कवर्धा -नगर पंचायत पांडातराई के एकमात्र तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में भारी अनियमितताओं और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त प्राक्कलन (एस्टीमेट) को सार्वजनिक करते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मौके पर किया जा रहा निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के बिल्कुल विपरीत और गुणवत्ता विहीन है।
आरटीआई से खुला खेल
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार तालाब सौंदर्यीकरण में जिन सामग्रियों, मोटाई, गहराई, ढलाई और अन्य तकनीकी बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा। आरोप है कि प्राक्कलन में उच्च गुणवत्ता की सामग्री दर्शाई गई है, जबकि कार्य में सस्ती और निम्न स्तरीय सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इससे निर्माण की मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इंजीनियर फील्ड से गायब
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी कार्यस्थल पर नियमित निरीक्षण के लिए उपस्थित नहीं रहते। निगरानी के अभाव में ठेकेदार को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई है। यदि तकनीकी परीक्षण और माप पुस्तिका का सही संधारण नहीं हुआ, तो भविष्य में यह निर्माण गंभीर खतरा बन सकता है।
कार्य में कमीशन का आरोप*
मामले का सबसे विस्फोटक पहलू कथित कमीशनखोरी है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यहां लंबे कमीशन का खेल चल रहा है। आरोप है कि 7 प्रतिशत कमीशन लेकर मनपसंद ठेकेदार को कार्य दिया गया और शेष हिस्सेदारी अन्य स्तरों पर बांटी जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नगर में यह जन चर्चा का विषय बना हुआ है।
दो समानांतर सरकार?
नगर में यह भी चर्चा है कि यहां दो तरह की सत्ता चल रही है—एक प्रशासनिक स्तर पर और दूसरी जनप्रतिनिधियों के प्रभाव में। अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी को भी कमीशन के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है। आरोप यह भी है कि कई विकास कार्यों के कार्यादेश इसलिए लंबित हैं क्योंकि कथित ‘कट’ तय नहीं हो पा रहा।
ठेकेदार पर उठे सवाल
ठेकेदार फर्म को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। नगर में यह चर्चा है कि क्या कार्य किसी प्रभावशाली समूह या परिवार से जुड़ी कंपनी— कंपनी से संबंधित फर्म—को दिया गया है? हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आए हैं, पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
प्राक्कलन की अनदेखी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वीकृत प्राक्कलन का पालन नहीं किया गया तो यह सीधे-सीधे शासकीय धन की हानि है। तालाब सौंदर्यीकरण का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल देना होता है। लेकिन यदि निर्माण मानकहीन होगा, तो इससे भविष्य में ढांचे के क्षतिग्रस्त होने और अतिरिक्त मरम्मत लागत का खतरा बढ़ जाएगा।
जनता की मांग – हो उच्चस्तरीय जांच
नगरवासियों ने इस पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच की मांग की है। थर्ड पार्टी निरीक्षण, माप पुस्तिका की जांच और भुगतान प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा यह मामला नगर निकायों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार का प्रतीक बन जाएगा।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इन आरोपों पर पारदर्शी जांच होगी या फिर तालाब सौंदर्यीकरण की यह कहानी भी कागजों में ही दफन हो जाएगी? नगर की जनता जवाब चाहती है—और जवाब अब जरूरी हो गया है।