेन्नई का भ्रमण कराया गया। आईएनएस चेन्नई प्रोजेक्ट 15ए के तहत निर्मित तीन युद्धपोतों में तीसरा और अंतिम पोत है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना ने तैयार किया है और इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में किया गया। इसे नवंबर 2016 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
पत्रकारों को युद्धपोत की परिचालन भूमिका, अत्याधुनिक युद्ध प्रणालियों और समुद्री अभियानों के दौरान इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि आधुनिक विध्वंसक युद्धपोत समुद्री निगरानी, वायु रक्षा और सतही युद्ध अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आईएनएस चेन्नई की लंबाई लगभग 163 मीटर है और इसका विस्थापन करीब 7,500 टन है। इसमें चार गैस टर्बाइन इंजन लगे हैं, जो इसे 30 नॉट से अधिक की गति प्रदान करते हैं। युद्धपोत को रडार पर कम दिखाई देने के लिए विशेष स्टील्थ तकनीक के साथ डिजाइन किया गया है तथा इसमें आधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियां मौजूद हैं।
पत्रकारों को समुद्री सुरक्षा तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य और इसके आसपास के समुद्री क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत समझाई गई। पत्रकारों को बताया गया कि इन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा बनाए रखना भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों के बीच समुद्री निगरानी और जहाजों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है, इसकी भी जानकारी दी गई।
दौरे के दौरान पत्रकारों ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड स्थित ड्राई डॉक का भी भ्रमण किया। यहां उन्हें बताया गया कि समुद्र में लंबे समय तक परिचालन के बाद युद्धपोतों के रखरखाव, निरीक्षण, मरम्मत और रिफिट के लिए ड्राई डॉक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ड्राई डॉक में जहाज को पानी से बाहर लाकर उसके उस हिस्से का भी निरीक्षण और रखरखाव किया जाता है, जो सामान्य परिचालन के दौरान हमेशा पानी के भीतर रहता है। इसमें जहाज का अंडरवाटर हुल, प्रोपल्शन सिस्टम तथा पानी के नीचे स्थित अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियां शामिल होती हैं।
पत्रकारों को मुंबई स्थित नौसेना के बड़े ड्राई-डॉकिंग बुनियादी ढांचे की कार्यप्रणाली और इसकी तकनीकी जटिलताओं से भी अवगत कराया गया। इस दौरान उन्हें बताया गया कि बड़े युद्धपोतों और विमानवाहक पोतों के रखरखाव के लिए अत्याधुनिक ड्राई डॉक किस प्रकार महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में काम करते हैं।
मीडिया टीम ने नौसेना पोत संग्रहालय का भी दौरा किया। यहां पत्रकारों को भारत में नौसैनिक पोतों के विकास और भारतीय नौसेना के इतिहास की जानकारी दी गई। संग्रहालय में विभिन्न कालखंडों से संबंधित पोतों, नौसैनिक तकनीक, डिजाइन, हथियार प्रणालियों और समुद्री अभियानों से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं को प्रदर्शित किया गया है। इन प्रदर्शनों के माध्यम से पत्रकारों ने भारत की नौसैनिक क्षमता के क्रमिक विकास और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की यात्रा को समझा।
पश्चिमी नौसेना कमान का यह दौरा पत्रकारों के लिए भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन युद्धपोतों की परिचालन भूमिका से लेकर युद्धपोतों के रखरखाव, ड्राई डॉक की तकनीकी कार्यप्रणाली और भारत की समुद्री शक्ति के ऐतिहासिक विकास को एक साथ समझने का अवसर रहा।
छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम महाराष्ट्र के प्रेस टूर पर है, जिसके दौरान पत्रकारों को देश के महत्वपूर्ण संस्थानों, तकनीकी सुविधाओं और रणनीतिक प्रतिष्ठानों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जा रहा है।
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