स्वच्छता की ओर बढ़ते कदम, बेमेतरा जिला बना मिसाल, घर-घर कचरा प्रबंधन से बदल रही गांवों की तस्वीर
बेमेतरा । सेवा संकल्प अभियान के तहत बेमेतरा जिले में स्वच्छता और जनभागीदारी को नई गति मिल रही है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत गांवों में घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर लगातार बदल रही है।
जनपद पंचायत साजा की ग्राम पंचायत ढाप सहित जिले के अनेक गांव स्वच्छता प्रबंधन में बेहतर कार्य करते हुए अन्य गांवों के लिए उदाहरण बन रहे हैं। इस अभियान की सबसे मजबूत कड़ी महिला स्वच्छता समूह और स्वच्छता दीदियां हैं, जो घर-घर पहुंचकर कचरा संग्रहण और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही हैं।
घर-घर कचरा संग्रहण से स्वच्छता को मिली मजबूती
जिले के गांवों में नियमित रूप से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। ग्रामीणों को *गीला, सूखा, सैनेटरी और विशेष कचरे* को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए वॉल पेंटिंग, मुनादी और स्वच्छता दीदियों के घर-घर संपर्क के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
जिले के 506 गांवों में यूजर चार्ज का नियमित संग्रहण सुनिश्चित किया जा चुका है, जिससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था को निरंतर और व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिल रही है।
गीले कचरे से बन रही जैविक खाद
गीले कचरे के उपयोगी निपटान के लिए ग्राम पंचायतों और महिला समूहों को नाडेप टांका के माध्यम से जैविक खाद निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे कचरे को बोझ न मानकर उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में ग्रामीणों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
सूखे कचरे से स्वच्छता के साथ आय का जरिया
महिला स्वच्छता समूह सूखे कचरे को सेग्रीगेशन शेड में लाकर उसकी छंटाई करते हैं। प्लास्टिक सहित अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर संबंधित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट, कबाड़ी एवं रीसाइकलरों तक पहुंचाया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से *स्वच्छता के साथ-साथ उनके समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का अवसर* भी मिल रहा है।
सोख पिट से गांवों में जलभराव पर नियंत्रण
गांवों की गलियों और मोहल्लों में बेकार पानी न बहे, इसके लिए आवश्यक स्थानों पर *सोख पिट* का निर्माण कराया जा रहा है। इससे गांवों को स्वच्छ रखने और गंदे पानी के उचित निपटान में मदद मिल रही है।
स्वच्छ सार्वजनिक स्थल, बेहतर ग्रामीण परिवेश
गांवों की मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही सामुदायिक शौचालयों के सुचारू संचालन और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आंकड़ों की नजर में बेमेतरा
683 — जिले में कुल ग्राम
683 — कचरा पृथक्करण शेड से आच्छादित गांव
683 — सक्रिय महिला स्वच्छता समूह
506 — यूजर चार्ज का नियमित संग्रहण करने वाले गांव
10 — प्रति महिला समूह औसत सदस्य संख्या
स्वच्छता की कमान संभाल रहीं ग्रामीण महिलाएं
गांव-गांव में महिला स्वच्छता समूह ट्राई साइकिल और विशेष कचरा वाहनों के माध्यम से सैनेटरी एवं विशेष कचरे का पृथक संग्रहण कर रहे हैं। वहीं टूल बॉक्स युक्त साइकिल कार्ट के माध्यम से घर-घर स्वच्छता सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
इन महिलाओं की सक्रिय भागीदारी यह संदेश दे रही है कि जब सेवा का संकल्प जनभागीदारी से जुड़ता है, तो बदलाव गांव की गलियों से दिखाई देने लगता है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी ध्यान
कचरा प्रबंधन में कार्यरत महिला समूहों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उनके लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के साथ समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है।
सेवा संकल्प से स्वच्छता का संकल्प
बेमेतरा जिले में स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि *जनभागीदारी से जुड़ा सेवा का संकल्प* बन रही है। जिला पंचायत के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, महिला स्वच्छता समूहों, स्वच्छता दीदियों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से गांव स्वच्छता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
ग्राम पंचायत ढाप की पहल इस बात की मिसाल है कि सामूहिक जिम्मेदारी और निरंतर प्रयास से गांवों में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
“कचरे का सही वर्गीकरण, स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण — यही है सेवा संकल्प की पहचान।”