उन्नत मूंग की खेती से किसान गिरधारी बारी ने दो महीने में कमाए 22 हजार का अतिरिक्त आय
महासमुंद, 24 सितंबर 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा का देशभर में सेवा, सुशासन और जनकल्याण की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में किसानों की आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव महासमुंद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और उन्नत कृषि तकनीक को अपनाकर विकासखंड सरायपाली के ग्राम राजाडीह निवासी प्रगतिशील कृषक श्री गिरधारी बारी ने महज दो महीने में मूंग की खेती से 22 हजार रुपये का अतिरिक्त शुद्ध लाभ अर्जित कर मिसाल पेश की है।
श्री गिरधारी बारी ने कृषि विभाग, सरायपाली के सहयोग से लगभग एक एकड़ क्षेत्र में मूंग की उन्नत किस्म आईपीएम 410-3 (शिखा) का प्रदर्शन किया। कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने समय पर बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय अपनाए। वैज्ञानिक कृषि पद्धति और उन्नत किस्म के उपयोग से फसल की बढ़वार अच्छी रही तथा फलियों का विकास भी बेहतर हुआ। महज 60 से 65 दिनों में फसल तैयार होने के बाद उन्हें कुल 4 क्विंटल मूंग का उत्पादन प्राप्त हुआ। मूंग की औसत बाजार दर 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार उन्हें 32 हजार रुपये की सकल आय हुई। खेती की कुल लागत लगभग 10 हजार रुपये रही, जिसे घटाने के बाद श्री बारी को 22 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
कृषक श्री गिरधारी बारी बताते हैं कि वे पहले पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। कृषि विभाग द्वारा दलहनी फसलों की उन्नत खेती के लिए दिए जा रहे मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने अपने खेत में मूंग की उन्नत किस्म आईपीएम 410-3 (शिखा) को अपनाया। समय पर कृषि कार्य और विभागीय तकनीकी सलाह का पालन करने से उन्हें कम अवधि में अच्छी उपज प्राप्त हुई। वे बताते हैं कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए मार्गदर्शन से फसल प्रबंधन में काफी सहायता मिली। मूंग जैसी दलहनी फसल से अतिरिक्त आय प्राप्त होने के साथ खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति में भी सुधार होता है, जिससे आगामी फसलों के लिए भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
कृषि विभाग, सरायपाली द्वारा किसानों को उन्नत किस्मों के उपयोग, वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समयबद्ध कीट-रोग नियंत्रण के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। ऐसे प्रदर्शन एवं तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों को दलहनी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे कम अवधि और कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकें।