*पंडरिया शक्कर कारखाना के प्रबंध संचालक का हुवा स्थानातंरण आखिर प्रभार देने में हिचकिचाहट क्यों-?--क्या पंडरिया शक्कर कारखाना के अधिकारी शासन के स्थानांतरण आदेशों से ऊपर है?
कबीरधाम |
2026-09-19 18:33:58
*पंडरिया शक्कर कारखाना के प्रबंध संचालक का हुवा स्थानातंरण आखिर प्रभार देने में हिचकिचाहट क्यों-?--क्या पंडरिया शक्कर कारखाना के अधिकारी शासन के स्थानांतरण आदेशों से ऊपर है?
पंडरिया/कवर्धा--
पंडरिया स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना में अधिकारि के स्थानांतरण और पदभार हस्तांतरण को लेकर बार-बार ऐसी स्थिति क्यों बन रही है, यह अब यह लोगो के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
इससे पूर्व में भी राकेश सिंह राजपूत का स्थानांतरण किया गया था और उनके स्थान पर दूसरे अधिकारी अनिल बनज का स्थानांतरण किया गया था। इसके बावजूद पदभार छोड़ने और विधिवत रिलीव होने की प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति बनी रही। बाद में राजनीति माध्यम से उनका स्थानांतरण पुनः कारखाना हो गया।
अब एक बार फिर लगभग उसी तरह की स्थिति सामने आती दिखाई दे रही है।
वर्तमान प्रबंध संचालक उत्तर कुमार कौशिक का स्थानांतरण महाप्रबंधक, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, नवा रायपुर के पद पर किया जा चुका है। वहीं नए प्रबंध संचालक आशुतोष डडसेना अपने पूर्व पद से विधिवत रिलीव होकर ज्वाइनिंग के लिए कारखाना पहुंच चुके हैं और शक्कर कारखाना मे आवक-जावक की प्रक्रिया भी पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद वर्तमान प्रबंध संचालक द्वारा पदभार छोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं होना कई गंभीर सवालों को खड़े करता है।
**आखिर शासन के आदेश का पालन कब होगा?**
सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेशों का पालन करना संबंधित अधिकारियों के लिए अनिवार्य नहीं है?
यदि किसी अधिकारी का स्थानांतरण विधिवत आदेश के माध्यम से हो चुका है, तो उसके बाद पदभार हस्तांतरण में देरी क्यों?
क्या हर बार राजनीतिक हस्तक्षेप के माध्यम से स्थानांतरण आदेशों को प्रभावित किया जा सकता है?
और सबसे बड़ा सवाल—आखिर पंडरिया शक्कर कारखाने में पदस्थ बड़े अधिकारी यहां से जाना ही क्यों नहीं चाहते?
यदि प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार बड़े अधिकारियों का कार्यकाल सामान्यतः सीमित अवधि का रखा जाना चाहिए, तो फिर एक ही स्थान पर लंबे समय तक बने रहने और स्थानांतरण के बाद भी पदभार हस्तांतरण में देरी की स्थिति क्यों उत्पन्न होती है?
**क्या निजी हित जुड़े होने की आशंका है?**
बार-बार स्थानांतरण, पदभार हस्तांतरण और उसके बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियां स्वाभाविक रूप से यह सवाल पैदा करती हैं कि कहीं इसके पीछे किसी प्रकार का निजी या अन्य हित तो नहीं जुड़ा हुआ है।
हम किसी अधिकारी पर बिना जांच के आरोप नहीं लगा रहे हैं। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि इन परिस्थितियों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो तथा शासन के आदेशों का नियमानुसार पालन कराया जाए।
क्योंकि दूसरी तरफ कारखाने के श्रमिक अपने 8 महीने के लंबित वेतन और पिछले हड़ताल समझौते के बकाया भुगतान के लिए परेशान हैं।
जब श्रमिकों को उनका मेहनताना समय पर नहीं मिल रहा है, तब प्रशासनिक पदों को लेकर इस प्रकार की खींचतान आखिर क्यों?
शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेशों का तत्काल पालन कराया जाए।
नए प्रबंध संचालक को नियमानुसार पदभार ग्रहण कराया जाए।पदभार हस्तांतरण में हुई देरी के कारणों की जांच कराई जाए।
श्रमिकों का लंबित वेतन और हड़ताल से संबंधित बकाया भुगतान तत्काल जारी किया जाए।
यदि किसी प्रकार का राजनीतिक या निजी हस्तक्षेप हुआ है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच हो।
पंडरिया शक्कर कारखाना किसी व्यक्ति या राजनीतिक प्रभाव का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों और श्रमिकों की मेहनत से चलने वाली संस्था है।