छत्तीसगढ़ / कोरिया

सेवा संकल्प से आत्मनिर्भरता की ओर खेती के साथ मत्स्य पालन अपनाकर बाल गोविंद ने बढ़ाई अपनी आय

 कोरिया । शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। इसी भावना को साकार करता सेवा संकल्प अभियान जिले में शासन की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को सामने ला रहा है।

सोनहत विकासखंड के ग्राम पोड़ी-अमहर निवासी बाल गोविंद, पिता विश्वनाथ, पहले मुख्य रूप से कृषि कार्य करते थे। परिवार के लिए आय का प्रमुख साधन केवल खेती होने के कारण आमदनी सीमित थी। परिवार में सात सदस्य होने के कारण दैनिक एवं जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ति में भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

इसी स्थिति को बदलने के लिए बाल गोविंद ने खेती के साथ मत्स्य पालन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। उन्हें मछली पालन विभाग द्वारा आयोजित शिविर एवं विभागीय माध्यम से मत्स्य पालन प्रसार योजना की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग में आवेदन किया और योजना के माध्यम से मत्स्य पालन के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त किए।

योजना से मिला सहयोग, शुरू हुआ नया व्यवसाय

मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत बाल गोविंद को एक आईस बॉक्स जिसकी राशि 6 हजार रू. तथा एक महाजाल जिसकी राशि 10 हजार रू. है, शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा 20 पैकेट मत्स्य बीज, जिसकी राशि 2,800 है, 50 प्रतिशत अनुदान पर प्रदान किया गया।

विभाग से मिले मत्स्य बीज, जाल और आईस बॉक्स जैसे संसाधनों तथा विभागीय मार्गदर्शन के सहयोग से बाल गोविंद ने अपनी भूमि पर तालाब में मत्स्य पालन शुरू किया। इससे उन्हें कृषि के साथ आय का एक नया और नियमित स्रोत मिला।

आय में 60 हजार रू. वार्षिक की बढ़ोतरी

योजना का लाभ मिलने से पहले बाल गोविंद की अनुमानित आय 7 हजार प्रतिमाह यानी 84 हजार प्रतिवर्ष थी। मत्स्य पालन शुरू करने के बाद उनकी वर्तमान आय बढ़कर लगभग 12 हजार प्रतिमाह यानी 1.44 लाख प्रतिवर्ष हो गई है। इस प्रकार उनकी वार्षिक आय में लगभग 60 हजार रू. की वृद्धि हुई है।

आय बढ़ने से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अब वे परिवार की जरूरी आवश्यकताओं को पहले की अपेक्षा बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ उनके सामाजिक स्तर और जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है।

सेवा से सशक्तिकरण और सशक्तिकरण से आत्मनिर्भरता

बाल गोविंद की कहानी बताती है कि जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचता है और उसके साथ विभागीय मार्गदर्शन मिलता है, तो सहायता आजीविका के स्थायी साधन में बदल सकती है।

सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से ऐसी ही कहानियां सामने आ रही हैं, जहां शासकीय योजनाओं से मिले सहयोग ने ग्रामीण परिवारों को नई आर्थिक संभावनाएं दी हैं। बाल गोविंद ने कृषि के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाई और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। आज वे मत्स्य पालन से नियमित आय अर्जित करते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

हितग्राही की जुबानी

“पहले मेरी आमदनी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक कठिनाई होती थी। मत्स्य पालन प्रसार योजना के माध्यम से मुझे मत्स्य बीज, जाल और आईस बॉक्स की सहायता मिली। खेती के साथ मछली पालन शुरू करने से मेरी आय बढ़ी है और अब मैं अपने परिवार की जरूरी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रहा हूं।”

योजना की प्रमुख उपलब्धि

योजना के माध्यम से हितग्राही को मत्स्य बीज रियायती दर पर प्राप्त हुआ, वहीं मत्स्य पालन के लिए आवश्यक महाजाल एवं आईस बॉक्स शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए गए। इन संसाधनों के साथ विभागीय मार्गदर्शन ने हितग्राही को मत्स्य पालन शुरू करने और उसे आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

बाल गोविंद की यह सफलता “सेवा संकल्प अभियान” के उस उद्देश्य की जीवंत मिसाल है, जिसमें शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से हितग्राहियों को सशक्त, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का संकल्प लिया गया है।

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