सेवा की कहानी : गांव-गांव कपड़े बेचने से अपनी दुकान तक, श्यामबाई ने बनाई आत्मनिर्भर पहचान
बिहान के सहयोग से बढ़ाया कपड़ा व्यवसाय, सालाना सवा लाख रुपये से अधिक की आय से बनीं लखपति दीदी
कोरिया 17 अक्टूबर 2026
कभी खेती-किसानी और मजदूरी पर निर्भर रहने वाली श्रीमती श्यामबाई आज अपने गांव में कपड़े की दुकान संचालित कर रही हैं। विकासखंड बैकुंठपुर के ग्राम पोटेडांड निवासी श्यामबाई ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से मि
ले सहयोग और अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है। कपड़ा व्यवसाय से सालाना सवा लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर उन्होंने ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बनाई है।
समूह से जुड़ने से पहले श्यामबाई के परिवार की आजीविका खेती और मजदूरी से चलती थी। सीमित आमदनी में घरेलू जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। वे परिवार की आय बढ़ाने के लिए अपना काम शुरू करना चाहती थीं। गौरी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
आर्थिक सहयोग से शुरू हुआ कपड़ा व्यवसाय
श्यामबाई को समूह के माध्यम से सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये तथा बैंक ऋण के रूप में 20 हजार रुपये प्राप्त हुए। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने पति के सहयोग से कपड़ा व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में वे गांव-गांव जाकर कपड़े बेचती थीं।
ग्राहकों की जरूरतों को समझते हुए उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। मेहनत, अच्छे व्यवहार और काम के प्रति लगन से ग्राहकों का विश्वास बढ़ा और आमदनी में भी सुधार होने लगा।
अपनी दुकान से आजीविका को मिला स्थायित्व
व्यवसाय बढ़ने पर श्यामबाई ने अपने गांव में कपड़े की दुकान खोल ली। इससे उन्हें कारोबार संचालित करने का स्थायी स्थान मिला। अब दुकान और कपड़ा विक्रय से वे सालाना सवा लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
उनकी कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है और घरेलू जरूरतें पूरी करने में उनका योगदान बढ़ा है। श्यामबाई का यह सफर दर्शाता है कि समय पर मिला आर्थिक सहयोग और निरंतर मेहनत ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार तथा आत्मनिर्भरता के अवसर तैयार कर सकती है।