कृषि के साथ मत्स्य पालन अपनाकर आत्मनिर्भर बने किसान संजय शर्मा, आय दोगुनी के करीब
कोरिया । राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिले शासकीय सहयोग से कोरिया जिले के नगर गांव के किसान संजय शर्मा ने कृषि और मुर्गी पालन के साथ मत्स्य पालन शुरू कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
पहले उनकी आय मुख्य रूप से कृषि और मुर्गी पालन पर निर्भर थी। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने मत्स्य पालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में अपनाया। योजना के तहत उनकी निजी भूमि पर एक हेक्टेयर तालाब निर्माण के लिए 2.80 लाख रुपए का अनुदान दिया गया। इसके अलावा आइस-बॉक्स 6,000 रुपये और महाजाल 10,000 रुपए शत-प्रतिशत अनुदान पर, जबकि 14,000 रुपए मूल्य के 100 पैकेट मत्स्य बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए गए।इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन से मत्स्य पालन को व्यवस्थित रूप मिला और परिवार की आय का अतिरिक्त स्रोत विकसित हुआ।
65 हजार से बढ़कर 1.25 लाख रुपए हुई मासिक आय
योजना का लाभ मिलने से पहले संजय शर्मा की अनुमानित आय 65,000 प्रतिमाह यानी 7.80 लाख वार्षिक थी। मत्स्य पालन शुरू करने के बाद यह बढ़कर 1.25 लाख प्रतिमाह यानी 15 लाख वार्षिक हो गई। उनकी मासिक आय में करीब 60,000 की वृद्धि हुई है। आय बढ़ने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
हितग्राही ने जताया आभार
संजय शर्मा ने कहा पहले मेरी आय कृषि और मुर्गी पालन तक सीमित थी। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तालाब निर्माण, मत्स्य बीज और आवश्यक उपकरण मिलने से मत्स्य पालन शुरू करने में मदद मिली। अब इससे अतिरिक्त आय हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।”
संजय शर्मा की सफलता दर्शाती है कि कृषि के साथ सहायक गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय और आजीविका को मजबूत कर सकते हैं। शासकीय योजना, विभागीय मार्गदर्शन और उनके प्रयासों से मत्स्य पालन आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है।