कांग्रेस का वोट चोरी का आरोप राक्षस के मुंह से भगवद गीता सुनने जैसा : कुमारस्वामी
बेंगलुरु । केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) के विरोध को लेकर पाखंड का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने खुद इस प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की थी।
कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा कि यह शर्मनाक है कि कांग्रेस पार्टी अब एसआईआर में गड़बड़ियों के खिलाफ बोल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों की भी आलोचना की कि वे कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने के बजाय सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने मांग की कि पुलिस उन कांग्रेस नेताओं के खिलाफ तुरंत केस दर्ज करे, जिन्होंने विरोध-प्रदर्शन करके ट्रैफिक जाम किया और जनता को परेशानी में डाला।
कांग्रेस का 'वोट चोरी' को लेकर बेवजह हंगामा करना वैसा ही है जैसे किसी राक्षस के मुंह से भगवद गीता का उपदेश सुनना। वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शादी हॉल, कम्युनिटी हॉल और घरों जैसी जगहों पर इकट्ठा हुए थे।
उन्होंने कहा कि हमने उन्हें शादी हॉल, कम्युनिटी हॉल, घरों और दूसरी जगहों पर लोगों को ग्रुप में इकट्ठा करते और वोटर लिस्ट में सुधार करवाते देखा है। जनता दल (सेक्युलर) ने इसके खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की थी। बाद में एनडीए गठबंधन के सभी नेताओं ने भी आयोग से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।
कुमारस्वामी ने कहा कि जब शिकायतें दर्ज कराई गई थी, तब सरकार चुप रही थी, लेकिन अब वह एसआईआर में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद, जिन कांग्रेस नेताओं ने खुद गड़बड़ियां की, वे अब बार-बार 'गड़बड़ियों' की बात कर रहे हैं। जब हमने शिकायतें दर्ज कराईं तो सरकार चुप रही और अब बोल रही है। उन्होंने यह ड्रामा तब शुरू किया जब दिल्ली में उनके नेताओं ने उन पर दबाव डाला।
कुमारस्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों से जनता का ध्यान हटाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उठाया है।
उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले उन्होंनेबेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और मुख्यमंत्री व उनके परिवार के सदस्यों पर कंपनी के साथ मिलीभगत करके प्रोजेक्ट की जमीन हासिल करने के कथित आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश किए थे।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि जब इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक रूप से खूब चर्चा हो रही है, तो मुख्यमंत्री ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा सामने रखा है।
गुरुवार को सीएम शिवकुमार ने बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर के बाहर धरना दिया था। उन्होंने मांग की थी कि 'फॉर्म 7' आवेदनों के जरिए योग्य वोटरों के नाम हटाने की कथित साजिश की जांच हो और इस मामले में आपराधिक केस दर्ज किया जाए।