छत्तीसगढ़ / रायपुर
करोड़ों दिलों पर गूंजती रहेगी तंबूरे की तान और बुलंद आवाज: श्री अरुण साव
प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर उप मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया
रायपुर, 5 जुलाई 2026
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दुखद खबर से हम सभी को गहरा आघात लगा है। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पंडवानी की पहचान डॉ. तीजन बाई से थी।
श्री साव ने कहा कि उनका जाना देश के लिए और छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। करोड़ों दिलों पर तंबूरे की तान एवं बुलंद आवाज गूंजती रहेगी।
पंडवानी की अद्भुत प्रस्तुति
श्री साव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई की पंडवानी प्रस्तुति अद्भुत थी। अपनी बुलंद आवाज, अभिनय, लयबद्धता और सहयोगियों के संगीत से वे ऐसी प्रस्तुति देती थी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पंडवानी के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश और विदेश में प्रसारित किया। गांवों में आज भी उनकी पंडवानी कथा अमर है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके सभी परिजनों और चाहने वालों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
राज्यपाल ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर जताया शोक
रायपुर
राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर स्वर-कोकिला, पद्म विभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन केवल लोककला जगत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय गायन शैली, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपना संपूर्ण जीवन लोककला की साधना, संरक्षण और संवर्धन को समर्पित किया। उन्होंने पंडवानी जैसी समृद्ध लोक परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका व्यक्तित्व, कला-साधना और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और समस्त लोककला जगत को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
महिला स्व-सहायता समूहों के ‘विष्णु भोग’ चावल की खुशबू पहुंची पुलिस मुख्यालय तक
पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को भेंट किया गया जीपीएम की विशिष्ट पहचान ‘विष्णु भोग’ चावल, महिलाओं के आत्मनिर्भरता मॉडल और स्थानीय उत्पाद की सराहना
रायपुर, 05 जुलाई 2026
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के प्रवास पर पहुंचे पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम का स्वागत स्थानीय पहचान और कृषि समृद्धि के प्रतीक ‘विष्णु भोग’ चावल से किया गया। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने उन्हें जिले की विशिष्ट पहचान माने जाने वाले ‘विष्णु भोग’ चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। यह चावल जिले में बिहान योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पुलिस महानिदेशक को ‘विष्णु भोग’ चावल की विशेषताओं, उसकी गुणवत्ता तथा इसके उत्पादन और विपणन में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय कृषि उत्पादों को नई पहचान दिला रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय में भी वृद्धि कर रही है।
पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम ने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘विष्णु भोग’ चावल केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से जिले की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलती है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला समूहों द्वारा गुणवत्ता और परंपरा के साथ तैयार किए जा रहे ऐसे उत्पाद भविष्य में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएंगे। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से किसानों और महिला समूहों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, जिससे ग्रामीण विकास को भी गति मिलेगी।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार खिलारी तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन
पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक
रायपुर
प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. वह लंबे वक्त से बीमार चल रही थी. रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली. उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाई. महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज़, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने जीवंत बनाया. उनकी कला ने भारत के साथ-साथ एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष सम्मान मिला.
पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई. उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति!
तीजन बाई का निधन बड़ी क्षति – पूर्व सीएम भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण तीजन बाई जी का निधन छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश में कला और संस्कृति की बड़ी क्षति है. उन्होंने अपने गायन से पंडवानी विधा को सजीव रखा और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया. हम सब आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों व प्रशंसकों को संबल दे. ॐ शांति:
पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलिः छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमर आवाज़ हुई शांत
पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोकगायिका के निधन पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने जताया गहरा शोक, कहा- छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल रत्न खो दिया
रायपुर, 05 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और विश्व की लोक कला जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत कला, दमदार प्रस्तुति और समर्पण से पंडवानी जैसी लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनका निधन प्रदेश और देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
गरीब परिवार से निकलकर विश्व मंच तक का प्रेरणादायी सफर
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा तथा माता का नाम सुखवती बाई था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उनके नाना ब्रजलाल परधा से उन्हें इस लोककला की प्रारंभिक शिक्षा मिली।
महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिलाओं द्वारा पंडवानी की वेदमती शैली में बैठकर प्रस्तुति देने की परंपरा थी, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती देते हुए पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद, गायन और भाव-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुति देना शुरू किया। उनकी यही शैली आगे चलकर उनकी विशिष्ट पहचान बन गई।
हबीब तनवीर ने पहचानी प्रतिभा, बदल गई जिंदगी
प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दीं।
उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मॉरीशस, जापान सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का विश्वभर में परचम लहराया। उनकी प्रभावशाली आवाज, अभिनय और कथावाचन शैली ने विदेशी दर्शकों को भी भारतीय लोक परंपरा से परिचित कराया।
देश-विदेश में मिले अनेक प्रतिष्ठित सम्मान
लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार तथा 2019 में भारत के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त बिलासपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. (मानद उपाधि) प्रदान कर सम्मानित किया।
नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा
तीजन बाई ने न केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि इस लोकविधा से नई पीढ़ी के अनेक कलाकारों को भी जोड़ा। उनकी प्रेरणा से अनेक महिला कलाकारों ने पंडवानी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।
देशभर से उमड़ा श्रद्धांजलियों का सैलाब
तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके योगदान को सदैव अविस्मरणीय बताया।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान रहेंगी अमर
तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाया और पंडवानी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनके निधन से भले ही लोककला जगत ने अपनी बुलंद आवाज खो दी हो, लेकिन उनकी कला, उनकी शैली और उनकी विरासत आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनकी अमिट सांस्कृतिक विरासत भारतीय लोककला के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।
सफलता की नई उड़ान : पारंपरिक मजबूरी से 'लखपति दीदी' बनने तक का सफर
नारायणपुर की अनिता वड्डे ने 'बिहान' और उन्नत मुर्गीपालन से बदली अपने परिवार की तकदीर, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
रायपुर,05 जुलाई 2026
मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सही मार्गदर्शन यदि मिल जाए, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर जिले के विकासखंड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम भाटपाल की रहने वाली अनिता वड्डे ने। कभी आर्थिक तंगहाली और अनिश्चित भविष्य से जूझने वाली अनिता आज समाज में 'लखपति दीदी' के रूप में अपनी एक नई और सम्मानजनक पहचान बना चुकी हैं।
चुनौतियों भरा था शुरुआती सफर
कुछ समय पहले तक अनिता वड्डे के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बेहद सीमित खेती और अस्थायी मजदूरी थी। आमदनी इतनी कम थी कि घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। भविष्य को लेकर हमेशा एक चिंता बनी रहती थी, लेकिन अनिता ने अपनी इस नियति को स्वीकार करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की ठानी।
'बिहान' ने जगाया आत्मनिर्भरता का विश्वास
अनिता के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत 'जीवन स्व-सहायता समूह' से जुड़ीं। समूह में होने वाली नियमित बैठकों, बचत की आदतों और वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीकों ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास फूंका। इसी दौरान उन्हें बिहान के तहत संचालित एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना के बारे में पता चला। पारंपरिक ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की चाह में उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक आजीविका पद्धतियों को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर ने मुझे केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीने का गौरव भी दिया है।
वैज्ञानिक पद्धतियों से पाई सफलता
आईएफसी क्लस्टर के माध्यम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग ने अनिता के प्रयासों को पंख लगा दिए। उन्होंने 1500 चूजों की ब्रूडिंग (Brooding) की कमान संभाली और स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चूजों की आपूर्ति शुरू की। इससे न केवल उनकी बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई। संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वैज्ञानिक प्रबंधन का ही नतीजा था कि शुरुआती चरण में ही उन्हें 16 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।
अब लक्ष्य: 30 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय
इस शुरुआती सफलता ने अनिता के हौसलों को एक नई उड़ान दी है। आज वे अपने इस व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं। अब उनका अगला लक्ष्य इस आजीविका के माध्यम से हर महीने 30 हजार रुपये तक की नियमित और स्थिर आय अर्जित करना है।
आज उनका परिवार एक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी रहा है। अनिता अब सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी हैं। वे चाहती हैं कि गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सक्षम होकर अपने पैरों पर खड़ी हो। अनिता वड्डे की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही अवसर और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिख सकती हैं।
नारायणपुर के एकलव्य रचेंगे नई दिल्ली में इतिहास
जोनल राष्ट्रीय युवा संसद में छत्तीसगढ़ उपविजेता
8 बच्चों का संसद भवन के लिए चयन
रायपुर, 05 जुलाई 2026
नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के बच्चों ने वह कर दिखाया है, जिस पर आज पूरा छत्तीसगढ़ गर्व कर रहा है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल राज्य का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने शानदार और दमदार प्रदर्शन से उपविजेता (रनर-अप) का खिताब भी अपने नाम कर लिया।
जोनल राष्ट्रीय युवा संसद के कड़े मुकाबले में मध्य प्रदेश की टीम पहले स्थान पर रही, लेकिन छत्तीसगढ़ के इन 'एकलव्यों' ने अपनी प्रतिभा से सबका दिल जीत लिया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के दम पर विद्यालय के 8 होनहार छात्र-छात्राओं का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। अब ये बच्चे देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करेंगे और वहां लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर की कार्यवाही को अपनी आंखों से लाइव देखेंगे।
प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कांटे की टक्कर थी। छत्तीसगढ़ की टीम से जिन 8 बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की की है। उनमें
हर्षा ने प्रथम स्थान हासिल किया। इन्होंने 'स्पीकर' (लोकसभा अध्यक्ष) की बेहद चुनौतीपूर्ण भूमिका को इतनी कुशलता से निभाया कि प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। मनसाय और अनुराधा दोनों ने अपने तर्कों और प्रभावशाली प्रस्तुति से उपविजेता का स्थान पाया।
अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबती और शामी इन पांचों विद्यार्थियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया।
नारायणपुर जैसे पूर्व में नक्सल प्रभावित और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों के लिए संसद की कार्यवाही का हिस्सा बनना और फिर सीधे नई दिल्ली के संसद भवन तक का टिकट कटाना, उनके अदम्य साहस और आत्मविश्वास की कहानी बयां करता है।
उनकी इस सफलता के पीछे गुरुओं का मंत्र और प्रशासनिक संबल बच्चों की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे उनके गुरुओं की कड़ी मेहनत और प्रशासन का मजबूत साथ रहा है। विद्यालय के प्राचार्य के कुशल नेतृत्व और कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के समर्पित प्रशिक्षण ने बच्चों में वह आत्मविश्वास फूंका, जिससे वे मंच पर बिना झिझक के दहाड़ सके।
एकलव्य विद्यालय के प्राचार्य ने इस गौरवशाली पल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए NESTS मुख्यालय (नई दिल्ली), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्टेट सोसायटी (CTD रायपुर), नारायणपुर कलेक्टर और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सहित सभी विभागीय अधिकारियों का उनके निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार जताया है।
पद्म विभूषण डॉ तीजन बाई के निधन पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने जताया गहरा शोक
रायपुर, 5 जुलाई 2026
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पंडवानी डॉ. गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
श्री चौधरी ने कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस दुःखद घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी श्रद्धांजलि
डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर 5 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण
रायपुर 5 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने श्भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), नवा रायपुर में आयोजित चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान से जुड़कर पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरित एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण अभियानों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया
रायपुर, 05 जुलाई 2026
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर स्वर-कोकिला, पद्म विभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन केवल लोककला जगत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय गायन शैली, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपना संपूर्ण जीवन लोककला की साधना, संरक्षण और संवर्धन को समर्पित किया। उन्होंने पंडवानी जैसी समृद्ध लोक परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका व्यक्तित्व, कला-साधना और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और समस्त लोककला जगत को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
चिंतन शिविर 3.0: योग से हुई नई सुबह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिया स्वस्थ और संतुलित जीवन का संदेश
रायपुर, 05 जुलाई 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ्यास के साथ की। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) नवा रायपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित विशेष योग सत्र में उन्होंने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि नियमित योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन और प्रभावी निर्णय क्षमता के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से चिंतन शिविर के दौरान दिन की शुरुआत योग से की गई, ताकि सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास के इस सामूहिक आयोजन से चिंतन शिविर 3.0 में सकारात्मक ऊर्जा के साथ अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश को नई दिशा मिलेगी ।
योग सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा आईआईएम रायपुर के अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 5 जुलाई को करेंगे थोक बाजार डूमरतराई फेस-2 का नामकरण एवं लोकार्पण
गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित समारोह में होंगे शामिल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी करेंगे अध्यक्षता
रायपुर, 4 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित रायपुर के डूमरतराई थोक बाजार फेस-2 के नामकरण एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन 5 जुलाई 2026 (रविवार) को शाम 5:00 बजे किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी करेंगे।
कार्यक्रम में मंत्री श्री केदार कश्यप, मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इसके अलावा विधायक श्री राजेश मूणत, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक समारोह में शामिल होंगे।
46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी आवंटन से खरीफ सीजन के लिए खाद की उपलब्धता हुई सुनिश्चित
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा का जताया आभार
रायपुर, 4 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा छत्तीसगढ़ को 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी आवंटित किए जाने पर उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा के विशेष सहयोग से लिया गया यह निर्णय प्रदेश के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा से हुई भेंट के दौरान उन्होंने खरीफ सीजन की आवश्यकताओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ के लिए अतिरिक्त डीएपी उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। केंद्रीय मंत्री ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया था, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को अतिरिक्त डीएपी का आवंटन प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यूरिया की उपलब्धता पहले से ही पर्याप्त थी और अब अतिरिक्त डीएपी मिलने से खरीफ सीजन के लिए खाद की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। इससे किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा कृषि कार्य सुचारु रूप से संचालित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि उन्हें समय पर डीएपी, यूरिया सहित सभी आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार अन्नदाता के कल्याण और कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की
परिजनों से फोन पर चर्चा कर जाना स्वास्थ्य : बेहतर उपचार और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
रायपुर, 4 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई के अस्वस्थ होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। श्रीमती तीजन बाई वर्तमान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के मेडिकल आईसीयू में उपचाराधीन हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से स्वयं दूरभाष पर चर्चा कर उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि तीजन बाई के उपचार, निरंतर चिकित्सकीय निगरानी तथा सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रीमती तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय पंडवानी शैली और विलक्षण कला-साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनका योगदान राज्य की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है।
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि तीजन बाई शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ होकर पुनः अपनी अनुपम कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाती रहें।
सेवा सेतु से आसान हुई शासकीय सेवाओं की राह
रायपुर, 4 जुलाई 2026
शासन की महत्वाकांक्षी पहल सेवा सेतु पोर्टल नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने में प्रभावी साबित हो रहा है। पोर्टल के माध्यम से विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में लाभ प्राप्त किया जा रहा है। इससे नागरिकों का समय और धन दोनों बच रहे हैं तथा कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ रही है।
कोरबा जिले की पोड़ी उपरोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सुतर्रा निवासी कुमारी निधि सेन ने सेवा सेतु के माध्यम से समयबद्ध सेवा का लाभ प्राप्त किया। उन्होंने निवास प्रमाण पत्र के लिए ग्राम सुतर्रा स्थित लोक सेवा केंद्र में आवेदन किया। पटवारी प्रतिवेदन सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति के उपरांत उनका आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध रूप से निराकृत किया गया और उन्हें मात्र एक सप्ताह के भीतर निवास प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया।
निधि ने बताया कि आवेदन से लेकर प्रमाण-पत्र प्राप्त होने तक पूरी प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। उन्हें किसी भी कार्यालय के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़े, जिससे समय और आर्थिक व्यय दोनों की बचत हुई। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से शासकीय सेवाओं तक आम नागरिकों की पहुंच पहले की तुलना में अधिक सरल और सुगम हुई है। उन्होंने शासन की इस जनहितैषी पहल के प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाया है। समयबद्ध, पारदर्शी और उत्तरदायी सेवा वितरण की यह व्यवस्था सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक भी आसानी से शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन 1076 से श्रीमती तीजन बाई को मिला नया राशन कार्ड
शिकायत के त्वरित निराकरण से मिली राहत
हितग्राही ने शासन के प्रति जताया आभार
रायपुर 04 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किए जाने से आमजन को राहत मिल रही है। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंढा निवासी श्रीमती तीजन बाई मंडावी को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नया राशन कार्ड प्राप्त हुआ है।
ग्राम मेंढा निवासी श्री बलराम मंडावी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कर बताया था कि श्रीमती तीजन बाई मंडावी का नया राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है, जिससे उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी। शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा मामले का परीक्षण कर त्वरित कार्रवाई की गई। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए श्रीमती तीजन बाई मंडावी का नया राशन कार्ड जारी कर दिया गया। इसके पश्चात विभाग द्वारा दूरभाष के माध्यम से हितग्राही से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की गई, जिसमें श्रीमती तीजन बाई मंडावी ने नया राशन कार्ड प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए समाधान पर संतोष व्यक्त किया। श्रीमती तीजन बाई मंडावी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण हुआ और अब उन्हें राशन कार्ड प्राप्त हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की प्रभावी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है।