सेवा की कहानी : सुअर पालन से धनेश्वरी की आजीविका को मिली नई राह, 3 सुअरों से बढ़कर 10 बच्चों तक पहुंचा परिवार
अम्बिकापुर 01 अक्टूबर 2026/

ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने और पशुपालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाने में पशुपालन विभाग की योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ग्राम गगोली, विकासखंड लुंड्रा (धौरपुर) निवासी धनेश्वरी केरकेट्टा भी ऐसी ही एक पहल से लाभान्वित होकर सुअर पालन को आगे बढ़ा रही हैं।
धनेश्वरी केरकेट्टा को वर्ष 2025 में पशुपालन विभाग की ‘सुकर त्रयी योजना’ के अंतर्गत एक नर और दो मादा सुअर प्रदान किए गए। योजना के माध्यम से मिले इन पशुओं से उन्होंने सुअर पालन की शुरुआत की और मेहनत व देखभाल के परिणामस्वरूप अब उन्हें 10 बच्चे प्राप्त हुए हैं। इससे उनका उत्साह बढ़ा है और वे सुअर पालन को आगे और विस्तारित करने की तैयारी कर रही हैं।
धनेश्वरी बताती हैं कि सुअर पालन से उन्हें अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर मिला है। गांव में ही सुअरों और उनके बच्चों की बिक्री हो जाने से बाजार की बड़ी समस्या भी नहीं रहती। वे कहती हैं, “गांव में ही सुअर बिक जाते हैं। आगे संख्या बढ़ने पर हम इन्हें मंडी में भी बेचेंगे।”
उन्होंने पशुपालन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग से मिले सहयोग ने उन्हें सुअर पालन शुरू करने और इसे आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। अब उनका लक्ष्य सुअर पालन का विस्तार कर अधिक आय अर्जित करना और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।