छत्तीसगढ़ / दुर्ग
जाति प्रमाण पत्र मिलने से खुला शिक्षा और रोजगार का रास्ता
दुर्ग। शासन की महत्वकांक्षी पहल सेवा सेतु से जरूरतमंदों को प्रमाण पत्र बनाने की राह आसान कर दी है। दुर्ग निवासी सुश्री हिरामन पिता स्वर्गीय राम बगस आर्थिक रूप से साधारण परिवार से हैं। सुश्री हिरामन को आगे की पढ़ाई और रोजगार के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। लंबे समय से प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। पिता की मृत्यु के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के अभाव में उनका कार्य पूरा नहीं हो पा रहा था।
इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन के बाद सेवा सेतु प्रबंधक ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर आवेदन की पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन और समन्वय किया। संबंधित विभाग द्वारा आवेदन का परीक्षण कर 30 जून 2026 को उनका ओबीसी जाति प्रमाण पत्र अनुमोदित कर जारी कर दिया गया।
जाति प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद सुश्री हिरामन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहती है कि अब उन्हें आवश्यक दस्तावेज बनवाने तथा भविष्य में अपने परिवार के शैक्षणिक एवं अन्य सरकारी कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। अब स्वयं के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर अपने भाई-बहनों का भी जाति प्रमाण पत्र बना पाउंगी। उन्होंने सेवा सेतु की त्वरित, पारदर्शी और जनहितैषी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के डायरेक्टर ने नए छात्रों से एकेडमिक एक्सीलेंस को सोशल इम्पैक्ट से जोड़ने का आग्रह किया
दुर्ग । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई ने 23 जुलाई, 2026 को लगभग 600 नए छात्रों के बैच का स्वागत किया। कैंपस लाइफ में आसानी से ढलने में मदद के लिए, स्टूडेंट मेंटरशिप प्रोग्राम (SMP) 24 से 27 जुलाई तक चार दिन का ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित कर रहा है। नए छात्रों और उनके माता-पिता के लिए एक इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किया गया, जिसमें डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश और सीनियर फैकल्टी सदस्यों—जिनमें डीन प्रो. सौम्या गंगोपाध्याय, प्रो. संतोष बिस्वास, डॉ. सुधानवा पात्रा और डॉ. कुलदीप कटारिया के साथ-साथ SMP फैकल्टी-इन-चार्ज डॉ. प्रवीण कुमार शामिल थे—ने कैंपस की सुविधाओं, एकेडमिक सपोर्ट और स्टूडेंट लाइफ के बारे में अहम जानकारी दी। इस ओरिएंटेशन का मकसद नए छात्रों को संस्थान में मौजूद एकेडमिक, रिसर्च और एक्स्ट्रा-करिकुलर मौकों से परिचित कराना है
नए छात्रों के बैच को संबोधित करते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने छात्रों को आगाह किया कि वे एडमिशन को ही आखिरी मंज़िल न समझें। उन्होंने कहा, " भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में पहुँचना माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुँचने जैसा है—यह अभी शिखर नहीं है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सफलता के शिखर तक पहुँचने के लिए लगातार अनुशासन, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की ज़रूरत होती है।
प्रोफ़ेसर प्रकाश ने छात्रों से अपनी शिक्षा का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर समाज की भलाई के लिए करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि असल दुनिया की सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए छात्रों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने छात्रों को इनक्यूबेशन की ओर बढ़ने और देश के लिए स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हें समाज की ज़रूरतों को पूरा करना चाहिए और "राष्ट्र प्रथम" की सोच अपनानी चाहिए। उन्हें नौकरी खोजने वाले के बजाय नौकरी देने वाला बनना चाहिए। संस्थान के बढ़ते रिसर्च और डेवलपमेंट के दायरे पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने नए छात्रों को उभरते हुए क्षेत्रों में प्रैक्टिकल स्किल सीखने, R&D प्रोजेक्ट्स में शामिल होने और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े काम करने के लिए प्रेरित किया।
कैंपस कल्चर के महत्व को बताते हुए, डायरेक्टर ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई को एक मिलनसार और एक-दूसरे का साथ देने वाला परिवार बताया जो सामूहिक तरक्की के लिए समर्पित है। उन्होंने नए छात्रों को सर्वांगीण व्यक्तिगत विकास के लिए हॉस्टल की ज़िंदगी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। सबसे ज़रूरी बात यह है कि उन्होंने कहा कि कामयाबी से ज़्यादा अहमियत हमेशा चरित्र की होनी चाहिए और छात्रों को सहानुभूति और ईमानदारी को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने सीखने के लिए एक समावेशी माहौल बनाने पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ज्ञान हासिल करने में भाषा कभी भी रुकावट नहीं बननी चाहिए।
जिले में अब तक 415.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज
दुर्ग । जिले में 1 जून 2026 से 27 जुलाई 2026 तक 415.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कार्यालय कलेक्टर भू अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून से अब तक सर्वाधिक वर्षा 508.6 मिमी तहसील बोरी में तथा न्यूनतम 276.7 मिमी. तहसील धमधा में दर्ज की गई है। इसके अलावा तहसील दुर्ग में 466.9 मिमी, तहसील पाटन में 507.1 मिमी, तहसील भिलाई-3 में 399.3 मिमी और तहसील अहिवारा में 333.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। 27 जुलाई 2026 को तहसील दुर्ग में 3.0 मिमी, तहसील धमधा में 5.1 मिमी, तहसील पाटन में 4.4 मिमी, तहसील बोरी में 0.0 मिमी, तहसील भिलाई 3 में 11.0 मिमी और तहसील अहिवारा में 7.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ मौसम में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई
दुर्ग । राज्य शासन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उद्यानिकी फसलों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ मौसम में फसल बीमा कराने हेतु 31 जुलाई 2026 तक समय सीमा तय किया गया है।
उद्यानिकी फसलाें की खेती कर रहे किसानाें को विपरीत मौसम जैसे कम तापमान, अधिक तापमान, बीमारी अनुकूल मौसम, कीट व्याधियो का प्रकोप, लगातार अवर्षा की स्थिति निर्मित होना ओला वृष्टि आदि से होने वाले नुकसान से बचाने पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा लागू की गई है। खरीफ वर्ष 2026 में दुर्ग जिले अन्तर्गत बीमा कराने वाले कृषकों को अधिसूचित फसल के अनुसार निर्धारित कुल बीमित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत अथवा वास्तविक प्रीमियम जो भी कम हो राशि कृषक अंश के रूप में ऋणि एवं अऋणि दोनो प्रकार के कृषको को जमा करने होंगें। अऋणि कृषक फसल लगाने का स्वघोषित प्रमाण पत्र, नक्शा खसरा, आधार कार्ड अपने बैंक पासबुक की छाया प्रति जिसमें आईएफएससी कोड इत्यादि का उल्लेख हो, जमा कर बीमा करा सकते है।
योजना के अंतर्गत ऋणी कृषकों के लिये विकल्प चयन के आधार पर क्रियान्वित होगी। ऋणी कृषक जो योजना में शामिल नही होना चाहते, उन्हें भारत सरकार द्वारा जारी चयन प्रपत्रानुसार हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा आवेदन की अंतिम तिथि के 07 दिवस पूर्व तक संबंधित वित्तीय संस्थान में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। निर्धारित समय-सीमा में हस्ताक्षरित घोषणा पत्र जमा नही करने पर संबंधित बैंक द्वारा संबंधित मौसम के लिये स्वीकृत/नवीनीकृत की गई अल्पकालीन कृषि ऋण को अनिवार्य रूप से बीमाकृत किया जाएगा। इस मामले में बैंक द्वारा किसी भी प्रकार की चूक/त्रुटि होने पर संबंधित बैंक किसानांे के स्वीकार्य दावो के भुगतान करने के लिये उत्तरदायी होगा।
मुख्य/मूल कवरेज अंतर्गत फसल टमाटर हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 1,20,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 6,000 रूपए। फसल बैंगन हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 77,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 3850 रूपए। फसल मिर्च हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 68,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 3400 रूपए। फसल अदरक हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 1,50,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 7500 रूपए। फसल केला हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 85,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,250 रूपए। फसल पपीता हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 87,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,350 रूपए। फसल अमरूद हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 45,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 2,250 रूपए निर्धारित है। अतिरिक्त/एड-ऑन-कवरेज अंतर्गत फसल मिर्च हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 22,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 1100 रूपए। फसल केला हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 80,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,000 रूपए। फसल पपीता हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 38,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 1900 रूपए निर्धारित है।
इसके अलावा फसल केला के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 31 मई 2027, चक्रवाती हवाएं हेतु दिनांक 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027, फसल पपीता के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 30 अप्रैल 2027, चक्रवाति हवाएं हेतु दिनांक 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027, फसल मिर्च के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 जोखिम अवधि निर्धारित है।
उद्यानिकी फसलों के बीमा हेतु इच्छुक कृषक च्वाइस सेंटर/ भारतीय कृषि बीमा कम्पनी के प्रतिनिधी/ लोक सेवा केन्द्र/ बैंक शाखा/ सहकारी समिति /ऑनलाइन पंजीयन/ विकासखंड में स्थापित विभागीय शासकीय उद्यान रोपणी विकासखंड दुर्ग ( रविश कुमार साहू, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी,मो. नं 9993146452), विकासखंड धमधा ( कमलेश सिन्हा, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी, मो. नं 9340113341) एवं वि.ख. पाटन (श्रीमती सुरभि श्रीवास्तव, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी, मो. नं 9011648203) में संपर्क कर सकते है।
छात्रों को मिली कानूनी अधिकारों, साइबर-सड़क सुरक्षा, पॉक्सो अधिनियम की जानकारी
एमसीबी । जागरूक नागरिक ही सशक्त समाज की आधारशिला होते हैं। इसी उद्देश्य के साथ सोमवार को मनेन्द्रगढ़ स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित नागरिकों को संवैधानिक अधिकारों, विधिक सहायता, साइबर अपराधों से बचाव, सड़क सुरक्षा, बाल संरक्षण, नशा मुक्ति तथा राष्ट्रीय लोक अदालत जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न कानूनी विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं व्यवहारिक ढंग से समाधान किया।
शिविर में तालुका विधिक सेवा समिति, मनेन्द्रगढ़ के अध्यक्ष यशवंत वासनिकर एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राकेश सिंह सोरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून केवल न्यायालयों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूकता ही एक सुरक्षित, जिम्मेदार और न्यायपूर्ण समाज की नींव है। उन्होंने विद्यार्थियों को वर्तमान डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति सचेत रहने की सलाह देते हुए कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी, बैंकिंग जानकारी या व्यक्तिगत विवरण साझा करने से बचें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जागरूक, जिम्मेदार एवं कानून का सम्मान करने वाला नागरिक बनाना भी है। उन्होंने ऐसे शिविरों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक चेतना के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। शिविर में अधिकार मित्र अजय विश्वकर्मा (थाना मनेन्द्रगढ़) एवं अंजनी यादव (थाना झगराखांड) ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण न्याय से वंचित न रहे।
कार्यक्रम के दौरान परिवहन अधिनियम एवं सड़क सुरक्षा पर विशेष चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट तथा चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करने की सलाह दी गई। वक्ताओं ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
शिविर में पॉक्सो अधिनियम ( POCSO Act) के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बच्चों के अधिकारों, लैंगिक अपराधों से सुरक्षा तथा किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी बैंक कॉल, केवाईसी अपडेट, निवेश एवं नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी से बचाव के उपाय भी विस्तार से बताए गए।
राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए स्वास्थ्य एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 की जानकारी भी साझा की गई। साथ ही आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से विभिन्न मामलों का त्वरित, सरल एवं कम खर्च में निराकरण किया जा सकता है। शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों एवं नागरिकों को निःशुल्क विधिक सहायता हेल्पलाइन 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र व्यक्तियों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की गई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने कानूनी विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका विशेषज्ञों ने सहज एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। पूरे आयोजन ने विद्यार्थियों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वाद नहीं, संवाद की शक्ति : कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण में प्रतिभागियों का उत्साह बना प्रेरणा का स्रोत
ग्रामों से उठ रही सौहार्द, संवाद और सामाजिक समरसता की नई अलख : पति-पत्नी की प्रेरणादायी सहभागिता बनी आकर्षण का केंद्र
दुर्ग, ।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा दिनांक 25 जुलाई 2026 से 29 जुलाई 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत हर्षोल्लास एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हो रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे प्रतिभागियों द्वारा अभूतपूर्व उत्साह, सीखने की जिज्ञासा एवं सामाजिक परिवर्तन के प्रति समर्पण इस अभिनव पहल की सार्थकता को सुदृढ़ कर रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में उपस्थित सम्मानित मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा यह अवलोकन किया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" के निर्माण के संकल्प के साथ जिले के पाँच चयनित ग्राम—घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल—से चयनित कम्यूनिटी मीडियेटर्स को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। मीडिया प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता, संवादात्मक शिक्षण पद्धति एवं ग्राम स्तर पर शांति, सामाजिक समरसता एवं वाद-मुक्त ग्रामीण भारत के निर्माण के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण को भी निकटता से देखा एवं सराहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम पंचायत निकुम से माधव प्रसाद देशमुख, भागवत राम पटेल एवं श्रीमती मंजुषा मेश्राम, ग्राम पंचायत घुघसीडीह से मोहन सोनी, गोवर्धन बारले एवं श्रीमती ललिता बारले; ग्राम पंचायत कुथरेल से श्रीमती गीता गजपाल एवं डॉ. लोकनाथ साहू; ग्राम पंचायत अरसनारा से श्रीमती राधा निषाद एवं बरातूराम निषाद तथा ग्राम पंचायत ननकट्ठी से रवि साहू एवं बुद्धि सागर वर्मा सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं। इन्हें Potential Trainers द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक अत्यंत प्रेरणादायी एवं उल्लेखनीय विशेषता यह भी है कि ग्राम पंचायत घुघसीडीह से गोवर्धन बारले एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ललिता बारले पति-पत्नी के रूप में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे हैं। अपनी पारिवारिक एवं सांसारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए दोनों ने कम्यूनिटी मीडियेशन के माध्यम से समाज सेवा के इस शुभ अवसर के महत्व को आत्मसात किया है। प्रशिक्षण के दौरान दोनों एक-दूसरे का सहयोग एवं ध्यान रखते हुए अत्यंत उत्साह एवं समर्पण के साथ सहभागिता निभा रहे हैं। उनकी यह सहभागिता न केवल पारिवारिक सामंजस्य एवं आपसी सम्मान का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि जब परिवार संवाद एवं सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ता है, तब वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बन सकता है। उनकी प्रेरणादायी उपस्थिति कम्यूनिटी मीडियेशन की मूल भावना "संवाद, सहमति और सौहार्द" को साकार रूप प्रदान करती है तथा समाज के लिए एक अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत करती है।
जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित
दुर्ग । कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता सर्वेक्षण और विभिन्न विकास कार्यों की अद्यतन प्रगति की समीक्षा हेतु प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के स्वच्छता लक्ष्यों और पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई, जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे ने कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के दिशा-निर्देशों के पालन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक के दौरान यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि जिले के समस्त 381 ग्रामों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित किया जा चुका है और इनका भौतिक सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए ग्राम के सभी परिवारों द्वारा घर पर ही चार प्रकार का कचरा पृथक्करण किया जाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान कर उनका पंजीयन करने के निर्देश दिए गए हैं। कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सायकल रिक्शा में गीले एवं सूखे कचरे के अतिरिक्त दो अन्य खंड जोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें लाल खंड सेनेट्री पैड एवं डायपर के लिए तथा काला खंड अन्य ई-कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ग्राम में निर्मित नाडेप और वर्मी कंपोस्ट के उपयोग हेतु साफ-सफाई करने के भी निर्देश प्रदान किए गए हैं।
व्यक्तिगत शौचालयों और प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जनपद पंचायत धमधा से 219 एवं पाटन से 135 प्राप्त मांग पत्रों के अनुसार हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही, जनपद पंचायत दुर्ग से 278, धमधा से 02 एवं पाटन से 361 नवीन पात्र परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीण अंचल में घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली को प्रभावी बनाने और प्रत्येक घर से निर्धारित यूजर चार्ज की नियमित वसूली सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। स्वच्छताग्राहियों के मानदेय भुगतान की समीक्षा करते हुए यह कड़े निर्देश दिए गए कि जिन ग्राम पंचायतों में मानदेय लंबित है, उन्हें 15 दिवस के भीतर भुगतान कर प्रतिवेदन प्रेषित किया जाए तथा 15वें वित्त आयोग की राशि से इसका नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
तरल एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के मोर्चे पर जानकारी दी गई कि जिले में वर्तमान में 5 फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट पूरी तरह से क्रियाशील हैं। ग्रामीण अंचल में डी-स्लज वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और नवीन एफएसटीपी निर्माण तथा पूर्व में निर्मित प्लांट के एक्सटेंशन पर भी चर्चा की गई। महतारी सदन में निर्मित सामुदायिक शौचालयों में 15वें वित्त आयोग की राशि का भुगतान करने हेतु ग्राम पंचायतों को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, क्रेडा विभाग को गोवर्धन प्लांट को पुनः क्रियाशील करने के निर्देश दिए गए हैं तथा जिन हितग्राहियों एवं संस्थानों को गैस कनेक्शन प्रदाय किए गए हैं, उनसे निर्धारित शुल्क प्राप्त करने और पुनः उपयोग सुनिश्चित करने हेतु ग्राम स्तर पर बैठक आयोजित कर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था पुख्ता करने को कहा गया है। बैठक में सभी जनपद सीईओ, परियोजना अधिकारी और निर्माण कार्य एजेंसी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
कभी भीम की गदा तो कभी अर्जुन का गांडीव बना तीजन का तंबूरा नहीं जाएगा संग्रहालय, परिजन बोले हमारी अमूल्य विरासत
पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन के बाद छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग ने उनके ऐतिहासिक तंबूरे को संग्रहालय में संरक्षित करने का अनुरोध किया था। लेकिन स्वजनों ने इसे मां की आत्मा और परिवार की अमूल्य धरोहर बताते हुए संग्रहालय को देने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि यह तंबूरा घर में सुरक्षित रहेगा।
भिलाई। पंडवानी गायन की विश्वविख्यात कलाकार, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित तथा भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की पूर्व कर्मचारी डा. तीजन बाई के निधन के बाद उनकी स्मृतियों को सहेजने की पहल शुरू हो गई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग ने उनकी जीवनभर की साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को संरक्षित करने के उद्देश्य से परिवार से उसे संग्रहित करने का अनुरोध किया था। हालांकि, स्वजनों ने इस अनुरोध को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि यह तंबूरा उनके लिए केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि तीजन बाई की आत्मा, उनकी साधना और परिवार की अमूल्य धरोहर है। इसलिए इसे किसी भी परिस्थिति में परिवार से अलग नहीं किया जाएगा।
स्वजनों का कहना है कि जिस तंबूरे को हाथ में लेकर तीजन बाई ने दशकों तक महाभारत की कथाओं को स्वर दिया, देश-दुनिया के मंचों पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया और करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई, उसे वे अपने घर से दूर नहीं जाने देंगे। परिवार के सदस्यों के अनुसार यह तंबूरा उनकी मां की जीवंत स्मृति है और उनके जाने के बाद भी उसी श्रद्धा के साथ घर में सुरक्षित रखा जाएगा।
साधना और संघर्ष का साक्षी है तंबूरा
संस्कृति विभाग की पहल, लेकिन परिवार की भावनाएं सर्वोपरि
सोमनी गांव से विश्व मंच तक का अद्भुत सफर
राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत हुईं तीजन बाई
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं तीजन बाई
स्वजनों ने कहा— घर में ही सुरक्षित रहेगी अमूल्य धरोहर
"सौहार्द, सहमति और सामाजिक समरसता की ओर एक सशक्त कदम : कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ"
दुर्ग । "संवाद से समाधान, मध्यस्थता से सम्मान और सौहार्द से सशक्त समाज का निर्माण" के मूल उद्देश्य को साकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के प्रेरणादायी नेतृत्व में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा 25 जुलाई 2026 से 29 जुलाई 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के चतुर्थ तल स्थित नवीन सभागार में आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह के साथ किया गया।
कम्यूनिटी मीडियेशन अर्थात् सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण भारत में सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं जनहितकारी पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालयों तक पहुँचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" के निर्माण के संकल्प के साथ जिले के पांच ग्राम घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है। इन ग्रामों से चयनित कुल 15 कम्यूनिटी मीडियेटर्स इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे हैं, जिन्हें Potential Trainers द्वारा कम्यूनिटी मीडियेशन की संपूर्ण प्रक्रिया, उसके व्यावहारिक पक्षों एवं विवाद समाधान के कौशलों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात् ये कम्यूनिटी मीडियेटर्स अपने-अपने ग्रामों में संवाद एवं मध्यस्थता की संस्कृति को सुदृढ़ करते हुए छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे।
उपरोक्त कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक समर्पित समन्वय समिति का गठन भी किया गया है, जिसमें स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत की अध्यक्षा सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) मुस्कान शर्मा एवं पंकज शर्मा सम्मिलित हैं। यह समिति प्रशिक्षण कार्यक्रम की समस्त गतिविधियों के सुचारू संचालन, समन्वय एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निरंतर मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।
इस महत्वाकांक्षी एवं जनकल्याणकारी पहल के सफल आयोजन में जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग का भी बहुमूल्य एवं सराहनीय योगदान रहा है। अधिवक्ता संघ द्वारा प्रदान किया जा रहा सक्रिय सहयोग कम्यूनिटी मीडियेशन को जन-जन तक पहुँचाने तथा न्याय तक सरल एवं सुलभ पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
उल्लेखनीय है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाने हेतु मल्टी सेक्टोरियल एप्रोच (Multi-Sectoral Approach) को अपनाया गया है। इसके अंतर्गत राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जिला दुर्ग स्थित विधि महाविद्यालयों सुराना लाॅ काॅलेज, भारती लाॅ काॅलेज, कल्याण लाॅ काॅलेज एवं शंकराचार्य लाॅ काॅलेज के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण का सक्रिय सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी।
रक्तदाता संस्थाओं को मिलेगा एक चौथाई निःशुल्क रक्त का लाभ, कलेक्टर की नई पहल
आईआईटी भिलाई के सहयोग से बनेगा मोबाइल एप, रक्तदान करने वाली संस्थाओं का रहेगा पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड
दुर्ग । इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी दुर्ग द्वारा जिला चिकित्सालय में संचालित ब्लड बैंक में रक्त की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा नियमित स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कला मंदिर, सिविक सेंटर भिलाई जिला दुर्ग में ’रक्तदान-महादान’ विषय पर बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक, व्यापारी संघ, महिला समूहों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं अध्यक्ष इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ने कहा कि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी दुर्ग द्वारा जिला चिकित्सालय परिसर में जनभागीदारी से सर्वसुविधायुक्त ब्लड बैंक का सफल संचालन किया जा रहा है। इस ब्लड बैंक के माध्यम से जिला चिकित्सालय में भर्ती गंभीर एवं जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जाता है, जिससे अनेक लोगों की जान बचाई जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य पूरे वर्ष के लिए नियमित रक्तदान शिविरों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करना है, ताकि प्रत्येक संस्था, संगठन एवं समाज रक्तदान शिविर आयोजित कर सके। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं अध्यक्ष इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ने बताया कि डिजिटल पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी भिलाई के सहयोग से एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से यह जानकारी उपलब्ध रहेगी कि किस संस्था या संगठन ने कितनी यूनिट रक्तदान किया है, वर्तमान में ब्लड बैंक में कितनी यूनिट रक्त उपलब्ध है तथा अन्य आवश्यक जानकारी भी डिजिटल रूप से दर्ज रहेगी। कलेक्टर सिंह ने बताया कि थैलेसीमिया, एनीमिया, सिकल सेल रोग, गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं जैसे गंभीर मरीजों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। वहीं अन्य मरीजों से शासन द्वारा निर्धारित शुल्क लिया जाता है।
रक्तदाताओं एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कलेक्टर सिंह ने एक नई पहल करते हुए कहा कि यदि कोई संस्था, समाज या संगठन रक्तदान करता है और उसके द्वारा अनुशंसित ऐसा व्यक्ति, जो शासन की निःशुल्क रक्त श्रेणी में शामिल नहीं है, रक्त की आवश्यकता होने पर उसे संस्था द्वारा प्रदाय किए गए रक्त में से एक चौथाई निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल दान नहीं, बल्कि किसी के जीवन को बचाने का संकल्प है। युवाओं को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करने तथा समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित करने में सभी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
बैठक में जिले के विभिन्न समाज प्रमुखों, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, पुलिस एवं अर्धसैनिक बल, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संगठनों, औद्योगिक संस्थानों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से रक्तदान अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए सुझाव और सहयोग का आह्वान किया गया। इस अवसर पर ब्लड बैंक के प्रभारी अधिकारी डॉ. एस.आर. चुरेन्द्र ने ब्लड बैंक दुर्ग की कार्यप्रणाली, रक्त की आवश्यकता तथा स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर विस्तृत जानकारी देते हुए अधिक से अधिक लोगों से नियमित रक्तदान करने की अपील की।
इस दौरान आभार प्रदर्शन प्रमोद वाघ द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर योगिता देवांगन, नगर निगम भिलाई आयुक्त सुरूचि सिंह, डीआईजी सीआईएसएफ अखिलेश कुमार शुक्ला, अपर कलेक्टर हरवंश मिरी, डिप्टी कलेक्टर प्रफुल्ल गुप्ता, तहसीलदार क्षमा यदु, जिला चिकित्सा अधिकारी एवं रेडक्रास सोसायटी सचिव मनोज दानी, रेडक्रॉस दुर्ग अध्यक्ष शरद पाटनकर, नोडल अधिकारी रेडक्रॉस डॉ.सी.बी.एस.बंजारे, प्रभारी अधिकारी ब्लड बैंक डॉ. एसआर चुरेन्द्र, कोषाध्यक्ष जिला प्रबंध समिति प्रमोद वाघ, सीएमओ सेक्टर 9 हॉस्पिटल डॉ उदय, पुलिस बल के अधिकारी, बड़ी संख्या में संस्था/संगठन/ स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्था, विभिन्न समाज प्रमुख सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
ताश खेलते पकड़े गए निगम के तीन कर्मचारी निलंबित
भिलाईनगर । नगर पालिक निगम भिलाई के मुख्य कार्यालय परिसर में ड्यूटी के दौरान ताश-पत्ती खेलते पाए जाने पर निगम आयुक्त ने तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कार्यस्थल पर अनुशासनहीनता और शासकीय कार्य में लापरवाही के मामले में की गई।
जानकारी के अनुसार, 21 जुलाई को तीनों कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। कर्मचारियों ने 22 जुलाई को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन आयुक्त ने उसे असंतोषजनक मानते हुए निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
आरोप है कि कार्यालीन समय में निगम के मुख्य कार्यालय परिसर स्थित तहसील कार्यालय के सामने तीनों कर्मचारी अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय ताश-पत्ती खेलते हुए पाए गए। निगम प्रशासन ने इसे सरकारी सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए कहा कि इस तरह की हरकत से नगर निगम की छवि धूमिल हुई है और आम नागरिकों के बीच गलत संदेश गया है।
निलंबित कर्मचारियों में विकास सिंह (सहायक राजस्व निरीक्षक), डहर सिंह बंजारे (सफाई कामगार) और अशोक यादव (भृत्य) शामिल हैं। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में तीनों का मुख्यालय जोन-4, शिवाजी नगर रहेगा। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्य के दौरान अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जल संरक्षण से बदली किसानों की तकदीर, राजपुर का सामुदायिक चेक डेम बना मिसाल
दुर्ग । जल संरक्षण की दिशा में किए गए छोटे-छोटे प्रयास किस तरह ग्रामीणों की जिंदगी बदल सकते हैं, इसका प्रेरणादायक उदाहरण धमधा विकासखंड की ग्राम पंचायत राजपुर में देखने को मिला है। यहां विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत भागवत के खेत के पास निर्मित सामुदायिक चेक डेम आज किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस संरचना ने न केवल वर्षा जल को सहेजने का काम किया है, बल्कि भू-जल स्तर बढ़ाने, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने और किसानों की आय में वृद्धि का भी रास्ता खोला है।
इस चेक डेम के निर्माण के लिए 16.02 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसमें 2.80 लाख मजदूरी तथा 13.20 लाख सामग्री का प्रावधान रखा गया। निर्माण कार्य पूर्ण होने तक कुल 15.69 लाख की राशि व्यय हुई, जिसमें 2.79 लाख मजदूरी एवं 12.55 लाख सामग्री पर खर्च किए गए। इस कार्य से 1671 मानवदिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे स्थानीय श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिला, पलायन में कमी आई तथा मजदूरी के माध्यम से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली। 12 मीटर स्पैन वाले इस चेक डेम की 10,080 घनमीटर जल संरक्षण क्षमता वाले इस चेक डेम ने पूरे क्षेत्र की जल व्यवस्था को नई मजबूती दी है। पहले बारिश का अधिकांश पानी बहकर नालों में चला जाता था, लेकिन अब वही पानी संरक्षित होकर धीरे-धीरे जमीन में समा रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि आसपास के कुएं, हैंडपंप और बोरवेल का जलस्तर बढ़ा है तथा गर्मियों में भी पानी की उपलब्धता पहले से बेहतर बनी रहती है।
इस परियोजना का लाभ भगवाता सुखराम, बुसाहु राम सिंह, श्रीमती चितरेखा पुनित, ईष्वरी मधुर सिंह और केवल पचरू सहित कई किसानों को मिल रहा है। पहले जहां खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, वहीं अब किसान खरीफ के साथ रबी और सब्जी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई मिलने से उत्पादन बढ़ा है, खेती की लागत घटी है और किसानों की आय में लगातार इजाफा हो रहा है। तकनीकी सहायक सुश्री पूजा पटेल के अनुसार, चेक डेम का निर्माण सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है और इससे लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकती है। यह संरचना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, सूखे की स्थिति में किसानों को राहत देने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक का कहना है कि चेक डेम बनने के बाद वर्षा का पानी गांव में ही संरक्षित हो रहा है, जिससे खेती आसान और अधिक लाभकारी बनी है। वहीं किसानों का भी मानना है कि अब खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, समय पर सिंचाई मिल जाती है और फसल खराब होने की चिंता काफी कम हो गई है। राजपुर का यह सामुदायिक चेक डेम आज केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, ग्रामीण रोजगार और कृषि समृद्धि का सफल मॉडल बनकर उभरा है। यह साबित करता है कि यदि वर्षा जल की हर बूंद को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए, तो जल संकट का स्थायी समाधान संभव है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
विद्या फाउंडेशन ने शासकीय स्कूल छावनी के छात्रों को बांटी चरण पादुका
भिलाई l सामाजिक संस्था विद्या फाउंडेशन ने गीतांजलि कौशिक के सहयोग से छावनी स्थित शासकीय मिडिल प्राइमरी स्कूल के छात्रों को चरण पादुका वितरित की।
चरण पादुका मिलते ही बच्चों के चेहरे पर एक अलग मुस्कान देखी गई। इस पुनीत कार्य के लिए शिक्षकों और छात्रों ने विद्या फाउंडेशन और टीम के लोगों को साधुवाद दिया और संस्था के कार्यों की प्रशंसा भी की।
इस दौरान विद्या फाउंडेशन से रश्मि सागर , खुशबू शेट्टी , वाय राजेंद्र राव , सलाहकार पर्यटन मंडल गीतांजलि कौशिक सोशल वर्कर , रेड ड्रॉप संयोजक सुरज साहू सिगमा फाउंडेशन डायरेक्ट कबीर साहू , रामकुमार साहू समाज सेवी सुमित बैठा उपस्थित थे।
जिले में अब तक 409.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज
दुर्ग, । जिले में 1 जून 2026 से 24 जुलाई 2026 तक 409.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कार्यालय कलेक्टर भू अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून से अब तक सर्वाधिक वर्षा 508.6 मिमी तहसील बोरी में तथा न्यूनतम 270.6 मिमी. तहसील धमधा में दर्ज की गई है। इसके अलावा तहसील दुर्ग में 463.9 मिमी, तहसील पाटन में 502.7 मिमी, तहसील भिलाई-3 में 388.3 मिमी और तहसील अहिवारा में 325.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। 24 जुलाई 2026 को तहसील दुर्ग में 0.2 मिमी, तहसील धमधा में 1.0 मिमी, तहसील पाटन में 1.5 मिमी, तहसील बोरी में 0.0 मिमी, तहसील भिलाई 3 में 0.0 मिमी और तहसील अहिवारा में 0.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
स्वैच्छिक रक्तदान अभियान को लेकर 25 जुलाई को कला मंदिर भिलाई में बैठक आयोजित
दुर्ग । इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी दुर्ग द्वारा जिला चिकित्सालय में संचालित ब्लड बैंक में रक्त की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने और नियमित रक्तदान शिविरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कला मंदिर, सिविक सेंटर, भिलाई में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष अभिजीत सिंह करेंगे। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, समाज प्रमुखों, शैक्षणिक संस्थानों, पुलिस एवं अर्धसैनिक बल, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संघ, औद्योगिक संस्थानों, राजनीतिक दलों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, दुर्ग भिलाई प्रेस क्लब के समस्त सदस्य को आमंत्रित किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थाओं एवं नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की है।
भिलाई की राशन दुकान में 1007 क्विंटल चावल की हेराफेरी, संचालक गिरफ्तार
भिलाईनगर । दुर्ग जिले के भिलाई सेक्टर-7 स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में 1007.51 क्विंटल चावल की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। खाद्य विभाग की जांच में भारी मात्रा में चावल का स्टॉक गायब मिलने के बाद भिलाईनगर पुलिस ने राशन दुकान के संचालक एवं अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत को गिरफ्तार कर लिया है।
ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि कलेक्टर (खाद्य शाखा) के निर्देश पर खाद्य निरीक्षक ने 22 जुलाई को थाना भिलाई नगर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में शासकीय उचित मूल्य दुकान, सेक्टर-7 मार्केट (दुकान आईडी-431004118) के अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत और विक्रेता नमिता सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
जांच समिति ने दुकान के अभिलेखों, उपलब्ध स्टॉक और ऑनलाइन रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान वितरण पंजी, चावल उत्सव पंजी, बैठक पंजी और बारदाना पंजी तो मिले, लेकिन स्टॉक पंजी उपलब्ध नहीं थी। अध्यक्ष ने बताया कि स्टॉक पंजी विक्रेता के पास है।
भौतिक सत्यापन में दुकान में केवल 26.50 क्विंटल चावल मौजूद मिला, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार 1034.01 क्विंटल चावल उपलब्ध होना चाहिए था। इस तरह 1007.51 क्विंटल अरवा चावल की कमी पाई गई। पूछताछ के दौरान अध्यक्ष इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
खाद्य विभाग की शिकायत के आधार पर भिलाईनगर पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। दस्तावेजों की जांच और साक्ष्य एकत्र करने के बाद पुलिस ने आरोपी संचालक धनंजय सिंह राजपूत (63) को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता विषयक विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन
संवाद, सौहार्द एवं आपसी सहमति से विवादों के समाधान का दिया गया संदेश
दुर्ग । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।
जिसके संबंध में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग एवं जिला प्रशासन, दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आज ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के अंतर्गत एक भव्य एवं प्रभावी विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों के समन्वित सहयोग एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
उक्त कार्यक्रम का आयोजन राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय एवं सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला दुर्ग स्थित भारती लॉ कॉलेज के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण की गरिमामयी एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता भी रही, जिन्होंने सामुदायिक मध्यस्थता एवं विधिक जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं प्रभावी बनाया। विधि के विद्यार्थियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि न्याय एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों के मध्य इस महत्वपूर्ण जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करना था कि किसी भी प्रकार के छोटे-बड़े सामाजिक, पारिवारिक अथवा सामुदायिक विवादों का समाधान केवल न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव नहीं है, बल्कि उन्हें आपसी संवाद, समझ, सहमति एवं सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से भी सौहार्दपूर्ण एवं सम्मानजनक ढंग से सुलझाया जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता ऐसी प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें किसी भी पक्ष की हार अथवा जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की भावनाओं, आवश्यकताओं एवं हितों का सम्मान करते हुए ऐसा समाधान खोजा जाता है, जिसे सभी पक्ष स्वेच्छा एवं संतोषपूर्वक स्वीकार कर सकें।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों से संबंधित जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी प्रदान करते हुए ग्रामीणजनों को विधिक अधिकारों, सामाजिक उत्तरदायित्वों एवं शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जागरूक किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली एवं जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
उक्त कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बी.एम.ओ. देवेन्द्र बेलचंदन, महिला एवं बाल विकास विभाग से सुपरवाइजर ममता साहू, जनपद पंचायत से परियोजना अधिकारी (पी.ओ.) गौरव मिश्रा, राजस्व विभाग से पटवारी सतीश दीवान, पशु चिकित्सा विभाग से प्रेमलता देवांगन तथा भारती लॉ कॉलेज से असिस्टेंट प्रोफेसर संपदा बैस एवं सरिता गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर का विशेष योगदान रहा, जिनके समन्वय एवं मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के मध्य प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उनके द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता एवं विधिक जागरूकता के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से किए गए प्रयासों ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं जनोपयोगी बनाया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग एवं जिला प्रशासन, दुर्ग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों के समन्वित सहयोग, शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता एवं जनसहभागिता के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, विधिक जागरूकता एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल सिद्ध हुआ। सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से समाज में संवाद, सहयोग एवं आपसी विश्वास की भावना को सशक्त बनाने का यह प्रयास निश्चित रूप से न्याय सुलभता के लक्ष्य को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।