छत्तीसगढ़ / कोरिया

कोरिया : गणेश प्रसाद के खेतों में आई हरियाली से बदल रहा है उनका जीवन

 जल ही जीवन है। लंबे समय से इस कहावत को कहा और सुना जा रहा है। इसी तरह हर किसान जिसके पास सिंचाई का कोई साधन नहीं है वह भी बिना जल के अधूरा जीवन जीने को मजबूर है। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत बेलिया में रहने वाले गणेश प्रसाद के जीवन में भी खेती योग्य भूमि होने के बाद भी संकट के बादल बने रहते थे। सिंचाई की कोई सुविधा न होने से वह बारिश पर आश्रित रहते थे। ऐसे में उनके खेतों में अच्छी फसल के लिए कोई उम्मीद नहीं थी। मनरेगा से बने कूप ने उनके खेतों में हरियाली लौटा दी है। अब उनका जीवन खुषहाली की राह पर आगे बढ़ रहा है।

पानी का गंभीर संकट
कोरिया जिले के ग्राम पंचायत बेलिया में रहने वाले गणेश प्रसाद साहू का परिवार जलसंकट से जूझ रहा था। उनके आस पास कोई जलस्रोत ना होने से वह अपने घरेलू उपयोग और पेयजल के लिए भी सार्वजनिक हैंडपंप पर आश्रित थे। ऐसे में उनके घर के पास लगी लगभग दो एकड़ भूमि खाली अनुपयोगी पड़ी रहती थी। उससे यह परिवार कोई लाभ नहीं ले पाता था। ऐसे में मनरेगा के तहत बने कूप ने उनके जीवन में खुषहाली के बीज बोए हैं।

जलसंसाधन से बदलाव
हितग्राही श्री गणेष प्रसाद के आवेदन पर ग्राम पंचायत द्वारा उनके निजी भूमि में एक कूप निर्माण कार्य को प्रस्तावित किया गया। प्रषासकीय स्वीकृति के बाद लगभग ढाई लाख रूपए की लागत से गणेष प्रसाद के बाड़ी में एक कूप का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया गया। समय-सीमा में कार्य पूर्ण होने से अब गणेश प्रसाद के खेतों में सिंचाई के लिए भरपूर जल है। इसका वह दैनिक जीवन में भी नियमित उपयोग कर रहे हैं।

बनी सिंचाई की सुविधा
कूप निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद से गणेष प्रसाद के गहरे कुंए में भरपूर जलभराव है। उन्होने बताया कि अब वह अपने बाड़ी में दलहन तिलहन की अलग-अलग फसलें ले रहे है। सिंचाई की सुविधा मिल जाने से उन्होने अपने सात एकड़ खेतों के लिए धान की नर्सरी समय पर लगाई और इस साल उनकी धान की फसल भी अच्छी है। इससे उन्हे अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है। गणेष प्रसाद ने बताया कि वह अपने दो एकड़ की बाड़ी में आलू सहित अन्य सब्जी की फसलें लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि गणेश प्रसाद जैसे किसानों की सेवा करने और विकसित भारत की संकल्प को पूरा करने में मदद मिल रही है।

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