3 देशों को आकाश मिसाइल सिस्टम का सफल एक्सपोर्ट, भारतीय डिफेंस सेक्टर की बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली । प्रोडक्शन अब स्थिर हो गया है। हमारे पास अपनी सेनाओं के लिए भी और ऑर्डर हैं, और मुझे यकीन है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से और भी कई ऑर्डर मिलेंगे। सिंह ने 'आकाश' को भारत के डिफेंस सेक्टर की सफलता की कहानियों में से एक बताया और कहा कि यह सिस्टम देश की अपनी मिसाइल डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के परिपक्व होने को दिखाता है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को बताया कि भारत के अपने बनाए 'आकाश' एयर डिफेंस सिस्टम को तीन देशों - आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान - को सफलतापूर्वक एक्सपोर्ट किया गया है। इससे भारत में बने मिलिट्री इक्विपमेंट की दुनिया भर में बढ़ती मांग का पता चलता है। सिंह ने ANI के साथ एक खास बातचीत में कहा पहला ग्राहक आर्मेनिया था, जिसने कई बैटरी ली हैं। इसके बाद, हमने इसे ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी एक्सपोर्ट किया है। प्रोडक्शन अब स्थिर हो गया है। हमारे पास अपनी सेनाओं के लिए भी और ऑर्डर हैं, और मुझे यकीन है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से और भी कई ऑर्डर मिलेंगे। सिंह ने 'आकाश' को भारत के डिफेंस सेक्टर की सफलता की कहानियों में से एक बताया और कहा कि यह सिस्टम देश की अपनी मिसाइल डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के परिपक्व होने को दिखाता है।
उन्होंने कहा मैं कहूंगा कि 'आकाश' हमारी सफलता की कहानियों में से एक है। यह हमारे अपने मिसाइल डिज़ाइन और प्रोडक्शन सिस्टम के परिपक्व होने को दिखाता है। यह तेज़ रफ़्तार वाले हवाई लक्ष्यों से निपटने में असरदार है। रक्षा सचिव ने कहा कि 'आकाश' सिस्टम का प्रोडक्शन स्थिर हो गया है और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इसकी खरीद जारी है, साथ ही भारत इंटरनेशनल डिफेंस मार्केट में अपनी मौजूदगी भी बढ़ा रहा है।
आकाश का कॉम्बैट परफॉर्मेंस और ऑपरेशनल रिकॉर्ड
मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान आकाश ने काफी ध्यान खींचा, जब भारत को पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा था। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत के लेयर्ड एयर-डिफेंस नेटवर्क के हिस्से के तौर पर आकाश समेत कई स्वदेशी सिस्टम तैनात किए गए थे और ऑपरेशन के दौरान आकाश ने शानदार परफॉर्मेंस दिखाई। DRDO आकाश को कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (short-range surface-to-air missile system) बताता है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। यह सिस्टम भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना दोनों के पास है और इसे युद्ध वाले इलाकों में तैनात किया गया है। सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हवाई खतरों का मुकाबला करने में इस सिस्टम की भूमिका पर भी ज़ोर दिया है और बताया है कि भारत के एयर-डिफेंस रिस्पॉन्स में कई सिस्टम एक साथ काम कर रहे थे। इसके अपग्रेडेड वर्शन, 'आकाश प्राइम' ने सिस्टम की क्षमताओं को और बढ़ाया है। जुलाई 2025 में, लद्दाख में ऊंचाई वाले इलाके में हुए ट्रायल के दौरान आकाश प्राइम ने तेज़ी से उड़ने वाले दो मानवरहित हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया, जिससे 4,500 मीटर से ज़्यादा ऊंचाई पर काम करने की इसकी क्षमता साबित हुई।