छत्तीसगढ़ / रायपुर
मुख्य सचिव ने सचिवों की ली उच्च स्तरीय बैठक
सभी विभागों के सचिवों की उच्च स्तरीय बैठक ली
विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की
रायपुर, 07 जुलाई 2026
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों में बैकलॉग के पदों की भर्ती के लिए शीघ्र कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए है।
मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने शासन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों के अंतर्गत भू-अर्जन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव श्री भुवनेश यादव सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।
जनदर्शन बना दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद का मंच,श्री परशुराम तिवारी को मिली निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राई साइकल
रायपुर, 06 जुलाई 2026

प्रदेश में जनदर्शन आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के जनदर्शन कार्यक्रम में 80 प्रतिशत दिव्यांगता से जूझ रहे प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम बगडा कोटेया निवासी परशुराम तिवारी को जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल से निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राई साइकल उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद का संचार हुआ है।
प्रत्येक सोमवार को आयोजित जनदर्शन में आज कुल 85 आवेदन प्राप्त हुए, जिनके निराकरण के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
इसी दौरान श्री परशुराम तिवारी ने आवागमन में हो रही कठिनाइयों को लेकर मोटराइज्ड ट्राई साइकल उपलब्ध कराने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद विभाग ने बिना विलंब के उन्हें निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राई साइकल प्रदान की।
समाज कल्याण विभाग के अनुसार श्री परशुराम तिवारी 80 प्रतिशत दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं और लंबे समय से आवागमन संबंधी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। मोटराइज्ड ट्राई साइकल मिलने से अब उनके दैनिक कार्यों के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी भी सुगम हो सकेगी।
सहायता प्राप्त होने पर श्री परशुराम तिवारी ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग से उनके जीवन में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे अधिक स्वतंत्रता के साथ अपने कार्य कर सकेंगे।
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शासन की मंशा है कि प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचे, ताकि वे आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।
270 आजीविका डबरी निर्माण कार्य पूर्ण, जल संरक्षण एवं सिंचाई सुविधाओं को मिला बढ़ावा
दलहन-तिलहन और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी सशक्त
रायपुर, 06 जुलाई 2026

जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए जिला प्रशासन मुंगेली ने ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वीबीजी रामजी आयुक्त श्री तारण प्रकाश सिन्हा के सतत मार्गदर्शन एवं कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में 270 आजीविका डबरी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। यह पहल किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आजीविका डबरियों में वर्षा जल का वैज्ञानिक तरीके से संचयन किया जाएगा, जिससे खेतों में लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहेगा। इससे सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा तथा किसानों को वर्षभर कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।
कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार उपलब्ध कराना है। जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार, मत्स्य पालन और फसल विविधीकरण जैसे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये डबरियां वर्षा जल को संरक्षित कर उसे खेतों के समीप सुरक्षित रखेंगी। पहले जो पानी बहकर नालों और नदियों में चला जाता था, अब वही जल सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण तथा कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा तथा जल संकट से राहत मिलेगी।
डबरियों में उपलब्ध जल से दलहन एवं तिलहन फसलों को समय पर सिंचाई मिल सकेगी। इससे चना, मसूर, अरहर, मूंग, उड़द, सरसों, तिल सहित अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और प्राकृतिक जोखिम भी कम होगा। जिन डबरियों में वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा, वहां वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन भी किया जा सकेगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा, ग्रामीणों को पोषणयुक्त खाद्य उपलब्ध होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिली नई आर्थिक शक्ति
खेती हुई आधुनिक, परिवारों का भविष्य भी हो रहा सुरक्षित
रायपुर, 06 जुलाई 2026
राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना प्रदेश के किसानों के लिए आर्थिक संबल बनकर उभर रही है। योजना के तहत प्रदान की जा रही प्रोत्साहन राशि किसानों को खेती में निवेश बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसान इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं और खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं। इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के सोहागपुर ग्राम के किसान श्री रमेश सिंह की कहानी कृषक उन्नति योजना के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
गोड़ जनजाति से संबंध रखने वाले श्री रमेश सिंह के पास लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि है। वर्ष 2025-26 में उन्होंने 255 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 1 लाख 86 हजार 405 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई।
श्री रमेश सिंह ने इस राशि का उपयोग उन्नत किस्म के बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों की खरीदी में किया, जिससे खेती की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा तथा परिवार की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को भी प्राथमिकता दी है।
श्री रमेश सिंह का कहना है कि योजना से प्राप्त आर्थिक सहयोग ने उनकी खेती को नई दिशा दी है। अब वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं तथा परिवार का जीवन स्तर भी पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ हुआ है।
कृषक उन्नति योजना प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नवाचार, उत्पादकता वृद्धि और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हुए आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रभावी योगदान दे रही है।
सुशासन से बदली चरवाहे बालमुकुंद के परिवार की जिंदगी
प्रधानमंत्री आवास और भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से मिला आर्थिक संबल
जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों के जीवन में आ रहा सकारात्मक बदलाव
रायपुर, 06 जुलाई 2026
राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों तक पहुंचकर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। सुशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों को आवास, आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ समय पर मिल रहा है। बालोद जिले के ग्राम सोंहपुर निवासी एवं पेशे से चरवाहे श्री बालमुकुंद यादव का परिवार इसका प्रेरक उदाहरण है, जिनके जीवन में विभिन्न शासकीय योजनाओं ने नई उम्मीद और आर्थिक स्थिरता का संचार किया है।
रोजी-रोटी के लिए मवेशी चराने का कार्य करने वाले श्री बालमुकुंद यादव के परिवार को केंद्र एवं राज्य शासन की अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का आवास उपलब्ध हुआ है, जिससे वर्षों पुरानी सुरक्षित आवास की चिंता समाप्त हो गई है। अब उनका परिवार एक सुरक्षित और सम्मानजनक घर में जीवनयापन कर रहा है।
परिवार की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महतारी वंदन योजना प्रभावी साबित हुई है। इस योजना के तहत उनकी माता और पत्नी के बैंक खातों में प्रतिमाह निर्धारित राशि सीधे अंतरित हो रही है। इससे उन्हें घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आर्थिक संबल मिला है और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।
भूमिहीन होने के कारण श्री बालमुकुंद यादव के परिवार को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्राप्त हो रही है। यह सहायता उनके परिवार के लिए कठिन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण सहारा बन रही है और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार सिद्ध हो रही है।
श्री बालमुकुंद यादव बताते हैं कि एक समय पक्का मकान बनाना और परिवार के लिए नियमित आर्थिक सहायता की कल्पना भी कठिन थी। आज शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उनका परिवार सुरक्षित आवास, महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता और वार्षिक वित्तीय सहयोग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहा है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान किया है।
श्री यादव ने जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की संवेदनशील नीतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और भूमिहीन परिवारों का जीवन तेजी से बदल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसी योजनाएं आगे भी जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी।
झमाझम बारिश से दूर हुई किसानों की चिंता
समय पर खाद-बीज ने बढ़ाया अन्नदाताओं का विश्वास
मानसून की मेहरबानी और शासन की तैयारी से खेती को मिली नई रफ्तार, खेतों में लौटी रौनक
रायपुर, 06 जुलाई 2026

जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। आसमान में बादलों की आवाजाही तो थी, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूने पड़े थे। खरीफ फसलों की बुआई, धान की रोपाई और बेहतर उत्पादन को लेकर किसान चिंतित थे। हर दिन आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते अन्नदाता अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे थे। आखिरकार पिछले कुछ दिनों से हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता को खुशी में बदल दिया। तपती धूप से तपी धरती पर जैसे ही वर्षा की बूंदें बरसीं, केवल मिट्टी ही नहीं महकी, बल्कि किसानों के मन में भी नई उम्मीद और आत्मविश्वास के अंकुर फूट पड़े।
मानसून की यह दस्तक केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आई है। दूर-दूर तक फैले खेतों में अब पानी लबालब दिखाई दे रहा है। गांवों में फिर से चहल-पहल लौट आई है। खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज, कृषि यंत्रों की आवाज, धान की रोपाई में जुटे किसान परिवार और प्रकृति का नव श्रृंगार ग्रामीण जीवन की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। कहीं खेतों की जुताई अंतिम चरण में है तो कहीं किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में जुट गए हैं। वर्षा की हर बूंद मानो किसानों की मेहनत को नई शक्ति प्रदान कर रही है। यही वह समय है, जब धरती और अन्नदाता का अटूट रिश्ता सबसे अधिक सजीव दिखाई देता है। किसान पूरे विश्वास के साथ खेतों में उतरता है, क्योंकि उसे पता है कि आज की मेहनत ही आने वाले कल की समृद्धि की नींव बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने खरीफ सीजन की तैयारियां समय रहते पूरी कर किसानों की खेती को मजबूत आधार प्रदान किया है। कृषि विभाग द्वारा मानसून से पहले ही गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई थी। इसका लाभ अब किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है। जैसे ही वर्षा ने रफ्तार पकड़ी, किसान बिना किसी विलंब के खेती के कार्यों में जुट गए। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता के कारण बुआई और रोपाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कोरबा जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को अनुदानित दरों पर खाद एवं बीज सहजता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को न तो बाजार में भटकना पड़ रहा है और न ही आवश्यक उर्वरकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अनुकूल वर्षा ने किसानों के उत्साह को नई उड़ान दी है।
इसका उदाहरण करतला स्थित आदिवासी सेवा सहकारी समिति में देखने को मिला। ग्राम कछार निवासी कृषक श्री घनश्याम राठिया, जो लगभग साढ़े छह एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, ने समिति से 12 बोरी यूरिया, 6 बोरी डीएपी तथा 4 बोरी सुपर फास्फेट प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें न लाइन में लगना पड़ा और न ही किसी प्रकार का इंतजार करना पड़ा। समिति में सभी व्यवस्थाएं सुचारु हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो रहा है। शासन द्वारा रियायती दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिलने से खेती की लागत कम हुई है और छोटे एवं मध्यम किसानों को बड़ी राहत मिली है।
श्री राठिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने और अच्छी बारिश होने से इस वर्ष खेती की शुरुआत बेहद अच्छी हुई है। अब पूरे परिवार के साथ धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है और उन्हें इस वर्ष अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है। छत्तीसगढ़ की धरती पर बरसती यह वर्षा केवल खेतों को ही नहीं सींच रही, बल्कि किसानों के सपनों, उनकी मेहनत और समृद्ध भविष्य की आशाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रकृति की अनुकंपा और शासन की दूरदर्शी व्यवस्था का यह प्रभावी समन्वय खेती-किसानी को नई गति दे रहा है। समय पर उपलब्ध खाद-बीज, अनुकूल मौसम और किसानों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया है कि इस खरीफ सीजन में अन्नदाता आत्मविश्वास के साथ समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
बारिश भी नहीं रोक सकी जागरूकता की मुहिम
गांव-गांव पहुंचा योजना जत्था
शासकीय योजनाओं की जानकारी के लिए बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीण
रायपुर, 6 जुलाई 2026

लगातार हो रही बारिश के बावजूद सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का उत्साह कम नहीं हुआ। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा नीति आयोग के सहयोग से संचालित योजना जत्था अभियान गांव-गांव पहुंचकर शिक्षा, स्वास्थ्य और शासकीय योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहा है।
इसी क्रम में रविवार को सुकमा विकासखंड की ग्राम पंचायत कोर्रा और ग्राम पंचायत सोना कूकानार के राऊतपारा में मॉडल साक्षरता कार्यक्रम एवं योजना जत्था का आयोजन किया गया। दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी कर अभियान को सफल बनाया।
कार्यक्रम में ग्रामीणों को वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों, स्वच्छता, मौसमी बीमारियों से बचाव तथा साक्षरता के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। योजना जत्था की टीम ने नाटक, संवाद और जनसंपर्क जैसे रोचक माध्यमों से सरकारी योजनाओं की पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया, जिससे लोगों ने सहजता से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। जिला प्रशासन का लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, और योजना जत्था इस दिशा में प्रभावी जनजागरूकता अभियान बनकर उभर रहा है।
समय पर मिला खाद, बीज और ऋण तो बढ़ा किसान का भरोसा
रायपुर, 6 जुलाई 2026
खेती में समय सबसे बड़ी पूंजी होती है। यदि किसान को बोआई से पहले खाद, बीज और ऋण समय पर मिल जाए तो अच्छी फसल की उम्मीद भी बढ़ जाती है। सुकमा जिले में इस खरीफ सीजन में प्रशासन की सक्रिय पहल ने यही भरोसा किसानों के बीच मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक खाद और उन्नत बीज की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इससे किसानों को बिना किसी परेशानी के खरीफ की तैयारियां पूरी करने में मदद मिली है।
रानीबहाल गांव के प्रगतिशील किसान हड़मा राम मरकाम इसकी मिसाल हैं। लगभग 32 एकड़ कृषि भूमि वाले हड़मा राम को छिंदगढ़ सहकारी समिति के माध्यम से 3.50 लाख रुपये का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया। इस राशि से उन्होंने समय पर खाद और उन्नत बीज खरीदे तथा बोआई की तैयारियां पूरी कर लीं। उनका कहना है कि समय पर मिली इस सुविधा से आर्थिक दबाव कम हुआ और खेती का काम बिना किसी बाधा के शुरू हो सका।
जिला प्रशासन केवल कृषि आदानों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। खाद-बीज की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और बिचौलियों पर भी प्रशासन एवं पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी रख रही हैं। इससे किसानों को उचित मूल्य पर कृषि सामग्री मिल रही है और उनमें भरोसा बढ़ा है।
बारिश के मौसम में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने विद्युत कंपनी ने जारी की एडवाइजरी
रायपुर, 06 जुलाई 2026
बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।
बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें।
घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।
बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।
यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-
सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।
उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।
धान छोड़ गेंदा फूल की खेती
बदलते मौसम और जल संकट के बीच फसल विविधीकरण की मिसाल
कम पानी में बेहतर आय की उम्मीद
सरकार की प्रोत्साहन योजना से बढ़ा किसानों का भरोसा
रायपुर, 6 जुलाई 2026
कभी धान की लहलहाती फसल के लिए पहचाने जाने वाले खेत अब रंग-बिरंगे गेंदा फूलों से महकने की तैयारी में हैं। यह बदलाव किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि बदलते मौसम, घटते जल संसाधनों और बेहतर आय की तलाश में एक प्रगतिशील किसान की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेश्वर के किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने इस खरीफ सीजन में अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में धान के स्थान पर गेंदा फूल की खेती शुरू करने का निर्णय लेकर फसल विविधीकरण की दिशा में नई मिसाल पेश की है।
करीब 20 एकड़ कृषि भूमि के मालिक वीरेंद्र साहू बताते हैं कि पिछले वर्ष अल्प वर्षा और बेमौसम बारिश ने धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। उत्पादन घटा और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने खेती के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर ऐसी फसल अपनाने का निर्णय लिया, जो कम पानी में अच्छी पैदावार दे और बाजार में बेहतर कीमत भी दिला सके।
इस नई शुरुआत में कृषि विभाग का मार्गदर्शन उनके लिए संबल बना। विभाग की सलाह पर उन्होंने मृदा परीक्षण कराया और गेंदा फूल की वैज्ञानिक खेती की तकनीक अपनाई। ग्राम मोहड़ में पिछले वर्ष किसानों को गेंदा फूल की खेती से मिली सफलता ने भी उन्हें नई राह चुनने का आत्मविश्वास दिया।
गेंदा फूल की सबसे बड़ी ताकत इसकी निरंतर बाजार मांग है। धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसकी आवश्यकता पूरे वर्ष बनी रहती है। इसके साथ ही निकटवर्ती दुर्ग जिले का बड़ा बाजार है। वीरेंद्र साहू को विश्वास है कि कम पानी, अपेक्षाकृत कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह खेती उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
वे मानते हैं कि आज के दौर में खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढालना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि किसान धान के साथ-साथ कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को भी अपनाएं, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।
वीरेंद्र साहू राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को दी जा रही 15 हजार रुपये की आदान सहायता को भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को मिल रहा यह प्रोत्साहन नई सोच के साथ खेती करने का विश्वास दे रहा है। इससे अधिक से अधिक किसान परंपरागत खेती के साथ वैकल्पिक फसलों की ओर भी कदम बढ़ाएंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले ने हासिल किया पीएम किसान सम्मान निधि योजना का 80 प्रतिशत लक्ष्य
32 हजार 865 किसानों तक पहुंची सम्मान निधि की सहायता
शेष पात्र किसानों को जोड़ने के लिए अभियान तेज, हर पात्र किसान तक योजना का लाभ पहुंचाने का संकल्प
रायपुर, 6 जुलाई 2026
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में किसान कल्याण को नई मजबूती मिल रही है। जिले ने योजना के क्रियान्वयन में 80 प्रतिशत प्रगति हासिल कर यह साबित किया है कि किसानों तक केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने से खेती-किसानी के लिए आवश्यक कृषि निवेश आसान हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।
30 जून 2026 की स्थिति के अनुसार जिले के कुल 40 हजार 850 किसानों में से 33 हजार 59 किसानों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन किया जा चुका है। इनमें से 32 हजार 865 किसान योजना के अंतर्गत नियमित रूप से लाभ प्राप्त कर रहे हैं। योजना के माध्यम से पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जाती है। यह राशि किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक सहित अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।
जिला प्रशासन शेष पात्र किसानों को भी योजना से जोड़ने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। इसके तहत ई-केवाईसी, आधार सत्यापन, बैंक खाते के प्रमाणीकरण तथा नए पंजीयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे। प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक पात्र किसान तक योजना का लाभ सुनिश्चित करना है।
शेष 20 प्रतिशत प्रकरणों में शासकीय सेवक, आयकरदाता, मृत किसान अथवा अन्य अपात्र श्रेणी के मामले तथा लंबित पंजीयन शामिल हैं। ऐसे मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है, वहीं पात्र किसानों के दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन कर उन्हें योजना में शामिल करने के प्रयास भी जारी हैं।
जिला प्रशासन ने सभी पात्र किसानों से अपील की है कि जिन्होंने अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन नहीं कराया है अथवा ई-केवाईसी, आधार और बैंक खाते से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं, वे शीघ्र ही कृषि विभाग, जनपद पंचायत या लोक सेवा केंद्र के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करें। इससे वे योजना का लाभ समय पर प्राप्त कर सकेंगे और खेती-किसानी को आर्थिक संबल मिलेगा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जिले में किसान हितैषी शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और ग्रामीण विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
पर्यटन के नए दौर की ओर बढ़ा बलौदाबाजार जिला, छुइहा जलाशय से गिरौदपुरी धाम तक होगा व्यापक विकास
जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, स्थानीय रोजगार, पर्यटन सुविधाओं और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
रायपुर, 6 जुलाई 2026
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को पर्यटन की दृष्टि से नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए पर्यटन विकास की व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। कलेक्टर श्री कुलदीप शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के सुनियोजित विकास, पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में कलेक्टर श्री शर्मा ने कहा कि जिले में प्राकृतिक, धार्मिक और पारिस्थितिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं का समुचित उपयोग करते हुए पर्यटन स्थलों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा, जिससे जिले की पहचान मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि चिन्हित पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों में तेजी लाते हुए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
बैठक में शहर के निकट स्थित छुइहा जलाशय के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। कलेक्टर ने इसे जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए। जलाशय क्षेत्र में पर्यटकों के लिए आकर्षक वातावरण, आवश्यक आधारभूत सुविधाएं तथा मनोरंजन के अवसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही जलाशय की भूमि पर हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन विभाग को तत्काल कार्रवाई करने तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में खोरसी नाला पर नवीन कृषि उपज मंडी के समीप चेक डेम निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण, सोनबरसा जंगल सफारी में पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, गिरौदपुरी धाम के विकास तथा गिधौरी के समीप महानदी तट के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन परियोजनाओं के माध्यम से जिले में प्रकृति, धार्मिक और इको-टूरिज्म को नई पहचान देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हीरा स्व-सहायता समूह द्वारा छुइहा जलाशय में बोटिंग संचालन के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। समिति ने सुरक्षा मानकों और आवश्यक सुविधाओं का परीक्षण कराने के बाद इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।
बलौदाबाजार जिले में पर्यटन स्थलों के व्यवस्थित विकास से जिले में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, आतिथ्य सेवाओं, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, नौकायन और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को भी व्यापक बाजार प्राप्त होगा।
जिला पर्यटन विकास समिति की यह पहल बलौदाबाजार-भाटापारा को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति को एकीकृत करते हुए विकसित की जा रही यह कार्ययोजना आने वाले समय में जिले को पर्यटन के उभरते हुए केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष श्री अशोक जैन, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री दिव्या अग्रवाल, समिति के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बिहान से जुड़ी महिलाओं के परिवारों को मिला संबल
चार नॉमिनी को सौंपी गई बीमा राशि
रायपुर, 06 जुलाई 2026
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़े परिवारों के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना कठिन समय में आर्थिक सहारा बन रही है। सोमवार को जिला पंचायत कांकेर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने योजना के तहत चार मृतक हितग्राहियों के नामांकित परिजनों को बीमित राशि के चेक प्रदान किए।
बीमा राशि कांकेर विकासखंड के ग्राम मनकेशरी निवासी भूपेश देवांगन और पवन पटेल तथा ग्राम बारदेवरी निवासी रामेश्वरी पटेल और तेजसिंह दनेलिया के निधन के बाद उनके नॉमिनी को प्रदान की गई। बिहान मिशन के पीआरपी और एफएलसीआरपी ने तत्परता से बीमा दावा तैयार कर संबंधित बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कराई, जिसके बाद दावा स्वीकृत होने पर राशि का भुगतान किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में कांकेर विकासखंड में अब तक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के 9 बीमा दावों का सफलतापूर्वक निपटारा कर संबंधित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
दुर्ग के गांव-गांव में लबालब भरीं आजीविका डबरियां और नवा तरिया, जल संरक्षण से ग्रामीण आजीविका को मिलेगी नई मजबूती
बारिश के साथ दिखने लगा ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान का असर
रायपुर, 06 जुलाई 2026

मानसून की शुरुआत के साथ दुर्ग जिले में 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान 2.0 के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में दिखाई देने लगे हैं। अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया, चेक डैम, परकोलेशन पॉण्ड और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से लबालब भर रही हैं। इससे न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी तथा अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए वर्षभर पानी उपलब्ध हो सकेगा।
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन तथा सीईओ जिला पंचायत श्री बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान 2.0 और वीबी जी राम जी के प्रभावी समन्वय से जिले की 300 ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किए गए। जनभागीदारी से संचालित इस अभियान ने वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण को नई गति दी है।
एक ही वित्तीय वर्ष में जिले में 55,965 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 834 रिचार्ज पिट, 123 ग्राम तालाब, 26 चेक डैम, 15 परकोलेशन पॉण्ड तथा 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया। इन संरचनाओं में वर्षा जल का तेजी से संचयन होने से अभियान की उपयोगिता स्पष्ट रूप से सामने आने लगी है।
जिले में निर्मित 30 आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं 'नवा तरिया-आय के जरिया' पहल के अंतर्गत बनाए गए 112 डबरी एवं तालाब भी बारिश के पानी से भरने लगे हैं। इन जल संरचनाओं से मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों को वर्षभर स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।
जिला प्रशासन का मानना है कि 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान केवल जल संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ आने वाले समय में जल सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
बंदूक नहीं, अब स्टेयरिंग पर है भरोसा
सुकमा के पुनर्वासित युवा लिख रहे नई जिंदगी की कहानी
ड्राइविंग प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
प्रशासन बना बदलाव का सारथी
रायपुर, 6 जुलाई 2026
कभी हिंसा और भय के साये में जिंदगी बिताने वाले सुकमा के पुनर्वासित युवाओं की जिंदगी अब नई दिशा पकड़ रही है। हाथों में बंदूक की जगह अब वाहन की स्टेयरिंग है और आंखों में बेहतर भविष्य के सपने। जिला प्रशासन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की पहल से 31 पुनर्वासित युवा एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की मूलभूत मरम्मत का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे तुरंत रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।
प्रशिक्षणार्थी सोड़ी सोमड़ी कहती हैं कि इस प्रशिक्षण ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया है और अब उन्हें सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद दिखाई दे रही है। वहीं पुनेम ज्योति का कहना है कि ड्राइविंग कौशल उनके लिए भविष्य में आजीविका का मजबूत आधार बनेगा।
कलेक्टर श्री अमित कुमार के अनुसार, पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। आरसेटी की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, बदलाव की राह हमेशा खुली रहती है। आज इन युवाओं की स्टेयरिंग पर मजबूत पकड़ केवल गाड़ियों को नहीं, बल्कि उनके जीवन को भी नई मंजिल की ओर ले जा रही है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 से मिली राहत, तान्या बसोर का जन्म प्रमाण पत्र हुआ तैयार
रायपुर, 06 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन एवं जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के संकल्प के अनुरूप मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण कर लोगों को राहत प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के मैहर जिले के निवासी महेंद्र बसोर ने अपनी पुत्री तान्या बसोर का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनने की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराई थी। तान्या का जन्म 220 बिस्तर सिविल अस्पताल, मनेन्द्रगढ़ (छत्तीसगढ़) में हुआ था। जन्म दूसरे राज्य में होने के कारण जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में उन्हें विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा मामले का गंभीरता से परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की गई। परिणामस्वरूप मात्र 10 दिन के भीतर तान्या बसोर का जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर महेंद्र बसोर को उपलब्ध करा दिया गया। जन्म प्रमाण पत्र मिलने पर महेंद्र बसोर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का शीघ्र समाधान हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की जनहितैषी पहल से आम नागरिकों को समयबद्ध राहत मिल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की सराहना की।
अधिक वर्षा की स्थिति में किसान लेही पद्दति से धान की करें बुआई
मानसूनी वर्षा की वर्तमान स्थिति के दृष्टिगत किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
रायपुर, 06 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के मार्ग से सामान्यतः 14 जून के आसपास मानसून वर्षा का आगमन होता है, किन्तु इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बस्तर में लगभग 10 दिन विलंब से मानसून आया है। वर्तमान में प्रदेश के समस्त कृषि जलवायु क्षेत्रों जैसे बस्तर का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान एवं छत्तीसगढ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में मानसून पहुंच गया है। सामान्यतः जून के माह में छत्तीसगढ़ में लगभग 21 से.मी. वर्षा होती है, किन्तु इस वर्ष जून के माह में 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आगामी 8 जुलाई तक पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने का आसार हैं। वर्तमान में बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग को छोड़कर पूरे प्रदेश में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। विगत पांच दिनों में उपरोक्त दोनों संभागों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में व्यापक वर्षा हुई है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मानसून के देरी से आने के पश्चात् भी विगत 1 जुलाई से 6 जुलाई तक छत्तीसगढ का मैदानी भाग एवं बस्तर का पठार में अधिक वर्षा होने के कारण मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा हो चुका है। अतः इस प्रकार लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए किसान बन्धुओं को सलाह दी जाती है कि खेतों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता होने पर मचाई कर नर्सरी उपलब्ध होने पर रोपाई करें अथवा नर्सरी की अनुपलब्धता पर लेही विधि से अंकुरित बीजों को मचाई किये हुए खेतों में ड्रम सीडर एवं छिटकवा विधि से बुवाई करें। साथ ही नर्सरी एवं बीजों को कवकनाशी (कार्बेन्डाजिम) एवं जैव उर्वरकों से उपचारित कर रोपाई एवं बुवाई करें।
इस वर्ष अषाढ़ माह 1 जुलाई से प्रारंभ हुआ है। अषाढ़ माह से प्रारंभ होकर सावन मास की हरियाली अमावस्या अर्थात हरेली तिहार तक हम खरीफ फसल की बुआई एवं रोपाई कर सकते हैं। इस बार हरेली 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जो किसान भाई धान की सीधी बुआई करते हैं उन्हें परामर्श है कि जमीन में बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक धान की बुआई कर लेवें। रोपाई एवं बियासी पद्धति से धान की खेती करने वाले किसान भाई 30 जुलाई तक रोपाई एवं बियासी का कार्य कर लेवें। किसी असामान्य परिस्थिति के कारण विलंब होने से यदि आप हरेली तक भी बुआई रोपाई का कार्य करते हैं तो फसल के उत्पादन में ज्यादा नुकसान नहीं होगा
चूंकि इस बार मानसून विलंब से आया है इसलिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि इस वर्ष धान की शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जो कि 125-130 दिन तक पक जाती है जैसे- इन्द्रावती धान, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एम.टी.यू. 1010, एम.टी.यू. 1153, एम.टी.यू. 1156, एम.टी.यू. 1001, विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया आदि का उपयोग करें। एक एकड़ में सीधी बुआई एवं बियासी के लिए 30 कि.ग्रा., रोपा पद्धति में 20 कि.ग्राम तथा हाइब्रिड प्रजाति के लिए 6 कि.ग्रा. बीज का उपयोग करें। जिन खेतों में अधिक जल भराव हो गया है तथा वर्षा रुक नहीं रही हो तो लेही पद्धति से धान की बोआई करें। इस विधि में धान के अंकुरित बीजों की खेत में बुआई की जाती है
बुआई के पूर्व बीज को कार्बेन्डाजिम या किसी अन्य कवकनाशी दवा से उपचारित कर लें। 1 किलो बीज के लिए ढाई ग्राम दवा का प्रयोग करें। भूमि में नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटेशियम की पूर्ति के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। धान में एजोस्पाइरिलम, पी.एस.बी., के.एस.बी. का उपयोग करना चाहिए। इन तीनों तरल जैव उर्वरकों की 2-2 मि.ली. मात्रा अर्थात 6 मि.ली. तरल पदार्थ 4 मि.ली. पानी में मिला लें। इस प्रकार तैयार 10 मि.ली. के घोल से 1 कि.ग्रा. धान बीज को उपचारित कर दें। यह उपचार पौधों को लगभग 12 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 8 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 5 कि.ग्रा. पोटेशियम प्रति एकड़ प्रदान करेगा।
वर्तमान परिपेक्ष्य में लगातार वर्षा की स्थिति में धान की लेही विधि से बुवाई- वर्तमान परिपेक्ष्य में उन क्षेत्रों में लगातार वर्षा की स्थिति निर्मित होने के कारण धान की लेही विधि से बुवाई करना उपयुक्त रहेगा। इस हेतु धान के खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होने पर खेत की रोपा पद्धति की ही तरह अच्छी तरह से मचाई कर अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर अथवा छिटकवॉं विधि से बुवाई करें। इस विधि में मध्यम अवधि में पकने वाली (120-130 दिन लगभग) उपयुक्त किस्मों (विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया, एम.टी.यू. 1001) का चयन करें एवं इस हेतु बीज दर 40 किलों ग्राम प्रति एकड़ उपयोग करते हुए बीजों को 8-10 घंटे पानी में भिगोना चाहिए फिर इन भीगे हुए बीजों का पानी निथार दें, इसके बाद इन बीजों को पक्के फर्स पर रखकर बोरे से ठीक से ढ़क देना चाहिए। लगभग 24-30 घंटे में बीज अंकुरित हो जायेंगे। अब बोरे को हटाकर बीज को छाया में फैलाकर रखें एवं इन अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर यंत्र उपलब्ध होने पर पंक्ति में बोवाई करें अथवा छिटकवॉं विधि से बुुवाई करें।
छत्तीसगढ़ में लगभग 26 लाख हेक्टेयर में धान की सीधी बुआई एवं 12 लाख हेक्टेयर में रोपाई की जाती है। सीधी बुआई में खरपतवार एक प्रमुख समस्या है एवं यदि इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फसल बोने के 40 दिन बाद तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना आवश्यक है। मानव श्रम उपलब्ध होने पर बोने के 20 दिन एवं 40 दिन बाद हाथ अथवा पैडी वीडर से निंदाई करना उचित होगा। रासायनिक दवाई से भी संकरी पत्ती एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारो का प्रभावकारी निंदा नियंत्रण किया जा सकता है। इसके विकल्प निम्नानुसार है-
अंकुरण पूर्व निंदानाशक (व्यवसायिक नाम- पेन्डीमेथीलीन स्टाम्प, पेंडीगोल्ड, पेंडीलीन, धानुटांप, पेनिडा, पेंडीहबे आदि की 1000 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ में बुआई के 0 से 3 दिन के बीच छिड़काव करें। पाइरेजोसल्फूरान (व्यवसायिक नाम- साथी, सेवक, पाइरोसल्फ, लाठी आदि की 80 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में मिलाकर बोने के 0 से 3 दिन बाद तक एक एकड़ खेत में छिड़काव करें। बिसपायरी बेक सोडियम (व्यवसायिक नाम- नोमीनी गोल्ड, एडोरा, स्ट्राइडर, बिसफोर्स आदि की 100 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में मिलाकर 1 एकड़ खेत में बोने अथवा रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद छिड़काव करें अथवा क्लोरीम्यूरान इथाइल़$मेटसल्फ्यूरान मिथाइल (व्यवसायिक नाम- आलमिक्स, धारमिक्स, दिग्गज आदि की 8 मि.ली. दवा) को 150 लीटर पानी मिलाकर 1 एकड़ खेत में बोने अथवा रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद छिड़काव करें।
बाजार में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण रसायनों का उपयोग भी किया जा सकता है। किन्तु उपयोग के पूर्व वैज्ञानिकों अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श लें। खरपतवार नियंत्रण के लिए हाथ से निंदाई, मशीन से निंदाई अथवा रासायनिक दवा नियंत्रण में एक हजार से डेढ़ हजार रू. प्रति एकड़ तक खर्च आता है, किन्तु यदि समय पर खरपतवारों को नियंत्रण नहीं किया गया तो 20 हजार रू. प्रति एकड़ की हानि हो सकती है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्राथमिक सहकारी सोसायटी में पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी.के., सिंगल सुपरफास्फेट एवं पोटाश उर्वरकों का भंडारण कर दिया गया है। पिछले वर्ष के समान मात्रा में किसानों को उर्वरक देने के निर्देश जारी किए जा चुके है। रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ हरी खाद एवं नील हरित काई के उपयोग से एक एकड़ में 1 बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन प्राप्त होती है तथा मिट्टी की संरचना में भी सुधार होता है।
एक एकड़ भूमि में अधिकतम 2 बोरी यूरिया एवं 1 बोरी डी.ए.पी. का उपयोग करें। किसान भाई डी.ए.पी. की पूरी मात्रा को बुआई या रोपाई के पूर्व दे दे। 1 बोरी यूरिया को बोने या रोपाई के 30-35 दिन बाद एवं 1 बोरी यूरिया को बोने या रोपाई के 60-70 दिन बाद दिया जावे। जुलाई एवं अगस्त माह में धान की खेती में आने वाले कार्यों जैसे बुआई, रोपाई, उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन के लिए यह परामर्श जारी किए जा रहे है। सभी कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों में कृषक सलाह केन्द्र स्थापित किए गए हैं। किसी भी प्रकार की कठिनाइयों के निराकरण के लिए अपने निकटस्थ कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विभाग से सम्पर्क करें।