देश-विदेश
गर्मी से राहत नहीं , दिल्ली-NCR में पारा पहुंचेगा 47 के पार
नई दिल्ली । उत्तर भारत के कई राज्य भीषण गर्मी की चपेट में हैं। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बढ़ते तापमान के साथ लू भी चल रही है। देश के कई अन्य राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है। इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने फिर से चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। भीषण गर्मी और लू के चलते 11 से 13 जून (मंगलवार से गुरुवार) तक दिल्ली में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
नरेला और नजफगढ़ में तापमान 46 डिग्री के पार
राजधानी दिल्ली में सोमवार को तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। स्थानीय मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार को दिल्ली के नरेला इलाके में सोमवार को 46.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। नजफगढ़ में तापमान 46.3 तक पहुंच गया। बढ़ते तापमान के बीच दिल्ली के कई इलाकों में लगातार दूसरे दिन भी लू (Heatwave) चलने की स्थिति बनी रही।
अभी नहीं मिलने वाली गर्मी से राहत
भीषम गर्मी को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में तीन दिनों के (मंगलवार-गुरुवार) लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कहा कि लोगों को अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। आने वाले दिनों में दिल्ली में तापमान 47 डिग्री तक पहुंच जाएगा। मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में दिन के समय 25 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गर्म हवाए चलेंगी। दिन में लू (Heatwave) चलने के साथ ही आसमान भी साफ रहेगा।
देश के इन हिस्सों में हो रही झमाझम बारिश
बढ़ती गर्मी के बीच दक्षिण भारत के कई राज्यों में मानसून आ चुका है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। इस मानसून का असर कई अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर जिले में हल्की बारिश हुई। तेज हवाओं के साथ हुई बूंदाबांदी से शहर का मौसम अचानक से बदल गया। लोगों को गर्मी से राहत मिल गई।
बिहार में भीषण गर्मी के चलते सरकारी स्कूल 15 जून तक बंद रहेंगे
पटना । बिहार में भीषण गर्मी के बीच राज्य शिक्षा विभाग ने सोमवार को सभी सरकारी स्कूलों को 15 जून तक बंद रखने का आदेश दिया है। शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है, “राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी और आईएमडी द्वारा जारी की गई चेतावनी के मद्देनजर विभाग नेसभी सरकारी स्कूलों को 11 से 15 जून तक बंद रखने का आदेश दिया है।
चूंकि स्कूल बंद रहेंगे, इसलिए शिक्षकों के लिए भी 15 जून तक छुट्टियां घोषित की जाएंगी।” भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि राज्य में अगले तीन से चार दिन तक भीषण गर्मी रहेगी और 14 जून तक उत्तरी व दक्षिणी क्षेत्रों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है।
आईएमडी के पटना केंद्र ने एक बयान में कहा, “14 जून तक राज्य के दक्षिणी और उत्तरी भागों में भीषण गर्मी रहने का अनुमान है।
लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि लंबे समय तक धूप में रहने से गर्मी से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं।” सोमवार को नौ स्थानों पर पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया।
बक्सर और भोजपुर में सबसे अधिक 45.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अन्य स्थान जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, उनमें बक्सर अरवल (45.7), डेहरी (45.6), औरंगाबाद और बिक्रमगंज (45.5 डिग्री प्रत्येक), गया (45.1 डिग्री) और नवादा (44.9 डिग्री) शामिल हैं।
स्टेट टाइगर फोर्स को मिली भारी सफलता
स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश, भोपाल एवं क्षेत्रीय इकाई इंदौर द्वारा 25 मई, 2024 को अनुसूची-IV में सूचीबद्ध दुर्लभ जीवित प्राणी इगुआना (Iguana iguana) एवं एंपरर स्कॉर्पियन (Pandanus imperator) को जप्त कर वन्य-जीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 यथा संशोधित-2022 की धारा-49 एम, 49 क्यू तथा CITES जीवित प्राणी प्रजातियाँ संबंधी नियम-2024 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया था। उक्त प्रकरण में अग्रिम कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना कार्तिक निवासी दिल्ली को 8 जून, 2024 को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय इंदौर के समक्ष पेश कर फॉरेस्ट पुलिस रिमांड पर लिया गया।
उक्त आरोपी की निशानदेही पर प्रदेश के बाहर बुलंदशहर (उ.प्र.) में कार्यवाही करते हुए 9 जून, 2024 को भारी मात्रा में अनुसूची-IV में सूचीबद्ध दुर्लभ जीवित प्राणी प्रजातियों इगुआना, सनकोन्युर, एगापोर्निस बर्ड, किकिनयन-सेण्डबोआ, सवाना लिजार्ट, एंपरर स्कॉर्पियन, टेरन्टोला स्पाइडर एवं अनुसूची-I एवं II में सूचीबद्ध प्रतिबंधित भारतीय वन्य-प्राणी प्रजातियों यलो मोनिटर, ब्लैक काइट, वाटर मोनिटर को जप्त किया गया एवं एक और आरोपी को गिरफ्तार किया तथा गिरोह के पास से 40 से ज्यादा प्राणी प्रजातियों के नमूने जप्त किये गये।
प्रकरण में लिप्त गिरोह द्वारा परिवेश 1.0 एवं परिवेश 2.0 में छद्मरूपण (Impersonation) एकाउंट बनाकर भारी मात्रा में दुर्लभ विदेशी प्राणी प्रजातियों के अवैध व्यापार देश के अलग-अलग राज्यों में बिना किसी पुख्ता दस्तावेजों के किया गया। देश के बाहर अन्य राज्यों में भी कार्रवाई की जा रही है।
वर्तमान में CITES जीवित प्राणी प्रजातियों के संबंध में भारत सरकार पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा जीवित प्राणी प्रजातियाँ (रिपोर्टिंग और रजिस्ट्रीकरण) नियम-2024 लागू किये गये हैं, जिसके अंतर्गत वन्य-जीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 यथा संशोधित-2022 अनुसूची-IV के परिशिष्ट I, II एवं III में दर्ज जीवित प्राणी प्रजातियों का स्वामित्व हस्तांतरण जन्म एवं मृत्यु का पंजीयन PARIVESH PORTAL 2.0 के माध्यम से कराया जाना आवश्यक है, इसके लिये 31 अगस्त, 2024 तक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किये जा सकेंगे। प्रत्येक व्यक्ति, जिनके पास उपरोक्त अनुसार जीवित प्राणी प्रजातियाँ हैं, इस पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीयन अवश्य करें। 31 अगस्त, 2024 के पश्चात जिन व्यक्तियों के पास पंजीयन प्रमाण-पत्र नहीं होगा, उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जायेगी।
आम जन-मानस को यह भी सूचित किया जाता है कि किसी भी साइटिस जीवित प्राणी, जिनका परिवेश 2.0 में रजिस्ट्रीकरण नहीं है, उन्हें न खरीदें। पेटशॉप विक्रेताओं को भी यह निर्देशित किया जाता है कि वह बिना रजिस्टर्ड ऐसे जीवित प्राणी प्रजाति का विक्रय नहीं करेंगे तथा रजिस्ट्रीकरण के उपरांत परिवेश 2.0 के माध्यम से स्थानांतरण/विक्रय किया जाना सुनिश्चित करेंगे। नियम के उल्लंघन में केन्द्र सरकार द्वारा सजा का प्रावधान भी रखा गया है।
ट्रक में घुसी कार, 3 लोगों की माैत, 7 घायल
मेरठ-बुलंदशहर । राष्ट्रीय राजमार्ग पर खरखाैदा थानाक्षेत्र के गांव धानोटा के सामने हाईवे पर भीषण हादसा हुआ. यहां सड़क किनारे खड़े खराब ट्रक में एक इको कार घुस गई. जिसमें कार चालक सहित तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि सात गंभीर रूप से घायल हुए हैं. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तीनों शव मोर्चरी भिजवाए व सभी घायलों को मेरठ मेडिकल में भर्ती कराया है. जानकारी के अनुसार मेरठ-बुलंदशहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव धानोटा के सामने सड़क किनारे एक खराब ट्रक खड़ा था.
मंगलवार तड़के करीब 4:00 पीलीभीत से पंजाब जा रही सवारी से लदी एक कार ट्रक में घुस गई. हादसे में कार का चालक जुनैद (22) पुत्र जमील अहमद निवासी नवाबगंज बरेली, अनिल कश्यप (28) पुत्र मूल चंद कश्यप निवासी लखा खारा थाना गजरौला पीलीभीत, सुनील कश्यप (20) पुत्र मूलचंद कश्यप तीनों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं प्रेमपाल पुत्र दयाराम निवासी लखा खारा, श्यामू मिश्रा पुत्र वेद प्रकाश मिश्रा निवासी लखा खारा, सूरजपाल पुत्र दयाराम पाल निवासी लखा खारा, आनंदपाल पुत्र छोटेलाल निवासी मुरैना थाना देवरिया अनिल पुत्र दिलीप कुमार निवासी सुहादा थाना गजरौला, प्रदीप पुत्र दयाराम निवासी लखा खारा, हरिओम पुत्र मुन्ना लाल निवासी पुरैना थाना देवरिया सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए ।
सूर्य नमस्कार के सामूहिक अभ्यास के विश्व रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट शिक्षा मंत्री को किया भेंट
जयपुर,। सोमवार को सचिवालय में स्कूल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को वर्ल्ड बुक ऑफ लंदन के वाइस प्रेसीडेंट श्री प्रथम भल्ल ने विश्व रिकॉर्ड का सटिफिकेट प्रदान किया। इस अवसर पर शासन सचिव स्कूल शिक्षा कृष्ण कुणाल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा आशीष मोदी सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी सूर्य सप्तमी के अवसर पर राजस्थान के सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में आयोजित सूर्य नमस्कार के सामूहिक अभ्यास कार्यक्रम में विद्यार्थियों सहित 1.33 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी निभाते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
उन्होंने इस आयोजन के सुव्यवस्थित प्रबंधन में सजगता और जिम्मेदारी से भूमिका निभाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की पूरी टीम के प्रयासों की भी सराहना की।
गुण नियंत्रण अभियान में पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों की जांच
जयपुर। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राकेश कुमार पाटनी ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा 15 मई से 30 जून 2024 तक विशेष गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जयपुर जिले के 25 से अधिक निरीक्षकों द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं के साथ-साथ अनाधिकृत कार्य करने वाली पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान बिना वैद्य लाइसेन्स कार्य करने वाली पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों के विरूद्ध कीटनाशी अधिनियम एवं नियमों के तहत कार्यवाही की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सभी उपभोक्ता जो कि घर, कार्यालय, होटल, रेस्टोरेन्ट, बैंक, स्कूल, सरकारी अथवा निजी संस्थानों में पेस्ट कन्ट्रोल का कार्य कराते हैं, को अवगत कराया जाता है कि पेस्ट कंट्रोल का कार्य लाइसेंसधारी व्यक्तियों या एजेन्सी से ही करवायें।
श्री पाटनी ने बताया कि कार्य कराने से पहले उनसे कृषि विभाग से जारी लाइसेंस की प्रति भी आवश्यक रूप से देखे एवं अनाधिकृत कार्य करने वालों के विरूद्ध कार्यालय संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद मे लिखित अथवा दूरभाष 9414377837 पर सूचित करावे। इस संबंध में विभाग द्वारा पेस्ट मैनेजमेंट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान से भी चर्चा कर सहयोग मांगा है।
राज्य स्तरीय इंस्पायर मानक अवार्ड प्रदर्शनी का किया उद्धाटन
जयपुर । शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर में सोमवार को तीन दिवसीय राज्य स्तरीय इंस्पायर मानक अवार्ड प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्धाटन किया। शिक्षा मंत्री ने प्रदर्शनी में सभी स्टालों पर जाकर बाल वैज्ञानिकों द्वारा तैयार मॉडल की कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी लेकर सराहना की।
उद्धाटन समारोह को संबोधित करते हुए दिलावर ने कहा कि नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवायी जायेगी। प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान करते हुए शुभकामनाएं दी।
उन्होंने धरती के बढ़ते तापमान को रोकने के लिए 8 अगस्त को आयोजित होने वाले अमृत पर्यावरण महोत्सव में योगदान देकर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर निदेशक माध्यमिक शिक्षा श्री आशीष मोदी सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कैबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल मंत्रालय का संभाला कार्यभार
दिल्ली । तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी ने सोमवार शाम को अपने मंत्रियों के विभागों का बंटवारा किया। मोदी ने अपने पुराने सिपहसालारों पर भरोसा करते हुए मंत्रिमंडल में किसी बड़े बदलाव से गुरेज किया है। कैबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव पर पीएम ने दूसरी बार भरोसा जताया और उन्हें फिर से रेल मंत्रालय सौंपा दिया। 11 जून यानी आज मंत्री वैष्णव ने रेल मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। वहीं उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का भी काम संभाल लिया है।
जनजाति खेल राष्ट्रीय प्रतियोगिता पहली बार 18 राज्यों के लगभग 5000 एथलीट भाग ले रहे हैं जिसमें....
आर्चरी संघ के अध्यक्ष कैलाश मुरारका ने कहा की 9से 12 जून 2023 कलिंगा यूनिवर्सिटी भुनेश्वर orissa जनजाति खेल राष्ट्रीय प्रतियोगिता पहली बार भारत सरकार 18 राज्यों के लगभग 5000 एथलीट भाग ले रहे हैं जिसमें आज कुबेर सिंह को 30 मीटर में सिल्वर मैडल मिला और ओवर ऑल में 2nd पोजिशन रहा कल मिक्स टीम और अन्य प्रतियोगिता होगी, हमे उम्मीद है 1,2, मैडल छत्तीशगढ और आयेंगे
मुरारका ने कहा की ऐसे खेलों का जो जनजाति वर्ग से आते हैं उनका 5:से 12 जून 2023 को भुनेश्वर में *आयोजित होने जा रहा है छत्तीसगढ़ तीरंदाजी संघ की 10 सदस्य टीम भाग ली है , जनजाति प्रतिभा को पहचानना खोजना और बढ़ावा देना और उनके लिए एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया है प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है इस तरह जनजाति वर्ग के लोगों में खेल को बढ़ावा देने के लिए और उसके बाद उन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए और उनकी शारीरिक क्षमता उठाने की इस प्रकार के आयोजन भारत सरकार के प्रयास से आयोजित किया जा रहे हैं। मुरारका ने कहा की बिलासपुर के बहतराइ में 25 मई चयन ट्रायल हुआ था
पखवाड़े के भीतर लगभग एक दर्जन छोटे-बड़े पुलों के ध्वस्त होने की घटनाएं
बिहार में एक पखवाड़े के भीतर लगभग एक दर्जन छोटे-बड़े पुलों के ध्वस्त होने की घटनाएं हैरान करने के साथ-साथ चिंतित करने वाली हैं। जैसी खबरें हैं, अकेले बुधवार, यानी 3 जुलाई को ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में पांच पुल-पुलिया धराशायी हो गए। इनमें सिवान में छाड़ी नदी पर बने दो पुल शामिल हैं। इससे पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर टर्मिनल-1 पर छत गिरने की घटना से भी हर कोई हैरान है। इस हादसे के कारण अनेक वाहन क्षतिग्रस्त हुए एवं एक व्यक्ति की मौत हो गई और 8 लोग घायल हुए थे। सभी को इस बात की हैरानी हो रही है कि देश के सबसे प्रमुख हवाईअड्डे पर इस तरह का हादसा कैसे हो सकता है? मुंबई में भी घाटकोपर का होर्डिग गिरना 14 लोगों की मौत का कारण बना था। इन पुलों के गिरने एवं अन्य सरकारी निर्माणों के ध्वस्त होने की घटनाओं ने एक बार फिर यही साबित किया है कि निर्माण कार्यों में फैले व्यापक भ्रष्टाचार और शासन तंत्र में बैठे लोगों की मिलीभगत के बीच ईमानदारी, नैतिकता, जिम्मेदारी या संवेदनशीलता जैसी बातों की जगह नहीं है। आज हमारी व्यवस्था चाहे राजनीति की हो, सामाजिक हो, पारिवारिक हो, धार्मिक हो, औद्योगिक हो, शैक्षणिक हो, चरमरा गई है, दोषग्रस्त हो गई है। उसमें दुराग्रही इतना तेज चलते हैं कि ईमानदारी बहुत पीछे रह जाती है। जो सद्प्रयास किए जा रहे हैं, वे निष्फल हो रहे हैं। पुल के गिरने से जितने पैसों की बर्बादी हुई, उसकी भरपाई आखिर किससे कराई जाएगी? बिहार में पुल गिरने की ताजा घटनाएं कोई पहली नहीं है। इससे पहले पिछले साल भर में सात पुलों के ढह जाने की खबरें आईं थी।
जाहिर है, इन पुलों के ढहने एवं गिरने से कई गांवों का आपस में सीधा संपर्क टूट गया है और मानसून के मौसम में उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। बरसात के मौसम में जर्जर ढांचों के गिरने की घटनाएं ज्यादा घटती हैं और इसीलिए सभी राज्यों में स्थानीय प्रशासन मानसून आने से पहले ही उनकी पहचान कर उनका इस्तेमाल प्रतिबंधित कर देता है। मगर पुल कोई रिहाइशी इमारत नहीं, जिसमें चंद परिवार या कुछ लोग रहते हों, और जिसे एहतियातन खाली करा लिया जाए। ये पुल ग्रामीण लोगों के जीवन की अनिवार्यता एवं जीवनरेखाएं हैं। उच्च तकनीक और प्रौद्योगिकी के मौजूदा समय में उच्च लागत के बावजूद छोटी नदियों और नहरों पर बनने वाले पुल भी यदि चंद वर्षों में या बनते ही धराशायी हो जाएं, तो इसको कुदरती कहर का नतीजा नहीं, आपराधिक मानवीय लापरवाही, भ्रष्टाचार एवं सरकारी धन का दुरुपयोग ही मानना चाहिए। बिहार में सिवान की जिस नदी पर दो पुलों के ढहने की घटना घटी है, वह मृत हो चुकी थी और उसे जल-जीवन हरियाली अभियान के तहत पुनर्जीवित किया गया था। निस्संदेह, इसके लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन सराहना के पात्र हैं। आखिर इस नदी के जिंदा होने से हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई को बल मिला है। मगर क्या उसी तंत्र को यह भी नहीं सुनिश्चित करना चाहिए था कि जो पुल जर्जर अवस्था में हैं, उनका विकल्प भी साथ-साथ तैयार किया जाए?
इस तरह बार-बार पुलों का गिरना एवं ध्वस्त होना सरकार में गहरे पैठ चुके भ्रष्टाचार, लापरवाही एवं रिश्वतखोरी को उजागर करता है। आजादी के अमृत-काल में पहुंचने के बाद भी भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, बेईमानी हमारी व्यवस्था में तीव्रता से व्याप्त है, अनेक हादसों एवं जानमाल की हानि के बावजूद भ्रष्ट हो चुकी मोटी चमड़ी पर कोई असर नहीं होता। ये पुल हादसें एवं ध्वस्त होने की घटनाएं बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के चरम पर होने को ही बल देती है। ऐसा नहीं है कि बिहार में ही ऐसे हादसें हो रहे हैं। गुजरात के मोरबी पुल हादसे को लोग अब भी नहीं भूले हैं। इस हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी। सात साल पहले कोलकाता में विवेकानंद पुल के ढहने से 26 लोगों की मौत की घटना भी सबको याद होगी। सिर्फ बिहार में पुलों का यूं ढहते जाना ही चिंता की बात नहीं है, दूसरे तमाम राज्यों से भी चमचम सड़कों पर बनते गड्ढ़ों और नए निर्माण के दरकने की खबरें लगभग रोजाना सुर्खियां बटोर रही हैं। इसलिए बेहतर होगा कि तमाम सार्वजनिक निर्माण में पारदर्शिता, ईमानदारी एवं आधुनिक स्थापित मानकों की गारंटी सुनिश्चित की जाए और इसमें किसी किस्म की कोताही बरतने वाले की जिम्मेदारी तय हो। देश भर में तमाम पुराने पुलों की समीक्षा के साथ-साथ उनके रखरखाव या वैकल्पिक पुल के निर्माण को लेकर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इतना तय है कि ये सभी पुल अगर भरभरा कर गिर रहे हैं तो इनकी डिजाइन गलत होने से लेकर उसमें उपयोग होने वाली सामग्री के घटिया होने का भी साफ संकेत है। लेकिन जिस तरह सरकार इन एवं ऐसे पुलों की गुणवत्ता और जोखिम का अध्ययन करा रही थी, क्या उसके निर्माण के दौरान या उससे पहले डिजाइन सहित उसके हर कसौटी पर बेहतर होने के लिए जांच कराना सुनिश्चित नहीं कर सकती थी? यह तय है कि इन पुलों के निर्माण में व्यापक खामियां थीं और वे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गये। सवाल है कि जब सरकार किसी कंपनी को पुल निर्माण की जिम्मेदारी सौंपती हैं, उससे पहले क्या गुणवत्ता की कसौटी पर पूरी निर्माण योजना, डिजाइन, प्रक्रिया, सामग्री, समय-सीमा और संपूर्णता को सुनिश्चित किया जाना जरूरी समझा जाता?
देश में भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है, विशेषतः राजनीतिक एवं प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने देश के विकास को अवरूद्ध कर रखा है। यही कारण है कि पुल या दूसरे निर्माण-कार्यों के लिए रखे गए बजट का बड़ा हिस्सा कमीशन-रिश्वतखोरी की भेंट चढ़ जाता है। इसका सीधा असर निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ता है। निर्माण घटिया होगा तो फिर उसके धराशायी होने की आशंका भी बनी रहती है। हादसों का एक बड़ा कारण जांच में दोषी और जिम्मेदार ठहराए गए अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का न होना भी है। बिहार, दिल्ली, मुम्बई, गुजरात हादसों के दोषियों को बचाने के प्रयास भी सबके सामने हुए हैं। हर हादसे के बाद लीपापोती के प्रयास खूब होते हैं। हादसे में मरने वालों के परिजनों को मुआवजा बांटकर ही अपनी जिम्मेदारी पूरी समझने वाली सरकारों को इससे आगे बढ़ना होगा। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने की पारदर्शी नीति नियामक केन्द्र बनाने के साथ उस पर अमल भी जरूरी है। विकसित देशों में भी ऐसे हादसे होते हैं, लेकिन अंतर यह है कि भारत में ऐसे हादसों से सबक नहीं लिया जाता। यह प्रवृत्ति दुर्भाग्यपूर्ण है। विडम्बना देखिये कि ऐसे भ्रष्ट शिखरों को बचाने के लिये सरकार कितने सारे झूठ का सहारा लेती है।
हादसों की जांच से काम नहीं चलने वाला। ऐसे निर्माण कार्यों में कमीशन-रिश्वतखोरी रोकने पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि जब ठेकेदार एक बड़ी राशि कमीशन के तौर पर दे देता है, तो फिर वह निर्माण कार्य में भी गुणवत्ता बनाए रखने के प्रति लापरवाह हो जाता है। लापरवाही की परिणति ऐसे हादसों के रूप में सामने आती है। प्रगतिशील कदम उठाने वाले नेतृत्व ने अगर भ्रष्ट व्यवस्था सुधारने में मुक्त मन से सहयोग नहीं दिया तो कहीं हम अपने स्वार्थी उन्माद एवं भ्रष्टता में कोई ऐसा धागा नहीं खींच बैठें, जिससे पूरा कपड़ा ही उधड़ जाए। राजनीति के क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामले में एक-दूसरे के पैरों के नीचे से फट्टा खींचने का अभिनय तो सभी दल एवं नेता करते हैं पर खींचता कोई भी नहीं। रणनीति में सभी अपने को चाणक्य बताने का प्रयास करते हैं पर चन्द्रगुप्त किसी के पास नहीं है। घोटालों और भ्रष्टाचार के लिए हल्ला उनके लिए राजनैतिक मुद्दा होता है, कोई नैतिक आग्रह नहीं। कारण अपने गिरेबार में तो सभी झांकते हैं वहां सभी को अपनी कमीज दागी नजर आती है, फिर भला भ्रष्टाचार से कौन निजात दिरायेगा? ऐसी व्यवस्था कब कायम होगी कि जिसे कोई ”रिश्वत“ छू नहीं सके, जिसको कोई ”सिफारिश“ प्रभावित नहीं कर सके और जिसकी कोई कीमत नहीं लगा सके। ईमानदारी अभिनय करके नहीं बताई जा सकती, उसे जीना पड़ता है कथनी और करनी की समानता के स्तर तक। आवश्यकता है, राजनीति के क्षेत्र में जब हम जन मुखातिब हों तो प्रामाणिकता का बिल्ला हमारे सीने पर हो। उसे घर पर रखकर न आएं। राजनीति के क्षेत्र में हमारा कुर्ता कबीर की चादर हो। तभी इन भ्रष्ट पुलों का भर-भराकर गिरना बन्द होगा।
राजस्थान के राजसमंद जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे
राजसमंद । राजस्थान के राजसमंद जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा उदयपुर-ब्यावर हाईवे पर चारभुजा थाना सर्किल के अंतर्गत मानसिंह का गुढा में हुआ। पहले एक ट्रेलर और पेट्रोल से भरे टैंकर की भिड़ंत हुई, जिसके बाद टैंकर क्रेटा कार पर पलट गया। कार सवार सभी लोग टैंकर के नीचे दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सभी मृतक केलवाड़ा (राजसमंद) के निवासी थे।
हादसे की जानकारी मिलते ही राजसमंद के कलेक्टर डॉ. भंवरलाल और स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए क्रेन मंगवाई और टैंकर को सीधा किया। क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाया गया ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके। टैंकर के नीचे फंसी कार को निकालने के लिए सिविल डिफेंस टीम को भी बुलाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार चालक द्वारा ओवरटेक करने के प्रयास में यह हादसा हुआ। टैंकर और ट्रेलर की भिड़ंत के बाद टैंकर कार पर पलट गया। हादसे के बाद भी टैंकर से पेट्रोल का रिसाव जारी था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
मरने वालों में दीनबंधु (32) पुत्र जगदीश उपाध्याय, पुरुषोत्तम उर्फ पवन उपाध्याय (40), पुत्र जगदीश उपाध्याय, रेणुका उपाध्याय (34) पत्नी पुरुषोत्तम उपाध्याय, मनसुख देवी (68) पत्नी जगदीश उपाध्याय शामिल हैं। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को शोक में डाल दिया है। प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है और मृतकों के परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
बसपा और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) मिलकर हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक साथ लड़ेंगे
चंडीगढ़। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि बसपा और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) मिलकर हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक साथ लड़ेंगे और वहां की जनविरोधी पार्टियों को हराएंगे।
बसपा मुखिया मायावती ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, बहुजन समाज पार्टी व इण्डियन नेशनल लोकदल मिलकर हरियाणा में होने वाले विधानसभा आम चुनाव में वहां की जनविरोधी पार्टियों को हराकर अपने नये गठबंधन की सरकार बनाने के संकल्प के साथ लड़ेंगे, जिसकी घोषणा मेरे पूरे आशीर्वाद के साथ आज चंडीगढ़ में संयुक्त प्रेस वार्ता में की गयी।
उन्होंने आगे लिखा कि इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला तथा बीएसपी के आनन्द कुमार, नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनन्द व पार्टी के राज्य प्रभारी रणधीर बेनीवाल की आज हुई प्रेसवार्ता से पहले दोनों पार्टियों के बीच नई दिल्ली में मेरे निवास पर गठबंधन को लेकर सफल वार्ता हुई।
मायावती ने कहा कि हरियाणा में सर्व समाज-हितैषी जन कल्याणकारी सरकार बनाने के संकल्प के कारण इस गठबंधन में एक-दूसरे को पूरा आदर-सम्मान देकर सीटों आदि के बंटवारे में पूरी एकता व सहमति बन गई है। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह आपसी एकजुटता जन आशीर्वाद से विरोधियों को हरा कर नई सरकार बनाएगी।
ज्ञात हो कि हरियाणा में विधानसभा का चुनाव होना है। हरियाणा विधानसभा इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मिलकर चुनाव लड़ेंगे। दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने राजधानी चंडीगढ़ में गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया।
सांप के 6 बार काटने के बाद भी बच गया युवक, सपने में दी धमकी
फतेहपुर । आपसी दुश्मनी में लोग एक दूसरे को धमकी देते रहते हैं। कोई तैश में आकर दूसरे को 'देख लेने' की धमकी दे देता है। लेकिन कोई सांप किसी को जान से मारने की धमकी दे तो? यह बात किसी को हजम नहीं होगी। लेकिन उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मलवा थाना क्षेत्र के सौरा गांव निवासी युवक का दावा है कि एक सांप ने उसे सपने में आकर धमकी दी है।
युवक का नाम विकास दुबे नाम है और उसे लगभग डेढ़ महीने के अंदर सांप ने छठी बार काट लिया। हालांकि इलाज के बाद विकास इस बार भी ठीक हो गया। इस घटना से विकास के परिजनों के साथ-साथ डॉक्टर भी हैरान हैं। एक तरफ जहां परिजन बड़ी अनहोनी की आशंका से डरे-सहमे हैं तो वहीं पीड़ित के एक दावे ने सभी को चौंका दिया है।
भारत सरकार के प्रमुख परिवार नियोजन कार्यक्रमों में से एक
इस विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के अवसर पर, हम परिवार नियोजन के क्षेत्र में भारत की अविश्वसनीय यात्रा पर गौर करते हैं। हम अपनी सफलताओं का उत्सव मनाते हैं, आशाओं से भरे भविष्य की कामना करते हैं और आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।
भारत का नेतृत्व और प्रगति
जैसा कि मई 2024 में जनसंख्या विकास पर संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीपीडी) के 30वें सम्मेलन में संकल्प व्यक्त किया गया है, भारत ने न केवल आईसीपीडी के एजेंडे को मजबूत नेतृत्व प्रदान किया है बल्कि बेहतर परिवार नियोजन सेवाओं और नाटकीय रूप से बेहतर स्वास्थ्य संबंधी नतीजों, विशेष रूप से मातृ स्वास्थ्य और बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के जरिए जमीनी स्तर पर जबरदस्त प्रगति का प्रदर्शन किया है।
जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के प्रति रवैया
भारत में मिलेनियल महिलाएं छोटे परिवारों को चुन रही हैं। ऐसे प्रत्येक परिवार में औसतन केवल दो बच्चे होते हैं। यह प्रवृत्ति पिछले दशक में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है, जिसके दौरान प्रजनन आयु (15 से 49 वर्ष) की आधी से अधिक महिलाओं (57 प्रतिशत) ने आधुनिक गर्भनिरोधकों का सक्रिय रूप से उपयोग किया है। गर्भनिरोधकों का यह व्यापक उपयोग भारत के परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है। हालांकि, परिवार नियोजन का आशय केवल गर्भनिरोधकों से कहीं आगे है। यह महिलाओं, परिवारों और समुदायों के स्वास्थ्य एवं कल्याण का अभिन्न अंग है। यह महिलाओं, लड़कियों एवं युवाओं को अधिकार और विकल्प प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाता है। 10-24 वर्ष की आयु के 369 मिलियन युवाओं के साथ, भारत एक परिवर्तनकारी जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है और विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए तैयार है।
इसके अलावा, पिछले कुछ दशकों में, इस कार्यक्रम में काफी विकास हुआ है और परिवार नियोजन के विभिन्न तरीकों को अपनाया गया है, जिसमें क्लिनिक-आधारित से लेकर लक्ष्य-उन्मुख तरीके और अब परिवार नियोजन विकल्पों को स्वैच्छिक रूप से अपनाना शामिल है। यह बदलाव आबादी की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए नीतियों को ढालने का प्रतिनिधित्व करता है।
राष्ट्रीय जनसंख्या और स्वास्थ्य संबंधी नीतियां परिवार नियोजन की अधूरी रह गई उस जरूरत को पूरा करने की आवश्यकता पर बल देती हैं, जिसे वैसी महिलाओं के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है जो बच्चे नहीं चाहती हैं या बच्चे को जन्म देने में देरी करना चाहती हैं लेकिन गर्भनिरोधक का कोई भी तरीका नहीं अपना रही हैं। इस कार्यक्रम ने 2012 में प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य (आरएमएनसीएच+ए) दृष्टिकोण के संस्थागतकरण के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, साथ ही परिवार नियोजन 2020 और अब परिवार नियोजन 2030 के माध्यम से परिवार नियोजन पर वैश्विक स्तर पर जोर दिया गया। इसने निरंतर जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देने, सूचना और सेवाओं की सुलभता में सुधार करने, गर्भनिरोधक विकल्पों की सीमा का विस्तार करने, अंतिम छोर तक दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता संबंधी आश्वासन सुनिश्चित करने और उच्च प्रजनन क्षमता वाले क्षेत्रों में नई रणनीतियों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
किसी देश की प्रगति और विकास जनसंख्या के आयामों से जुड़ा हुआ है। भारत पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रजनन क्षमता के प्रतिस्थापन स्तर (टीएफआर 2.0) को प्राप्त कर चुका है और एनएफएचएस-5 (2019-21) के अनुसार 31 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं, जो इसकी यात्रा की सफलता की कहानी है।
इसके साथ-साथ परिवार नियोजन को मातृ एवं शिशु रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने के लिए भी वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है और इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना है, जिसने समग्र नीतिगत उद्देश्यों को व्यापक तरीके से विस्तारित किया है।
भारतीय राज्यों की जनसांख्यिकीय विविधता दुनिया में अनूठी है और परिवार नियोजन की रणनीतियों को इसके अनुरूप ही ढाला गया गया है। सुलभ गर्भनिरोधक विकल्पों की सीमा को व्यापक बनाने के साथ-साथ, यह रणनीति विवाह की आयु, पहले जन्म की आयु और लड़कियों की शैक्षिक प्राप्ति जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण रूप से विचार करती है। ये कारक परिवार नियोजन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं जो राष्ट्र की विविध आवश्यकताओं को पूरा करता है।
मिशन परिवार विकास (एमपीवी): परिवार नियोजन में बदलाव
भारत सरकार के प्रमुख परिवार नियोजन कार्यक्रमों में से एक, मिशन परिवार विकास को 2016 में सात राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम) के उच्च प्रजनन दर वाले 146 जिलों में गर्भनिरोधक और परिवार नियोजन सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था।
यह व्यापक अभियानों के माध्यम से परिवार नियोजन सेवाओं के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण पर आधारित था। इसके तहत, सारथी वाहनों (वाहन के जरिये जागरूकता), युवा महिलाओं के लिए गर्भनिरोधकों तक पहुंच की सुविधा में सामाजिक बाधाओं को दूर करने के लिए सास बहू सम्मेलनों का आयोजन और नवविवाहित जोड़ों को परिवार नियोजन और जिम्मेदार माता-पिता की प्रथाओं के बारे में जागरूक बनाने के लिए नई पहल किट प्रदान करने जैसे विभिन्न कार्यक्रमों को शामिल किया गया था। साथ ही, एक मजबूत परिवार नियोजन लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सूचना प्रणाली का उपयोग करके गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और गर्भनिरोधकों की निर्बाध आपूर्ति के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को तैयार किया गया था।
आधुनिक गर्भनिरोधकों के उपयोग में उल्लेखनीय रूप से सुधार हुआ और कार्यक्रम में शामिल जिलों में इनके उपयोग में तेजी देखी गयी, जो एमपीवी कार्यक्रमों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। एमपीवी जिलों में आधुनिक गर्भनिरोधकों के उपयोग में इन बेहतर परिणामों के कारण सरकार ने 2021 में इस कार्यक्रम को सात राज्यों के सभी जिलों और छह पूर्वोत्तर राज्यों में विस्तार करने का निर्णय लिया।
राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत विकल्पों का विस्तार:
जनसंख्या की बदलती जनसांख्यिकी और जरूरतों के अनुरूप, वित्तीय वर्ष 2016-17 में गर्भनिरोधक विकल्पों का विस्तार किया गया। वर्तमान में, राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम कंडोम, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण, मुंह से ली जाने वाली गोलियां, एमपीए इंजेक्शन समेत विभिन्न प्रकार के प्रतिवर्ती आधुनिक गर्भनिरोधक प्रदान करता है। 10 राज्यों में, जिनमें से प्रत्येक में दो जिले शामिल हैं, उपत्वचीय प्रत्यारोपण और त्चा के नीचे दिया जाने वाला इंजेक्शन (अंतरा-एससी) शुरुआती चरण में हैं, जिसकी आने वाले वर्षों में पूरे भारत में विस्तार की योजना है।
कार्रवाई का आह्वान
हम विश्व जनसंख्या दिवस 2024 मना रहे हैं, जिसका विषय है “मां और बच्चे के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए गर्भावस्था का स्वस्थ समय और अंतराल।” हम अपने राज्य समकक्षों के प्रयासों और हमारे स्वास्थ्य कार्यबल, जिसमें एएनएम, आशा और अन्य जमीनी स्तर के कार्यकर्ता शामिल हैं, के अथक समर्पण को स्वीकार करते हैं, जो महत्वपूर्ण जानकारी और सेवाएं देने में सबसे आगे हैं। दुनिया के युवाओं, किशोरों, महिलाओं और बच्चों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हमारे देश में रहता है, जो हमें जनसांख्यिकीय लाभांश का अनूठा उपहार देता है, साथ ही हमारे लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में निवेश करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है।
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और गर्भनिरोधकों की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच महत्वपूर्ण है। सरकार पहुंच से संबंधित बाधाओं, गर्भनिरोधक विधियों के बारे में गलत धारणाओं, जरूरतमंदों के बीच जागरूकता की कमी, भौगोलिक और आर्थिक चुनौतियों और प्रतिबंधात्मक सामाजिक व सांस्कृतिक मानदंडों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। परिवार नियोजन सेवा अदायगी में सुधार के लिए पर्याप्त निवेश किया जा रहा है, जिसमें अस्थायी और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक विधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, पर्याप्त बजटीय आवंटन और स्वास्थ्य सुविधाओं और सामुदायिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से परिवार नियोजन सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। डिजिटल दुनिया के तेज विकास को देखते हुए, सरकार हमारे विज़न को इससे जोड़ने और प्रसारित करने के अवसर का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सूचना और सेवाओं तक पहुंच के मामले में कोई भी पीछे न छूट जाये।
हमारे परिवार नियोजन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी हितधारकों के सहयोग और समर्पण की आवश्यकता है। गर्भनिरोधक विधियों की सीमा का विस्तार करके हमारे युवाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसके अलावा, भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को सतत विकास, शहरीकरण और प्रवास की जटिलताओं का समाधान करना चाहिए। इन कारकों को हमारी नीतियों में एकीकृत करना यह सुनिश्चित करता है कि जनसांख्यिकीय वृद्धि समाज के सभी वर्गों के लिए एक स्थायी भविष्य और समावेशी समृद्धि के रूप में सामने आये।
सफल लक्ष्य कार्यक्रमों की गूंजती हुई प्रतिध्वनियों का विशिष्ट रणनीतियों के साथ तालमेल होना चाहिए, ताकि आगे के आशाजनक विकास का मार्ग प्रशस्त करने के लिए कमियों को दूर किया जा सके।
इस विश्व जनसंख्या दिवस पर, आइए हम सभी भारत भर के वंचित और कमज़ोर समुदायों पर विशेष ध्यान देने के साथ एक उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य बनाने का संकल्प लें। आइए हम एक ऐसे भविष्य के लिए प्रयास करें, जहां हमारा जनसांख्यिकीय लाभांश पूरी तरह से साकार हो, जहां प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच की सुविधा हो और जहां हमारे लोगों का स्वास्थ्य और कल्याण हमारे राष्ट्र की प्रगति व समृद्धि का आधार हो।
हम सब मिलकर इस विज़न को हकीकत बना सकते हैं।
अमरकंटक एक्सप्रेस में आग लग गई। आग एसी कोच के निचले हिस्से में लगी हादसे के बाद यात्री दहशत में आ गए
भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। अमरकंटक एक्सप्रेस में आग लग गई। आग एसी कोच के निचले हिस्से में लगी। यह हादसा मिसरोद और मंडीदीप स्टेशन के बीच हुआ। हादसे के बाद यात्री दहशत में आ गए। बताया जाता है, यह आग बी-तीन और बी-चार एसी कोच के नीचे लगी थी। उसके बाद फायर इस्टिंग्यूशर से इसे बुझाया गया। आग की घटना के बाद रेलवे ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
बता दें कि ट्रेन में सवार यात्रियों में से किसी एक ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया अकाउंट में अपलोड कर दिया। अमरकंट एक्सप्रेस छत्तीसगढ़ के दुर्ग और मध्यप्रदेश के भोपाल के बीच चलती है। इसके दुर्ग और भोपाल के अलावा 27 अन्य हॉल्ट हैं।
Property Tips: प्लॉट खरीदने वक्त इन बातों का जरूर रखें ख्याल
आपने अपने आस पास ऐसे कई लोगों को देखा होगा जिनको बिना कुछ खास काम किए इतना धन मिल जाता है जिसे देखकर वाकई काफी हैरानी होती है। ये धन या तो आकस्मिक रूप से मिलता है, चाहे वह पैतृक धन हो या फिर अनायास ही किसी का दिया हुआ। इस तरह के धनागमन का एक कारण व्यक्ति का घर भी होता है। कहा जाता है कि धनआगमन का एक स्त्रोत लक्ष्मीवान भूमि भी होती है। घर की भूमि अनेक प्रकार के प्रभावों वाली होती हैं। घर के लिए प्लॉट लेते वक्त इन बातों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।
सालों तक बचत करने और योजना बनाने के बाद आपकी कोशिश यह होनी चाहिए कि आप सही फैसला लें, जिससे बाद में आपको कोई पछतावा ना हो।
हम आपको यहां कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं जिनका ध्यान रखकर आप सही फैसला ले सकते हैं। घर खरीदने में आपकी बचत के साथ होम लोन के रूप में भी काफी रकम निवेश की जाती है, इस हिसाब से आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
नया घर या फ्लैट खरीदते वक्त आपको इलाके की लोकेशन, फ्लैट या घर के पजेशन की तारीख और कारपेट एवं कवर्ड एरिया जैसी कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
प्रॉपर्टी की कीमत :- आस-पास के इलाके में मौजूद प्रॉपर्टी से अपनी संपत्ति की तुलना करें। इससे आपको पता लग जायेगा कि बिल्डर ने आपको सही कीमत बताई है या नहीं। अब ऐसे बहुत से साधन हैं जिनसे आप संपत्ति कीमत की तुलना कर सकते हैं। प्रॉपर्टी की ऑनलाइन साईट, इलाके के प्रॉपर्टी डीलर और न्यूजपेपर में छपने वाले विज्ञापन से आप उस इलाके में संपत्ति की कीमत का अनुमान लगा सकते हैं।
लैंड रिकॉर्ड :- जिस जमीन पर आपका मकान बना है, वह बहुत महत्वपूर्ण है। आपको उस जमीन की मिट्टी के बारे में पता होना चाहिए। इसके साथ ही वजह जमीन हर तरह के सरकारी बकाये से मुक्त होनी चाहिए और रजिस्टर्ड होनी चाहिए। घर खरीदने से पहले आपको टाइटल डीड जरूर देखना चाहिए और उसे वेरीफाय करना चाहिए। इस डीड में जमीन के मालिकाना हक आदि के बारे में विस्तृत जानकारी होती है।
प्रॉपर्टी की कानूनी जानकारी :- आपको प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस जमीन पर यह बनी है, वह कानूनी झंझट से मुक्त हो। आप यह पता करें कि क्या डेवलपर को सभी मंजूरी मिल गयी है? इसमें रजिस्ट्रार, इलाके की डेवलपमेंट अथॉरिटी, जल आपूर्ति, विद्युत् बोर्ड और नगर निगम आदि शामिल हैं। अगर आप होम लोन लेकर यह प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो इस बात की जानकारी लोन देने वाला बैंक अपने स्तर से खुद ही चेक कर लेता है।
फ्लैट का लोकेशन :- चूंकि संपत्ति खरीदना लंबी अवधि का निवेश है, इस हिसाब से आपको प्रॉपर्टी के लोकेशन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इलाके में मौजूद सुविधाएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और जरूरी सेवा तक पहुंच कुछ ऐसी चीज है जिसका बहुत ध्यान रखा जाना चाहिए। आप इन सब चीजों पर ध्यान देंगे तो रहने से हिसाब से आपको सुकून मिलेगा। आपका फ्लैट सुरक्षित इलाके में भी होना चाहिए जिससे आप और आपका परिवार सुरक्षित रहे।
पजेशन की तारीख :- दिल्ली-एनसीआर या देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी खरीदते वक्त आपको पजेशन की तारीख का भी ध्यान रखने की जरूरत है। अब बिल्डर आम तौर पर पजेशन में काफी देर लगा रहे हैं। एक बायर के रूप में आपको पजेशन देने में देरी होने पर मुआवजे की रकम के बारे में एग्रीमेंट में दिए क्लॉज पर ध्यान देना चाहिए। आम तौर पर बिल्डर आपसे छह महीने का ग्रेस पीरियड मांग सकता है, लेकिन उसके लिए भी वैध कारण होना चाहिए।
बिल्डर-बायर एग्रीमेंट :- जब आप किसी बिल्डर से फ्लैट खरीदने जाते हैं और आप टोकन अमाउंट देकर फ्लैट बुक करते हैं तो आपको एक अलॉटमेंट लेटर मिलता है। उसके बाद अगर आप बैंक से लोन के लिए आवेदन करते हैं तो एक त्रिपक्षीय समझौता होता है। आपको इसे पढ़कर समझना चाहिए। अगर आपको कोई चीज समझ नहीं आ रही तो आपको बैंक या बिल्डर से उसे क्लियर करना चाहिए।
अतिरिक्त और छुपे हुए चार्ज :- आप प्रॉपर्टी खरीदने से संबंधित सभी चीज ध्यान से देखें। आपके लेट पेमेंट पर कितना जुर्माना लगता है और बिल्डर के लेट पजेशन देने पर कितनी पेनाल्टी है, सबका ध्यान रखें। अगर आपको समय पर फ्लैट नहीं मिलता तो बिल्डर हर महीने आपको एक तय रकम पेनाल्टी के रूप में देता है। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी, होम लोन की प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्री कराने का खर्च, समेत बाकी खर्च के बारे में आपको पहले से ही जानकारी ले लेनी चाहिए।
CG – फेसबुक का प्यार शादी में बदला, घर वाले नहीं थे राजी तो CM से लगाई गुहार…
कोरिया। जिले में प्रेम प्रसंग का अनोखा मामला सामने आया है। जहां लड़का लड़की के घर वाले नहीं माने तो दोनों ने प्रदेश के मुखिया और सरगुजा SI से गुहार लगाई। इसके बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा और उनकी शादी करवाई।
मामला कोरिया जिले के पाटन थाना क्षेत्र के महर छिदिंया गांव का है। जहां की रहने वाली मनीषा कुशवाहा का प्रेम प्रसंग सूरजपुर के शैलेंद्र से चल रहा था। दोनों के बीच फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। दोनों दिन-दिनभर बातचीत करते थे। धीरे-धीरे ये दोस्ती प्रेम प्रसंग में बदल गई। दोनों ने साथ में जीने-मरने की कसम खाई और शादी करने का फैसला कर लिया।
इसके बाद दोनों ने अपने रिश्ते के बारे में अपने अपने घर में बताया। पहले तो लड़की के घर वाले शादी के लिए मान गए लेकिन बाद में बिना पूछेलड़की की शादी कहीं और तय कर दी।जब लड़की ने घरवालों को मना किया, फिर भी वहीं नहीं माने, उल्टा उसे ही रोकने लगे।
मनीषा ने बताया- ‘जब घरवालों ने सहमति नहीं दी, तब मैंने फैसला किया कि मैं इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और IG से करूंगी। मनीषा ने ऐसा ही किया और अपनी पूरी बात प्रशासन के पास रखी। इसके बाद पटना थाना प्रभारी सौरभ द्विवेदी व महिला संरक्षण अधिकारी मनीषा के घर पहुंचे और पूरे मामले में जांच की।
यह भी पढ़ें – Valentine Week में प्रेमिका से मिलने घर गया था प्रेमी, और फिर खत्म हो गई लव स्टोरी….
जांच के बाद पुलिस और प्रशासन ने लड़की के घरवालों को समझाया। तब जाकर वह राजी हुए और उन्होंने शादी का लिए हां कर दिया। इसके बाद गुरुवार को दोनों की शादी प्रशासन के सामने धूमधाम से हुई है।