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वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी को मिलेगा 'श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान'

नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए 18 सितंबर का दिन खास होने जा रहा है। बिलासपुर में जन्मे प्रख्यात कवि, लेखक और सांसद स्व. श्रीकांत वर्मा की 95वीं जयंती के अवसर पर स्थापित ‘श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान 2026’ का पहला संस्करण शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। इस समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी को 'श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान' प्रदान किया जाएगा।

श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की ओर से शुरू किए गए इस राष्ट्रीय सम्मान के तहत 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। सम्मान का पहला संस्करण ही देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार अशोक वाजपेयी को दिए जाने से इसे लेकर साहित्य जगत में विशेष चर्चा है।

‘मगध’ से आधुनिक हिंदी साहित्य को मिली नई पहचान
स्व. श्रीकांत वर्मा की साहित्यिक विरासत में ‘मगध’ का विशेष स्थान माना जाता है। उनकी रचनाओं में इतिहास के माध्यम से सत्ता, भय, हिंसा, विडंबना और मानवीय असुरक्षा जैसे विषयों को अभिव्यक्ति मिली।

बिलासपुर की धरती से निकले श्रीकांत वर्मा ने साहित्य के साथ पत्रकारिता और राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनके नाम पर शुरू किया गया यह राष्ट्रीय सम्मान उनकी साहित्यिक स्मृति को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

अशोक वाजपेयी को ही क्यों चुना गया?
अशोक वाजपेयी और श्रीकांत वर्मा एक ही साहित्यिक दौर के महत्वपूर्ण रचनाकार रहे हैं। अशोक वाजपेयी ने श्रीकांत वर्मा को “20वीं सदी के अंधेरे की शिनाख्त करने वाले पहले कवि” के रूप में याद किया है।

अशोक वाजपेयी का योगदान कविता और आलोचना के साथ-साथ चित्रकला, संगीत तथा सांस्कृतिक संस्थान-निर्माण के क्षेत्र में भी रहा है। रज़ा फाउंडेशन जैसी सांस्कृतिक पहल से उनका जुड़ाव भी उनके व्यापक सांस्कृतिक योगदान का हिस्सा है।

 
 
 



ऐसे में श्रीकांत वर्मा के नाम पर शुरू किए गए पहले सम्मान के लिए अशोक वाजपेयी का चयन आयोजकों के अनुसार श्रीकांत वर्मा की साहित्यिक स्मृति और वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य के बीच संवाद को रेखांकित करता है।

21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि
‘श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान 2026’ के तहत ₹21 लाख की राशि के साथ औपचारिक प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। ट्रस्ट की ओर से शुरू किया गया यह सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक योगदान को सम्मानित करने की पहल के रूप में सामने आया है।

बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के साहित्य प्रेमियों के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की साहित्यिक विरासत से जुड़े एक राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत हो रही है।

 

 

18 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाला समारोह श्रीकांत वर्मा की स्मृति, उनकी साहित्यिक विरासत और समकालीन हिंदी साहित्य के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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