छत्तीसगढ़ / राजनांदगांव

छत्तीसगढ़ की बेटी इतिहास रचने से एक कदम दूर... गरीबी को हरा, पिता की मेहनत और जुनून से अब कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को दिलाएगी गोल्ड?

 

इलेक्ट्रिशियन पिता की सीमित आय, परिवार के त्याग और वर्षों की मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया, जहां अब पूरा देश उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद लगाए बैठा है।

 राजनांदगांव। सोमवार को ग्लास्गो (स्काटलैंड) में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 के 53 किग्रा वर्ग की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता पर पूरे देश की नजरें रहेंगी। इस मुकाबले में राजनांदगांव की अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव भारत के लिए स्वर्ण पदक की प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं। वर्ष 2022 से लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी ने अपने प्रदर्शन से देश और प्रदेश दोनों का गौरव बढ़ाया है।

पिता के साथ व्यायामशाला से शुरू हुई खेल यात्रा

 

ज्ञानेश्वरी यादव की खेल यात्रा किसी आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से नहीं, बल्कि राजनांदगांव स्थित जय भवानी व्यायामशाला से शुरू हुई। उनके पिता दीपक यादव स्वयं बॉडी बिल्डिंग करते थे। जब ज्ञानेश्वरी सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं, तब वह पिता के साथ व्यायामशाला जाने लगीं।

बेटी की मेहनत और लगन देखकर दीपक यादव ने कोच अजय लोहार से उन्हें वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण देने का अनुरोध किया। उस दिन ज्ञानेश्वरी ने पहली बार बारबेल उठाया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

सीमित आय में पूरा परिवार बना ताकत

ज्ञानेश्वरी के परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक थी। दीपक यादव इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और महीने में केवल तीन से पांच हजार रुपये की आय होती थी। इसी कमाई से पूरे परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, ज्ञानेश्वरी की विशेष डाइट, खेल किट, जूते और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च पूरा किया जाता था।

परिवार ने कई बार अपनी जरूरतों को पीछे रखा, लेकिन ज्ञानेश्वरी की तैयारी में कभी कमी नहीं आने दी। यही त्याग आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

एक साइकिल पर तय होता था संघर्ष का सफर

ग्राम भोड़िया से दीपक यादव रोज सुबह अपने बच्चों को लेकर करीब आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर राजनांदगांव पहुंचते थे। बच्चे पहले स्कूल जाते और फिर घंटों व्यायामशाला में अभ्यास करते। रात करीब 11 बजे पूरा परिवार उसी साइकिल से गांव लौटता था।

घर पर मां दुर्गा यादव सीमित संसाधनों में पूरे परिवार की जिम्मेदारी निभाती थीं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद परिवार ने कभी ज्ञानेश्वरी के सपनों को टूटने नहीं दिया।

20-20 घंटे काम कर बेटी का सपना किया पूरा

दीपक यादव बताते हैं कि उन्होंने कई बार 20-20 घंटे तक काम किया, लेकिन बेटी की डाइट और प्रशिक्षण के साथ कभी समझौता नहीं किया। पासपोर्ट बनवाने से लेकर प्रतियोगिताओं में भेजने तक हर तैयारी समय रहते पूरी की जाती थी। उन्हें विश्वास था कि संघर्ष ही एक दिन उनकी बेटी को बड़ी सफलता दिलाएगा।

पहला पदक बना करियर का टर्निंग प्वाइंट

ज्ञानेश्वरी यादव के करियर में वर्ष 2017 अहम साबित हुआ। दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्होंने पहला कांस्य पदक जीता। इसी उपलब्धि ने परिवार का आत्मविश्वास बढ़ाया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती हैं।

इसके बाद वर्ष 2022 में भुनेश्वर में आयोजित जूनियर महिला वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका चयन पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान की अकादमी के लिए हुआ। इसी वर्ष उन्होंने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई।

जन्मदिन से पहले चुना अभ्यास

ज्ञानेश्वरी के पिता के अनुसार, परिवार कभी उनका जन्मदिन भी ठीक से नहीं मना सका। दोस्तों के साथ समय बिताने और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने जैसी कई सामान्य खुशियों का उन्होंने त्याग किया। वर्षों तक उनका जीवन स्कूल, व्यायामशाला और अभ्यास तक ही सीमित रहा। यही अनुशासन आज उन्हें देश की भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल करता है।

लगातार बढ़ता गया उपलब्धियों का सफर

वर्ष 2022 में ग्रीस में आयोजित जूनियर विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने लगातार सफलता हासिल की। वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सहायक उप निरीक्षक पद पर नियुक्त किया। हालांकि परिवार का संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। राजनांदगांव में लिया गया घर अब भी ऋण पर है और उसकी किस्त पूरा परिवार मिलकर चुका रहा है।

उनकी प्रमुख उपलब्धियों में वर्ष 2023 की एशियन यूथ एवं जूनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप का रजत पदक, कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के जूनियर और सीनियर वर्ग में स्वर्ण पदक, वर्ष 2024 विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व, वर्ष 2025 राष्ट्रीय खेलों का स्वर्ण पदक तथा वर्ष 2026 एशियाई सीनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक शामिल हैं। अब ग्लास्गो में होने वाले मुकाबले में पूरे देश को उनसे एक और स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद है।

Leave Your Comment

Click to reload image