छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

मैनपुर के भाटापानी स्थित ज्ञान ज्योति प्राथमिक शाला कामारपारा का मामला, ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत भाटापानी स्थित ज्ञान ज्योति प्राथमिक शाला कामारपारा से शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षक सतीश कुमार दुबे शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। वहीं, स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन यानी पीएम पोषण योजना के तहत भोजन को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।



नशे की हालत में स्कूल पहुंचने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार शिक्षक सतीश कुमार दुबे स्कूल समय के दौरान कथित तौर पर महुआ शराब के नशे में पाए गए। शिक्षक के इस तरह स्कूल पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है।


ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी निभाते हैं, ऐसे में स्कूल समय में नशे की हालत में पहुंचना गंभीर लापरवाही है। मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

मध्याह्न भोजन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
शिक्षक से जुड़े मामले के साथ ही स्कूल में मध्याह्न भोजन व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने शिकायत की है। आरोप है कि बच्चों को निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है और लंबे समय से सिर्फ दाल-चावल परोसे जाने की बात सामने आ रही है।


ग्रामीणों का आरोप है कि पीएम पोषण योजना के तहत निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं किया जा रहा है। इससे बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग
पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।


मामले को लेकर मैनपुर बीईओ देवनाथ बघेल का पक्ष भी सामने आया है। अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों और मध्याह्न भोजन व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों में कितनी सच्चाई है।


शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
स्कूल बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करने का स्थान है। ऐसे में शिक्षक के कथित रूप से नशे की हालत में स्कूल पहुंचने और बच्चों के भोजन की व्यवस्था में कथित अनियमितता के आरोपों ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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