** उदका पंचायत में लाखों के कथित घोटाले पर जांच टीम अब तक खामोश**- शिकायतकर्ताओं को जांच रिपोर्ट का इंतजार--
कबीरधाम |
2026-09-15 18:42:06
** उदका पंचायत में लाखों के कथित घोटाले पर जांच टीम अब तक खामोश**- शिकायतकर्ताओं को जांच रिपोर्ट का इंतजार--
15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग की शिकायत के बाद तीन सदस्यीय जांच टीम ने की पड़ताल; करीब 10 लाख रुपये के कथित अनियमित भुगतान का मामला, कार्रवाई अब तक अधर में
"विकाश शुक्ला"
पंडरिया --जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत उदका में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग का मामला अब जांच रिपोर्ट के इंतजार में अटक गया है। करीब 10 लाख रुपये की राशि के उपयोग को लेकर की गई शिकायत के बाद प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। टीम ने पंचायत पहुंचकर जांच-पड़ताल भी की, लेकिन अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है। मामले की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सड़क, पंचायत भवन से लेकर पेयजल व्यवस्था तक पर सवाल
शिकायत में ग्राम पंचायत की सरपंच एवम सचिव पर 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार सड़क मरम्मत, पंचायत भवन मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप, बोर खनन, सीसी रोड, नाली सफाई और स्वच्छता सहित विभिन्न कार्यों के नाम पर राशि का आहरण किया गया, जबकि इनमें से कई कार्य मौके पर दिखाई नहीं दिए।
शिकायतकर्ताओं ने पंचायत के आय-व्यय का हिसाब और कार्यों से संबंधित जानकारी मांगी थी। आरोप है कि उन्हें अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच और पंचायत की राशि के आहरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए अनुविभागीय अधिकारी पंडरिया सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत सौंपी गई।
जांच में करीब तीन लाख रुपये के भुगतान पर उठे सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। जांच टीम ने पंचायत पहुंचकर विभिन्न कार्यों और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान दो मोटरों, सड़क मरम्मत और जीरा गिट्टी से जुड़े कार्यों में कथित अनियमितताओं के बिंदु सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि करीब एक लाख रुपये की मोटर, लगभग एक लाख रुपये के सड़क मरम्मत कार्य और करीब एक लाख रुपये की जीरा गिट्टी से संबंधित भुगतान अथवा कार्यों की स्थिति जांच के दायरे में है। प्रारंभिक स्तर पर करीब तीन लाख रुपये की राशि के कथित अनियमित उपयोग या वसूली योग्य होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों और राशि की वास्तविक स्थिति की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
जांच पूरी होने के बाद भी रिपोर्ट क्यों लंबित?
जांच टीम द्वारा मौके पर पड़ताल किए जाने के बावजूद रिपोर्ट अब तक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच के दौरान भुगतान और कार्यों में विसंगतियां सामने आई हैं, तो रिपोर्ट सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है? क्या जांच रिपोर्ट तैयार करने में असामान्य विलंब हो रहा है
या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया जा रहा है?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित अधिकारियों को देना होगा। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शासकीय राशि के उपयोग का होना चाहिए भौतिक सत्यापन
15वें वित्त आयोग की राशि गांव के विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में सड़क, पेयजल, सफाई, पंचायत भवन और अन्य विकास कार्यों के नाम पर किए गए भुगतान का भौतिक सत्यापन आवश्यक है। कार्यों की वास्तविक स्थिति, स्वीकृत राशि, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का मिलान कर ही वित्तीय अनियमितता की पुष्टि की जा सकती है।
यदि जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों से नियमानुसार राशि की वसूली और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन पर
उदका पंचायत का मामला अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। करीब 10 लाख रुपये के कथित वित्तीय दुरुपयोग की शिकायत, जांच के दौरान सामने आने वाले करीब तीन लाख रुपये के कथित संदिग्ध भुगतान और तीन सदस्यीय जांच टीम की लंबित रिपोर्ट ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की निगाहें जनपद पंचायत पंडरिया तथा जिला पंचायत कबीरधाम के अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना होगा कि प्रशासन जांच रिपोर्ट सामने लाकर निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रहा जाऐगा ।