छत्तीसगढ़ / दुर्ग

छात्रों ने बनाई विकसित भारत की तस्वीर, स्कूल शिक्षा मंत्री ने बढ़ाया उत्साह

 दुर्ग । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। शुक्रवार को पाटन स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी विद्यार्थियों के लिए  ड्रॉइंग एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी कला-कौशल और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किये। स्‍कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने आयोजन में शामिल होकर विद्यार्थियों की बनाई हुई कलाकृतियों का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किया।

 
 
 

विद्यालय परिसर में आयोजित चित्रकारी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा देखने को मिली। विद्यार्थियों ने रंगों और चित्रों के माध्यम से देश की प्रगति, आत्मनिर्भरता, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं तकनीक सहित विभिन्न विषयों को अपनी चित्र में स्थान दिये। रंगोली के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाओं को आकर्षित रूप में प्रस्तुत किये।

 
 
 

स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से विकसित भारत की सुंदर तस्वीर को कागज और रंगों में जीवंत रूप से उकेरा है। विद्यार्थियों की कलाकृतियों में केवल रंग और आकृतियां ही नहीं, बल्कि उनके सपने, उनकी सोच और देश के भविष्य को लेकर उनकी कल्पनाएं भी दिखाई देती हैं। 

मंत्री  गजेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प देश के सामने रखा है, उसमें युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आज के विद्यार्थी ही कल के भारत का नेतृत्व करेंगे। इसलिए बच्चों में शुरू से ही रचनात्मक सोच, नवाचार, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी बनाई कलाकृतियों के विषय में जानकारी ली और उनकी कल्पनाओं की सराहना की। मंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी रुचि और प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए भी पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। कला, खेल, विज्ञान, तकनीक और अन्य रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

 

मंत्री यादव ने कहा कि प्रतियोगिता में किसी विद्यार्थी की सफलता केवल पुरस्कार प्राप्त करने तक सीमित नहीं होती। मंच पर आकर अपनी कला प्रस्तुत करना, दूसरों की कला को देखना और उससे सीखना भी विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजन बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, सहयोग और अपनी प्रतिभा के प्रति विश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे प्रोत्साहित करना शिक्षक और विद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बच्चों को जितने अधिक अवसर अपनी प्रतिभा को सामने लाने के मिलेंगे, उनका आत्मविश्वास उतना ही मजबूत होगा।

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