छत्तीसगढ़ / सुकमा

छिंदगढ़ की महिलाओं ने स्वच्छता को बनाया आजीविका का साधन: 'कमलफूल' समूह प्रतिमाह कमा रहा ₹18,000 से ज्यादा

 सुकमा । जिला मुख्यालय से लगभग 24 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत छिंदगढ़ के ग्राम पंचायत छिंदगढ़ में कमलफूल स्व-सहायता समूह की स्वच्छाग्राही दीदियां स्वच्छता और आजीविका का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। 

समूह की दीदियां प्रतिदिन सुबह 4 बजे से घर-घर कचरा संग्रहण के साथ बाजार, सार्वजनिक स्थलों, चौक-चौराहों और दुकानों की साफ-सफाई का कार्य करती हैं। दुकानों से प्रति माह 160 रुपये यूजर चार्ज लिया जाता है। एकत्रित कचरे को ई-रिक्शा के माध्यम से सेग्रीगेशन शेड तक पहुंचाया जाता है, जहां प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट में प्लास्टिक बोतलों, झिल्ली एवं अन्य प्लास्टिक सामग्री का पृथक्करण किया जाता है। उल्लेखनीय है कि ई रिक्शा जिला प्रशासन के द्वारा समूह को प्रदान किया गया है।

प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से स्वच्छता के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्लास्टिक बोतलों को हाइड्रोलिक मशीन के माध्यम से बेलिंग कर तैयार किया जाता है और एमआरएफ सेमरा, बस्तर-जगदलपुर के रिसायक्लर्स को विक्रय किया जाता है। इस पहल से कमलफूल स्व-सहायता समूह की स्वच्छाग्राही दीदियों को प्रतिमाह 18 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। समूह की अध्यक्ष शांति करतामी ने बताया कि रिसायकलर्स से प्राप्त राशि का भुगतान स्व-सहायता समूह के बैंक खाते में किया गया है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत संचालित यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता प्रबंधन को आजीविका से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। कमलफूल स्व-सहायता समूह द्वारा किए जा रहे स्वच्छता एवं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट कार्य से अब तक लगभग 2.50 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हुई है। छिंदगढ़ की स्वच्छाग्राही दीदियां अपने परिश्रम से न केवल गांव को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की प्रभावी मिसाल भी पेश कर रही हैं।

 

 

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