छत्तीसगढ़ / राजनांदगांव

*जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में पीड़ित परिवार ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग*

जिला चिकित्सालय राजनांदगांव में प्रसव के दौरान हुई जच्चा-बच्चा की मौत को लेकर पीड़ित परिवार ने थाना बसंतपुर में सौंपा आवेदन, उपचार में कथित लापरवाही और मामले को दबाने के प्रयास की जांच की मांग*

राजनांदगांव। जिला चिकित्सालय राजनांदगांव में प्रसव के दौरान जालबांधा निवासी लगभग 27 वर्षीय माधुरी सिन्हा और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना से आहत पीड़ित परिवार ने थाना बसंतपुर में आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं सूक्ष्म जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि माधुरी सिन्हा को प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय राजनांदगांव में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान गर्भस्थ शिशु की स्थिति गंभीर होने की जानकारी सामने आने के बावजूद परिवार के अनुसार समय पर आवश्यक चिकित्सकीय निर्णय एवं उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया। परिवार का कहना है कि प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद भी तत्काल आवश्यक उपचार अथवा ऑपरेशन नहीं किया गया। बाद में माधुरी को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन कुछ समय बाद परिजनों को जच्चा और बच्चा दोनों की मौत की सूचना दी गई। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।परिवार का कहना है कि मृतका को पूर्व से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की जानकारी उन्हें नहीं थी। वहीं, जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र प्रसाद द्वारा मृत्यु का कारण कथित रूप से हार्ट अटैक बताया गया। इस पर परिवार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हुई थी, तो मृत्यु के वास्तविक कारण की पुष्टि के लिए विधिवत पोस्टमार्टम कराया जाना चाहिए था।पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पोस्टमार्टम नहीं कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया तथा कुछ कागजात पर हस्ताक्षर कराए गए। परिवार का कहना है कि वे घटना की वास्तविक परिस्थितियों और मृत्यु के कारणों को जानना चाहते हैं, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करने के बजाय वास्तविक रूप से जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।आवेदन में परिवार ने उपचार के दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों एवं संबंधित स्टाफ की भूमिका की जांच, मेडिकल रिकॉर्ड, सोनोग्राफी रिपोर्ट, उपचार पर्ची, दवाइयों एवं अन्य चिकित्सकीय दस्तावेजों को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने तथा जिलाचिकित्सालय परिसर में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की है।परिवार ने पोस्टमार्टम एवं मेडिकल-लीगल प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी जांच कराने का आग्रह किया है। आवेदन में कहा गया है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, साक्ष्य छिपाने अथवा मामले को दबाने के प्रयास की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।पीड़ित परिवार की मांग है कि जांच किसी दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष तरीके से हो तथा उपलब्ध दस्तावेजों, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए।परिवार का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि माधुरी और उसके नवजात बच्चे की मौत के वास्तविक कारण सामने लाने तथा भविष्य में किसी अन्य परिवार के साथ ऐसी घटना न हो, इसके लिए है।परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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