देश-विदेश
राजस्थान में उद्घाटन से पहले ही बह गई नई बनी सड़क, 6 महीने पहले हुई थी तैयार
राजस्थान।झुंझुनूं जिले में उदयपुरवाटी क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में रविवार रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई।
बारिश के चलझुंझुनूं जिले में उदयपुरवाटी क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में रविवार रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई। बारिश के चलते काटली नदी के तट क्षेत्र में आए तेज बहाव में करोड़ों की लागत से बनी एक नवनिर्मित सड़क उद्घाटन से पहले ही बह गई।
बाघोली से नीमकाथाना को जोड़ने वाली यह सड़क महज छह महीने पहले ही बनकर तैयार हुई थी, लेकिन अब इसका संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
NH-52 से जोड़ने वाली सड़कस्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क बाघोली को NH-52 से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग थी, जिसका सपना वे वर्षों से देख रहे थे।
हालांकि, पहली ही बारिश ने उनके इस सपने को तोड़ दिया। तेज बहाव के कारण सड़क दो हिस्सों में बंट गई है और उसकी तस्वीर धुंधली हो गई है।
PWD और ठेकेदार जिम्मेदार? ग्रामीणों ने इस बड़ी क्षति के लिए सीधे तौर पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया, जिसकी पोल पहली ही मूसलाधार बारिश ने खोल दी।
नई सड़क की बदहाली का वीडियो वायरलघटना के बाद मौके पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने सड़क की बदहाली के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए, जो अब तेजी से वायरल हो रहे हैं। काटली नदी के बाघोली क्षेत्र में तेज बहाव ने सड़क के अलावा कई छोटे एनीकट और खेतों को भी जलमग्न कर दिया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
गुजरात में हुआ बड़ा हादसा, वडोदरा-आणंद को जोड़ने वाला पुल टूटा, नदी में गिरी कई गाड़ियां
गुजरात । एक बड़ा हादसा देखने को मिला है। यहां वडोदरा के पादरा और आणंद जिलों को जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना 45 साल पुराना पुल आज सुबह ढह गया।
इस कारण वहां हड़कंप मच गया। इस घटना में पुल के ऊपर से गुजर रहे दो ट्रक, एक बोलेरो और एक जीप समेत चार वाहन माही नदी में गिर गए। पुल के टूटने की वजह से एक टैंकर अब भी पुल पर लटका हुआ है। इस घटना में अबतक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग इस हादसे में घायल हुए हैं।
बता दें कि जब यह हादसा हुआ तो मुजपुर समेत आसपास के गांवों के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। इसके साथ ही पादरा पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और कार्रवाई शुरू की।
घटनास्थल पर पहुंची प्रशासन की टीम
बता दें कि इस पुल को पादरा-गंभीरा पुल के नाम से भी जाना जाता है। इस पुल के ढहने की जानकारी जैसे ही मुजपुर गांव के लोगों को मिली, तो लोग राहत बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए। इसके बाद माही नदी में गिरे वाहनों से तीन लोगों को रेस्क्यू किया गया।
हालांकि, इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई है। घटना के तुरंत बाद 108 एंबुलेंस को इसकी सूचना दी गई। बता दें कि घटनास्थल पर प्रशासन की टीम मौजूद है और नदी में गिरे वाहनों को निकालने का काम शुरू हो गया है। साथ ही माही नदी में तैराकों ने भी अपना काम शुरू कर दिया है।
लापरवाही का आरोप
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इस हादसे कि लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि दशकों पुराने पुल की मरम्मत के लिए बार-बार अनुरोध किया गया, लेकिन प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चेतावनियों के बावजूद, अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण पुल ढह गया और कई लोग हताहत हुए। उन्होंने बताया कि वडोदरा और आणंद के बीच एक प्रमुख मार्ग गंभीर पुल पिछले कुछ वर्षों में काफी जर्जर हो चुका था और अब भारी यातायात के लिए यह पुल उपयुक्त नहीं था।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन
राजस्थान । केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाउ लाल वैष्णव का निधन हो गया है। जोधपुर AIIMS में उनका इलाज चल रहा था। जोधपुर AIIMS की तरफ से ही उनके निधन की जानकारी दी गई है।
दरअसल, जोधपुर AIIMS में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का इलाज चल रहा था। अस्पताल की तरफ से ही उनके निधन की जानकारी दी गई है। आज सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर दाउ लाल वैष्णव के निधन की जानकारी जोधपुर AIIMS के द्वारा दी गई। जोधपुर AIIMS ने एक विज्ञप्ति में बताया, "यह अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि रेल मंत्री के पिता दाउ लाल वैष्णव जी का आज दिनांक 08 जुलाई 2025 को पूर्वाह्न 11:52 बजे AIIMS जोधपुर में निधन हो गया।"
जोधपुर AIIMS की विज्ञप्ति में आगे बताया, "वह पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और AIIMS जोधपुर में उपचाराधीन थे। चिकित्सा टीम के हरसंभव प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। AIIMS जोधपुर परिवार दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करता है एवं शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
मनमोहन सामल फिर बने ओडिशा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष
नई दिल्ली । भाजपा ने मनमोहन सामल को ओडिशा प्रदेश इकाई का फिर से अध्यक्ष नियुक्त किया है। इससे पहले सोमवार को ओडिशा इकाई के अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया था। इस पर नामांकन करने वाले वे एकमात्र उम्मीदवार थे। भाजपा के केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक संजय जायसवाल ने पार्टी के राज्य मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सामल की इस पद पर पुनर्नियुक्ति की घोषणा की।
इससे पहले सोमवार को मनमोहन सामल ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक संजय जायसवाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में ओडिशा भाजपा चुनाव अधिकारी और सांसद प्रताप सारंगी के समक्ष इस पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले एकमात्र नेता थे। सामल के अलावा कई अन्य नेताओं ने भी भाजपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
2024 में पार्टी की जीत में निभाई थी बड़ी भूमिका
उनके नेतृत्व में 2024 में ओडिशा विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल (बीजद) को हराया था। वहीं ओडिशा में भाजपा ने राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से 20 पर जीत हासिल की और राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल कर राज्य में सरकार बनाई।
कैबिनेट ने युवा आयोग के गठन समेत 43 प्रस्तावों पर लगाई मुहर
पटना । सीएम नीतीश की अध्यक्षता में मंगलवार सुबह 10.30 से शुरू हुई एक घंटे तक चली। बैठक में 43 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई। इसमें सबसे प्रमुख प्रस्ताव बिहार के युवाओं के लिए है। जिस पर सीएम नीतीश कुमार ने अपनी स्वीकृति दे दी है। यानी अब बिहार में युवा आयोग का गठन किया जाएगा। सीएम नीतीश ने इसका खुद ही एलान किया। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के एक और महत्वपूर्व प्रस्ताव पर सीएम नीतीश कुमार ने मुहर लगा दी।
इसके तहत अब बिहार की सभी सरकार सेवाओं में हर स्तर पर सभी प्रकार की मदों पर सीधी नियुक्तियों में राज्य की मूल निवासी महिला अभ्यर्थियों को ही 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। यानी बाहर के राज्य की महिला को बिहार में 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ का नहीं मिलेगा। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण योजना संबल अंतर्गत राज्य के पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग एवं सामान्य वर्ग के पुरुष दिव्यांग अभ्यर्थियों को राज्य के सदृश्य सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत कोई आर्थिक सहयोग देय नहीं होगा। बिहार सरकार की ओर से बताया गया कि प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार की तैयारी के लिए पचास हजार और एक लाख रुपये की राशि दिव्यांगजनों दी जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है।
22 हजार में 'संतान की गारंटी' बना मौत का सौदा...
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से अंधविश्वास और क्रूरता की शर्मनाक घटना सामने आई है। कंधरापुर थाना क्षेत्र के पहलवानपुर गांव में झाड़फूंक के नाम पर एक महिला की मौत हो गई। महिला के परिजनों और ग्रामीणों ने गुस्से में आकर तांत्रिक चंदू के घर के बाहर बने मंदिर पर शव रखकर हंगामा किया।
22 हजार में 'संतान की गारंटी', मौत का सौदा निकला
35 वर्षीय अनुराधा यादव, जो संतान न होने की चिंता से झुझ रही थी, पिछले एक महीने से अपने मायके में रह रही थी। इसी दौरान परिवार ने गांव के कथित तांत्रिक चंदू की बातों में आकर झाड़फूंक कराने का फैसला किया। चंदू ने 22 हजार रुपये में संतान की “गारंटी” दी थी।
रविवार रात झाड़फूंक के दौरान उसने अनुराधा को न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि गला दबाया और नाबदान का गंदा पानी पिलाया। जब महिला की हालत बिगड़ गई तो वह उसे ऑटो में जिला अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
महिला की मौत के बाद तांत्रिक खुद कंधरापुर थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं गांव में आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को चंदू द्वारा बनाए गए मंदिर के बाहर रखकर रातभर प्रदर्शन किया। उन्होंने तांत्रिक और उसके साथियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
रातभर पुलिस शव को कब्जे में नहीं ले सकी। अंततः सोमवार सुबह कलेक्टर व पुलिस अफसरों की समझाइश के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
काली मंदिर से शुरू हुआ अंधविश्वास का धंधा
ग्रामीणों के अनुसार, चंदू कई वर्षों से तंत्र-मंत्र करता आ रहा है। उसने अपने घर के पास मां काली का भव्य मंदिर और अपनी मृत बहन का मंदिर भी बनवाया था। चंदू खुद को साधु और सिद्ध पुरुष बताकर लोगों से 20 हजार से 1 लाख तक की रकम वसूल करता था।
क्या कहते हैं ग्रामीण और परिवार वाले
पीड़िता के भाई सुधीर यादव ने बताया: “हमने कई बार मना किया था, लेकिन तांत्रिक ने हमें भरोसा दिलाया कि वो बहन को संतान दे सकता है। आज बहन की लाश घर पड़ी है और वो मंदिर बनाकर बैठा है।”
पुलिस ने तांत्रिक को किया गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस ने तांत्रिक चंदू को हिरासत में लेकर हत्या और धोखाधड़ी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, और अन्य कथित सहयोगियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
यह घटना न सिर्फ अंधविश्वास की अंधी गली का आईना है, बल्कि सिस्टम को यह सोचने पर मजबूर करती है कि शिक्षा और विज्ञान के इस युग में भी 'संतान' के नाम पर महिलाओं की जान ली जा रही है — और समाज चुप है।
बागेश्वर धाम में फिर हादसा: धर्मशाला की दीवार गिरने से महिला की मौत
10 से ज्यादा लोग घायल
छतरपुर । मध्यप्रदेश में छतरपुर जिले के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम में मंगलवार तड़के एक धर्मशाला की दीवार गिरने से बड़ा हादसा हो गया। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी 40 वर्षीय अनीता देवी की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि 10 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। घायलों को एम्बुलेंस से छतरपुर जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। सभी की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
श्रद्धालुओं के परिजनों ने बताया कि सभी लोग धर्मशाला में सो रहे थे, तभी अचानक दीवार भरभराकर गिर पड़ी और वे मलबे में दब गए। हादसे में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के अदलाहट गांव की रहने वाली अनीता देवी, पत्नी राजू की मौत हो गई है। कई लोग दीवार के मलबे में दब गए। 10 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि दीवार गिरने के कारणों की जांच की जा रही है।
छतरपुर सीएमएचओ आरपी गुप्ता का कहना है कि सुबह भारी बारिश के कारण बागेश्वर धाम में एक ढाबे पर दीवार ढह गई। इसके मलबे में दबने से कुछ श्रद्धालु घायल हुए हैं। एक की मौत की जानकारी भी सामने आई है। घायलों को समुचित इलाज कराया जा रहा है।
4 को ग्वालियर किया रैफर
ग्राम गढ़ा में स्थित बागेश्वर धाम में अत्यधिक बारिश होने एवं प्राकृतिक आपदा से अचानक घटित हादसे में उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं के घायल होने पर तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती कराया गया। सिविल सर्जन ने बताया कि चार लोगों की हालत नाजुक होने पर प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल ग्वालियर मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस के माध्यम रैफर किया गया है।
साथ ही पांच लोगों का उपचार किया जा रहा है, जिनकी हालत स्थिर है और तीन लोगों को मामूली चोटे आने पर उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया है। घटना के तत्काल बाद मौके पर एसडीएम सहित जिला प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। साथ ही जिला अस्पताल में घायलों के बेहतर उपचार की जानकारी ली। जिला प्रशासन के निर्देशन में अत्यधिक बारिश होने पर उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदा में फंसे होने से बचाव या सहायता के लिए जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। जिसका नंबर 07682-245376 है। किसी भी घटना की तत्काल जानकारी एवं सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है।
पहले भी हुआ था हादसा
बता दें कि कुछ दिनों पहले भी धाम में हादसा हो चुका है। 3 जुलाई को भी बागेश्वर धाम परिसर में टेंट गिरने से एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी और 8 लोग घायल हुए थे। टेंट में लगा लोहे का एंगल श्यामलाल कौशल (50) के सिर पर गिर गया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
हिमाचल में अलर्ट; दिल्ली-UP से MP तक भारी बारिशv
नई दिल्ली। आज का मौसम (सोमवार, 7 जुलाई) को कैसा रहेगा। दिल्ली-NCR और उत्तराखंड में बारिश का यलो अलर्ट है।
हिमाचल में भारी बरसात का अलर्ट है। बादल फटने और लैंडस्लाइड का भी खतरा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित 20 से ज्यादा प्रदेशों में तेज बारिश की संभावना है। बिजली भी गिर सकती है।
हिमाचल में हाहाकार
हिमाचल में 19 बार बादल फटने की घटनाएं हुईं। बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 82 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य में 269 सड़कें बंद हैं।
मौसम विभाग ने सोमवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। कल (8 जुलाई) भी 4 जिले ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में यलो अलर्ट है।
इन प्रदेशें में बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और तेलंगाना में बारिश का अलर्ट जारी किया है।
गगनयात्री शुभांशु ने इसरो प्रमुख को लगाया फ़ोन, इस यात्रा के लिए कहा धन्यवाद
नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष यात्री (गगनयात्री) शुभांशु शुक्ला, जो इस समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद हैं, ने इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के अध्यक्ष वी. नारायणन को फोन कर अपनी अंतरिक्ष यात्रा के लिए उनके और पूरी इसरो टीम के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि, शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत आईएसएस पहुंचे हैं।
6 जुलाई को हुई थी बातचीत
इसरो ने बताया कि यह फोन कॉल 6 जुलाई की दोपहर को हुआ था। इस बातचीत में इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने शुभांशु शुक्ला का हालचाल पूछा और यह जानना चाहा कि अंतरिक्ष स्टेशन पर कौन-कौन से वैज्ञानिक प्रयोग और गतिविधियां चल रही हैं। इसरो प्रमुख ने यह भी कहा कि पृथ्वी पर लौटने के बाद शुभांशु शुक्ला को सभी प्रयोगों और अनुभवों को विस्तार से दस्तावेज के रूप में तैयार करना चाहिए, ताकि भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकें।
क्या है गगनयान का मिशन?
इसरो ने बताया कि गगनयान मिशन का उद्देश्य भारत की यह क्षमता साबित करना है कि वह अपने दम पर इंसानों को लो-अर्थ ऑर्बिट (पृथ्वी की निचली कक्षा) में भेज सकता है। शुक्ला का यह मिशन इसरो और अमेरिकी कंपनी एक्सिओम स्पेस के सहयोग से संभव हुआ है।
इसरो के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी की बात
इस फोन कॉल के दौरान इसरो के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे, जिसमें (1) डॉ. उन्नीकृष्णन नायर, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के निदेशक और मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रोग्राम मैनेजमेंट काउंसिल के चेयरमैन; (2) एम. मोहन, लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) के निदेशक; (3) पद्मकुमार ई. एस., इसरो इनर्शियल सिस्टम यूनिट (आईआईएसयू) के निदेशक; (4) एम. गणेश पिल्लई, (5) इसरो के वैज्ञानिक सचिव और एलपीएससी के पूर्व निदेशक एन. वेदाचलम भी शामिल रहे।
शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में चल रहे प्रयोग की दी जानकारी
इसरो प्रमुख वी. नारायणन से बातचीत के दौरान शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष स्टेशन पर चल रहे तमाम प्रयोगों की प्रगति की जानकारी भी साझा की और बताया कि वे किन वैज्ञानिक लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं और किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
भारत में पहली बार होगी डिजिटल जनगणना: मोबाइल ऐप, पोर्टल से दर्ज होंगी जानकारियां
नई दिल्ली । देश में जनगणना अब पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी। केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि 2026 में शुरू होने वाली जनगणना भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें लोग खुद भी मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
जनगणना की नई दिशा: डिजिटल भारत की ओर
अब तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर कागज पर विवरण इकट्ठा करते थे, लेकिन अब सरकार इस प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऐप-बेस्ड बना रही है। इससे न केवल डाटा संग्रह तेज और पारदर्शी होगा, बल्कि यह सीधे सुरक्षित रूप से केंद्रीय सर्वर तक पहुंचेगा।
जनता खुद भर सकेगी विवरण
जनगणना दो चरणों में होगी:
हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस – 1 अप्रैल 2026 से
पॉपुलेशन एनुमरेशन – 1 फरवरी 2027 से
इन दोनों चरणों में नागरिक स्वेच्छा से अपनी जानकारी खुद भी दर्ज कर सकेंगे।
इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना
यह आजादी के बाद भारत की 8वीं और कुल 16वीं जनगणना होगी, लेकिन पहली बार जनता को अपनी जानकारी सीधे दर्ज करने का विकल्प मिलेगा। इससे भागीदारी, पारदर्शिता और सटीकता तीनों को बढ़ावा मिलेगा।
34 लाख कर्मचारी होंगे तैनात, तीन स्तरों की ट्रेनिंग
इस विशाल प्रक्रिया के लिए सरकार 34 लाख कर्मचारियों को नियुक्त करेगी। इन्हें तीन स्तरों पर प्रशिक्षित किया जाएगा –
राष्ट्रीय ट्रेनर
मास्टर ट्रेनर
फील्ड ट्रेनर
हर क्षेत्र को छोटे-छोटे ब्लॉकों में बांटा जाएगा और हर घर तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
सीमा बदलाव की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2025
सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अगर वे अपने जिले, तहसील या थाना सीमाओं में कोई बदलाव करना चाहते हैं, तो 31 दिसंबर 2025 तक कर लें। इसके बाद कोई भी बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा, और उसी आधार पर जनगणना होगी।
जनगणना 2026-27 न सिर्फ आंकड़ों का काम है, बल्कि यह डिजिटल भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो देश की नीतियों, योजनाओं और संसाधन आवंटन की नींव तय करेगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण का मामला, 10 को सुनवाई
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि वह निर्वाचन आयोग के इस कदम की वैधता पर निर्धारित तिथि को विचार करेगा।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की आंशिक कार्य दिवस (पीडब्ल्यूडी) पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के नेतृत्व में कई याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत दलीलों को संज्ञान में लेते हुए गुरुवार (10 जुलाई) को मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई। सिब्बल ने पीठ से आग्रह किया कि वह इन याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करे। इस पर न्यायमूर्ति धूलिया ने कहा, हम इस मामले को गुरुवार को सुनेंगे।
मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में राजद सांसद मनोज झा, एडीआर और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने याचिका दायर की है। मनोज झा ने चुनाव आयोग के उस निर्णय को अदालत में खारिज करने की मांग की है, जिसमें आयोग ने बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है। राजद का कहना है कि विधानसभा चुनाव के ठीक कुछ महीने पहले इस तरह की प्रक्रिया चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
मनोज झा ने कहा कि निर्वाचन आयोग का 24 जून का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार), अनुच्छेद 325 (जाति, धर्म और लिंग के आधार पर किसी को भी मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जा सकता) और अनुच्छेद 326 (18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका प्रत्येक भारतीय नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के योग्य है) का उल्लंघन करता है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।
वहीं महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा कि वह निर्वाचन आयोग के 24 जून के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध करती हैं, जिसके तहत संविधान के विभिन्न प्रावधानों का कथित उल्लंघन करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जा रहा है।
महुआ ने अपनी याचिका में कहा, अगर इस आदेश को रद्द नहीं किया गया, तो यह देश में बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकता है, जिससे लोकतंत्र, स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कमजोर हो सकते हैं। महुआ ने शीर्ष अदालत से भारत निर्वाचन आयोग को देश के अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण के इस तरह के आदेश जारी करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ भी एक याचिका दायर कर चुका है, जिसमें बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश को चुनौती दी गई है। चुनाव आयोग ने 24 जून को बिहार में एसआईआर करने के निर्देश जारी किए थे, जिसका उद्देश्य अपात्र नामों को हटाना और यह सुनिश्चित करना था कि केवल पात्र नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों। बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
कवाई थर्मल पॉवर प्लांट के विस्तरण की जनसुनवाई सफलतापूर्वक सम्पन्न
कवाई थर्मल पॉवर प्लांट के विस्तरण की जनसुनवाई सफलतापूर्वक सम्पन्न
मस्क के अमेरिका पार्टी बनाने के ऐलान से ट्रंप खफा
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्व सहयोगी और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क पर तीखा हमला किया है। ट्रंप ने मस्क को 'पटरी से उतरी ट्रेन' बताया है। मस्क ने हाल ही में 'अमेरिका पार्टी' नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की है, जिससे ट्रंप नाखुश हैं। ट्रंप ने 'ट्रुथ' पर लिखा, मुझे एलन मस्क को पूरी तरह से पटरी से उतरते देखकर दुख हुआ, जो पिछले पांच हफ्तों में ट्रेन के मलबे के रूप में तब्दील हो गए हैं। वह एक तीसरी राजनीतिक पार्टी भी शुरू करना चाहते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका में कभी सफल नहीं हुए हैं। ऐसा लगता है कि सिस्टम उनके लिए डिजाइन नहीं किया गया है।
उन्होंने आगे कहा, तीसरी पार्टियां सिर्फ 'पूर्ण व्यवधान और अराजकता' की ओर ले जाती हैं और वाशिंगटन में कट्टरपंथी वामपंथी डेमोक्रेट्स के साथ यह सब बहुत हो चुका है, जिन्होंने अपना आत्मविश्वास और अपना दिमाग खो दिया है। दूसरी ओर, रिपब्लिकन एक अच्छी तरह से चलने वाली 'मशीन' हैं, जिन्होंने अभी-अभी इस तरह का सबसे बड़ा बिल पारित किया है।
ट्रंप ने हाल ही में 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' पर हस्ताक्षर करते हुए उसे एक नया कानून बनया है। इसे ट्रंप ने एक 'महान विधेयक' बताया है। ट्रंप ने आगे कहा, मस्क इसलिए नाखुश हैं, क्योंकि इस बिल ने 'इलेक्ट्रिक व्हीकल मैंडेट' को खत्म कर दिया है, जो सभी को कम समय में इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए मजबूर कर देता।
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वह शुरू से ही इसका कड़ा विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को अब जो कुछ भी चाहिए वह खरीदने की अनुमति है- गैसोलीन संचालित, हाइब्रिड (जो बहुत अच्छा कर रहे हैं), या नई तकनीकों से लैस। अब इलेक्ट्रिक व्हीकल बाध्य नहीं हैं।
अमेरिकी नेता ने कहा, मैंने दो साल तक इस पर अभियान चलाया है। ईमानदारी से कहूं, तो जब एलन ने मुझे अपना पूर्ण और निर्विवाद समर्थन दिया, तो मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्हें पता है कि मैं इलेक्ट्रिक व्हीकल मैंडेट को खत्म करने जा रहा हूं। यह मेरे हर भाषण और हर बातचीत में था। मस्क ने कहा कि उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है, जिससे मैं बहुत है
बाजार नियामक के पास सभी प्रकार की धोखाधड़ी और हेराफेरी के खिलाफ कार्रवाई करने की ताकत
मुंबई । सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को कहा कि हमें नए नियमों की नहीं, बल्कि अधिक प्रवर्तन और निगरानी की आवश्यकता है। पांडे की ओर से यह बयान ऐसे समय पर दिया गया है, जब जेन स्ट्रीट मामला सामने आने के बाद नए नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मीडिया से बातचीत करते हुए जेन स्ट्रीट मामले पर बोलते हुए सेबी चीफ ने कहा, बाजार नियामक के पास सभी प्रकार की धोखाधड़ी और हेराफेरी के खिलाफ कार्रवाई करने की ताकत है और हमारा अंतरिम आदेश इसकी गवाही दे रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जेन स्ट्रीट के लिए जारी किए गए आदेश में काफी विश्लेषणात्मक कार्य किया गया था, हालांकि धोखाधड़ी वाली गतिविधियां कई तरीकों से की जाती हैं।
पांडे ने कहा, हेरफेर करने वाले व्यवहारों को अलग-अलग खिलाड़ियों द्वारा अलग-अलग तरीकों से समझा जा सकता है। ऐसा कोई एक खास तरीका नहीं है जिससे आपको आकलन करना पड़े... हमारे पीएफयूटीपी विनियमों में बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि बाजार में हेरफेर करने वाले और धोखाधड़ी वाले व्यवहारों की अनुमति नहीं है और विनियमों के अंतर्गत सेबी के पास जांच करने और कार्रवाई करने की सभी शक्तियां हैं।
सेबी चेयरमैन ने आगे कहा कि नियामक और एक्सचेंज इस मामले को निगरानी मुद्दे के रूप में देख रहे हैं। सेबी ने जेन स्ट्रीट पर आरोप लगाया गया है कि उसने नियमों के खिलाफ जाकर गलत रणनीतियों के इस्तेमाल से इंडेक्स ऑप्शंस में 43,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुनाफा कमाया है। सेबी के अनुसार, जेन स्ट्रीट और इसकी संबंधित संस्थाओं ने बैंक निफ्टी सूचकांक को आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ाने और घटाने के लिए एक इंट्रा-डे ट्रेडिंग रणनीति तैयार की।
बाजार नियामक ने पाया कि 1 जनवरी, 2023 और 31 मार्च, 2025 के बीच, जेन स्ट्रीट और उसकी संस्थाओं ने 43,289 करोड़ रुपए का चौंका देने वाला मुनाफा कमाया, जो मुख्य रूप से बैंक निफ्टी ऑप्शन से था।
4 दिन में अमरनाथ यात्रा पहुंचे 70 हजार से अधिक श्रद्धालु
श्रीनगर । अमरनाथ यात्रा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। पिछले चार दिनों में 70 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा की, जबकि 8,605 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था सोमवार को कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों के अनुसार, तीन जुलाई से शुरू अमरनाथ यात्रा के बाद से अब तक करीब 70 हजार लोगों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इनमें से 21,512 यात्रियों ने रविवार को दर्शन किए। इसके अलावा, 8,605 यात्रियों का एक और जत्था सोमवार को दो सुरक्षा काफिलों में जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि पहला काफिला 3,486 श्रद्धालुओं को लेकर उत्तर कश्मीर के बालटाल बेस कैंप जा रहा है, जबकि दूसरा काफिला 5,119 श्रद्धालुओं को लेकर दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप जा रहा है। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने बताया कि जम्मू में भगवती नगर यात्री निवास में आने वाले यात्रियों के अलावा, कई श्रद्धालु यात्रा में शामिल होने के लिए मौके पर पंजीकरण के लिए सीधे बालटाल और नुनवान (पहलगाम) पहुंच रहे हैं।
सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत को बढ़ाने के लिए सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियां लाई गई हैं। पूरे मार्ग को सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। इस साल की अमरनाथ यात्रा में स्थानीय लोगों ने पूरा सहयोग दिया है, जैसा वे पहले भी करते रहे हैं। पहलगाम आतंकी हमले से कश्मीरियों के आहत होने का संदेश देने के लिए, स्थानीय लोग पहले जत्थे के यात्रियों का स्वागत करने सबसे पहले पहुंचे। जैसे ही यात्री नौगाम सुरंग पार कर काजीगुंड से कश्मीर घाटी में पहुंचे, स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
रविवार को स्थानीय लोगों ने उत्तरी कश्मीर के गांदरबल जिले में बालटाल बेस कैंप से लौट रहे यात्रियों को कोल्ड ड्रिंक और शुद्ध पेयजल परोसा। यात्रियों ने बिना हिचकिचाए स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी स्वीकार की और कश्मीरियों के इस प्यार के लिए उनका धन्यवाद किया। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई है और 38 दिनों के बाद 9 अगस्त को समाप्त होगी।
श्री अमरनाथ जी यात्रा भक्तों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है, क्योंकि किंवदंती है कि भगवान शिव ने इस गुफा के अंदर माता पार्वती को शाश्वत जीवन और अमरता के रहस्य बताए थे।
राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच अब लेखपाल नहीं करेंगे, SDM स्तर पर होगा अंतिम फैसला
लखनऊ । यूपी में राजस्व मामलों की जांच को लेकर बड़ा फैसला किया गया है। उत्तर प्रदेश में अब लेखपाल की रिपोर्ट ही अंतिम नहीं मानी जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनता दर्शन में आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए लेखपाल स्तर की जांच पर परिवर्तन किया है। अब राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच लेखपाल नहीं, नायब तहसीलदार करेंगे।
अपर मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके तहत नायब तहसीलदार से नीचे कोई अधिकारी राजस्व मामलों की जांच नहीं करेगा। शिकायतकर्ता को सुनने के बाद ही नायब तहसीलदार अपनी रिपोर्ट देंगे।
उपजिलाधिकारी (SDM) स्तर पर अंतिम निर्णय और समाधान होगा। बता दें कि सीएम ऑफिस, जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर हो गया है, इस वजह से अब किसी की रिपोर्ट से नहीं, सुनवाई से न्याय होगा।
इटारसी में 13 जुलाई को आयोजित होगा 'प्रदेश स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह', यूपी कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल होंगे मुख्य अतिथि
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