छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

कबीरधाम में प्रशासनिक कसावट की कवायद तेज नये कलेक्टर श्रीमती तूलिका प्रजापति ने सभी विभागों की ली मैराथन बैठक

  कवर्धा।

कबीरधाम जैसे राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से प्रभावशाली जिले में कलेक्टर की कुर्सी बदलते ही प्रशासनिक गलियारों में बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। आईएएस तूलिका प्रजापति के कलेक्टर पद की कमान संभालते ही पहले ही सप्ताह में अधिकारियों की कार्यशैली में कसावट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक ढिलाई के बीच नए नेतृत्व ने जिलेवासियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
पूर्व कलेक्टर गोपाल वर्मा करीब दो वर्ष तक कबीरधाम के कलेक्टर रहे। उनके कार्यकाल में जिले के विभिन्न क्षेत्रों का लगातार दौरा कर अधिकारियों को निर्देश दिए जाते रहे। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई निर्देशों के अपेक्षित क्रियान्वयन नहीं होने की चर्चाएं भी बनी रहीं। सवाल उठता रहा कि जब कलेक्टर स्तर से लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं तो अधीनस्थ अमला उन निर्देशों को गंभीरता से लेकर अमल क्यों नहीं कर रहा।
अब नई कलेक्टर के पदभार संभालने के साथ प्रशासनिक कामकाज के तौर-तरीकों में शुरुआती बदलाव नजर आने लगा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव समय-सीमा की बैठक को लेकर बताया जा रहा है। पहले यह बैठक मंगलवार को आयोजित होती थी, लेकिन अब सप्ताह के प्रथम कार्यदिवस यानी सोमवार को बैठक आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। इससे सप्ताह की शुरुआत से ही प्रशासनिक प्राथमिकताओं और लंबित मामलों की समीक्षा का संदेश जाता है।
चर्चा यह भी है कि पहले कई बार विभाग प्रमुख की जगह अधीनस्थ कर्मचारी या प्रतिनिधि बैठक में पहुंच जाते थे। अब संबंधित विभाग प्रमुख की स्वयं मौजूदगी को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आ रही है। यदि यह व्यवस्था निरंतर लागू रहती है तो निश्चित रूप से अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
इधर पुलिस विभाग में भी नए पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद लगातार कार्रवाई का सिलसिला जारी है। दोनों अधिकारियों को अभी पखवाड़ा भर का समय ही हुआ है, लेकिन पुलिस की सक्रियता से अपराधियों में भय का वातावरण बनने का संदेश जा रहा है। लगातार कार्रवाई से कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस की गंभीरता भी सामने आ रही है।

कबीरधाम की प्रशासनिक व्यवस्था में अब असली परीक्षा आदेशों की नहीं, बल्कि उनके धरातल पर क्रियान्वयन की होगी। बैठक सोमवार को होने लगी है, लेकिन जनता यह देखना चाहेगी कि अधिकारियों की कार्यशैली भी सोमवार से ही बदलती है या केवल बैठक का दिन बदला है।

जिले में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नए नेतृत्व से प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उम्मीद जगी है। अब जरूरत इस बात की है कि यह शुरुआती कसावट केवल कुछ दिनों की हलचल न रह जाए, बल्कि पूरे कार्यकाल में जवाबदेही, अनुशासन और त्वरित कार्रवाई की स्थायी व्यवस्था बने।

कुर्सी बदली है तो उम्मीद है कि अब फाइलों की चाल भी बदलेगी और आदेशों की गूंज दफ्तर से निकलकर जमीन तक पहुंचेगी

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