छत्तीसगढ़ / मनेन्द्रगढ़ – चिरिमिरी – भरतपुर

सफलता की ओर बढ़ता कदम : आधुनिक खेती की राह पर किसान मोहर सिंह, पहली बार करेंगे नैनो डीएपी का उपयोग

 ग्राम बरौता के किसान ने अपनाई वैज्ञानिक कृषि पद्धति, बेहतर उत्पादन और कम लागत की जताई उम्मीद

एमसीबी/27 जुलाई 2026

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड भरतपुर अंतर्गत ग्राम बरौता के किसान श्री मोहर सिंह ने इस खरीफ सीजन में आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाते हुए पहली बार अपनी फसल में इफको नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को वैज्ञानिक खेती एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
श्री मोहर सिंह ने अपनी खेती के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति से नैनो डीएपी प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसी विश्वास के साथ उन्होंने इस वर्ष अपनी फसल में पहली बार नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है। मोहर सिंह ने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में उनके गांव तथा आसपास के कई किसानों ने नैनो डीएपी का उपयोग किया था। उन किसानों की फसल में बेहतर बढ़वार, पौधों की अच्छी वृद्धि और संतोषजनक उत्पादन देखने के बाद उनका विश्वास इस तकनीक के प्रति और मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि दूसरों की सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने भी इस वर्ष नई तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, “मैं पहली बार नैनो डीएपी का उपयोग कर रहा हूं। पिछले वर्ष हमारे गांव के किसानों को इसके अच्छे परिणाम मिले थे। उनकी फसल देखकर मुझे भी विश्वास हुआ कि यह तकनीक खेती के लिए लाभदायक है। मुझे उम्मीद है कि इससे मेरी फसल की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।“
मोहर सिंह ने नैनो डीएपी की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका आसान परिवहन है। पहले जहां पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियां ढोनी पड़ती थीं, वहीं नैनो डीएपी की छोटी बोतल को आसानी से बैग में रखकर खेत तक ले जाया जा सकता है। इससे किसानों का समय, श्रम और परिवहन संबंधी कठिनाइयां कम होती हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसान कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में नई तकनीकों का सही उपयोग करें, तो खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकती है।
कृषि विभाग द्वारा जिले में किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के संबंध में लगातार प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।

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