छत्तीसगढ़ / कोरिया

’सेवा की कहानी’ : जल से कल की तैयारी कर रहे हैं अकलासरई के सुरेश प्रसाद

 कोरिया 26 सितम्बर 2026

कोरिया जिले के अकलासरई ग्राम पंचायत में रहने वाले सुरेश प्रसाद के लिए परंपरागत खेती और अकुशल रोजगार का साध नही आजीविका की प्रमुख गतिविधि हैं। ऐसे में जब उनके पास उपलब्ध खेतों में सिंचाई का साधन ही नहीं था तो उनके लिए अपने खेतों में की जाने वाली मेहनत का कोई मूल्य हाथ नहीं आता था। ऐसे में उन्हें मनरेगा योजना के तहत मिले परकोलेशन टेंक से जल का संसाधन प्राप्त हुआ और अब वह अपने जल से बेहतर कल की तैयारी कर रहे हैं। यह एक छोटा सा जल संसाधन सुरेश प्रसाद के खेती के कार्य को अब फायदेमंद बना रहा है। डबरी से सिंचाई का साधन बन जाने के बाद उन्होंने अपने खेतों में धान की फसल की खेती कर ली है।

बिन पानी सब सून
कोरिया जिले के सोनहत जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम अकलासरई में रहने वाले सुरेष प्रसाद के पास केवल कृषि ही आजीविका का मुख्य साधन है। उनके पास लगभग एक एकड़ की पैतृक भूमि है और वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अपने खेतों में मेहनत करते हुए जीवन यापन करते हैं। पहले उनके खेतों में सिचाई का कोई साधन ना होने से वह केवल वर्षाजल पर निर्भर रहते थे। ऐसे में अक्सर धान की रोपाई या फिर नर्सरी तैयार करते समय बारिष ना होने से उन्हे हमेषा नुकसान उठाना पड़ता था। साथ ही फसल पकते समय भी बारिष कम हो जाने से अच्छी फसल नहीं होती थी। ऐसे में किसानी से उन्हे कोई विशेष लाभ नहीं हो पाता था। लेकिन जब से परकोलेशन टेंक का कार्य पूरा हुआ है वह सिंचाई की सुविधा का लाभ ले रहे हैं।

आजीविका की राह हुई आसान
सुरेश प्रसाद ने बताया कि वह सिंचाई के साधन के लिए प्रयास कर रहे थे लेकिन पास में कोई प्राकृतिक जल संसाधन नहीं होने से उनकी समस्या बनी हुई थी। ऐसे में ग्राम सभा से पारित प्रस्ताव के आधार पर उन्हे गत वर्ष परकोलेशन टेंक बनाने की स्वीकृति प्राप्त हुई। मेहनती सुरेश ने परिवारजनों और ग्रामीणों के साथ मिलकर अपने खेतों में उचित जगह का चयन कर कार्य समय पर पूरा कर लिया। पहली बारिश में पूरी तरह से जलभराव होने के बाद उनके खेतों में पर्याप्त सिंचाई की सुविधा हो गई है।

सिंचाई के साथ मछलीपालन
सुरेष प्रसाद ने बताया कि डबरी में भरपूर जल होने से इस बार उन्होने अपने खेतों में एक एकड़ में धान की रोपाई समय पर की है जिससे उन्हे अच्छी फसल मिलने की आस है। साथ ही वह अपने डबरी में मछलीपालन के लिए पांच किलोबीज डाल चुके हैं। जिससे आने वाले सालों में मछली पालन से उन्हें दोहरा लाभ मिलेगा। सुरेश प्रसाद ने बताया कि सिंचाई की सुविधा बन जाने से वह धान की फसल के बाद ठंड के मौसम में सब्जियों की फसल लगाने को तैयार हैं। संसाधन मिल जाने से इस मेहनतकश किसान के जीवन में खुशहाली की नई राह बन गई है। अब उनका परिवार बेहतर आजीविका के ससाधनों की ओर आगे बढ़ रहा है।

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