आंदोलन व अपराध करने में अंतर होता है
लोकतंत्र में जब कहा जाता है कि आंदोलन करना लोगों का अधिकार है तो कुछ लोगों को यह लगता है कि आंदोलन करने के नाम पर वह कुछ भी कर सकते हैं,करवा सकते हैं। आंदोलन करने के अधिकार को वह अपराध करने का अधिकार समझ लेते हैं और आंदोलन करने के नाम पर अपराध करते भी है और अदालत से उम्मीद करते हैं कि वह उनके आंदोलन करने को दौरान जो कुछ भी किया गया है, उसे आंदोलन ही माने, उसे पुलिस की तरह अपराध न माने। वह मानते हैं कि पुलिस ने उनको पकड़कर गलती की है,पुलिस ने उनके साथ ज्यादती की है, वह कह रहे हैं तो अदालत भी माने कि उनके साथ ज्यादती हुई है और इसीलिए उनको आंदोलनकारी मानकर छोड़ दिया जाए, उनके खिलाफ दर्ज मामले को वापस लिया जाए और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जो भी आंदोलन करता है, वह खुद को पाकसाफ व पुलिस को ज्यादती करने वाला बताता है।ऐसे में अदालत को आंदोलन करने वालों को यह एहसास कराना जरूरी होता है कि पुलिस ने अपराध दर्ज किया है तो इसलिए कि आपने आंदोलन के नाम पर अपराध किया गया है।
यही वजह है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर.मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने और बैरिकेड तोड़ने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं की हिरासत पर सुनवाई के दौरान सौरव दास व आशुतोष रंका को एहसास दिलाने का प्रयास किया कि आपने कुछ तो गलत किया है, इसलिए पुलिस ने आपको पकड़ा है और अदालत ने आपको न्यायिक हिरासत में भेजा है।आपको कानून का पालन करना चाहिए था, आपने नहीं किया। इन नेताओं पर जंतर.मंतर पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश करने का आरोप है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि विरोध प्रदर्शनों के लिए पुलिस की अनुमति लेने का मकसद सिर्फ प्रदर्शनकारियों पर पाबंदी लगाना ही नहीं होता है।यही वजह है कि अदालत ने यह सवाल भी किया कि जब जंतर.मंतर को विरोध.प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाइड कर दिया तो आप गए क्यों।
कोर्ट ने दोनों के जरिए देश के युवाओं व आंदोलन करने वालों को यह संदेश दिया है कि पुलिस जब कहीं पर बेरीकेड लगाती है तो बैरिकेड्स किसी खास मकसद से लगाए जाते हैं। जब आंदोलन करने वाले बैरिकेड तोड़ते हैं तो होता क्या है,जहां जाने से लोगों को रोका जाता है तो वहां लोगों के आने का रास्ता खुल जाता है और वहां और लोगों के आने की संभावना बन जाती है, ऐसे लोग जिन पर आंदोेलनकारियों का नियंत्रण नहीं होता है। फ्रांस में छात्रों के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए हाई कोर्ट ने कहा हम अपने देश के बाहर भी ऐसा ही कुछ देख रहे हैं। जो एक छात्र विरोध के रूप में शुरू हुआ था वह अब आगजनी और लूटपाट में बदल गया है इसीलिए आंदोलन के पहले पुलिस की अनुमति की जरूरत होती है। इसका मकसद किसी को आंदोलन करने से रोकना नहीं होता है, आंदोलन के दौरान दूसरे लोगों को कोई परेशानी न हो, ऐसी व्यवस्था आंदोलन के पहले करना होता है। आंदोलन के दौरान कई लोग अपराध भी कर सकते हैं, पुलिस व्यवस्था आंदोलन के दौरान कोई अपराध न हो ऐसी व्यवस्था करती है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी साफ कर दिया कि जेन जी के नाम पर नेपाल,बांग्लादेश,श्रीलंका में जो कुछ हुआ वह गलत था फ्रांस में जो कुछ हो रहा है वह भी गलत है इसलिए देश में भी जेन जी के नाम पर कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। आंदोलन के अधिकार के नाम पर कहीं भी,कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।सुप्रीम कोर्ट ने संसद मार्च के दौरान छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने को कहा था और मामले सरकार ने वापस भी लिए थे तो देश में कुछ लोगों को लगा कि देश में छात्रों के नाम पर जेन जी के नाम कुछ भी किया जाएगा तो कोर्ट उनके साथ नरमी से पेश आएगी।अदालत ने साफ कर दिया है कि जेन जी के नाम पर देश में कुछ भी न किया जाए,कुछ किया जाएगा तो उसके साथ हमेशा नरमी से पेश नहीं आया जाएगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आंदोलन आंदोलन की तरह किया जाए, आंदोलन के नाम पर अपराध किया जाएगा तो उसे अपराध की तरह लिया जाएगा।
काकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर का आंदोलन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के कारण सफल हो गया तो काजपा के नेताओं को वहम हो गया था वह इस देश में बड़ी राजनीतिक ताकत हो गए हैं, वह जो चाहेंगे वह हो जाएगा। वह जहां चाहेंगे धरना प्रदर्शन करेंगे, उनको कोई रोक नहीं सकता। वह बिना अऩुमति जंतर मंतर पर कई दिनों तक प्रदर्शन कर सकते हैं तो वह जंतर मंतर पर तिरंगा भी फहरा सकते हैं।वह भूल गए कि जब वह बिना अनुमति जंतर मंतर पर धऱना दे रहे थे तो जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जा सकता था और जब वह तिरंगा फहराने गए तो जंतर मंतर पर प्रदर्शन पर रोक लग गई थी यानी अब जंतर मंतर में प्रदर्शन के लिए जाना अपराध हो गया था और सीजेपी के नेताओं ने जंतर मंतर में बिना अनुमति घुसकर अपराध किया तो पुलिस ने तो उनको पकड़कर एहसास दिलाया है कि आपने अपराध किया है, हाईकोर्ट ने एहसास दिला दिया है कि आंदोलन व अपराध में अंतर होता है, इस अंतर को सीजेपी के नेताओं सहित सभी दलों के नेता याद रखें।